बेमेतरा, 03 मई 2026
जिले में कृषि को पर्यावरण अनुकूल एवं किफायती बनाने की दिशा में जिला प्रशासन और कृषि विभाग के संयुक्त प्रयास से शासकीय प्रक्षेत्र मोहगांव में नील-हरित शैवाल (ब्लू ग्रीन एल्गी) का उत्पादन सफलतापूर्वक प्रारंभ किया गया है। यह जैव उर्वरक धान सहित अनेक फसलों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है और रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता कम करने में सहायक होगा।
कृषि विभाग ने मोहगांव में तैयार मदर कल्चर के माध्यम से इस तकनीक को जिलेभर में विस्तार देने की कार्ययोजना तैयार की है। इसी कड़ी में ग्राम मौहाभाठा के प्रगतिशील कृषक टोकेश्वर साहू के खेत में भी इसका उत्पादन शुरू किया गया है। नील-हरित शैवाल वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर कर फसलों को प्राकृतिक पोषण प्रदान करता है, जिससे उत्पादन लागत घटती है और मृदा की दीर्घकालीन उर्वरता बनी रहती है।
कृषि विभाग द्वारा किसानों को फील्ड डेमोन्स्ट्रेशन, कार्यशालाओं एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से निरंतर प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है। उप संचालक कृषि मोरध्वज डडसेना ने जिले के सभी किसानों से इस उन्नत तकनीक को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि यह खेती को लाभकारी एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
यह पहल राज्य एवं केंद्र सरकार की जैविक खेती नीति के अनुरूप है और आने वाले समय में बेमेतरा जिला इस क्षेत्र में अन्य जिलों के लिए एक मॉडल के रूप में उभर सकता है।
नील-हरित शैवाल: सस्ती और पर्यावरण-अनुकूल जैव-उर्वरक से टिकाऊ कृषि की नई राह


