“हम अपने साथियों के न्याय के लिए लड़ते रहेंगे”भारतीय मजदूर संघ पंडरिया
पंडरिया- 25 अगस्त 2026
श्रमिकों के साथ मनमानी बर्दाश्त नहीं, 31 श्रमिकों को बाहर करने और 3 श्रमिकों को वापस नहीं लेने के निर्णय से आक्रोश।
भारतीय मजदूर संघ ने स्पष्ट किया है कि वह अपने सदस्यों के साथ दृढ़ता से खड़ा है और जब तक न्याय नहीं मिलता, शांतिपूर्ण तथा लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगा। संगठन ने एमडी और कारखाना प्रबंधन से अपील की है कि वे स्थिति को गंभीरता से लें और तत्काल प्रभाव से विवाद का समाधान करें।
संघ का रुख
— भारतीय मजदूर संघ ने पंडरिया स्थित लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाना में श्रमिकों के साथ कथित मनमाने और भेदभावपूर्ण व्यवहार के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है। संगठन ने कहा है कि श्रमिकों के साथ अन्याय किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
मामले का परिचय
5 अगस्त को इकाई महामंत्री ने कारखाना प्रबंधन के समक्ष 7 माह के लंबित वेतन और पिछले आंदोलन के दौरान हुए समझौते को लागू किए जाने का मामला उठाया था। संगठन के अनुसार, एमडी ने इसका जवाब “नेतागिरी करते हो” कहते हुए इकाई महामंत्री की आईडी डिलीट कर उन्हें काम से रोक दिया।
आंदोलन और समझौता
इसके विरोध में 11 अगस्त से “ललित चन्द्रवंशी को काम पर वापस लो” की मांग को लेकर धरना, प्रदर्शन और टूल डाउन आंदोलन शुरू किया गया। लगातार आंदोलन के परिणामस्वरूप 21 अगस्त को प्रबंधन के साथ समझौता हुआ और ललित चन्द्रवंशी को कार्यस्थल पर बहाल कर दिया गया।
नया विवाद और संगठन की चिंता
संगठन ने आरोप लगाया कि समझौते के तुरंत बाद 31 श्रमिकों को अचानक नौकरी से हटा दिया गया, जबकि ये कर्मचारी लगभग 9 वर्षों से लगातार सेवा में थे और उनका ज्वाइनिंग भी पूरा हो चुका था। बाद में प्रबंधन ने 31 में से 28 श्रमिकों को लौटाने की घोषणा की, पर तीन श्रमिकों को वापस नहीं लेने की बात कही। संगठन के अनुसार उन तीनों से कहा गया था कि “काम पर आते समय हड़ताल में शामिल नहीं होना”, और इसका पालन न करने को कारण बताकर उन्हें बहाल नहीं किया जा रहा है।
संघ का प्रश्न और मांग
भारतीय मजदूर संघ ने सवाल उठाया है कि यदि 31 श्रमिकों का ज्वाइनिंग पूरा था और वे वर्षों से लगातार काम कर रहे थे, तो उन्हें अगले ही दिन काम से हटाने का वैध आधार क्या था? यदि 28 श्रमिकों को बहाल किया जा सकता है, तो समान परिस्थितियों में बाकी तीन के साथ अलग व्यवहार क्यों? संगठन ने कहा कि यह सिर्फ तीन लोगों का मुद्दा नहीं है — आज तीन की, तो कल किसी भी श्रमिक की आईडी बंद की जा सकती है।
संगठन की मांगें
तीनों श्रमिकों को तुरंत और बिना शर्त काम पर बहाल किया जाए।
31 श्रमिकों को बाहर किए जाने के फैसले की निष्पक्ष पड़ताल और पुनर्विचार किया जाए।
भविष्य में किसी भी कर्मचारी के साथ मनमाने निर्णय से पहले यूनियन से समन्वय और परामर्श किया जाए।
टकराव बढ़ाने के बजाय प्रबंधन बातचीत और न्यायपूर्ण समाधान का मार्ग अपनाए।
- Advertisement -
- Advertisement -