डिजिटल डेस्क _दिनांक: 22 मार्च 2026
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज ‘विश्व जल दिवस’ के अवसर पर देशवासियों को संबोधित करते हुए जल संरक्षण के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। प्रधानमंत्री ने इस अनमोल प्राकृतिक संसाधन की सुरक्षा के लिए ‘हर बूंद बचाने’ (Saving every drop) और उसके उत्तर दायित्वपूर्ण उपयोग का आह्वान किया है।
संरक्षण की संस्कृति पर जोर प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) के माध्यम से अपना संदेश साझा करते हुए कहा, “जल हमें जीवन देता है और हमारे ग्रह के भविष्य को आकार देता है। आइए, हम जल के संरक्षण और उसके विवेकपूर्ण उपयोग के अपने संकल्प को और मजबूत करें।” उन्होंने उन व्यक्तियों और संस्थाओं की सराहना की जो जल बचाने के लिए जागरूकता फैला रहे हैं और सतत पद्धतियों को बढ़ावा दे रहे हैं।
बढ़ते जल संकट के कारण पर नजर डालें तो
शहरीकरण और कंक्रीट का बढ़ता संकट
देश के बढ़ते जल संकट के तकनीकी पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया। वर्तमान में दिल्ली, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे महानगर जल संकट के जीवंत उदाहरण बन चुके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ‘कंक्रीट के जंगलों’ के विस्तार के कारण वर्षा जल जमीन में नहीं समा पा रहा है, जिससे भूजल स्तर में भारी गिरावट आई है। साथ ही, नदियों में बढ़ता औद्योगिक अपशिष्ट और आर्द्रभूमियों पर अतिक्रमण इस समस्या को और गंभीर बना रहा है।
कृषि क्षेत्र में जल प्रबंधन की चुनौती प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप, कृषि क्षेत्र में जल की बर्बादी को रोकना प्राथमिकता है। ज्ञात हो कि वैश्विक स्तर पर मीठे पानी का 70-80% हिस्सा कृषि में उपयोग होता है। पारंपरिक ‘फ्लड इरिगेशन’ के कारण होने वाली पानी की भारी क्षति को रोकने और ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जल-कुशल तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया है। विज्ञप्ति में चेतावनी दी गई है कि यदि जल प्रबंधन में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में यह वैश्विक खाद्यान्न संकट का रूप ले सकता है।
खबर निष्कर्ष आज का दिन केवल एक दिवस नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए एक सामूहिक संकल्प का दिन है। प्रधानमंत्री ने देश के प्रत्येक नागरिक से जल संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की है।


