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Thursday, October 29, 2026
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APK फाइल खोलते ही विधायक का WhatsApp हुआ हैक, संपर्कों से मांगे गए 76 हजार रुपये…पुलिस ने शुरू की जांच

 छत्तीसगढ़ :  कोरबा जिले से मोबाइल साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है। पाली तानाखार विधानसभा क्षेत्र के विधायक और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तुलेश्वर मरकाम का मोबाइल एक APK फाइल खोलने के बाद हैक हो गया। मोबाइल पर नियंत्रण हासिल करने के बाद साइबर ठगों ने उनके WhatsApp अकाउंट का इस्तेमाल कर परिचित लोगों से पैसों की मांग शुरू कर दी।हैकर ने विधायक के संपर्क में मौजूद लोगों को मैसेज भेजकर 76 हजार रुपये मांगे। मैसेज में यह बताया गया कि UPI काम नहीं कर रहा है और तत्काल पैसों की जरूरत है। कुछ लोगों को शक होने पर उन्होंने सीधे विधायक से संपर्क किया, जिसके बाद साइबर ठगी की पूरी जानकारी सामने आई।

APK फाइल खोलने के बाद हुआ मोबाइल पर कब्जा

जानकारी के अनुसार विधायक तुलेश्वर मरकाम के मोबाइल पर एक APK फाइल भेजी गई थी। विधायक ने जैसे ही उस फाइल को खोला, उसके बाद मोबाइल की सुरक्षा से जुड़ी समस्या सामने आई। कुछ समय बाद उनके WhatsApp अकाउंट का गलत इस्तेमाल शुरू हो गया।हैकर ने विधायक के WhatsApp संपर्कों को संदेश भेजकर खुद को मुश्किल में बताया और पैसों की मदद मांगने लगा। संदेश इस तरह तैयार किया गया था कि सामने वाले को लगे कि विधायक को ही तत्काल आर्थिक मदद की जरूरत है।

UPI काम नहीं करने का बहाना बनाकर मांगी रकम

हैकर ने लोगों को भेजे गए संदेश में बताया कि उसका UPI काम नहीं कर रहा है। इसी बहाने उसने तत्काल पैसे भेजने का अनुरोध किया। कुछ संपर्कों ने जब संदेश को लेकर विधायक से फोन पर बात की, तब उन्हें पता चला कि विधायक ने ऐसी कोई रकम नहीं मांगी है।इसके बाद विधायक के मोबाइल और WhatsApp अकाउंट के साथ हुई साइबर सेंध की जानकारी सामने आई।

पाली थाने में दर्ज कराई गई शिकायत

मामले की जानकारी मिलने के बाद विधायक तुलेश्वर मरकाम ने पाली थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल की सहायता से आरोपी तक पहुंचने और उसके डिजिटल सुरागों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

पुलिस ने APK फाइल को लेकर किया अलर्ट

पुलिस ने लोगों से अनजान स्रोत से आने वाली APK फाइल को डाउनलोड या ओपन नहीं करने की अपील की है। मोबाइल में ऐसी फाइल इंस्टॉल होने के बाद साइबर अपराधी डिवाइस या उसमें मौजूद अकाउंट तक पहुंच बनाने का प्रयास कर सकते है।विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार किसी भी अनजान व्यक्ति से मिली APK फाइल को खोलने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है। खास तौर पर यदि फाइल किसी परिचित के नाम से आए और उसके साथ तत्काल कार्रवाई या पैसे से जुड़ा संदेश हो, तो सीधे संबंधित व्यक्ति से फोन पर पुष्टि करना सुरक्षित तरीका है।

पुलिस मुठभेड़ मामले में महिला आरोपी को कोर्ट से राहत, पहचान और बरामदगी के सबूत नहीं हुए साबित

 बिलासपुर: महिला आरोपी मांगो उर्फ सिंधु नुरेटी, निवासी बारनागुडा, नारायणपुर को माओवादी गतिविधियों से जुड़े मामले में अदालत से राहत मिली है. पुलिस पर हमला, अवैध हथियार रखने और प्रतिबंधित माओवादी संगठन से जुड़ी गतिविधियों के आरोपों की सुनवाई के बाद बिलासपुर की एनआईए विशेष अदालत ने उसे बरी कर दिया.न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी ने मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसे ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका, जिनसे यह साबित हो सके कि मुठभेड़ के दौरान पुलिस टीम पर गोली चलाने वाले माओवादियों के समूह में मांगो नुरेटी भी शामिल थी.अदालत के सामने आरोपी की पहचान, ओडिशा पुलिस द्वारा उसे छत्तीसगढ़ पुलिस को सौंपे जाने, चोट और हथियार बरामदगी से संबंधित साक्ष्यों में भी कमियां सामने आईं.

