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Tuesday, July 21, 2026

सामाजिक कुरीति बाल विवाह से कैसे निपटें: छत्तीसगढ़ में पहल और अभियान

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रायपुर 18 मई 2026

छत्तीसगढ़ में बाल विवाह की जड़ें कमजोर करने के लिए सरकार और समाज अब एकजुट होकर मैदान में उतरे हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के मुताबिक, राज्य में 20-24 साल की 23.2% लड़कियों का विवाह 18 साल से पहले हुआ था। लेकिन 2023 के बाद शुरू हुए अभियानों ने इस आंकड़े को नीचे लाने की ठोस शुरुआत की है।

भारत सरकार की प्रमुख पहल
भारत में बाल विवाह रोकने के लिए सरकार ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान (27 नवंबर 2024) और पोर्टल शुरू किया है, जिसका लक्ष्य 2030 तक बाल विवाह खत्म करना है। प्रमुख योजनाओं में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, और विभिन्न राज्यों की कन्या विवाह योजनाएं शामिल हैं, जो लड़कियों की शिक्षा और आर्थिक सशक्तीकरण के माध्यम से विवाह में देरी को प्रोत्साहित करती हैं।

बाल विवाह मुक्त पंचायत अभियान: 2024 में लॉन्च इस अभियान में हर पंचायत को ‘बाल विवाह मुक्त’ घोषित करने का लक्ष्य है। अब तक 6,200 ग्राम पंचायतों ने प्रस्ताव पारित किया है। पंच-सरपंच को शादी का कार्ड व उम्र प्रमाण-पत्र देखना अनिवार्य किया गया।

1098 हेल्पलाइन की सक्रियता: चाइल्डलाइन 1098 पर बाल विवाह की सूचना मिलते ही पुलिस, महिला बाल विकास विभाग और SDM की संयुक्त टीम 1 घंटे में मौके पर पहुंचती है। 2025 में अकेले मुंगेली जिले में 74 बाल विवाह रोके गए।

जमीनी स्तर पर अभियान
लाड़ो अभियान’: यूनिसेफ और एमपी राज्य सरकार की साझेदारी में चल रहे इस अभियान में स्कूलों की ‘मीना मंच’ और आंगनबाड़ी की किशोरी समूह लड़कियों को कानून की जानकारी दे रहे हैं। लड़कियों ने खुद 300 से ज्यादा शादियां रुकवाई हैं।

निकाह/फेरे से पहले उम्र जांच: कलेक्टरों ने पंडित, मौलवी और बैंड-बाजा वालों को निर्देश दिया है कि वे बिना आधार/मार्कशीट देखे शादी न कराएं। उल्लंघन पर 1 लाख जुर्माना और 2 साल की सजा का प्रावधान है।

सशक्त बेटी, समृद्ध छत्तीसगढ़’ रथ: हर ब्लॉक में जागरूकता रथ घूम रहा है जो नुक्कड़ नाटक से बताता है कि बाल विवाह से एनीमिया, मातृ मृत्यु और स्कूल ड्रॉपआउट कैसे बढ़ता है।

चुनौती और रास्ता
गरीबी, अशिक्षा और ‘अक्षय तृतीया’ पर सामूहिक विवाह अभी भी बड़ी चुनौती हैं। पर अब गांव की महिलाएं ही ‘निगरानी समिति’ बनकर पुलिस को सूचना दे रही हैं।

लक्ष्य
प्रशासन के कहना है, “कानून के डंडे के साथ शिक्षा और रोजगार का सहारा देना जरूरी है। जब बेटी कमाने लगेगी, तो कोई उसे बोझ समझकर 14 साल में विदा नहीं करेगा।”: देश की हर पंचायत को ‘बाल विवाह मुक्त’ घोषित करना और साल 2030 तक पूरे भारत से बाल विवाह का पूर्णतः उन्मूलन करना है।

बाल विवाह रोकना सिर्फ सरकारी जिम्मेदारी नहीं। हर घर को तय करना होगा कि बेटी की डोली से पहले उसकी डिग्री निकले। तभी छत्तीसगढ़ सचमुच ‘बाल विवाह मुक्त’ बनेगा।

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