नई दिल्ली /डिजिटल डेस्क _03/04/2026
केंद्र सरकार ने फ्लाइट में 60 प्रतिशत सीटें मुफ्त देने के अपने आदेश को फिलहाल स्थगित कर दिया है। यह नियम 20 अप्रैल से लागू होने वाला था, लेकिन एयरलाइंस कंपनियों के विरोध के बाद सरकार पीछे हट गई।
एयरलाइंस के दबाव में झुकी सरकार
नागर विमानन मंत्रालय ने डीजीसीए को भेजे पत्र में साफ किया कि फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस और अकासा एयर की आपत्तियों के बाद इस फैसले की समीक्षा की गई। एयरलाइंस का तर्क था कि यह नियम किराया ढांचे को प्रभावित करेगा और मौजूदा डिरेगुलेटेड टैरिफ सिस्टम से मेल नहीं खाता।
एयरलाइंस आमतौर पर सीट चयन के लिए 200 रुपए से लेकर 2,100 रुपए तक चार्ज करती हैं, जो सीट की लोकेशन और अतिरिक्त लेगरूम जैसी सुविधाओं पर निर्भर करता है। 18 मार्च को नागर विमानन मंत्रालय द्वारा जारी मूल निर्देश का उद्देश्य यात्रियों की बढ़ती शिकायतों को दूर करना था, खासकर सीट चयन जैसे सेवाओं पर ज्यादा शुल्क को लेकर।
अभी भी 20% सीटें ही मुफ्त
फिलहाल स्थिति जस की तस बनी रहेगी —
🔹 केवल 20% सीटें बिना अतिरिक्त शुल्क के बुक होती हैं
🔹 बाकी सीटों के लिए ₹200 से ₹2,100 तक चुकाने पड़ते हैं
🔹 नया आदेश अगली समीक्षा तक लागू नहीं होगा।
यात्रियों की शिकायतों पर उठा था मामला
18 मार्च को जारी मूल निर्देश का मकसद सीट चयन पर अत्यधिक शुल्क की बढ़ती शिकायतों को दूर करना था। इसमें एक ही PNR पर यात्रा करने वाले यात्रियों को साथ बैठाने का प्रावधान भी था — खासकर परिवारों और बुजुर्गों के लिए।
भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है, जहां रोजाना 5 लाख से अधिक यात्री उड़ान भरते हैं। मंत्रालय ने कहा कि वह यात्री सुविधा और पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध है — लेकिन फिलहाल गेंद एयरलाइंस के पाले में ही है।
सरकार का रुख: विस्तृत समीक्षा के बाद ही नया आदेश जारी होगा।