12 अप्रैल 2024 को एकावारी के जंगल में हुई थी मुठभेड़

मामला 12 अप्रैल 2024 का है. अभियोजन के अनुसार धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र में डीआरजी, गरियाबंद डीआरजी और एसटीएफ की संयुक्त टीम माओवादी विरोधी अभियान के लिए एकावारी के जंगल और पहाड़ी इलाके में गई थी.शाम करीब 4.30 से 5.30 बजे के बीच पुलिस टीम पर कथित तौर पर 20 से 25 माओवादियों ने घात लगाकर फायरिंग शुरू कर दी. सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई के बाद माओवादी जंगल और अंधेरे का फायदा उठाकर वहां से निकल गए.मौके की तलाशी के दौरान बीजीएल सेल, सोलर प्लेट, बिजली के तार, माओवादी वर्दी, साहित्य और दवाइयां मिलने का दावा अभियोजन पक्ष ने किया था. इसी दौरान एसटीएफ आरक्षक सोढ़ी हिंगा के घायल होने की बात भी सामने आई थी.

पुलिस ने घायल अवस्था में पकड़े जाने की बताई थी कहानी

पुलिस के अनुसार मुठभेड़ के बाद मांगो नुरेटी के पैर में गोली लगी थी और वह घायल अवस्था में एकावारी गांव में अर्जुन लाल मरकाम के घर में छिपी हुई थी.पुलिस के मुताबिक 20 अप्रैल 2024 को ओडिशा पुलिस के डीवीएफ और एसओजी दल ने उसे वहां से पकड़ा और बाद में छत्तीसगढ़ पुलिस को सौंप दिया गया.हालांकि अदालत में इस घटनाक्रम को साबित करने के लिए पेश किए गए साक्ष्य पर्याप्त मजबूत नहीं पाए गए. आरोपी की कथित मौजूदगी और मुठभेड़ के बीच सीधा संबंध स्थापित करने में अभियोजन पक्ष को कठिनाई का सामना करना पड़ा.

मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों ने आरोपी की पहचान नहीं की

मामले की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण बिंदु यह रहा कि मुठभेड़ में शामिल डीआरजी और एसटीएफ के गवाहों में से किसी ने अदालत के सामने यह नहीं कहा कि उन्होंने मौके पर मांगो नुरेटी को देखा था.गवाहों की ओर से मुठभेड़ स्थल पर आरोपी की मौजूदगी या उसकी पहचान की स्पष्ट पुष्टि नहीं की गई. ऐसे में अभियोजन के उस दावे को मजबूत आधार नहीं मिल सका, जिसमें मांगो नुरेटी को पुलिस टीम पर फायरिंग करने वाले समूह से जोड़ा गया था.

साक्ष्यों की कड़ियां नहीं जुड़ने से आरोपी को मिली राहत

अदालत के सामने आरोपी की पहचान से लेकर कथित गिरफ्तारी, चोट और हथियार बरामदगी तक कई महत्वपूर्ण कड़ियां स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं हो सकीं. मुठभेड़ स्थल पर आरोपी की मौजूदगी साबित करने के लिए भी प्रत्यक्ष साक्ष्य सामने नहीं आया.इन्हीं साक्ष्यगत कमियों के आधार पर एनआईए विशेष अदालत ने मांगो उर्फ सिंधु नुरेटी को उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया.

छत्तीसगढ़ में बारिश का दौर फिर होगा तेज, कई जिलों में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट

 रायपुर: छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलने लगा है. राजधानी रायपुर में मंगलवार रात मौसम में बदलाव तो हुआ, लेकिन उमस और गर्मी से लोगों को पूरी राहत नहीं मिल सकी. दूसरी ओर दक्षिण छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियां बनी हुई हैं. जगदलपुर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश के असर से तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है.मौसम विभाग ने बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है. कुछ इलाकों में भारी से अत्यंत भारी बारिश के साथ तेज हवाएं और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी की गई है.

