बेमेतरा – 20 मई 2026
जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बेमेतरा जिला छत्तीसगढ़ में एक प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है। जिला प्रशासन, कृषि विभाग और किसानों के सामूहिक प्रयास से इस साल जिले में ग्रीष्मकालीन (गर्मी के) धान के रकबे में भारी कमी आई है, जबकि कम पानी में बेहतर मुनाफा देने वाली दलहन और तिलहन फसलों का क्षेत्र रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ गया है।
जल संकट से उबरने पंचायतों ने उठाई कसम
बेमेतरा जिला वृष्टि छाया क्षेत्र में आता है, जहां औसत वर्षा मात्र 995 मि.मी. है। पिछले साल कम बारिश के बावजूद 26,680 हेक्टेयर में ग्रीष्मकालीन धान लगाया गया था। चूंकि 1 किलो धान के लिए 2500 से 3000 लीटर पानी की जरूरत होती है, नतीजतन जिले के कई गांवों में ट्यूबवेल और हैंडपंप सूख गए थे। इस गंभीर जल संकट को देखते हुए जिले की सभी 425 ग्राम पंचायतों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर गर्मी में धान न लगाने और वैकल्पिक फसलें अपनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
आंकड़ों में बड़ा बदलाव:
- धान का रकबा घटा: पिछले वर्ष के 26,680 हेक्टेयर के मुकाबले इस साल ग्रीष्मकालीन धान का रकबा घटकर महज 5,139 हेक्टेयर रह गया।
- दलहन में उछाल: दलहन फसलों का रकबा 70,800 हेक्टेयर से बढ़कर 83,330 हेक्टेयर पहुंच गया।
- तिलहन हुआ तीन गुना: तिलहन फसलों का क्षेत्र 820 हेक्टेयर से बढ़कर 2,582 हेक्टेयर हो गया (लगभग 3 गुना वृद्धि)।
समर्थन मूल्य पर खरीदी से बढ़ा उत्साह
पीएम अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत जिले में दलहन-तिलहन की सरकारी खरीदी की जा रही है। अब तक 54,300 क्विंटल फसल खरीदी जा चुकी है, जिसके बदले किसानों को 14 करोड़ 58 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। किसानों के उत्साह को देखते हुए अगले साल खरीदी केंद्रों की संख्या और बढ़ाई जाएगी।
अगले साल की तैयारी
प्रशासन ने बताया कि बचे हुए 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में भी अगले साल मक्का, गेहूं, चना, सूरजमुखी और सरसों जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए गांव-गांव में जागरूकता शिविर और उन्नत बीज वितरण की व्यवस्था की जा रही है। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे टिकाऊ खेती और पर्यावरण संरक्षण के लिए इस मुहिम से जुड़ें।


