खासमखास, खल्लास और ‘नेता’ साहब है या बॉस – हेल मोगैंबो।
20। सितंबर 2026
‘चौपाल की चुटकी’ (एक व्यंग्य)
20। सितंबर 2026
‘चौपाल की चुटकी’ (एक व्यंग्य)
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में चर्चित ढेबर परिवार को 50 करोड़ रुपये की फिरौती के लिए धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। कथित तौर पर फोन करने वाले ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा बताया और रकम नहीं देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। घटना की शिकायत मिलने के बाद रायपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
विदेशी नंबर से आया धमकी भरा कॉल
मिली जानकारी के मुताबिक, ढेबर परिवार के सदस्य को धमकी भरा फोन आया था। कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि कॉल विदेशी नंबर से किया गया था। फोन करने वाले ने 50 करोड़ रुपये की मांग रखी और खुद को बिश्नोई गैंग से जुड़ा बताया। कॉल के दौरान अनवर ढेबर और एजाज ढेबर का नाम भी लिया गया।हालांकि, पुलिस अभी इस बात की पुष्टि नहीं कर रही है कि धमकी देने वाला वास्तव में किसी संगठित गैंग से जुड़ा है। रायपुर पुलिस कमिश्नर के अनुसार, जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि कहीं किसी ने बिश्नोई गैंग का नाम इस्तेमाल कर डर पैदा करने और रंगदारी वसूलने की कोशिश तो नहीं की।
साइबर टीम ने शुरू की तकनीकी जांच
शिकायत के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर टीम फोन नंबर और कॉल से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। कॉल डिटेल, नंबर की तकनीकी जानकारी और अन्य उपलब्ध सबूतों के जरिए आरोपी तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कॉल किस स्थान से किया गया और इसके पीछे कौन व्यक्ति या नेटवर्क काम कर रहा है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इंटरनेट कॉलिंग या किसी अन्य तकनीक के जरिए नंबर की पहचान छिपाने की कोशिश तो नहीं की गई।
अमन साव कनेक्शन भी जांच के दायरे में
धमकी देने वाले की ओर से बिश्नोई गैंग के साथ अमन साव गैंग का नाम लिए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है। ऐसे में पुलिस पुराने संपर्कों और संभावित कनेक्शन को भी खंगाल रही है। एजाज ढेबर को मिले कथित धमकी कॉल में इन नामों का इस्तेमाल क्यों किया गया, इसकी भी जांच की जा रही है।पुलिस परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हाल के दिनों में किसी व्यक्ति से विवाद, पुरानी दुश्मनी या किसी अन्य घटना का इस धमकी से कोई संबंध है या नहीं।
गैंग का असली कनेक्शन या सिर्फ नाम का इस्तेमाल?
फिलहाल जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि 50 करोड़ रुपये की मांग करने वाला व्यक्ति वास्तव में किसी आपराधिक गिरोह से जुड़ा है या उसने कुख्यात गैंग का नाम लेकर परिवार को डराने की कोशिश की है। पुलिस ने अभी तक कॉल करने वाले की पहचान सार्वजनिक नहीं की है।तकनीकी जांच पूरी होने और आरोपी की पहचान सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस धमकी के पीछे कौन है और उसका किसी संगठित आपराधिक नेटवर्क से कोई वास्तविक संबंध है या नहीं।
नई दिल्ली। देशभर के घरेलू LPG उपभोक्ताओं के लिए 1 अक्टूबर 2026 से एक अहम बदलाव लागू होने जा रहा है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, सब्सिडी के साथ नियंत्रित खुदरा कीमत पर LPG रिफिल बुक कराने के लिए Biometric Aadhaar Authentication यानी BAA पूरा होना जरूरी होगा। सरकार के अनुसार, जिन 27.43 करोड़ उपभोक्ताओं का यह सत्यापन पहले ही हो चुका है, उन्हें दोबारा प्रक्रिया कराने की जरूरत नहीं होगी।
1 अक्टूबर से क्या बदलेगा?
