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Thursday, October 29, 2026
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रायपुर में सर्व समाज एक मंच पर: गुजराती स्कूल कार्यक्रम की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

रायपुर – 23 सितंबर 2026

राजधानी रायपुर में सामाजिक सौहार्द और कौमी एकता को बनाए रखने के लिए विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर प्रशासन से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने डीसीपी कार्यालय पहुंचकर देवेंद्र नगर स्थित गुजराती मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

प्रतिनिधिमंडल में बौद्ध समाज, प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज, क्रिश्चियन समाज, सर्व ब्राह्मण समाज और हुसैनी सेना की महिला विंग जैनब तंजीम के पदाधिकारी शामिल थे।

जैनब तंजीम द्वारा पुलिस कमिश्नर को दिए गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि स्कूल के कार्यक्रम में वक्ता काजल हिंदुस्तानी द्वारा इस्लाम धर्म और मुस्लिम महिलाओं के हिजाब को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ है। पत्र में स्कूल प्रबंधन और आयोजकों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

वहीं, प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज रायपुर शहर के जिलाध्यक्ष मनोज बंजारे ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र (दिनांक 22.09.2026) में कहा है कि विद्यालय संविधान के अनुसार धर्मनिरपेक्ष वातावरण वाले होने चाहिए। उन्होंने मांग की है :
प्रदेश के सभी शासकीय-अशासकीय विद्यालयों में धार्मिक प्रचार पर रोक हेतु शिक्षा विभाग को निर्देश दिए जाएं
विद्यालय परिसर में केवल राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक मूल्यों और सर्वधर्म समभाव बढ़ाने वाले कार्यक्रम हों
रायपुर की घटना की निष्पक्ष जांच कर विद्यालय प्रबंधन पर नियमानुसार कार्रवाई हो

प्रतिनिधियों ने कहा कि स्कूल के बच्चे छत्तीसगढ़ और देश का भविष्य हैं, उन्हें संविधान के मूल्यों के साथ आगे बढ़ना चाहिए। सभी समाजों ने प्रदेश में शांति, भाईचारा और एकता बनाए रखने का संकल्प दोहराया।

नोट: समाचार में लगाए गए आरोप शिकायत पत्रों पर आधारित हैं, प्रशासन/स्कूल प्रबंधन का पक्ष आने पर अपडेट किया जाएगा।

मुठभेड़ मामले में महिला आरोपी बरी, अदालत ने कहा सबूतों से नहीं जुड़ पाई भूमिका

 बिलासपुर: महिला आरोपी मांगो उर्फ सिंधु नुरेटी, निवासी बारनागुडा, नारायणपुर को माओवादी गतिविधियों से जुड़े एक मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है. बिलासपुर की एनआईए विशेष अदालत ने पुलिस पर हमले, अवैध हथियार रखने और प्रतिबंधित संगठन से जुड़ी गतिविधियों के आरोपों से उसे बरी कर दिया है.अदालत में मामले की सुनवाई न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी ने की. फैसला सुनाते हुए अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त और ठोस साक्ष्यों के आधार पर यह साबित नहीं कर सका कि संबंधित मुठभेड़ के दौरान पुलिस टीम पर गोली चलाने वाले समूह में मांगो नुरेटी भी शामिल थी.

12 अप्रैल 2024 को जंगल में हुआ था पुलिस और माओवादियों के बीच सामना

मामला 12 अप्रैल 2024 का है. अभियोजन के मुताबिक धमतरी जिले के नगरी इलाके में डीआरजी, गरियाबंद डीआरजी और एसटीएफ की संयुक्त टीम माओवादी विरोधी अभियान के तहत एकावारी के जंगल और पहाड़ी क्षेत्र में पहुंची थी.बताया गया कि शाम करीब 4.30 से 5.30 बजे के बीच जंगल में मौजूद करीब 20 से 25 माओवादियों ने पुलिस टीम पर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी. सुरक्षा बलों की ओर से जवाबी कार्रवाई के बाद माओवादी कथित तौर पर जंगल और अंधेरे का फायदा उठाकर वहां से निकल गए.

