नीति आयोग रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: छत्तीसगढ़ में कर्ज का बढ़ता आकार
रायपुर -24 अगस्त 2026
सरकारी योजना में फ्रीबीज की योजनाएं समझने के लायक है। महतारी वंदन योजना का बार-बार उदाहरण दिया जाता है कि आज महिलाओं के खाते में महतारी वंदन योजना में इतना पैसा आया, किसानों को बोनस दिया गया किसानों के खाते में पैसा आया।लेकिन यह सब कर्ज के तले किया जा रहा है यह सब करने के लिए सरकार को कर्ज लेना पड़ता है, जिनको मिल रहा वह बहुत खुश है लेकिन राज्य कर्ज के मुंह में समाते जा रहा है।
दूसरे से छठे पायदान पर फिसला छत्तीसगढ़
नीति आयोग की ताज़ा ‘राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक’ रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ की वित्तीय तस्वीर चिंताजनक निकली है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य का राजकोषीय घाटा और कुल बकाया कर्ज दोनों ही MFRBM कानून द्वारा तय सीमाओं से ऊपर चले गए हैं, जिसके चलते राज्य की रैंकिंग दूसरे स्थान से छठे स्थान पर आ गिरती है।
तय नियमों से बहुत आगे निकला कर्ज और घाटा
मुख्य आँकड़े साफ़ हैं: राजकोषीय घाटा GSDP का 3.50% होना चाहिए था, जबकि वास्तविकता 5.94% पर पहुंच चुकी है। कुल बकाया कर्ज का अनुपात 28% की सीमा के बजाय 40.56% तक जा पहुंचा है। नीति आयोग ने खर्च की गुणवत्ता, राजस्व संग्रहण, विवेकपूर्ण बजट प्रबंधन, ऋण सूचकांक और ऋण स्थिरता—इन सभी में छत्तीसगढ़ की स्थिति कमजोर बताई है।
इसका सीधा असर आम योजनाओं और विकास पर पड़ सकता है। बढ़ता हुआ कर्ज‑बोझ और घाटा भविष्य के बजट में ब्याज भुगतान बढ़ाने का कारण बनेंगे, जिससे स्वास्थ्य, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए मिलने वाले फंड पर दिक्कत आ सकती है। वित्तीय लचीलापन घटने से बड़े निवेश और परियोजनाएं भी पीछे छूट सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकार के सामने दो चुनौतियाँ हैं: खर्च में कटौती और राजस्व बढ़ाना। रिपोर्ट सुझाव देती है कि गैर‑ज़रूरी व्यय पर रोक, कर संग्रह में सुधार और सरकारी परिसंपत्तियों का विवेकपूर्ण उपयोग जरूरी है। इसके अलावा कर्ज की संरचना पर फिर से विचार और केंद्र से सहयोग की घटनाओं पर ध्यान देना होगा।
नागरिकों के लिए यह चेतावनी भी है—स्थानीय सेवाओं और योजनाओं में बदलाव की संभावना के मद्देनजर अपनी प्रतिनिधियों से सवाल करें और बजट व खर्च की पारदर्शिता की माँग रखें।
नीति आयोग की रिपोर्ट साफ़ संदेश देती है: वित्तीय अनुशासन तुरंत न लौटाने पर राज्य के विकास और सेवा‑वितरण पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। समय रहते सुधारात्मक कदम ही राजकीय आर्थिक स्वास्थ्य बहाल कर सकते हैं।
- Advertisement -
- Advertisement -