डिजिटल डेस्क रायपुर/28/03/2026
छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026’ को लेकर मसीह समाज और राज्य सरकार के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। इस विधेयक के कड़े प्रावधानों के विरोध में आज राजधानी रायपुर की सड़कों पर हजारों की संख्या में मसीह समाज के लोग उतरे। प्रदर्शनकारियों ने विधेयक को असंवैधानिक और धार्मिक स्वतंत्रता का हनन बताते हुए राजभवन घेराव का आह्वान किया।
हालांकि, प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था और भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण प्रदर्शनकारियों को बैरिकेडिंग लगाकर आधे रास्ते में ही रोक दिया गया, जिसके बाद आक्रोशित समाज के लोग वहीं धरने पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी की।
मसीह समाज की मुख्य आपत्ति विधेयक में शामिल सजा और ‘प्रलोभन’ की अस्पष्ट व्याख्या को लेकर है। प्रस्तावित कानून के तहत अवैध धर्मांतरण के मामलों में 7 से 10 साल तक की जेल का प्रावधान है, वहीं यदि मामला महिलाओं या अनुसूचित जाति/जनजाति से जुड़ा हो, तो यह सजा 20 साल तक बढ़ सकती है।
प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि ‘लालच’ या ‘प्रलोभन’ जैसे शब्दों की स्पष्ट परिभाषा न होने से सामान्य मानवीय सेवा कार्यों को भी गलत तरीके से धर्मांतरण का नाम देकर निर्दोषों को झूठे केस में फंसाया जा सकता है। समाज के प्रतिनिधियों ने इसे संविधान के अनुच्छेद 25 का सीधा उल्लंघन करार दिया है, जो हर नागरिक को अपने धर्म के पालन और प्रचार की स्वतंत्रता देता है।
विवाद का एक अन्य बड़ा कारण विवाह के उद्देश्य से किए गए धर्मांतरण को अवैध घोषित करना भी है। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि सरकार इस बिल के जरिए एक विशेष एजेंडे पर काम कर रही है, जिससे राज्य का सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी आपत्तियों पर विचार नहीं करती और इस बिल को वापस नहीं लेती, तो यह आंदोलन केवल रायपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरे छत्तीसगढ़ में व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।
फिलहाल, चक्काजाम और घेराव की घोषणा के बाद राजधानी में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और प्रशासन प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश में जुटा है।
छत्तीसगढ़: धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 के खिलाफ मसीह समाज का हल्लाबोल, राजभवन घेराव की कोशिश