मुठभेड़ स्थल से कई सामान मिलने का किया गया था दावा

अभियोजन की ओर से अदालत में बताया गया था कि घटनास्थल की तलाशी के दौरान बीजीएल सेल, सोलर प्लेट, बिजली के तार, माओवादी वर्दी, साहित्य और दवाइयों समेत कई सामान बरामद किए गए थे.इसी मुठभेड़ के दौरान एसटीएफ के आरक्षक सोढ़ी हिंगा के घायल होने की बात भी अभियोजन पक्ष ने रखी थी. मामले में इन घटनाओं और बरामदगी को आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों से जोड़ने की कोशिश की गई.

पहचान और बरामदगी से जुड़े साक्ष्यों पर अदालत ने उठाए सवाल

अदालत के सामने आरोपी की पहचान को लेकर प्रस्तुत साक्ष्यों में पर्याप्त स्पष्टता नहीं पाई गई. इसके अलावा ओडिशा पुलिस से आरोपी की सुपुर्दगी, चोट और हथियार बरामदगी से संबंधित साक्ष्यों में भी कमियां और विरोधाभास सामने आए.अभियोजन पक्ष घटनास्थल से मिले सामान और आरोपी के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं कर सका. इसी तरह यह भी निर्णायक रूप से साबित नहीं हो पाया कि मुठभेड़ के दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग करने वालों में मांगो नुरेटी मौजूद थी.

ठोस प्रमाण नहीं मिलने पर सभी आरोपों से मिली राहत

अदालत ने माना कि केवल परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की मुठभेड़ में भूमिका साबित नहीं की जा सकती. अभियोजन पक्ष आरोपी कीमौजूदगी, पहचान और कथित गतिविधियों को पर्याप्त प्रमाणों के साथ जोड़ने में सफल नहीं रहा.इन्हीं साक्ष्यगत कमियों के आधार पर एनआईए विशेष अदालत ने मांगो उर्फ सिंधु नुरेटी को उसके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से बरी कर दिया.

व्यापम के प्रश्नपत्र में एक शब्द पर छिडा विवाद, सेन समाज ने उठाई कार्रवाई की मांग

 रायपुर: छत्तीसगढ़ में व्यापम की 20 सितंबर को आयोजित परीक्षा के प्रश्नपत्र को लेकर विवाद सामने आया है. परीक्षा में इस्तेमाल की गई एक लोकोक्ति में ‘नाउ’ शब्द को लेकर सेन समाज ने आपत्ति जताई है. समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि इस शब्द का प्रयोग आपत्तिजनक संदर्भ में किया गया, जिससे समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं.

कई जिलों में सामने आया विरोध, प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन

मामला सामने आने के बाद सेन समाज के लोगों ने प्रदेश के अलग अलग जिलों में विरोध दर्ज कराया है. समाज के प्रतिनिधियों ने प्रश्नपत्र में इस्तेमाल किए गए शब्द को अपनी जाति और पारंपरिक पेशे से जोड़कर अपमानजनक बताया है.रायपुर में सेन समाज के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा. प्रतिनिधियों ने पूरे मामले में जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है.

परीक्षा के प्रश्नपत्र में ऐसे शब्दों के इस्तेमाल पर उठे सवाल

सेन समाज का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र में इस्तेमाल होने वाली भाषा को लेकर विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए. प्रतिनिधियों के मुताबिक, परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंच पर किसी समुदाय की सामाजिक पहचान या पारंपरिक पेशे से जुड़े शब्द का ऐसा संदर्भ नहीं होना चाहिए, जिससे समाज के लोगों को अपमान महसूस हो.समाज ने संबंधित प्रश्न को हटाने या वापस लेने की मांग के साथ यह भी कहा है कि भविष्य में प्रश्न तैयार करते समय इस तरह की स्थिति दोबारा पैदा नहीं होनी चाहिए.

क्या है पूरा विवाद, क्यों जताई गई आपत्ति

विवाद की शुरुआत 20 सितंबर को आयोजित व्यापम परीक्षा के एक प्रश्न से हुई. प्रश्न में एक लोकोक्ति के संदर्भ में ‘नाउ’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था. सेन समाज ने इसी शब्द और उसके संदर्भ को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है.समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस प्रयोग से समुदाय की सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है. उन्होंने संबंधित प्रश्न की जांच कराने के साथ प्रश्न तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच करने की मांग की है.

अब जांच और कार्रवाई पर टिकी नजर

सेन समाज की ओर से प्रशासन के समक्ष शिकायत और ज्ञापन दिए जाने के बाद अब मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर है. समाज चाहता है कि पूरे विवाद की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि प्रश्नपत्र में संबंधित शब्द किस संदर्भ और प्रक्रिया के तहत शामिल किया गया था.

