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Tuesday, August 18, 2026

छत्तीसगढ़ में अवैध कॉलोनी पर अब 7 साल की जेल, खरीदने से पहले ये जांच जरूरी

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रायपुर- 18 अगस्त 2026

दरअसल, प्रदेश में धड़ल्ले से कट रही अवैध कॉलोनियों को लेकर सरकार ने अब सख्ती दिखाई है। छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम के तहत साफ नियम है – कोई भी व्यक्ति जमीन को टुकड़ों में बांटकर कॉलोनी बसाएगा, तो उसे पहले नगर पालिका या नगर पंचायत में कॉलोनाइजर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराना ही होगा। यही नियम बिल्डर और अपार्टमेंट बनाने वालों पर भी लागू है।

अगर आप रायपुर समेत किसी भी शहर में कॉलोनी में प्लॉट या बिल्डर से फ्लैट लेने की सोच रहे हैं, तो जेब ढीली करने से पहले एक बार कागज जरूर टटोल लीजिए। नहीं तो सस्ते के चक्कर में आप अवैध कॉलोनी में फंस सकते हैं।


नियम तोड़ा तो 7 साल जेल और 1 लाख जुर्माना

अगर कोई बिना रजिस्ट्रेशन और बिना ले-आउट पास कराए कॉलोनी काटता पकड़ा गया, तो उसे 3 से 7 साल तक की जेल और कम से कम एक लाख रुपये जुर्माना भरना पड़ सकता है। साथ ही कोर्ट पीड़ित खरीदार को हर्जाना दिलाने का आदेश भी दे सकता है।

नियम के मुताबिक -कॉलोनाइजर का लाइसेंस सिर्फ 5 साल के लिए वैध होता है।हर नई कॉलोनी के लिए अलग से विकास अनुमति लेनी पड़ती है।

कॉलोनी की 15% जमीन EWS (गरीब वर्ग) के लिए रिजर्व रखनी होती है।कुछ प्लॉट नगर पालिका के पास बंधक रखने पड़ते हैं, ताकि कॉलोनाइजर सड़क-नाली-बिजली का काम पूरा किए बिना भाग न जाए।

खरीदार क्या करें?

इसी को लेकर सूरजपुर जिला प्रशासन ने भी खरीदारों को आगाह किया है। प्रशासन ने कहा है – किसी भी दलाल या बिल्डर के कहने पर मत आइए। खरीदने से पहले सीधे नगर पालिका में जाकर चार चीजें जरूर चेक करें –

कॉलोनाइजर का पंजीयन वैध है या नहीं
कॉलोनी का नक्शा (ले-आउट) पास है या नहीं
विकास अनुमति मिली है या नहीं
प्लॉट बंधक तो नहीं है।


अधिकारियों का कहना है, थोड़ी सी जागरूकता आपको अवैध निर्माण और भविष्य के बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है। अगर कहीं नियम टूटता दिखे तो प्रशासन कार्रवाई करेगा।
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