1 अक्टूबर 2026 से जिन घरेलू LPG ग्राहकों ने Biometric Aadhaar Authentication पूरा नहीं किया है, उनके लिए सब्सिडी वाले रिफिल की बुकिंग तब तक सक्षम नहीं होगी, जब तक सत्यापन पूरा नहीं किया जाता। सरकार ने इसके लिए पहले 30 जून की समय सीमा तय की थी, जिसे कई बार बढ़ाया गया। अंतिम समय सीमा 14 सितंबर 2026 रखी गई थी।सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर का लाभ वास्तविक और पात्र उपभोक्ताओं तक पहुंचाना तथा डुप्लीकेट या अपात्र कनेक्शनों पर रोक लगाना है।
आधार वेरिफिकेशन नहीं कराया तो क्या सिलेंडर मिलना बंद हो जाएगा?
ऐसा नहीं है कि आधार सत्यापन पूरा नहीं होने पर ग्राहक को LPG सिलेंडर बिल्कुल नहीं मिलेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, जो उपभोक्ता Biometric Aadhaar Authentication नहीं कराना चाहते या किसी कारण से इसे पूरा नहीं कर पा रहे हैं, वे OMC के डिजिटल माध्यमों से अपनी पसंद दर्ज करा सकते हैं। ऐसे ग्राहकों को स्थानीय उपलब्धता के आधार पर 5 किलो या 10 किलो का सिलेंडर बाजार कीमत पर, बिना सब्सिडी के उपलब्ध कराया जा सकता है।
घर बैठे कैसे पूरा होगा Aadhaar Authentication?
इसके लिए हर बार गैस एजेंसी जाने की जरूरत नहीं है। उपभोक्ता अपने LPG कनेक्शन से जुड़ी ऑयल मार्केटिंग कंपनी के मोबाइल ऐप के जरिए घर से प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
इसके अलावा LPG सिलेंडर की डिलीवरी के समय डिलीवरी कर्मचारी के मोबाइल ऐप के जरिए मौके पर ही Biometric Aadhaar Authentication कराया जा सकता है। ग्राहक अपने LPG वितरक के शोरूम पर जाकर भी यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
करोड़ों ग्राहकों का वेरिफिकेशन पूरा
पेट्रोलियम मंत्रालय के 19 सितंबर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 27.43 करोड़ यानी करीब 89.9 प्रतिशत सक्रिय घरेलू LPG उपभोक्ताओं का Biometric Aadhaar Authentication पूरा हो चुका है। जिन ग्राहकों का सत्यापन हो चुका है, उनके लिए 1 अक्टूबर से दोबारा कोई प्रक्रिया जरूरी नहीं होगी।
सब्सिडी लेने वालों के लिए क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया?
Biometric Aadhaar Authentication के जरिए LPG कनेक्शन को वास्तविक उपभोक्ता से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, इससे सब्सिडी का लक्षित वितरण बेहतर करने, डुप्लीकेट या अपात्र कनेक्शनों की पहचान करने और सब्सिडी वाले घरेलू LPG के गलत इस्तेमाल को रोकने में मदद मिलेगी।इसलिए अगर आपने अभी तक Biometric Aadhaar Authentication पूरा नहीं किया है, तो 1 अक्टूबर से पहले अपने LPG कनेक्शन की स्थिति जरूर जांच लें और उपलब्ध माध्यमों में से किसी एक के जरिए सत्यापन पूरा कर लें।
रायपुर। छत्तीसगढ़ का खानपान अपनी सादगी, देसी स्वाद और पारंपरिक पकवानों के लिए खास पहचान रखता है। यहां के कई व्यंजन ऐसे हैं, जिनमें स्वाद के साथ स्थानीय संस्कृति और पुरानी पाक परंपराओं की झलक भी मिलती है। इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में पाग खुरमी रोटी का नाम भी शामिल है।
सामान्य रोटी से अलग पाग खुरमी रोटी स्वाद में मीठी और काफी समृद्ध होती है। इसे सूजी, गेहूं के आटे, घी और शक्कर के साथ काजू, बादाम, किशमिश, तिल और मूंगफली जैसे ड्राईफ्रूट्स मिलाकर तैयार किया जाता है। खास भरावन और ऊपर चढ़ने वाली मीठी चाशनी इसे अलग पहचान देती है।
ड्राईफ्रूट्स की भरावन बनाती है इसे खास
पाग खुरमी रोटी की तैयारी ड्राईफ्रूट्स से शुरू होती है। सबसे पहले काजू, बादाम, किशमिश, तिल और मूंगफली को थोड़े घी में हल्का भून लिया जाता है। इसके बाद इन्हें ठंडा करके ग्राइंडर में पीस लिया जाता है।
तैयार मिश्रण को अलग रख दिया जाता है। बाद में इसी ड्राईफ्रूट मिश्रण का इस्तेमाल रोटी के अंदर भरावन के तौर पर किया जाता है। यही भरावन इसके स्वाद को सामान्य रोटी से काफी अलग बनाती है।