कब से शुरू हो रहा पितृ पक्ष..? जानें प्रतिपदा श्राद्ध की तिथि, मुहूर्त और सर्वपितृ अमावस्या

 Pitra Paksha 2026। हिंदू पंचांग में पितृ पक्ष का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह अवधि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समर्पित होती है। इस दौरान परिवार अपने दिवंगत पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और अन्य धार्मिक कर्म करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से किए गए इन कर्मों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक ग्रंथ निर्णय सिंधु के अनुसार, पितृ पक्ष की शुरुआत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से मानी जाती है और इसका समापन अमावस्या तिथि पर होता है। तिथियों की स्थिति के आधार पर इसकी अवधि 15 या 16 दिन हो सकती है।

27 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 26 सितंबर की रात 10:18 बजे शुरू होगी और 27 सितंबर की रात 8:58 बजे तक रहेगी। 26 सितंबर को दिनभर भाद्रपद पूर्णिमा रहेगी। उदयातिथि के नियम के अनुसार आश्विन कृष्ण प्रतिपदा का श्राद्ध 27 सितंबर 2026 को किया जाएगा। इसी के साथ पितृ पक्ष की शुरुआत मानी जाएगी और अलग-अलग तिथियों के अनुसार पितरों का श्राद्ध किया जाएगा।

प्रतिपदा तिथि पर किन पितरों का श्राद्ध?

पितृ पक्ष की प्रतिपदा तिथि उन दिवंगत पितरों के लिए मानी जाती है, जिनका निधन किसी भी महीने की प्रतिपदा तिथि को हुआ हो। इस दिन उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और पंचबलि जैसे कर्म किए जाते हैं। श्राद्ध कर्म के लिए तिथि का सही निर्धारण करना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए परिवार अपने स्थानीय पंचांग और विद्वान आचार्य से मुहूर्त की पुष्टि कर सकते हैं।

श्राद्ध के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त

पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म के लिए दिन के विशेष समय को महत्वपूर्ण माना गया है। दिए गए पंचांग के अनुसार श्राद्ध के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:36 बजे से 1:24 बजे तक

दोनों मुहूर्तों की कुल अवधि 1 घंटा 36 मिनट है।

10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या

पितृ पक्ष का अंतिम दिन आश्विन कृष्ण अमावस्या को होता है, जिसे सर्वपितृ अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन उन सभी पितरों के लिए श्राद्ध किया जाता है, जिनकी श्राद्ध तिथि ज्ञात न हो या जिनका किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं किया जा सका हो। इस वर्ष अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर की रात 9:35 बजे शुरू होगी और 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाएगी। इसी दिन पितृ पक्ष का समापन होगा।

पितृ पक्ष में क्या किया जाता है?

 पितृ पक्ष के दौरान परिवार अपने पूर्वजों को याद करते हुए विभिन्न धार्मिक कर्म करता है। इनमें तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान, पंचबलि और दान आदि प्रमुख माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में किए गए श्राद्ध कर्म से पितरों की तृप्ति होती है और उनका आशीर्वाद परिवार को प्राप्त होता है। पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी माना जाता है। इसी कारण हिंदू धर्म में इस पक्ष का विशेष महत्व बताया गया है।

चंपारण्य में 73.42 करोड़ के श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स को केंद्र की मंजूरी

00 राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा चंपारण्य, करीब 15 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का होगा विस्तार
00 चंपारण्य को राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम – अग्रवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रायपुर जिले के चंपारण्य में लगभग 73.42 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स परियोजना को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति ष्टस्रूष्ट ने स्वीकृति प्रदान की है। सीएसएमसी स्वदेश दर्शन 2.0 की केंद्रीय समिति है, जो मिशन निदेशालय की अनुशंसाओं के आधार पर परियोजनाओं की स्वीकृति पर विचार करती है। परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा किया जाएगा तथा इसके लिए 18 माह की प्रस्तावित कार्यान्वयन अवधि निर्धारित की गई है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने परियोजना की स्वीकृति पर कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में पर्यटन, विशेषकर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के विकास को नई गति मिल रही है। चंपारण्य छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली को बेहतर पर्यटक सुविधाओं के साथ राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी। हमारा प्रयास होगा कि श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली की गरिमा और धार्मिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखते हुए यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए उच्च गुणवत्ता की सुविधाएं विकसित हों। यह परियोजना चंपारण्य को देश के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों के बीच और अधिक प्रभावी रूप से स्थापित करने में सहायक होगी।

