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Thursday, October 29, 2026
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काउंसिलिंग रजिस्टर में कथित काट-छांट ने खड़ा किया विवाद, शिक्षिका और महिला थाना काउंसलर पर FIR

छत्तीसगढ़ : महिला परामर्श केंद्र के काउंसिलिंग रजिस्टर में कथित तौर पर छेड़छाड़ और दस्तावेजों में बदलाव का आरोप सामने आया है। शिकायत के आधार पर सिविल लाइन पुलिस ने एक शिक्षिका और महिला थाना की काउंसलर के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। मामला न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज हुआ है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ BNS की धारा 337 और 340 के तहत कार्रवाई शुरू की है।आरोपितों में रीतू पाण्डेय मिश्रा, जो केंद्रीय विद्यालय रायगढ़ में प्राथमिक शिक्षिका बताई गई हैं, और महिला थाना की काउंसलर आशा सिंह शामिल हैं।

12 जून 2023 की काउंसिलिंग से जुड़ा है मामला

शिकायतकर्ता सुधांशु मिश्रा के मुताबिक उनकी पत्नी की ओर से महिला परामर्श केंद्र में शिकायत की गई थी। इसी शिकायत के सिलसिले में 12 जून 2023 को अंतिम काउंसिलिंग हुई थी। इस दौरान महिला थाना की काउंसलर आशा सिंह ने दोनों पक्षों की काउंसिलिंग की थी।शिकायतकर्ता का दावा है कि उस समय काउंसिलिंग रजिस्टर में महिला थाना में चल रहे एक प्रकरण को खत्म कराने की बात दर्ज की गई थी। उनके अनुसार संबंधित प्रविष्टि पर पति-पत्नी और काउंसलर के हस्ताक्षर भी मौजूद थे।

प्रमाणित प्रति और चालान में अंतर का आरोप

मामले ने उस समय नया मोड़ लिया, जब शिकायतकर्ता के अनुसार बाद में उनकी पत्नी की ओर से सरकंडा थाने में पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया गया।सुधांशु मिश्रा का आरोप है कि बाद में उन्हें मिली काउंसिलिंग रजिस्टर की प्रमाणित प्रति और मामले के चालान में दर्ज जानकारी में अंतर दिखाई दिया। इसी आधार पर उन्होंने रजिस्टर में कथित काट-छांट और दस्तावेजों में हेरफेर किए जाने का आरोप लगाते हुए शिकायत की।हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता और दस्तावेजों में बदलाव किस स्तर पर हुआ, यह पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

IG और SP से शिकायत के बाद न्यायालय का रुख

शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने पहले IG, SP और महिला थाना में मामले की शिकायत की थी। कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अधिवक्ता धनंजय मिश्रा के माध्यम से न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया।प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट कुमारी रिया चक्रवर्ती के आदेश के बाद सिविल लाइन पुलिस ने 18 सितंबर 2026 को अपराध क्रमांक 1282 दर्ज किया। अब पुलिस काउंसिलिंग रजिस्टर समेत उन सभी दस्तावेजों की जांच कर रही है, जिनके आधार पर कथित हेरफेर का आरोप लगाया गया है।

पुराने 498-A केस का भी शिकायत में जिक्र

शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में यह भी कहा है कि उनकी पत्नी की ओर से पहले दर्ज कराया गया 498-A का मामला हाईकोर्ट से खारिज हो चुका है। पुलिस की मौजूदा कार्रवाई हालांकि काउंसिलिंग रजिस्टर और संबंधित दस्तावेजों में कथित हेरफेर के आरोपों की जांच से जुड़ी है।पुलिस जांच में दस्तावेजों की मूल प्रतियां, प्रमाणित प्रतियां और चालान में दर्ज विवरण का मिलान किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रजिस्टर में वास्तव में कोई बदलाव या काट-छांट हुई थी या नहीं और यदि हुई तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