घी में भुने जाते हैं सूजी और गेहूं का आटा
अब कड़ाही में घी गर्म किया जाता है। इसमें सूजी और गेहूं का आटा डालकर धीमी आंच पर अच्छी तरह भुना जाता है। जब मिश्रण से खुशबू आने लगे और उसका रंग हल्का बदलने लगे, तब इसमें तैयार ड्राईफ्रूट्स का मिश्रण मिला दिया जाता है।
सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाने के बाद मिश्रण को कुछ देर के लिए रखा जाता है। इसी बीच अलग बर्तन में शक्कर की चाशनी तैयार की जाती है।
चाशनी से आता है पाग खुरमी में खास मीठा स्वाद
चाशनी तैयार होने के बाद इसे आटा, सूजी और ड्राईफ्रूट्स के मिश्रण में मिलाया जाता है। मिश्रण को अच्छी तरह गूंथकर इसकी छोटी-छोटी लोई तैयार की जाती हैं। हर लोई के अंदर ड्राईफ्रूट्स की भरावन रखकर इसे गोल आकार दिया जाता है।
इसके बाद कड़ाही में तेल गर्म करके रोटियों को धीमी आंच पर तला जाता है। धीमी आंच पर पकाने से पाग खुरमी बाहर से सुनहरी और अंदर से अच्छी तरह पकती है।
अंत में चाशनी की मीठी परत
रोटियों के तल जाने के बाद दोबारा शक्कर की चाशनी तैयार की जाती है। गरम पाग खुरमी रोटियों को इस चाशनी में डाला जाता है, जिससे उनके ऊपर मिठास की एक परत जम जाती है।
इस तरह तैयार होती है छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पाग खुरमी रोटी, जिसमें घी, सूजी, गेहूं, ड्राईफ्रूट्स और शक्कर का स्वाद एक साथ मिलता है। पारंपरिक छत्तीसगढ़ी खानपान में यह व्यंजन स्वाद के साथ स्थानीय पाक विरासत की भी झलक दिखाता है।
जनकपुर। छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के जनकपुर थाना क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान शराब सेवन और शासकीय वाहन को दुर्घटनाग्रस्त करने के मामले में पुलिस विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है। विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद आरक्षक क्रमांक 204 अविनाश गुप्ता को पुलिस सेवा से पृथक कर दिया गया है।
19 जुलाई को ड्यूटी के दौरान हुआ था हादसा
मामला 19 जुलाई 2026 का है। जनकपुर थाना क्षेत्र में डायल-112 वाहन क्रमांक CG 03 A 2700 में आरक्षक अविनाश गुप्ता की ड्यूटी लगी थी। इसी दौरान उनके द्वारा शराब का सेवन किए जाने की जानकारी सामने आई और शासकीय वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया।हादसे के बाद सरकारी वाहन को भी नुकसान पहुंचा। घटना से जुड़ी तस्वीरों में वाहन के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति दिखाई दी थी।
ब्रेथ एनालाइजर जांच में मिला शराब का सेवन
घटना के बाद आरक्षक अविनाश गुप्ता की ब्रेथ एनालाइजर से जांच कराई गई। पुलिस विभाग की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, जांच में 388 MG एल्कोहल कंटेंट पाए जाने का उल्लेख किया गया।मामले को गंभीर मानते हुए विभाग ने अगले ही दिन यानी 20 जुलाई 2026 को आरक्षक को निलंबित कर दिया। इसके बाद पूरे मामले की विभागीय जांच शुरू की गई।
जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद हुई कार्रवाई
विभागीय जांच के दौरान ड्यूटी के समय शराब सेवन, शासकीय वाहन को दुर्घटनाग्रस्त करने, कर्तव्य के प्रति लापरवाही और अनुशासनहीनता से संबंधित आरोपों की जांच की गई। जांच में आरोप प्रमाणित पाए गए।इसके बाद सक्षम प्राधिकारी ने 16 सितंबर 2026 को आरक्षक अविनाश गुप्ता को पुलिस सेवा से पृथक करने का आदेश जारी किया।
पुलिस विभाग ने अनुशासनहीनता पर दिखाई सख्ती
ड्यूटी के दौरान शराब सेवन और सरकारी वाहन से जुड़ी इस घटना को विभाग ने गंभीर अनुशासनहीनता माना। विभागीय जांच पूरी होने के बाद सेवा से पृथक करने की कार्रवाई की गई है। पुलिस विभाग की इस कार्रवाई को कर्तव्य के दौरान अनुशासन और जिम्मेदारी से जुड़े मामलों में सख्त कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