चंपारण्य में ₹73.42 करोड़ के श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स को केंद्र की मंजूरी


छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। चंपारण्य परियोजना की स्वीकृति छत्तीसगढ़ के आध्यात्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। परियोजना की स्वीकृति के लिए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।
महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य की जन्मस्थली चंपारण्य देशभर में वैष्णव श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य चंपारण्य को केवल तीर्थ यात्रा के एक पड़ाव तक सीमित न रखते हुए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, विरासत एवं अनुभव-आधारित पर्यटन के एक समग्र केंद्र के रूप में विकसित करना है। परियोजना के माध्यम से पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने, उनके ठहराव की अवधि बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस परियोजना में महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य से संबंधित आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स में म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर, कथा ग्राउंड, ओपन एयर थिएटर, वेलनेस एवं मेडिटेशन सुविधाएं, श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं डॉरमेटरी, मल्टीपर्पज हॉल, रेस्टोरेंट और वेंडर शॉप्स जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना में यज्ञ कुंड एवं जल कुंड का उन्नयन, तालाब विकास, दिव्य पाथवे एवं कवर्ड पाथवे, पार्किंग, साइनेज और लैंडस्केपिंग सहित अन्य पर्यटक सुविधाओं का भी विकास प्रस्तावित है। यह श्रद्धालुओं के साथ-साथ परिवारों, सांस्कृतिक पर्यटकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और वेलनेस पर्यटन से जुड़े पर्यटकों के लिए भी आकर्षक अनुभव होगा।
परियोजना की परिकल्पना इस प्रकार की गई है कि चंपारण्य आने वाले श्रद्धालुओं को महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य के जीवन, दर्शन और विरासत से परिचित होने का अवसर मिले। सामान्य पर्यटकों के लिए आधे से पूरे दिन तक के प्रवास तथा धार्मिक आयोजनों एवं वेलनेस गतिविधियों के दौरान अधिक अवधि तक ठहरने की संभावनाओं को भी ध्यान में रखा गया है। परियोजना की डीपीआर एवं कार्य-सीमा तैयार है और स्वीकृति के बाद निविदा प्रक्रिया प्रारंभ करने की तैयारी है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद चंपारण्य में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक, विरासत, शिक्षा और वेलनेस पर्यटन की गतिविधियों को भी विस्तार मिलेगा। इससे पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर सृजित करने की दिशा में भी मदद मिलेगी।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की पहल से भटगांव विधानसभा के 7 धान उपार्जन केंद्र होंगे सुविधा-संपन्न

00 69.58 लाख रुपए से पक्के फड़ एवं समतलीकरण कार्य को मिली स्वीकृति, किसानों को मिलेगी बेहतर उपार्जन सुविधा
रायपुर। किसानों को धान उपार्जन के दौरान बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भटगांव विधानसभा क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की गई है। भटगांव विधायक एवं कैबिनेट मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से विधानसभा क्षेत्र के 7 धान उपार्जन केंद्रों में पक्के फड़ निर्माण एवं समतलीकरण कार्य के लिए 69.58 लाख रुपए की स्वीकृति मिली है। इससे इन केंद्रों में आधारभूत सुविधाएं मजबूत होंगी और किसानों को धान बेचने के दौरान अधिक व्यवस्थित एवं सुविधाजनक वातावरण मिलेगा।
स्वीकृत कार्यों में सूरजपुर विकासखंड के टमकी, सिरसी, करोटी बी, खोपो, बतरा, सांवारांवां एवं कुर्रीडीह स्थित धान उपार्जन केंद्र शामिल हैं। प्रत्येक केंद्र में 9.94 लाख रुपए की लागत से पक्के फड़ निर्माण एवं समतलीकरण का कार्य किया जाएगा।
धान उपार्जन केंद्रों में पक्के फड़ और समतलीकरण होने से उपार्जन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी। इससे धान की आवक, खरीदी और रख-रखाव के दौरान होने वाली व्यावहारिक परेशानियों को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही किसानों को उपार्जन केंद्रों पर बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में यह कार्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
किसानों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए क्षेत्र में अधोसंरचना विकास को गति देने के क्रम में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े द्वारा भटगांव विधानसभा क्षेत्र में किसानों से जुड़े विषयों को प्राथमिकता से आगे बढ़ाने के प्रयासों का यह एक और परिणाम है। इससे धान उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था मजबूत होने के साथ किसानों को सुविधाजनक उपार्जन व्यवस्था का लाभ मिलेगा।