बंगाल की खाड़ी का सिस्टम छत्तीसगढ़ में बढ़ाएगा बारिश की गतिविधियां

बंगाल की खाड़ी में बना डिप्रेशन लगातार पश्चिम की ओर बढ़ रहा है. मौसम विभाग के अनुसार 22 सितंबर को सुबह 11.30 बजे यह सिस्टम पश्चिम मध्य और उससे लगे उत्तर पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 17.9 डिग्री उत्तर अक्षांश और 85.8 डिग्री पूर्व देशांतर के आसपास स्थित था.पिछले छह घंटों के दौरान यह करीब 8 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा. इसके पश्चिम उत्तर पश्चिम दिशा में बढ़ने और 23 सितंबर की रात तक विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच उत्तरी आंध्र प्रदेश तथा दक्षिणी ओडिशा तट को पार करने की संभावना जताई गई है.इस मौसम प्रणाली का प्रभाव छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल सकता है. दक्षिणी हिस्सों में आज और कल कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है.

50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं

बुधवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. वहीं कुछ इलाकों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का दौर भी देखने को मिल सकता है.बारिश के साथ गरज चमक और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है. मौसम विभाग ने लोगों को आकाशीय बिजली के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है.

पिछले 24 घंटे में कहां हुई सबसे ज्यादा बारिश

पिछले 24 घंटों के दौरान छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई. राजनांदगांव में प्रदेश का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 33.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जबकि पेण्ड्रा रोड में न्यूनतम तापमान 21.2 डिग्री सेल्सियस रहा.बारिश के आंकड़ों की बात करें तो कवर्धा में 4 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई. राजपुर और कोटा में 3 सेंटीमीटर, जबकि चांदो, भैयाथान, मरवाही और दर्री में 2 सेंटीमीटर बारिश हुई. जांजगीर, लोरमी, कोरबा और अजगरबहार में 1 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई.

रायपुर में बादल छाए रहेंगे, गरज चमक के साथ हो सकती है बौछार

राजधानी रायपुर में 23 सितंबर को मौसम आंशिक रूप से बादलयुक्त रहने का अनुमान है. शहर में एक से दो बार बारिश या गरज चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं.रायपुर में अधिकतम तापमान करीब 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है. बारिश होने के बावजूद उमस से पूरी तरह राहत मिलने को लेकर स्थिति मौसम की गतिविधियों पर निर्भर रहेगी.

इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट, कई इलाकों के लिए यलो अलर्ट जारी

मौसम विभाग ने दक्षिण छत्तीसगढ़ के कई जिलों में तेज हवा, बारिश और आकाशीय बिजली को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. सुकमा, बीजापुर, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा, बस्तर और कोंडागांव में मौसम ज्यादा सक्रिय रहने की चेतावनी है.इसके अलावा सुकमा, बीजापुर, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, उत्तर बस्तर कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर, बलौदा बाजार, जांजगीर चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, दुर्ग और बेमेतरा के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है.मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए बारिश और आकाशीय बिजली के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचना और तेज हवा के दौरान पेड़ तथा कमजोर ढांचों से दूरी बनाए रखना जरूरी होगा.

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी से पहले सरकार ने कसी कमर, 362 नए केंद्रों की तैयारियों पर खास नजर

 रायपुर: छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की तैयारियां तेज कर दी गई हैं. राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित के प्राधिकृत अधिकारी शशिकांत द्विवेदी की अध्यक्षता में जिला विपणन अधिकारियों की समीक्षा बैठक हुई. इसमें आगामी धान खरीदी सत्र को व्यवस्थित बनाने के लिए जरूरी तैयारियों और नए उपार्जन केंद्रों की व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई.अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी तैयारियां तय समय सीमा के भीतर पूरी कर ली जाएं, ताकि खरीदी शुरू होने के बाद किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.

पिछली खरीदी का हिसाब देखा गया, लंबित मामलों पर भी मांगी जानकारी

समीक्षा बैठक में पिछले वर्षों की धान खरीदी से जुड़े आंकड़ों और व्यवस्थाओं की जिलेवार समीक्षा की गई. इसमें खरीदे गए धान के निराकरण, चावल जमा करने की स्थिति और सूखत से संबंधित मामलों पर चर्चा हुई.खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में खरीदे गए धान के निपटारे के साथ एफसीआई और नान में चावल जमा करने की स्थिति की भी जानकारी अधिकारियों से ली गई. इसके अलावा खरीदी व्यवस्था से जुड़े लंबित मामलों को जल्द निपटाने पर भी जोर दिया गया.