बलरामपुर। बारिश के मौसम में खराब सड़कों की वजह से लोगों को होने वाली परेशानी की तस्वीरें अक्सर सामने आती हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में समस्या इससे भी आगे की है। यहां स्कूल तक पहुंचने के लिए रास्ता ही चुनौती बन गया है। वाड्रफनगर ब्लॉक के धौरपुर गांव में पदस्थ महिला शिक्षिकाओं को बारिश के दिनों में करीब 3 किलोमीटर पैदल चलने के बाद नदियां पार कर स्कूल पहुंचना पड़ता है। इस दौरान एक शिक्षिका अपनी छोटी बच्ची को साथ लेकर नदी पार करती नजर आईं, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।
पहले 3 किलोमीटर पैदल सफर, फिर नदियों को पार करने की चुनौती
धौरपुर गांव में पदस्थ दो महिला शिक्षिकाओं की तस्वीर सामने आई है। बताया जा रहा है कि स्कूल तक पहुंचने के लिए उन्हें पहले करीब 3 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। इसके बाद रास्ते में पड़ने वाली मोरन और इरिआ नदियों को पार करना होता है।बारिश के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ने पर मुश्किल और ज्यादा बढ़ जाती है। पानी अधिक होने की स्थिति में शिक्षिकाओं को नदी पार करने का जोखिम उठाने के बजाय वापस लौटना पड़ता है। ऐसे में स्कूल तक पहुंचना भी संभव नहीं हो पाता।
स्कूटर है, लेकिन स्कूल तक नहीं पहुंचा सकती
शिक्षिका संध्या के मुताबिक, वह अपनी स्कूटर को मरना इलाके में खड़ा करती हैं। इसके बाद आगे का करीब 3 किलोमीटर रास्ता पैदल तय करना पड़ता है। रास्ता पथरीला और ऊबड़-खाबड़ होने के कारण पैदल चलना भी आसान नहीं है।लेकिन सबसे बड़ी परेशानी इसके बाद सामने आती है, जब रास्ते में नदी पड़ती है। संध्या कई बार अपनी बेटी को भी साथ लेकर स्कूल जाती हैं। ऐसे में नदी पार करना उनके लिए सामान्य आवागमन नहीं, बल्कि रोज की चुनौती बन जाता है।
2014 से जारी है यही परेशानी
शिक्षिका संध्या ने बताया कि वह वर्ष 2014 से यहां पदस्थ हैं। इतने वर्षों में बारिश का मौसम आते ही उन्हें इसी तरह की परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। जलस्तर अधिक बढ़ने पर वह स्कूल नहीं पहुंच पाती हैं।उनका कहना है कि जब किसी वजह से स्कूल नहीं पहुंच पातीं तो उन्हें इसका मलाल रहता है। उन्हें चिंता होती है कि उनकी अनुपस्थिति का असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ सकता है।
कलेक्टर तक पहुंचा मामला, शिक्षिका की मेहनत की सराहना
महिला शिक्षिकाओं के इस संघर्ष की जानकारी बलरामपुर कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी तक भी पहुंच चुकी है। कलेक्टर ने शिक्षिका के समर्पण और मेहनत की सराहना की है।कलेक्टर के मुताबिक, उन्हें ऐसी शिक्षिका के बारे में जानकारी मिली है, जो अपने छोटे बच्चे को साथ लेकर बारिश के दौरान नदी पार करती हैं और करीब 3 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचती हैं। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षिका का इस तरह प्रयास करना सराहनीय है।
सवाल सिर्फ रास्ते का नहीं, बच्चों की पढ़ाई का भी
धौरपुर की यह तस्वीर ग्रामीण इलाकों में शिक्षा व्यवस्था तक पहुंच की जमीनी चुनौती को सामने लाती है। शिक्षिकाओं के सामने हर साल बारिश के दौरान यही समस्या खड़ी होती है। अब देखना होगा कि इस मुश्किल आवागमन को आसान बनाने के लिए प्रशासन की ओर से क्या स्थायी व्यवस्था की जाती है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को सुलझाने की कोशिश अब नए दौर में पहुंचती दिखाई दे रही है। जुलाई 2026 में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई थी। इसके बाद विवाद से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर केंद्रीय जल आयोग की निगरानी में दोनों राज्यों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में कहा कि दिल्ली में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री और अधिकारियों के बीच चर्चा हो चुकी है और अब विषय को केंद्रीय जल आयोग के स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि महानदी जल विवाद का जल्द समाधान निकलेगा।