उपमुख्यमंत्री शर्मा ने जिला पंचायत प्रतिनिधियों से वीसी द्वारा की वीबी-जीरामजी के प्रभावी क्रियान्वयन पर की चर्चा

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00 375 अनुमेय कार्यों में से स्थानीय आवश्यकता के अनुसार कार्यों का करें चयन
रायपुर। उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने जिला पंचायत प्रतिनिधियों से वीसी द्वारा की वीबी-जीरामजी के प्रभावी क्रियान्वयन पर की चर्चाविकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  विजय शर्मा ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के जिला पंचायत अध्यक्षों, उपाध्यक्षों एवं सदस्यों से संवाद किया। बैठक में योजनांतर्गत जिलों में स्वीकृत कार्यों, प्रगति तथा योजना के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने जिला पंचायत प्रतिनिधियों से बारी-बारी संवाद करते हुए योजना के क्रियान्वयन की जानकारी ली तथा उनके सुझाव और जमीनी स्तर पर आ रही कठिनाइयों को जाना। उन्होंने सभी को वीबी-जीरामजी के अंतर्गत अब 375 प्रकार के अनुमय कार्यों में से स्थानीय आवश्यकता के अनुसार कार्यों का चयन एवं स्वीकृति के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों में पर्याप्त संख्या में कार्य स्वीकृत किए गए है, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप ग्राम सभा के माध्यम से नए कार्य भी लिए जा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि योजना में मजदूरी एवं सामग्री का 60रू40 अनुपात बनाए रखते हुए तथा जल संरक्षण से संबंधित कम से कम 30 प्रतिशत कार्यों को प्राथमिकता देते हुए ग्राम सभाएं आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कार्य स्वीकृत कर सकती हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से योजना का लाभ ग्रामीणों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कार्यों का चयन करने पर जोर दिया।
बैठक में अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ऋचा शर्मा ने पंचायतों में स्वीकृत कार्यों के गुणवत्तापूर्ण निर्माण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किए जाएंगे, जिससे निर्माण कार्यों की प्रभावी निगरानी की जा सकेगी।
आयुक्त, विकसित भारतदृजीरामजी  तारन प्रकाश सिन्हा ने जिला पंचायत सदस्यों के योजना के प्रभावी क्रियान्वयन तथा तकनीकी समस्याओं से संबंधित प्रश्नों का समाधान किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विशेष प्रयासों तथा किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खेत सड़क और धरसा को भी अनुमय कार्यों में शामिल किया गया है। प्रदेश में बालिका शौचालय, मुक्तिधाम शेड तथा डिफंक्ट बोरवेल रिचार्ज जैसे कार्यों को प्राथमिकता से लिया जा रहा है। ग्राम पंचायतें अपनी स्थानीय आवश्यकता के अनुसार इन कार्यों का चयन कर सकती हैं। सिन्हा ने बताया कि विभिन्न योजनाओं के अभिसरण (कन्वर्जेंस) से संबंधित भारत सरकार का नोटिफिकेशन जल्द जारी होने की प्रक्रिया में है। वहीं मनरेगा के शेष लंबित भुगतान के संबंध में भारत सरकार को पत्र प्रेषित किया गया है।
वीबी-जीरामजी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मानव संसाधन को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। प्रथम चरण में 175 पदों पर भर्ती की स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें कार्यक्रम अधिकारी, कंप्यूटर प्रोग्रामर एवं लेखापाल के पद शामिल हैं तथा भर्ती प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। इसके अतिरिक्त बस्तर, बीजापुर एवं नारायणपुर जिलों में 63 रोजगार सहायक पदों पर भर्ती की अनुमति भी प्रदान की गई है।
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्षों, उपाध्यक्षों एवं सदस्यों ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपने सुझाव साझा किए तथा मैदानी स्तर पर आ रही विभिन्न कठिनाइयों से अधिकारियों को अवगत कराया। बैठक में पंचायत प्रतिनिधियों से प्राप्त सुझावों एवं समस्याओं को आवश्यक कार्रवाई हेतु संकलित किया गया है।