राजमिस्त्री और रेजा-कुली के बच्चे अब पढ़ेंगे बड़े आवासीय स्कूलों में

00 अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से नारायणपुर के श्रमिक परिवारों के सपनों को मिली नई उड़ान
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा संचालित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना नारायणपुर जिले के श्रमिक परिवारों के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की एक नई और मजबूत राह तैयार कर रही है। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के कारण जिन प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना श्रमिक परिवारों के लिए केवल एक अधूरा सपना हुआ करता था, आज इस योजना की बदौलत उन्हीं संस्थानों के दरवाजे उनके मेधावी बच्चों के लिए पूरी तरह खुल गए हैं। जिले के पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक नि:शुल्क गुणवत्तापूर्ण और आवासीय शिक्षा प्रदान कर यह योजना उनके सपनों को पंख लगा रही है।
जिले के ग्राम खरगांव में राजमिस्त्री का कार्य करने वाले रामधर दुग्गा के पुत्र साहिल दुग्गा का चयन जब राज्य के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार राजकुमार कॉलेज, रायपुर में हुआ, तो पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। रामधर भावुक होकर कहते हैं कि एक श्रमिक परिवार के लिए ऐसे बड़े विद्यालय में बच्चे को पढ़ाने की कल्पना करना भी आसान नहीं होता, लेकिन सरकार की इस पहल ने उनके बेटे की राह बेहद आसान कर दी है।
इसी तरह नारायणपुर के जगदीश मंदिर वार्ड की रहने वाली डिगेश्वरी जैन, जो स्वयं रेजा-कुली का कठिन काम करती हैं, अपनी पुत्री तेजल जैन के इस बड़े अवसर को लेकर बेहद उत्साहित हैं। तेजल का चयन दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजनांदगांव में नि:शुल्क अध्ययन के लिए हुआ है। वहीं ओरछा तहसील के सुदूर ग्राम कुतुल की रेजा-कुली गणेशिया उसेंडी की बेटी दिप्ती उसेंडी और ग्राम बाकुलवाही के दयाल सिंह पात्र की पुत्री पूर्वी पात्र का चयन संस्कार द गुरुकुल, बस्तर में हुआ है। ग्राम बोरण्ड निवासी बेनु राम राना के पुत्र हिमांशु राना को भी कृष्णा एजुकेशन सोसायटी, भिलाई में रहकर पढऩे का बेहतरीन मौका मिला है।
यह योजना केवल नि:शुल्क शिक्षा का जरिया मात्र नहीं है, बल्कि दूरस्थ और आदिवासी अंचलों के बच्चों के भीतर आत्मविश्वास का नया संचार कर उनके करियर को संवारने की एक मजबूत नींव साबित हो रही है। एक समृद्ध और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण पाकर बच्चे न केवल अपनी प्रतिभा को निखार सकेंगे, बल्कि भविष्य की बड़ी चुनौतियों के लिए भी तैयार हो सकेंगे। इस सुखद बदलाव से गदगद हितग्राही परिवारों ने श्रम विभाग के प्रति आभार जताते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन का सहृदय धन्यवाद व्यक्त किया है, जिनकी दूरगामी सोच से आज गरीब परिवारों के बच्चों का भविष्य संवर रहा है।

गांव की बेटी ने लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी, सुमन लता बनीं लखपति दीदी