1983 से नहीं, विवाद की मौजूदा कानूनी प्रक्रिया कई साल पुरानी है
महानदी के पानी के बंटवारे को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से मतभेद हैं। हालांकि, मौजूदा अंतरराज्यीय जल विवाद की औपचारिक कानूनी प्रक्रिया 2016 के बाद तेज हुई। ओडिशा ने 2016 में केंद्र के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद बातचीत के प्रयास हुए, लेकिन समाधान नहीं निकल सका। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार ने मार्च 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया था।
अब तकनीकी टीम आंकड़ों के आधार पर तलाश रही समाधान
वर्तमान में केंद्रीय जल आयोग की अध्यक्षता में गठित तकनीकी समिति दोनों राज्यों से मिले जल उपलब्धता और उपयोग से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा कर रही है। 7 सितंबर को समिति की दूसरी बैठक हुई, जिसमें दोनों राज्यों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के साझा विश्लेषण पर चर्चा की गई।17 सितंबर को महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण की सुनवाई भी आगे बढ़ाकर 28 सितंबर कर दी गई। इस दौरान दोनों राज्यों की तकनीकी टीमों के बीच सीडब्ल्यूसी की निगरानी में बातचीत जारी रहने की जानकारी सामने आई है। अगली तकनीकी बैठक 21 सितंबर को प्रस्तावित है।
ओडिशा दौरे पर रवाना हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
महानदी विवाद पर बयान देने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय दो दिवसीय ओडिशा दौरे के लिए रवाना हुए। प्रवास के दौरान वह ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे।मुख्यमंत्री पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर भी जाएंगे और वहां दर्शन कर छत्तीसगढ़ की सुख समृद्धि की कामना करेंगे।
इंदौर में कांग्रेस के कार्यक्रम को लेकर साय का राहुल गांधी पर निशाना
मुख्यमंत्री साय ने मध्यप्रदेश के इंदौर में आयोजित कांग्रेस के छात्र कार्यक्रम को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह जहां जाते हैं, वहां कांग्रेस का बंटाधार होता है और इंदौर तथा मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस का यही हाल होने वाला है।यह बयान मुख्यमंत्री की राजनीतिक प्रतिक्रिया है। महानदी जल विवाद के विपरीत इस मुद्दे पर आगे की स्थिति राजनीतिक बयानों और दलों की प्रतिक्रियाओं पर निर्भर करेगी।
बालोद। इलेक्ट्रिक वाहनों की डीलरशिप दिलाने और 100 प्रतिशत कैशबैक का भरोसा देकर लाखों रुपये की ठगी करने के मामले में बालोद पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि डीलरशिप और वाहनों के नाम पर शिकायतकर्ता से अलग अलग किश्तों में 31 लाख 80 हजार रुपये लिए गए। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
डीलरशिप के साथ 100 प्रतिशत कैशबैक का दिया गया था लालच
पुलिस के अनुसार ग्राम भानपुरी निवासी मनीष कुमार साहू ने 5 मई 2026 को थाना सनौद में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि CBK EV MOTORS और CBK SERVICE CENTER रायपुर से जुड़े नंदकिशोर साहू, लोकेश द्विवेदी और पुरुषोत्तम साहू ने इलेक्ट्रिक स्कूटी, स्कूल वैन, लोडर वाहन और इलेक्ट्रॉनिक सामान की डीलरशिप लेने पर पूरी रकम कैशबैक के रूप में वापस करने का भरोसा दिलाया था।बताया गया कि डीलरशिप लेने के लिए शुरुआत में 10 लाख रुपये जमा करने को कहा गया। रकम जमा करने के बाद कंपनी की ओर से प्रमाण पत्र भी दिया गया।
अलग अलग किश्तों में खाते में पहुंची 31.80 लाख की रकम
इसके बाद इलेक्ट्रिक स्कूटी और इलेक्ट्रॉनिक सामान के लिए अलग अलग रकम जमा कराने की बात कही गई। शिकायतकर्ता ने कंपनी की ओर से बताए गए बैंक खातों में 30 मई 2024 से अलग अलग किश्तों में कुल 31 लाख 80 हजार रुपये जमा किए।डीलरशिप शुरू करने की तैयारी में शिकायतकर्ता ने ग्राम सनौद में दुकान भी किराये पर ले ली। इसके बाद कंपनी की तरफ से 11 इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध कराए गए।
