समय की धारा और उपस्थिति का सत्य: ‘वर्तमान’ की एक दार्शनिक खोज- वीर नारायण सिंह
बेमेतरा- 30 अगस्त 2026
कल बेमेतरा कॉलेज के सामने एक कार वर्क शॉप पर कुछ युवा साथी और मैं बैठे थे। सामने शहीद वीर नारायण सिंह जी की मूर्ति स्थापित की जा रही थी और उसका अनावरण होना है।
मूर्तिकार प्रतिमा पर तांबे का रंग चढ़ा रहे थे।
रंग को देखकर मुझे कुछ समय पुरानी वह बात याद आ गई, जब स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की मूर्ति के लिए दावा तो तांबे का किया गया था, लेकिन बाद में खुलासा हुआ कि वह सीमेंट की बनी थी।
जब मैंने इस बात का ज़िक्र किया, तो पास बैठे एक युवा ने मुझे टोकते हुए कहा— “रिपोर्टर अंकल, प्रेजेंट की बात करिए।”
शायद उसके कहने का आशय ‘आज’ से था। लेकिन उसकी इस बात ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। क्या हम वास्तव में प्रेजेंट की असलियत को समझ पाए हैं?
बुनियाद कभी प्रेजेंट नहीं होती
अगर आपका आशय प्रेजेंट से ‘आज’ या समय से है, तो मेरे विचार से समय कभी प्रेजेंट होता ही नहीं। क्योंकि जो ‘आज’ खड़ा है, वह ‘कल’ की बुनियाद पर टिका है।
हम भव्य इमारत को देखते हैं, मंजिल दर मंजिल सुंदर अति सुंदर संरचना को सराहते हैं, लेकिन उसकी बुनियाद को नहीं देख पाते। बुनियाद में बहुत सुंदरता नहीं होती, पर वह सबसे ज्यादा मजबूत होती है। वह बुनियाद ‘कल’ (अतीत) थी, इसीलिए दिखाई नहीं देती।
समय का आने वाला एक-एक मिनट, एक-एक घंटा आता है और चला जाता है। आने वाले और जाने वाले के बीच की स्थिति को ही लोग प्रेजेंट समझ बैठते हैं। लेकिन समय तो बस पास हो रहा है और लगातार ‘पास्ट’ (अतीत) बनता जा रहा है। हमें यह भी नहीं पता कि कल क्या होगा, इसीलिए हम इसी में उलझे रहते हैं कि कल क्या हुआ था।
उपस्थिति ही वर्तमान है
मैंने कहीं पढ़ा था— “ना भूतकाल होता है, ना भविष्य काल… केवल होता है तो वर्तमान।”
लोग ‘वर्तमान’ के इस असली अस्तित्व को शायद ही स्वीकार कर पाएं। धर्म हमारा कल था, भगवान हमारे कल थे; हम ‘आज’ का नाम लेकर ‘कल’ पर ही तो जी रहे हैं।
अंग्रेजी के शब्द ‘Present’ का असली अर्थ केवल समय नहीं, बल्कि ‘उपस्थित होना’ है। समय कल भी था और कल भी रहेगा, लेकिन हमारी उपस्थिति कल नहीं थी और कल भी नहीं रहेगी। इसीलिए, आपकी उपस्थिति ही वर्तमान है। और जब आप यहाँ उपस्थित हैं, तो अपनी उस उपस्थिति को सर्वश्रेष्ठ बनाना ही ‘परफेक्ट प्रेजेंटेशन’ है।
समय खुद में कुछ नहीं है, यह तो बस गणना के लिए बनाया गया एक सूचना तंत्र है। घड़ी महज एक मशीन है।
WATCH का व्यापक व्याकरण
घड़ी को हम ‘वॉच’ (Wrist Watch) भी कहते हैं। यह वॉच हमें केवल समय देखना नहीं, बल्कि अपने कर्मों को देखना सिखाती है। ‘Watch’ का व्यापक व्याकरण और जीवन का दर्शन यही है:
W – Watch your Words (अपने शब्दों पर नज़र रखें)
A – Watch your Actions (अपने कर्मों को देखें)
T – Watch your Tongue (अपनी वाणी को संभालें)
C – Watch your Character (अपने चरित्र पर ध्यान दें)
H – Watch your Honesty and Hard work (अपनी ईमानदारी और मेहनत को परखें)
जनचौपाल-36 निष्कर्ष
गया हुआ वक्त ठहरता नहीं, बस चलता रहता है। इसलिए न अतीत का कोई स्वतंत्र अस्तित्व बचा है, न भविष्य का कोई आकार है— होता है तो केवल वर्तमान। और यह वर्तमान कुछ और नहीं, बस आपकी इस क्षण में सजग उपस्थिति (Presence) है।
सोशल जानकारी अनुसारअनावरण छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव द्वारा किया जाना प्रस्तावित है और इसकी तैयारियां जारी हैं।
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