डिजिटल डेस्क ,06/04/2026
नारी शक्ति वंदन (महिला आरक्षण) कानून के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण को असली रूप 2029 के आम चुनाव से देने की कोशिश चल रही है।
इसके लिए सरकार ने 16–18 अप्रैल के विशेष संसद सत्र में जरूरी कानून‑संशोधन और परिसीमन (सीट बांटने‑बढ़ाने) की तैयारी रखी है, ताकि 2029 के चुनाव में यह आरक्षण लागू हो सके।
समय‑सीमा और आम आदमी को क्या फायदा?
यह अधिनियम तो 2023 में बन चुका है, लेकिन लागू होने की तारीख अभी तय नहीं, सरकार अब इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से शुरू करना चाहती है।
इसके लिए लोकसभा की सीटें बढ़ाकर,महिलाओं के लिए अतिरिक्त रिजर्व सीटें रखने का फॉर्मूला बन रहा है; दक्षिण भारत के राज्यों को यह भी यकीन दिया गया है कि उनकी मौजूदा लोकसभा सीटें कम नहीं होंगी, बस नई सीटों में महिला हिस्सा जुड़ेगा।
नारी शक्ति वंदन कानून के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण को असली रूप देने के लिए सरकार ने 2029 के लोकसभा चुनाव को लक्ष्य बनाया है।
इसके लिए जरूरी कानून संशोधन और परिसीमन तैयारी
16–18 अप्रैल के विशेष सत्र में पूरी की जाएगी, ताकि अगले चुनाव में लगभग एक‑तिहाई सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व दिखें। दक्षिण भारत के राज्यों को यह भी सुनिश्चित किया गया है कि उनकी बरसों से कम जनसंख्या के कारण लोकसभा सीटें घटेंगी नहीं, बल्कि नई बनने वाली सीटों में से ही महिला आरक्षण निकाला जाएगा। इस तरह यह कानून न सिर्फ राजनीति में महिलाओं की जगह मजबूत करेगा, बल्कि दक्षिण तक आम लोगों को यह भी दिखेगा कि उनकी आवाज़ भी अब सीधे विधायक‑सांसद के रूप में ऊपर तक पहुंचेगी।


