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Wednesday, August 26, 2026

DRDO की मिसाइल तकनीक अब भारतीय रक्षा उद्योग को होगी हस्तांतरित, घरेलू उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

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नई दिल्ली 26 अगस्त 2026

मंत्रालय के अनुसार, इससे देश में विनिर्माण क्षमता बढ़ेगी, रक्षा औद्योगिक आधार मजबूत होगा और घरेलू स्तर पर मूल्य संवर्द्धन को बढ़ावा मिलेगा।

केंद्र सरकार ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की प्रौद्योगिकी भारतीय रक्षा उद्योग को हस्तांतरित करने को मंजूरी दे दी है।

इस फैसले के बाद पात्र भारतीय रक्षा कंपनियां इन तकनीकों का इस्तेमाल कर देश में ही मिसाइल प्रणालियों का उत्पादन कर सकेंगी।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस पहल के तहत DRDO पात्र रक्षा कंपनियों को संबंधित मिसाइल तकनीक उपलब्ध कराएगा। मंत्रालय ने इसे रक्षा क्षेत्र में घरेलू उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

विकास से उत्पादन तक पहुंचेगी मिसाइल तकनीक

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह प्रावधान मिसाइल प्रणालियों को अनुसंधान एवं विकास के चरण से आगे बढ़ाकर औद्योगिक उत्पादन तक पहुंचाने में मदद करेगा। साथ ही, उन्नत रक्षा प्रणालियों के विकास और निर्माण में भारतीय उद्योग की क्षमताओं का प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

मंत्रालय ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस नई व्यवस्था के तहत किन-किन मिसाइल प्रणालियों के उत्पादन की अनुमति निजी क्षेत्र को दी जाएगी।

आकाश, अस्त्र और नाग जैसे सिस्टम पर नजर

हालांकि, माना जा रहा है कि भारतीय निजी रक्षा उद्योग को आकाश वायु रक्षा मिसाइल, अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल और नाग टैंक रोधी गाइडेड मिसाइल जैसी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों के निर्माण का अवसर मिल सकता है।

इन प्रणालियों के उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

MSME को भी मिलेगा अवसर

सरकार का लक्ष्य केवल बड़े रक्षा उद्योगों तक सीमित नहीं है। इस पहल के जरिए भारतीय MSME और अन्य तकनीकी साझेदारों को भी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में शामिल होने के अवसर मिलेंगे।

आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश

सरकार का मानना है कि मिसाइल तकनीक को घरेलू उद्योग तक पहुंचाने से भारत की अभियानगत क्षमता मजबूत होगी और रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार को भी गति मिलने की उम्मीद है।

1.78 लाख करोड़ रुपये पहुंचा घरेलू रक्षा उत्पादन

सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि वर्ष 2014 में यह करीब 46,000 करोड़ रुपये था।

इसी अवधि में भारत का रक्षा निर्यात भी बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सरकार की इस नई पहल को रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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