सोना-चांदी के बाजार में आज हलचल कम, निवेशकों की नजर आगे की दिशा पर

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 मुंबई :  कमोडिटी बाजार में आज सोने और चांदी की शुरुआत सीमित दायरे में हुई. शुरुआती कारोबार में दोनों कीमती धातुओं में बहुत बड़ा उतार चढाव देखने को नहीं मिला. एमसीएक्स पर सोने का 5 अक्टूबर 2026 का वायदा अनुबंध पिछले कारोबारी सत्र के 1,53,094 रुपये प्रति 10 ग्राम के बंद भाव की तुलना में 1,53,497 रुपये पर खुला.सुबह करीब 10 बजे सोना 36 रुपये यानी 0.02 फीसदी की मामूली कमजोरी के साथ 1,53,058 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था. शुरुआती कारोबार के दौरान इसका निचला स्तर 1,53,005 रुपये और ऊपरी स्तर 1,53,497 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा.

चांदी में हल्की तेजी, 2.40 लाख रुपये के स्तर के आसपास कारोबार

चांदी के कारोबार में सोने के मुकाबले थोड़ा बेहतर रुख नजर आया. एमसीएक्स पर 4 दिसंबर 2026 की चांदी का वायदा अनुबंध 2,39,317 रुपये प्रति किलो के पिछले बंद भाव से बढ़कर 2,40,529 रुपये प्रति किलो पर खुला.सुबह के कारोबार में चांदी 238 रुपये यानी 0.10 फीसदी की बढ़त के साथ 2,39,555 रुपये प्रति किलो पर थी. कारोबार के दौरान चांदी ने 2,39,400 रुपये का निचला स्तर और 2,40,529 रुपये प्रति किलो का ऊपरी स्तर दर्ज किया.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की चाल अलग अलग

विदेशी बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं में एक जैसा रुझान नहीं रहा. कॉमेक्स पर सोना 0.23 फीसदी की गिरावट के साथ 4,347 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था. दूसरी ओर चांदी में 0.15 फीसदी की मजबूती दर्ज की गई और यह करीब 66 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई.

डॉलर मजबूत होने से सोने पर दबाव, कच्चे तेल से मिल रहा सहारा

बाजार जानकारों के अनुसार डॉलर इंडेक्स के 100 के स्तर से ऊपर जाने का असर सोने की कीमतों पर दिखाई दे रहा है. डॉलर में मजबूती के बीच निवेशकों की ओर से कुछ मुनाफावसूली देखने को मिल रही है, जिससे सोने की तेजी पर फिलहाल दबाव बना हुआ है.हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी सोने के लिए सकारात्मक कारक मानी जा रही है. तकनीकी स्तर पर 4,250 डॉलर प्रति औंस को सोने के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है. यानी इस स्तर के आसपास कीमत को सहारा मिलने की संभावना पर बाजार की नजर बनी हुई है.

अमेरिकी आंकड़ों की कमी से सीमित दायरे में रह सकता है सोना

इस सप्ताह अमेरिका से कोई बड़ा आर्थिक आंकड़ा जारी होने की उम्मीद नहीं है. ऐसे माहौल में सोने की कीमतों में बहुत बड़ी दिशा बनने के बजाय सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल सकता है. हालांकि वैश्विक बाजार की गतिविधियों और डॉलर की चाल के कारण बीच बीच में उतार चढाव बना रह सकता है.

कहां तक जा सकता है सोने का भाव

बाजार विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक कॉमेक्स पर सोने के लिए 4,250 से 4,450 डॉलर प्रति औंस का दायरा महत्वपूर्ण रह सकता है. वहीं घरेलू बाजार में एमसीएक्स पर सोने की कीमत 1,51,000 से 1,56,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच रहने की संभावना जताई गई है.इस लिहाज से आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर डॉलर इंडेक्स, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर बनी रहेगी.

पेट्रोल-डीजल के दाम आज भी स्थिर, जानिए दिल्ली से लेकर मुंबई तक आपके शहर में कितना है रेट

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 पेट्रोल-डीजल : कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी उतार चढाव के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं हुआ है. अलग अलग शहरों में ईंधन के दाम स्थानीय टैक्स और अन्य शुल्क के कारण अलग बने हुए हैं. दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है.मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.31 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.97 रुपये प्रति लीटर है. देश के प्रमुख महानगरों की तुलना करें तो दिल्ली में पेट्रोल और डीजल दोनों अपेक्षाकृत कम कीमत पर मिल रहे हैं.