11 वाहन मिले लेकिन गुणवत्ता की शिकायत के बाद कंपनी ने वापस ले लिए
शिकायतकर्ता के मुताबिक उपलब्ध कराए गए इलेक्ट्रिक वाहनों की गुणवत्ता को लेकर समस्या सामने आई। इसके बाद कंपनी ने सभी 11 वाहनों को वापस ले लिया। कंपनी की ओर से बाद में नए और बेहतर वाहन उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया, लेकिन इसके बाद वाहन उपलब्ध नहीं कराए गए।जब शिकायतकर्ता ने जमा रकम वापस मांगी तो मामला और उलझ गया।
रकम लौटाने के लिए दिए गए तीनों चेक हो गए बाउंस
पैसे वापस करने के दबाव के बाद 6 सितंबर 2024 को धमतरी के भूपेंद्र दादर स्थित दुकान पर 1 लाख 45 हजार रुपये लौटाए गए। बाकी रकम की वापसी के लिए कंपनी की ओर से तीन चेक दिए गए।शिकायतकर्ता ने जब इन चेक को बैंक में जमा किया तो तीनों चेक स्टॉप पेमेंट के कारण बाउंस हो गए। इसके बाद उसने पुलिस से शिकायत की।
पुलिस ने केस दर्ज कर शुरू की जांच, दो आरोपी जेल भेजे गए
शिकायत के आधार पर थाना सनौद में अपराध क्रमांक 40/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले में धारा 420 और 34 के तहत कार्रवाई करते हुए जांच शुरू की। जांच के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। मामले में पुलिस अब ठगी की पूरी रकम, अन्य संबंधित लोगों की भूमिका और लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मैनपाट को स्वच्छ और बेहतर पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर सख्ती की तैयारी है। सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने मैनपाट के अलग अलग पर्यटन स्थलों का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने गंदगी को लेकर नाराजगी जताई और पर्यटन स्थलों पर गुटखा, तंबाकू और सिगरेट की बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए।
दुकानों में तंबाकू उत्पाद मिले तो रद्द होगा आवंटन
निरीक्षण के दौरान पर्यटन स्थलों पर गुटखा और तंबाकू के कारण फैली गंदगी का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। विधायक ने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया कि जिन दुकानों में गुटखा, तंबाकू या सिगरेट की बिक्री पाई जाती है, उनका आवंटन तत्काल रद्द किया जाए।विधायक ने कहा कि मैनपाट की पहचान सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है। देश के अलग अलग हिस्सों से पर्यटक यहां पहुंचते हैं। ऐसे में पर्यटन स्थलों पर गुटखा थूकने और कचरा फैलने से न केवल स्वच्छता प्रभावित होती है, बल्कि पर्यटन स्थल की छवि पर भी असर पड़ता है।
महिला पर्यटकों की सुविधा के लिए सड़क किनारे बनेंगे शौचालय
पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए भी योजना तैयार की जा रही है। मैनपाट के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचने वाली सड़कों के किनारे पर्याप्त संख्या में शौचालय और यात्री प्रतीक्षालय बनाने की बात कही गई है।इस व्यवस्था का सबसे ज्यादा लाभ महिला पर्यटकों और परिवार के साथ मैनपाट पहुंचने वाले लोगों को मिलने की उम्मीद है। पर्यटन स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने से पर्यटकों की परेशानी कम करने पर जोर दिया जा रहा है।
पर्यटन सीजन में बक्साइट ट्रकों की आवाजाही पर भी लगेगी पाबंदी
मैनपाट में बढ़ती पर्यटकों की संख्या के बीच यातायात व्यवस्था को लेकर भी अहम बदलाव की तैयारी है। पिछले एक साल में एक लाख से ज्यादा पर्यटकों के पहुंचने के बाद पर्यटन सीजन और भीड़ वाले समय में बक्साइट से लदे भारी वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने का फैसला लिया गया है।प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार सुबह 9 बजे से 10 बजे तक बक्साइट लोड ट्रकों की आवाजाही रोकी जाएगी। शाम के समय भी करीब दो घंटे तक भारी वाहनों को मैनपाट की सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं होगी।