00 20 हजार से शुरू की किराना दुकान, आज सालाना एक लाख से अधिक की आय
रायपुर। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं एवं आजीविका गतिविधियों का सकारात्मक प्रभाव गांव-गांव में दिखाई दे रहा है। इसी कड़ी में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी की श्रीमती सुमन लता वाकरे की कहानी ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास, मेहनत और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायी मिसाल बनकर सामने आई है।
स्व-सहायता समूह से जुड़कर बदली जिंदगी
श्रीमती सुमन लता वाकरे आज लखपति दीदी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। कभी परिवार की आर्थिक परिस्थितियों को लेकर चिंतित रहने वाली सुमन लता ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी मेहनत और लगन से आर्थिक सशक्तिकरण की राह चुनी। वे माँ महामाया महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं और वर्तमान में समूह की सचिव के दायित्व का निर्वहन कर रही हैं। सुमन लता बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुडऩा उनके जीवन में बदलाव का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। समूह के माध्यम से उन्हें आर्थिक गतिविधि शुरू करने का अवसर मिला और धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ा। समूह की गतिविधियों और उपलब्ध वित्तीय सहायता ने उन्हें स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया।
15 हजार की आरएफ राशि से शुरू हुई आत्मनिर्भरता की राह
समूह के माध्यम से श्रीमती सुमन लता को 15 हजार रुपये की आरएफ राशि प्राप्त हुई। इसके बाद 60 हजार रुपये की सीआईएफ राशि में से 20 हजार रुपये का उपयोग कर उन्होंने गांव में किराना दुकान शुरू की। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन अपनी मेहनत, ग्राहकों के प्रति विश्वास और बेहतर संचालन के बल पर उन्होंने दुकान का लगातार विस्तार किया। व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने बैंक से ऋण लेकर अपनी दुकान में आवश्यक सामग्री बढ़ाई। आज उनकी किराना दुकान पहले की तुलना में काफी विस्तृत हो चुकी है और व्यवसाय से उन्हें प्रतिवर्ष एक लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है। आर्थिक गतिविधि के विस्तार ने न केवल उनके परिवार की आय को मजबूत किया, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास भी दिया।
लखपति दीदी बनकर बनीं गांव की प्रेरणा
श्रीमती सुमन लता की सफलता इस बात का उदाहरण है कि जब महिलाओं को संगठित होकर आगे बढऩे का अवसर, आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन मिलता है, तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। स्व-सहायता समूह ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि अपने सपनों को साकार करने का आत्मविश्वास भी प्रदान किया। किराना दुकान के माध्यम से नियमित आय अर्जित कर सुमन लता ने लखपति दीदी बनने की उपलब्धि हासिल की है। उनकी कहानी गांव की अन्य महिलाओं को भी आर्थिक गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही है।
महतारी वंदन योजना का भी मिला संबल
श्रीमती सुमन लता को महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों की राशि भी प्राप्त हो चुकी है। उनके अनुसार योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग दिया है। उन्होंने इस सहयोग के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मिल रहा बढ़ावा
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, स्व-सहायता समूहों को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों से जोडऩे के साथ उन्हें विभिन्न आजीविका अवसरों का लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प से प्रेरित होकर गांव की महिलाएं अब सहायता की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं रोजगार और आय के साधन तैयार कर रही हैं। सुमन लता वाकरे की कहानी इसी बदलाव की जीवंत तस्वीर है, जहां समूह से मिला सहयोग, सरकारी योजनाओं का संबल और स्वयं की मेहनत मिलकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार कर रहे हैं।
सेवा संकल्प अभियान में सुमन लता की कहानी बनी प्रेरणा
सेवा संकल्प अभियान के परिप्रेक्ष्य में सुमन लता वाकरे की सफलता की कहानी ग्रामीण भारत में हो रहे सकारात्मक बदलाव को सामने लाती है। यह कहानी बताती है कि योजनाओं का वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देता है, जब लाभार्थी उन्हें अवसर में बदलकर अपनी मेहनत से नई उपलब्धियां हासिल करते हैं। गुदुमदेवरी की सुमन लता आज केवल अपने परिवार के लिए आय का मजबूत आधार नहीं बनी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि संगठित प्रयास, सरकारी योजनाओं का सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति मिलकर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

CM साय के ओडिशा दौरे का आज दूसरा दिन, राज्यपाल से मुलाकात के बाद लौटेंगे रायपुर

 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दो दिवसीय ओडिशा दौरे का आज दूसरा और अंतिम दिन है। अपने प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री आज ओडिशा के राज्यपाल से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात के बाद उनका ओडिशा दौरा समाप्त हो जाएगा।जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री साय दोपहर करीब 1:30 बजे रायपुर वापस पहुंचेंगे। राज्यपाल से मुलाकात को उनके ओडिशा प्रवास के अंतिम कार्यक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।

पहले दिन मुख्यमंत्री से मुलाकात और जगन्नाथ मंदिर में दर्शन

ओडिशा दौरे के पहले दिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ओडिशा के मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर पहुंचकर विधिवत दर्शन-पूजन किया।मुख्यमंत्री ने भगवान जगन्नाथ से छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, खुशहाली और प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना की। दो दिवसीय प्रवास के दौरान उनकी विभिन्न महत्वपूर्ण मुलाकातों के साथ धार्मिक कार्यक्रम भी शामिल रहे।राज्यपाल से आज होने वाली मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री साय छत्तीसगढ़ के लिए रवाना होंगे और दोपहर में रायपुर पहुंचेंगे।