362 नए धान खरीदी केंद्रों के लिए जुटाई जा रही जरूरी सुविधाएं

आगामी खरीदी सीजन में नए धान उपार्जन केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा रही है. समीक्षा बैठक में 362 नए केंद्रों की तैयारियों को प्रमुखता से लिया गया. इन केंद्रों पर किसानों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ संग्रहण व्यवस्था की क्षमता और तैयारी की समीक्षा की गई.बारदानों की उपलब्धता, धान के परिवहन, संग्रहण और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े इंतजामों की भी जानकारी ली गई. अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि खरीदी शुरू होने से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह तैयार रहें.

किसानों को केंद्रों पर नहीं होनी चाहिए परेशानी

धान खरीदी व्यवस्था की तैयारियों में किसानों की सुविधा को प्रमुखता दी जा रही है. अधिकारियों से कहा गया है कि उपार्जन केंद्रों पर जरूरी संसाधनों की उपलब्धता पहले से सुनिश्चित की जाए.शशिकांत द्विवेदी ने निर्देश दिए कि बारदाने, संग्रहण, परिवहन और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं में किसी तरह की कमी नहीं रहनी चाहिए. खरीदी प्रक्रिया के दौरान किसानों को अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए जिला स्तर पर लगातार निगरानी रखने पर भी जोर दिया गया.

समय पर पूरी होंगी प्रशासनिक और वित्तीय तैयारियां

खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की धान खरीदी को लेकर प्रशासनिक और वित्तीय तैयारियों को भी समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं. नए केंद्रों के जरिए खरीदी व्यवस्था को अधिक सुचारू बनाने की तैयारी है.सरकार और संबंधित विभागों का फोकस खरीदी प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के साथ किसानों के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने पर है. आने वाले दिनों में नए धान उपार्जन केंद्रों की तैयारियों और उपलब्ध संसाधनों की समीक्षा का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है.

रायपुर में सर्व समाज एक मंच पर: गुजराती स्कूल कार्यक्रम की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

रायपुर – 23 सितंबर 2026

राजधानी रायपुर में सामाजिक सौहार्द और कौमी एकता को बनाए रखने के लिए विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर प्रशासन से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने डीसीपी कार्यालय पहुंचकर देवेंद्र नगर स्थित गुजराती मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

प्रतिनिधिमंडल में बौद्ध समाज, प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज, क्रिश्चियन समाज, सर्व ब्राह्मण समाज और हुसैनी सेना की महिला विंग जैनब तंजीम के पदाधिकारी शामिल थे।

जैनब तंजीम द्वारा पुलिस कमिश्नर को दिए गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि स्कूल के कार्यक्रम में वक्ता काजल हिंदुस्तानी द्वारा इस्लाम धर्म और मुस्लिम महिलाओं के हिजाब को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ है। पत्र में स्कूल प्रबंधन और आयोजकों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

वहीं, प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज रायपुर शहर के जिलाध्यक्ष मनोज बंजारे ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र (दिनांक 22.09.2026) में कहा है कि विद्यालय संविधान के अनुसार धर्मनिरपेक्ष वातावरण वाले होने चाहिए। उन्होंने मांग की है :
प्रदेश के सभी शासकीय-अशासकीय विद्यालयों में धार्मिक प्रचार पर रोक हेतु शिक्षा विभाग को निर्देश दिए जाएं
विद्यालय परिसर में केवल राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक मूल्यों और सर्वधर्म समभाव बढ़ाने वाले कार्यक्रम हों
रायपुर की घटना की निष्पक्ष जांच कर विद्यालय प्रबंधन पर नियमानुसार कार्रवाई हो

प्रतिनिधियों ने कहा कि स्कूल के बच्चे छत्तीसगढ़ और देश का भविष्य हैं, उन्हें संविधान के मूल्यों के साथ आगे बढ़ना चाहिए। सभी समाजों ने प्रदेश में शांति, भाईचारा और एकता बनाए रखने का संकल्प दोहराया।

नोट: समाचार में लगाए गए आरोप शिकायत पत्रों पर आधारित हैं, प्रशासन/स्कूल प्रबंधन का पक्ष आने पर अपडेट किया जाएगा।

मुठभेड़ मामले में महिला आरोपी बरी, अदालत ने कहा सबूतों से नहीं जुड़ पाई भूमिका

 बिलासपुर: महिला आरोपी मांगो उर्फ सिंधु नुरेटी, निवासी बारनागुडा, नारायणपुर को माओवादी गतिविधियों से जुड़े एक मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है. बिलासपुर की एनआईए विशेष अदालत ने पुलिस पर हमले, अवैध हथियार रखने और प्रतिबंधित संगठन से जुड़ी गतिविधियों के आरोपों से उसे बरी कर दिया है.अदालत में मामले की सुनवाई न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी ने की. फैसला सुनाते हुए अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त और ठोस साक्ष्यों के आधार पर यह साबित नहीं कर सका कि संबंधित मुठभेड़ के दौरान पुलिस टीम पर गोली चलाने वाले समूह में मांगो नुरेटी भी शामिल थी.