स्वच्छता और बेहतर यातायात पर जोर, पर्यटन को सुविधाजनक बनाने की तैयारी
मैनपाट में तंबाकू उत्पादों पर रोक, पर्यटकों के लिए शौचालय और प्रतीक्षालय की सुविधा तथा भारी वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने की योजना का उद्देश्य पर्यटन स्थलों पर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना है। इन फैसलों के लागू होने के बाद मैनपाट में पर्यटकों के लिए स्वच्छता, सुविधा और यातायात व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल सकता है।
महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सरकारी वेतन व्यवस्था से जुड़ा हैरान करने वाला मामला सामने आया है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिरपुर में पदस्थ एक सहायक ग्रेड 2 लिपिक ने कथित तौर पर रिकॉर्ड में अपना पद और वेतनमान बदलकर खुद को व्याख्याता के तौर पर दर्ज करा लिया। इसके बाद वह करीब 8 महीने तक व्याख्याता के पद के मुताबिक वेतन लेता रहा।मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू हो गई है। जांच में स्कूल के अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आने के बाद उन पर भी निलंबन की कार्रवाई की गई है।
वेतन बिल बनाने की जिम्मेदारी का उठाया फायदा
मामले में सिरपुर स्कूल में पदस्थ सहायक ग्रेड 2 लिपिक नारायण प्रसाद निर्मलकर का नाम सामने आया है। उसका मूल पद लेवल 6 का था, लेकिन रिकॉर्ड में कथित तौर पर उसे व्याख्याता एलबी के लेवल 9 के पद पर दर्शा दिया गया।बताया जा रहा है कि स्कूल में शिक्षकों के वेतन से संबंधित बिल तैयार करने का काम लिपिक के पास था। इसी व्यवस्था का फायदा उठाते हुए उसने प्राचार्य के डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल किया और मई 2025 से दिसंबर 2025 के बीच अपने पदनाम और वेतनमान में बदलाव कर दिया।
8 महीने तक निकलता रहा बढ़ा हुआ वेतन
रिकॉर्ड में बदलाव के बाद नारायण प्रसाद निर्मलकर ने करीब आठ महीने तक व्याख्याता के पद के अनुसार वेतन प्राप्त किया। इस दौरान सरकारी खजाने को करीब 13 लाख रुपये की आर्थिक क्षति होने की बात सामने आई है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक वेतन में हुए इस बदलाव की जानकारी स्कूल से लेकर शिक्षा विभाग और कोषालय स्तर तक कैसे नहीं पहुंची।
रायपुर से हुई जांच तो सामने आया पूरा मामला
मामले का खुलासा जनवरी 2026 में हुआ। रायपुर स्थित संचालनालय कोष एवं लेखा के अधिकारियों की नजर सिरपुर स्कूल से निकलने वाले असामान्य रूप से अधिक वेतन पर पड़ी। इसके बाद जब रिकॉर्ड की जांच की गई तो लिपिक द्वारा अपने पद और वेतनमान में बदलाव किए जाने की जानकारी सामने आई।जांच के बाद मामले ने तूल पकड़ा और विभाग ने संबंधित अधिकारियों तथा कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल शुरू की।
प्राचार्य और जिला शिक्षा कार्यालय के कर्मचारी पर भी कार्रवाई
मामला सामने आने के बाद 27 जनवरी को नारायण प्रसाद निर्मलकर को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद आगे की जांच में प्रथम दृष्टया जिम्मेदारी सामने आने पर लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक ऋतुराज रघुवंशी ने 18 सितंबर को प्रभारी प्राचार्य उमा ठाकुर और जिला शिक्षा कार्यालय के लिपिक अकील मोहम्मद खान को भी निलंबित कर दिया।इस कार्रवाई के बाद अब विभागीय जांच जारी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फर्जी तरीके से पद और वेतनमान बदलने की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका थी और सरकारी राशि की वसूली किस तरह की जाएगी।
कलेक्टर ने दिए थे FIR के निर्देश, अब तक दर्ज नहीं हुआ मामला
मामले में कलेक्टर की ओर से FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, बताया जा रहा है कि निर्देश के करीब आठ महीने बाद भी पुलिस में FIR दर्ज नहीं हुई है।फिलहाल विभागीय जांच चल रही है और आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर तय होगी।