सेवा संकल्प अभियान: डिजिटल क्रांति की ओर छत्तीसगढ़: वसुंधरा परियोजना से सुशासन और पारदर्शी राजस्व सेवाओं का नया दौर

लेखक – विष्णु प्रसाद वर्मा सहायक संचालक
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के नागरिकों को सुगम, त्वरित और पारदर्शी राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सेवा के संकल्प के साथ एक ऐतिहासिक डिजिटल क्रांति का नेतृत्व कर रही है। राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग द्वारा शुरू की गई वसुंधरा परियोजना के माध्यम से प्रदेश भर के पुराने और वर्तमान राजस्व अभिलेखों का संपूर्ण डिजिटलीकरण, संरक्षण तथा प्रमाणीकरण किया जा रहा है, जिससे आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से हमेशा के लिए मुक्ति मिलेगी।
सफलता का आधार: दंतेवाड़ा का क्रांतिकारी मॉडल
इस महत्वाकांक्षी योजना की सफलता की मजबूत नींव दंतेवाड़ा जिले के क्रांतिकारी मॉडल पर आधारित है। दंतेवाड़ा में पिछले एक वर्ष के दौरान 12 हजार से अधिक नागरिकों ने कियोस्क सेवाओं का लाभ उठाया और 15 हजार से अधिक जाति प्रमाण-पत्र मात्र एक से दो दिनों में जारी किए गए। इसके साथ ही सैकड़ों विवादित मामलों का त्वरित निराकरण संभव हुआ और अभिलेखों में छेड़छाड़ का एक भी मामला सामने नहीं आया।
विस्तृत खाका: 12.89 करोड़ पृष्ठों का डिजिटलीकरण
दंतेवाड़ा के इसी सफल प्रयोग से प्रेरणा लेते हुए अब पूरे राज्य में लगभग 12 करोड़ 89 लाख पृष्ठों के विभिन्न राजस्व अभिलेखों को डिजिटाइज़ करने का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत 22.72 करोड़ रुपए की लागत से 5.68 करोड़ पृष्ठ खसरा पांचसाला, 11.77 करोड़ रुपए की लागत से 2.94 करोड़ पृष्ठ क्च-1 रिकॉर्ड, 9.98 करोड़ रुपए की लागत से 2.49 करोड़ पृष्ठ नामांतरण व संशोधन पंजी, 2.13 करोड़ रुपए की लागत से 53.16 लाख पृष्ठ मिसल पंजी और 1.89 करोड़ रुपए की लागत से 47.29 लाख पृष्ठ अधिकार अभिलेख शामिल हैं। इसके अतिरिक्त निस्तार पत्रक, वाजिब-उल-अर्ज, रीनंबरिंग सूची, साधारण खसरा, नजूल शीट एवं व्यवर्तन पंजी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा।
वित्तीय ढांचा और समयबद्ध कार्यान्वयन
इस विशाल परियोजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए 65.41 करोड़ रुपए की कुल एकमुश्त पूंजीगत लागत (कैपेक्स) और 50 लाख रुपए प्रति वर्ष का परिचालन व्यय तय किया गया है, जिसकी वित्तीय व्यवस्था राज्य के अधोसंरचना मद और केंद्र सरकार की डीआईएलआरएमपी 3.0 योजना से की जाएगी। योजना के तहत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के सहयोग से अगले तीन महीनों के भीतर वसुंधरा पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार किया जाएगा, जिसके बाद कार्यदायी एजेंसियों का चयन कर एक वर्ष के भीतर सभी अभिलेखों के डिजिटलीकरण और सत्यापन का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।
तकनीकी नवाचार: एआई और ब्लॉकचेन से सुरक्षा
वसुंधरा परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसमें आधुनिकतम तकनीकों का समावेश है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ओसीआर, डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन और स्मार्ट सर्च इंजन की मदद से दशकों पुराने रिकॉर्ड भी पलक झपकते ही खोजे जा सकेंगे। वहीं अभिलेखों में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या हेरफेर को रोकने के लिए ब्लॉकचेन आधारित सुरक्षा, डिजिटल हस्ताक्षर और यूनिक क्यूआर व बारकोड प्रणाली लागू की जाएगी।
त्वरित सेवाएं और सुशासन का नया युग
इस योजना के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद वर्तमान में नकल प्राप्ति में लगने वाला 3 से 7 दिनों का समय घटकर मात्र कुछ मिनटों का रह जाएगा और यह सेवा नागरिकों को 24 घंटे उपलब्ध रहेगी। नागरिक अब वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप, लोक सेवा केंद्रों और कियोस्क के माध्यम से घर बैठे आसानी से प्रमाणित अभिलेख प्राप्त कर सकेंगे। सुगम ऑनलाइन पेमेंट गेटवे और अधिकारियों के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाओं से आम जनता को राहत मिलेगी। छत्तीसगढ़ सरकार का यह नवाचार न केवल भूमि विवादों और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लगाएगा, बल्कि राज्य में डिजिटल गवर्नेंस, पारदर्शिता और सुशासन के एक नए युग का सूत्रपात भी करेगा।