जानिए प्रमुख शहरों में आज पेट्रोल और डीजल के दाम

शहरपेट्रोल रुपये प्रति लीटरडीजल रुपये प्रति लीटर
दिल्ली102.1295.20
मुंबई111.3197.97
फरीदाबाद103.2896.10
चेन्नई107.7899.56
लखनऊ101.8695.36
पटना113.3599.36
नासिक112.4698.20
भोपाल115.41100.47
प्रयागराज101.8295.05

रूसी तेल की खरीद में आई कमी, मिडिल ईस्ट से बढ़ी सप्लाई

भारत के कच्चे तेल आयात के स्रोतों में भी हाल के दिनों में बदलाव देखने को मिला है. अगस्त में रूस से भारत आने वाले कच्चे तेल की मात्रा जुलाई की तुलना में 16.5 फीसदी घटकर करीब 21 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई.इसके उलट मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की सप्लाई में बढ़ोतरी हुई है. इसका एक प्रमुख कारण संयुक्त अरब अमीरात की सरकारी तेल कंपनी ADNOC की ओर से होर्मुज स्ट्रेट के बाहर स्थित फुजैराह और सोहर जैसे टर्मिनलों से कच्चे तेल की आपूर्ति शुरू करना बताया गया है.

अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच भारतीय रिफाइनरियों की रणनीति में बदलाव

रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारतीय रिफाइनरियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक जोखिम बढ़ा है. अमेरिका में रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर हाल में सख्त कानूनी प्रावधान सामने आए हैं. इनके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को दिया गया है.भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी रहने के बीच भारतीय रिफाइनरियां अपने आयात स्रोतों में संतुलन बनाने पर जोर दे रही हैं. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक रूस से तेल खरीद पर निर्भरता को धीरे धीरे कम करके करीब 20 से 30 फीसदी के दायरे में लाने की कोशिश की जा रही है.

आम लोगों के लिए क्यों अहम है कच्चे तेल के आयात में बदलाव

भारत अपनी घरेलू जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, आयात के स्रोत, रुपये की विनिमय दर और सरकार के टैक्स जैसे कई कारक घरेलू ईंधन कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं. फिलहाल देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं.

पंचांग: बुधवार को प्रथम पूज्यनीय भगवान गणेश की करें आराधना, मिलेगा फल

 पंचांग : आज 23 सितंबर, 2026 बुधवार, के दिन भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि है. भगवान विष्णु के द्वारा इस तिथि का नियंत्रण होता है. नई योजना बनाने और रणनीति विकसित करने, धन दान करने और उपवास करने के लिए अच्छा दिन माना जाता है.

23 सितंबर का पंचांग :

  • विक्रम संवत : 2083
  • मास : भाद्रपद
  • पक्ष : शुकल पक्ष द्वादशी
  • दिन : बुधवार
  • तिथि : शुकल पक्ष द्वादशी
  • योग : सुकर्म
  • नक्षत्र : श्रवण
  • करण : बव
  • चंद्र राशि : मकर
  • सूर्य राशि : कन्या
  • सूर्योदय : 06:09:00 AM
  • सूर्यास्त : 06:17:00 PM
  • चंद्रोदय : 04:26 PM
  • चंद्रास्त : 03:35 AM, सितम्बर 24
  • राहुकाल : 12:13 से 13:44
  • यमगंड : 07:40 से 09:11

आज का नक्षत्र
आज के दिन चंद्रमा मकर राशि और श्रवण नक्षत्र में रहेगा. यह नक्षत्र मकर राशि में 10 डिग्री से लेकर 23:20 तक फैला हुआ है. इसके देवता हरि है और इस नक्षत्र पर चंद्रमा का शासन है. यह गतिशील तारा है, जिसमें यात्रा करने, वाहन चलाने, बागवानी करने, जुलूस में जाने, दोस्तों से मिलने, खरीदारी करने और अस्थायी प्रकृति केेे किसी भी तरह के कार्य किए जा सकते हैं.

आज के दिन का वर्जित समय
आज के दिन 12:13 से 13:44 बजे तक राहुकाल रहेगा. ऐसे में कोई शुभ कार्य करना हो, तो इस अवधि से परहेज करना ही अच्छा रहेगा. इसी तरह यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम से भी परहेज करना चाहिए.