12 अप्रैल 2024 को जंगल में हुआ था पुलिस और माओवादियों के बीच सामना

मामला 12 अप्रैल 2024 का है. अभियोजन के मुताबिक धमतरी जिले के नगरी इलाके में डीआरजी, गरियाबंद डीआरजी और एसटीएफ की संयुक्त टीम माओवादी विरोधी अभियान के तहत एकावारी के जंगल और पहाड़ी क्षेत्र में पहुंची थी.बताया गया कि शाम करीब 4.30 से 5.30 बजे के बीच जंगल में मौजूद करीब 20 से 25 माओवादियों ने पुलिस टीम पर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी. सुरक्षा बलों की ओर से जवाबी कार्रवाई के बाद माओवादी कथित तौर पर जंगल और अंधेरे का फायदा उठाकर वहां से निकल गए.

मुठभेड़ स्थल से कई सामान मिलने का किया गया था दावा

अभियोजन की ओर से अदालत में बताया गया था कि घटनास्थल की तलाशी के दौरान बीजीएल सेल, सोलर प्लेट, बिजली के तार, माओवादी वर्दी, साहित्य और दवाइयों समेत कई सामान बरामद किए गए थे.इसी मुठभेड़ के दौरान एसटीएफ के आरक्षक सोढ़ी हिंगा के घायल होने की बात भी अभियोजन पक्ष ने रखी थी. मामले में इन घटनाओं और बरामदगी को आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों से जोड़ने की कोशिश की गई.

पहचान और बरामदगी से जुड़े साक्ष्यों पर अदालत ने उठाए सवाल

अदालत के सामने आरोपी की पहचान को लेकर प्रस्तुत साक्ष्यों में पर्याप्त स्पष्टता नहीं पाई गई. इसके अलावा ओडिशा पुलिस से आरोपी की सुपुर्दगी, चोट और हथियार बरामदगी से संबंधित साक्ष्यों में भी कमियां और विरोधाभास सामने आए.अभियोजन पक्ष घटनास्थल से मिले सामान और आरोपी के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं कर सका. इसी तरह यह भी निर्णायक रूप से साबित नहीं हो पाया कि मुठभेड़ के दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग करने वालों में मांगो नुरेटी मौजूद थी.

ठोस प्रमाण नहीं मिलने पर सभी आरोपों से मिली राहत

अदालत ने माना कि केवल परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की मुठभेड़ में भूमिका साबित नहीं की जा सकती. अभियोजन पक्ष आरोपी कीमौजूदगी, पहचान और कथित गतिविधियों को पर्याप्त प्रमाणों के साथ जोड़ने में सफल नहीं रहा.इन्हीं साक्ष्यगत कमियों के आधार पर एनआईए विशेष अदालत ने मांगो उर्फ सिंधु नुरेटी को उसके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से बरी कर दिया.

व्यापम के प्रश्नपत्र में एक शब्द पर छिडा विवाद, सेन समाज ने उठाई कार्रवाई की मांग

 रायपुर: छत्तीसगढ़ में व्यापम की 20 सितंबर को आयोजित परीक्षा के प्रश्नपत्र को लेकर विवाद सामने आया है. परीक्षा में इस्तेमाल की गई एक लोकोक्ति में ‘नाउ’ शब्द को लेकर सेन समाज ने आपत्ति जताई है. समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि इस शब्द का प्रयोग आपत्तिजनक संदर्भ में किया गया, जिससे समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं.

कई जिलों में सामने आया विरोध, प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन

मामला सामने आने के बाद सेन समाज के लोगों ने प्रदेश के अलग अलग जिलों में विरोध दर्ज कराया है. समाज के प्रतिनिधियों ने प्रश्नपत्र में इस्तेमाल किए गए शब्द को अपनी जाति और पारंपरिक पेशे से जोड़कर अपमानजनक बताया है.रायपुर में सेन समाज के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा. प्रतिनिधियों ने पूरे मामले में जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है.