जगन्नाथ धाम पहुंचे CM विष्णु देव साय, श्रीमद् भागवत कथा में हुए शामिल; बोले- आध्यात्मिक शांति का मिला अनुभव

 ओडिशा:  पुरी स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ धाम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने पुरी पहुंचकर आध्यात्मिक सभा में भाग लिया और श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण किया। उन्होंने जगन्नाथ धाम की यात्रा को अपने लिए सौभाग्य का अवसर बताते हुए कहा कि यहां आकर उन्हें भक्ति और आध्यात्मिक शांति का अनुभव हुआ।

भागवत कथा में शामिल होकर सुनी भगवान की कथा

मुख्यमंत्री ने पुरी धाम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में हिस्सा लिया। उनके अनुसार, कथा का वाचन कान्हाजी महाराज कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने धार्मिक आयोजन में शामिल होने पर प्रसन्नता जताई और कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से भगवान के संदेश और जीवन मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है।उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक आयोजनों से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है और समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिलता है।

भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रमुख केंद्र है पुरी

विष्णु देव साय ने जगन्नाथ पुरी को भारतीय संस्कृति और धार्मिक आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण केंद्र बताया। पुरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां वर्षभर अलग-अलग धार्मिक आयोजन और उत्सव होते हैं, जिनका श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व है।पुरी को हिंदू धर्म के चार प्रमुख धामों में शामिल माना जाता है। इसी वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां धार्मिक यात्रा के लिए पहुंचते हैं।

धर्म, संस्कार और सद्भावना का संदेश देते हैं ऐसे आयोजन

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा जैसे आयोजन भारतीय परंपरा और आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाने का काम करते हैं। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए लोगों को धर्म, संस्कार, भक्ति और सद्भावना से जुड़े संदेश मिलते हैं।उन्होंने भगवान जगन्नाथ से सभी के सुख, शांति और कल्याण की कामना भी की।

धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं की मौजूदगी

मुख्यमंत्री के पुरी पहुंचने और भागवत कथा में शामिल होने के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी मौजूद रहे। कथा का श्रवण करने पहुंचे लोगों में उत्साह दिखाई दिया।मुख्यमंत्री ने कहा कि आध्यात्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने से मन को नई ऊर्जा मिलती है। उन्होंने पुरी धाम की यात्रा और भागवत कथा के अनुभव को अपने लिए विशेष और यादगार बताया।

Chhattisgarh Weather: फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, कई जिलों में बारिश के साथ बिजली गिरने का अलर्ट; जानें किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम एक बार फिर करवट लेने की तैयारी में है। नए मौसम तंत्र के सक्रिय होने से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार कुछ इलाकों में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने जैसी स्थिति बन सकती है। इसे देखते हुए लोगों को खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

बंगाल की खाड़ी से बढ़ेगी नमी, सक्रिय होंगे बादल

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी और आसपास बने मौसम तंत्र का असर छत्तीसगढ़ में दिखाई दे सकता है। सिस्टम के प्रभाव से प्रदेश में नमी का प्रवाह बढ़ने की संभावना है, जिससे बादलों की सक्रियता बढ़ेगी।इसके चलते कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर तेज बारिश के दौर भी देखने को मिल सकते हैं।

