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Friday, June 5, 2026

छत्तीसगढ़ में नैनो डीएपी को बढ़ावा: किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन का लक्ष्य

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न्यूज छत्तीसगढ़ 26/05/2026

कृषि मंत्री नेताम ने नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे वैकल्पिक उर्वरकों को अपनाने की अपील की है। पश्चिम एशिया में तनाव के चलते आयातित उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने व्यापक रणनीति बनाई है।

उर्वरक की वर्तमान स्थिति:
स्टॉक उपलब्ध: राज्य में अभी 9.29 लाख मीट्रिक टन रासायनिक खाद गोदामों और सोसायटियों में उपलब्ध है, जो खरीफ सीजन के लक्ष्य का 60% है।
केंद्र से आवंटन: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयास से केंद्र सरकार ने खरीफ 2026 के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य दिया है। यह पिछले साल की खपत 14.62 लाख मीट्रिक टन से 93 हजार मीट्रिक टन ज्यादा है।
आवंटन का ब्रेकअप: यूरिया 7.25 लाख, डीएपी 3 लाख, एमओपी 80 हजार, एनपीके 2.5 लाख, एसएसपी 2 लाख मीट्रिक टन।

नैनो डीएपी क्यों? लागत और फायदे:
कम लागत: 1 एकड़ में परंपरागत 50 किलो डीएपी पर 1350 रु. खर्च होते हैं। वहीं 25 किलो डीएपी + 500 मिली नैनो डीएपी से लागत 1275 रु. ही आती है।
फायदे: संतुलित पोषण, बेहतर परिणाम, पर्यावरण अनुकूल खेती, ठोस डीएपी पर निर्भरता कम, उर्वरक उपयोग की दक्षता बढ़ेगी।
कृषि क्रांति की ओर एक कदम” अभियान के तहत नैनो डीएपी को फॉस्फोरस व नाइट्रोजन युक्त उन्नत तरल उर्वरक के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।

नैनो डीएपी के उपयोग की वैज्ञानिक विधि:
चरण 1 – आधार खाद: 25 किलो डीएपी या 75 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट या 38 किलो 12-32-16 मिश्रित उर्वरक।
चरण 2 – बीज/पौध उपचार: बीज के लिए 150 मिली नैनो डीएपी को 3 लीटर पानी में मिलाएं। पौध की जड़ों के लिए 250 मिली नैनो डीएपी को 50 लीटर पानी में घोलें।
चरण 3 – छिड़काव: रोपाई के 30 दिन बाद 250 मिली नैनो डीएपी को 125 लीटर पानी में मिलाकर खड़ी फसल में छिड़काव करें।

सरकार की अन्य रणनीति:
विकल्प बढ़ाए जा रहे: एनपीके 12:32:16, 20:20:0:13, हरी खाद, जैविक खाद, नील हरित काई और नैनो उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है।
पारदर्शी वितरण: सभी जिलों में पात्रता अनुसार खाद मिले, इसके लिए राज्य स्तर पर मॉनिटरिंग।

कालाबाजारी रोकने के लिए उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियां बनाई गई हैं।फसल विविधीकरण द्वारा सुगंधित धान, दलहन-तिलहन, ऑयल पाम, मखाना और मसाला फसलों को बढ़ावा।

कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने कहा कि किसानों से वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर नैनो डीएपी का उपयोग करने की अपील है, जिससे उत्पादन बढ़े और लागत घटे।

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