बारिश के साथ तेज हवा और गरज-चमक की संभावना

नए मौसम सिस्टम के प्रभाव से केवल बारिश ही नहीं, बल्कि कई इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की भी संभावना जताई गई है। मौसम खराब होने के दौरान खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी।आकाशीय बिजली की स्थिति में खुले मैदान, खेत, तालाब और नदी के आसपास रहने से बचने की सलाह दी गई है।

किसानों के लिए क्यों जरूरी है सावधानी

बदलते मौसम का असर खेती-किसानी पर भी पड़ सकता है। खेतों में काम करने वाले किसानों को अचानक बारिश और आकाशीय बिजली के खतरे को देखते हुए मौसम की स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है।बारिश या बिजली चमकने के दौरान खेत में काम करने के बजाय सुरक्षित स्थान पर जाना ज्यादा जरूरी होगा। कृषि गतिविधियों की योजना भी स्थानीय मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर बनाने की सलाह दी गई है।

बारिश से तापमान में आ सकती है गिरावट

बादल छाने और बारिश का दौर शुरू होने से प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। इससे उमस और गर्मी से परेशान लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।हालांकि तेज बारिश के दौरान कुछ निचले इलाकों में जलभराव जैसी स्थानीय समस्या भी सामने आ सकती है। ऐसे में लोगों को बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन की सलाह पर ध्यान देने की जरूरत होगी।

बिजली चमकने पर इन जगहों से रहें दूर

आकाशीय बिजली के दौरान पेड़ के नीचे खड़े होना खतरनाक हो सकता है। इसके अलावा खुले मैदान, तालाब, नदी और अन्य खुले स्थानों पर रहने से भी बचना चाहिए।खराब मौसम के दौरान बिजली के खंभों, मोबाइल टावर और अन्य ऊंची संरचनाओं से दूरी बनाए रखना जरूरी है। मौसम विभाग की चेतावनी और स्थानीय प्रशासन की जानकारी पर लगातार नजर रखना भी सुरक्षित रहने के लिए महत्वपूर्ण होगा।छत्तीसगढ़ में नए मौसम तंत्र के प्रभाव से आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव जारी रहने की संभावना है। ऐसे में बारिश के साथ आकाशीय बिजली और तेज हवाओं को लेकर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी, ठिकाने से AK-47 समेत 3 रायफल और कारतूस बरामद

 छत्तीसगढ़ : नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को हथियारों की बड़ी खेप बरामद करने में सफलता मिली है। जंगल क्षेत्र में चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों ने एक संदिग्ध ठिकाने से AK-47 समेत तीन रायफल और बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। हथियार मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने आसपास के इलाके में तलाशी अभियान और तेज कर दिया है।

गुप्त सूचना के आधार पर जंगल में पहुंची संयुक्त टीम

पुलिस और सुरक्षा बलों को सूचना मिली थी कि जंगल के इलाके में नक्सलियों से जुड़े हथियार और अन्य सामग्री छिपाकर रखी गई है। सूचना की पुष्टि के बाद संयुक्त टीम ने संबंधित क्षेत्र में सर्च अभियान शुरू किया।जवानों ने जंगल के भीतर संदिग्ध स्थानों की तलाशी ली। इसी दौरान उन्हें हथियार और कारतूस मिले। बरामद सभी सामान को सुरक्षा बलों ने अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

AK-47 के साथ मिली अन्य रायफल और गोलियां

तलाशी के दौरान सुरक्षा बलों को AK-47 राइफल के अलावा दो अन्य रायफल भी मिली हैं। इसके साथ बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि हथियारों की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बरामद सामग्री किस नक्सली दस्ते से जुड़ी है।जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि हथियारों को जंगल में कब और किस उद्देश्य से छिपाया गया था।

हथियार मिलने के बाद जंगल में बढ़ाई गई निगरानी

हथियारों की बरामदगी के बाद सुरक्षा बलों ने आसपास के जंगलों में निगरानी बढ़ा दी है। जवान संभावित ठिकानों और संदिग्ध गतिविधियों को लेकर लगातार सर्चिंग कर रहे हैं। सुरक्षा बलों को आशंका है कि आसपास अन्य सामग्री या नक्सली ठिकाने भी हो सकते हैं।इसी वजह से अभियान को आगे भी जारी रखा गया है और संवेदनशील इलाकों में जवानों की मौजूदगी बढ़ाई गई है।

नक्सल नेटवर्क के खिलाफ लगातार चल रहा अभियान

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की ओर से लंबे समय से सर्च और एंटी नक्सल ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के दौरान समय-समय पर हथियार, विस्फोटक और अन्य सामग्री बरामद होती रही है।फिलहाल बरामद हथियारों की जांच की जा रही है। साथ ही जंगल क्षेत्र में सुरक्षा बलों की सर्चिंग जारी है, ताकि नक्सल गतिविधियों से जुड़े अन्य ठिकानों और संदिग्धों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके

गुफा देखने निकले दो भाइयों पर भालू ने किया हमला, छोटे भाई को बचाने 10 साल के मुकेश ने दिखाई हिम्मत

 कोरबा :  लेमरू वन परिक्षेत्र में वन्यजीव हमले की घटना सामने आई है। छातीबाहर गांव के रहने वाले दो सगे भाई जंगल में गुफा और पहाड़ देखने गए थे। इसी दौरान गुफा के पास अचानक उनका सामना भालू से हो गया। भालू ने 7 वर्षीय सोनू पर हमला कर दिया। छोटे भाई को बचाने के लिए उसका 10 वर्षीय भाई मुकेश भालू के सामने डट गया। घटना में दोनों बच्चे घायल हुए हैं, जबकि सोनू की हालत गंभीर बताई जा रही है।

भाई पर हमला होते ही मुकेश ने उठाया मोर्चा

बताया जा रहा है कि गुफा के पास पहुंचते ही भालू ने सोनू को निशाना बना लिया। खतरा देखते ही मुकेश अपने छोटे भाई को बचाने के लिए आगे बढ़ा। उसने पत्थर उठाकर भालू को पीछे हटने पर मजबूर करने की कोशिश की। इस दौरान मुकेश भी घायल हो गया, लेकिन भालू के पीछे हटने से सोनू को बचाने में कामयाबी मिली।सोनू को गंभीर चोटें आने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद आगे के इलाज के लिए रेफर किया गया है।

तीन युवकों के साथ जंगल गए थे दोनों बच्चे

ग्रामीणों के अनुसार, दोनों बच्चे शहर से आए तीन युवकों के संपर्क में आए थे। युवकों ने उन्हें जंगल में गुफा और पहाड़ दिखाने की बात कही थी। शुरुआत में बच्चों ने उनके साथ जाने से मना किया, लेकिन आरोप है कि उन्हें पैसे देने की बात कहकर साथ चलने के लिए तैयार किया गया।इसके बाद दोनों भाई युवकों के साथ कार से जंगल की ओर गए। कुछ दूरी तक वाहन से जाने के बाद सभी पैदल गुफा की तरफ बढ़े। बताया जा रहा है कि दोनों बच्चे आगे चल रहे थे, जबकि तीनों युवक उनके पीछे थे।

भालू के हमले के बाद युवक मौके से लौटे

गुफा के पास अचानक भालू सामने आया और उसने सोनू पर हमला कर दिया। घटना के दौरान दोनों बच्चे मुश्किल में फंस गए। ग्रामीणों का आरोप है कि भालू के हमले के बाद तीनों युवक बच्चों की मदद करने के बजाय वहां से भाग गए और कार की तरफ लौट गए।घटना की जानकारी मिलने पर ग्रामीण और बच्चों के परिजन मौके पर पहुंचे। इसके बाद युवकों की कार में तोड़फोड़ किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

वन विभाग की टीम ने घटनास्थल का लिया जायजा

भालू के हमले की सूचना मिलने के बाद दोनों घायल बच्चों को जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। सोनू की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए दूसरे स्थान पर रेफर किया गया है।घटना की जानकारी मिलने पर लेमरू डिप्टी रेंजर श्रवण कुमार वन विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। वन विभाग की ओर से घायल बच्चों के परिवार को तत्काल सहायता राशि उपलब्ध कराए जाने की जानकारी दी गई है। मामले में विभाग की आगे की कार्रवाई जारी है।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पुजारी मंदिर की संपत्ति का मालिक नहीं…जानिए किस मामले में अदालत ने खारिज की याचिका

 बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने धार्मिक और ट्रस्ट की संपत्तियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि किसी मंदिर या धार्मिक संपत्ति का प्रबंधन करने वाला पुजारी उस संपत्ति का निजी या स्वतंत्र मालिक नहीं माना जा सकता। अदालत ने ठाकुर रामचंद्र जी स्वामी जैतूसाव मठ पब्लिक ट्रस्ट, रायपुर की संपत्तियों के राजस्व रिकॉर्ड में कलेक्टर का नाम मैनेजर या सर्वराकार के तौर पर दर्ज किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में किसी अधिकारी का नाम दर्ज होना सर्वराकार के पद या ट्रस्ट की संपत्ति पर किसी व्यक्ति के वास्तविक अधिकार का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

महंत ने किन दस्तावेजों के आधार पर जताया था संपत्ति पर दावा

यह याचिका रायपुर के पुरानी बस्ती स्थित जैतूसाव मठ निवासी महंत राम आशीष दास ने दायर की थी। उन्होंने खुद को दिवंगत महंत राम भूषण दास का शिष्य बताया था। अपने दावे के समर्थन में उन्होंने वसीयत, गोद लेने से संबंधित दस्तावेज और सर्वराकार के तौर पर नियुक्ति से जुड़े कागजात पेश किए थे।महंत राम भूषण दास ट्रस्ट के सर्वराकार थे और 16 नवंबर 2007 को उनका निधन हुआ था। इसके बाद ट्रस्ट की संपत्तियों को लेकर राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने का विवाद सामने आया।

कलेक्टर का नाम दर्ज करने को लेकर कैसे शुरू हुआ विवाद

मामले में महेंद्र कुमार अग्रवाल ने ट्रस्ट की भरेंगा और भटगांव स्थित कृषि भूमि समेत अन्य संपत्तियों के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज दिवंगत महंत के नाम को हटाकर कलेक्टर का नाम दर्ज करने की मांग की थी।तहसीलदार ने 13 अक्टूबर 2010 को आवेदन खारिज कर दिया था। आदेश में कहा गया था कि मामला पहले से ही न्यायालय और रजिस्ट्रार के समक्ष लंबित है। इसके बाद 21 मार्च 2012 को एसडीओ ने याचिकाकर्ता को नोटिस दिए बिना राजस्व रिकॉर्ड में कलेक्टर का नाम दर्ज करने का निर्देश जारी कर दिया।

कई स्तरों पर चला मामला, फिर हाईकोर्ट पहुंची चुनौती

एसडीओ के आदेश के खिलाफ दायर अपील को कलेक्टर ने खारिज कर दिया। इसके बाद संभागायुक्त ने 5 दिसंबर 2014 को मामले में आदेश पारित करते हुए संबंधित कार्रवाई को निरस्त कर दिया। मामला आगे राजस्व मंडल पहुंचा, जिसने 28 अप्रैल 2016 को संभागायुक्त के आदेश को पलट दिया और एसडीओ तथा कलेक्टर के आदेश बहाल कर दिए।इसके बाद इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांत का भी किया गया उल्लेख

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पुजारी उत्थान एवं कल्याण समिति मामले में निर्धारित सिद्धांत का उल्लेख किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी मंदिर या धार्मिक संपत्ति के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने मात्र से पुजारी उस संपत्ति का व्यक्तिगत मालिक नहीं बन जाता।अदालत ने यह भी कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में की गई प्रविष्टि से सर्वराकार के पद या ट्रस्ट की संपत्ति पर किसी व्यक्ति के वास्तविक अधिकार का अंतिम निर्धारण नहीं होता।

अनुच्छेद 227 के तहत दखल से कोर्ट ने किया इनकार

हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों और लागू कानूनी सिद्धांतों को देखते हुए संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही महंत राम आशीष दास की याचिका खारिज कर दी गई।