परीक्षा के प्रश्नपत्र में ऐसे शब्दों के इस्तेमाल पर उठे सवाल

सेन समाज का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र में इस्तेमाल होने वाली भाषा को लेकर विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए. प्रतिनिधियों के मुताबिक, परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंच पर किसी समुदाय की सामाजिक पहचान या पारंपरिक पेशे से जुड़े शब्द का ऐसा संदर्भ नहीं होना चाहिए, जिससे समाज के लोगों को अपमान महसूस हो.समाज ने संबंधित प्रश्न को हटाने या वापस लेने की मांग के साथ यह भी कहा है कि भविष्य में प्रश्न तैयार करते समय इस तरह की स्थिति दोबारा पैदा नहीं होनी चाहिए.

क्या है पूरा विवाद, क्यों जताई गई आपत्ति

विवाद की शुरुआत 20 सितंबर को आयोजित व्यापम परीक्षा के एक प्रश्न से हुई. प्रश्न में एक लोकोक्ति के संदर्भ में ‘नाउ’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था. सेन समाज ने इसी शब्द और उसके संदर्भ को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है.समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस प्रयोग से समुदाय की सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है. उन्होंने संबंधित प्रश्न की जांच कराने के साथ प्रश्न तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच करने की मांग की है.

अब जांच और कार्रवाई पर टिकी नजर

सेन समाज की ओर से प्रशासन के समक्ष शिकायत और ज्ञापन दिए जाने के बाद अब मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर है. समाज चाहता है कि पूरे विवाद की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि प्रश्नपत्र में संबंधित शब्द किस संदर्भ और प्रक्रिया के तहत शामिल किया गया था.

कब से शुरू हो रहा पितृ पक्ष..? जानें प्रतिपदा श्राद्ध की तिथि, मुहूर्त और सर्वपितृ अमावस्या

 Pitra Paksha 2026। हिंदू पंचांग में पितृ पक्ष का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह अवधि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समर्पित होती है। इस दौरान परिवार अपने दिवंगत पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और अन्य धार्मिक कर्म करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से किए गए इन कर्मों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक ग्रंथ निर्णय सिंधु के अनुसार, पितृ पक्ष की शुरुआत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से मानी जाती है और इसका समापन अमावस्या तिथि पर होता है। तिथियों की स्थिति के आधार पर इसकी अवधि 15 या 16 दिन हो सकती है।

27 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 26 सितंबर की रात 10:18 बजे शुरू होगी और 27 सितंबर की रात 8:58 बजे तक रहेगी। 26 सितंबर को दिनभर भाद्रपद पूर्णिमा रहेगी। उदयातिथि के नियम के अनुसार आश्विन कृष्ण प्रतिपदा का श्राद्ध 27 सितंबर 2026 को किया जाएगा। इसी के साथ पितृ पक्ष की शुरुआत मानी जाएगी और अलग-अलग तिथियों के अनुसार पितरों का श्राद्ध किया जाएगा।

प्रतिपदा तिथि पर किन पितरों का श्राद्ध?

पितृ पक्ष की प्रतिपदा तिथि उन दिवंगत पितरों के लिए मानी जाती है, जिनका निधन किसी भी महीने की प्रतिपदा तिथि को हुआ हो। इस दिन उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और पंचबलि जैसे कर्म किए जाते हैं। श्राद्ध कर्म के लिए तिथि का सही निर्धारण करना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए परिवार अपने स्थानीय पंचांग और विद्वान आचार्य से मुहूर्त की पुष्टि कर सकते हैं।

श्राद्ध के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त

पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म के लिए दिन के विशेष समय को महत्वपूर्ण माना गया है। दिए गए पंचांग के अनुसार श्राद्ध के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
  • रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:36 बजे से 1:24 बजे तक

दोनों मुहूर्तों की कुल अवधि 1 घंटा 36 मिनट है।

10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या

पितृ पक्ष का अंतिम दिन आश्विन कृष्ण अमावस्या को होता है, जिसे सर्वपितृ अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन उन सभी पितरों के लिए श्राद्ध किया जाता है, जिनकी श्राद्ध तिथि ज्ञात न हो या जिनका किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं किया जा सका हो। इस वर्ष अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर की रात 9:35 बजे शुरू होगी और 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाएगी। इसी दिन पितृ पक्ष का समापन होगा।

पितृ पक्ष में क्या किया जाता है?

 पितृ पक्ष के दौरान परिवार अपने पूर्वजों को याद करते हुए विभिन्न धार्मिक कर्म करता है। इनमें तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान, पंचबलि और दान आदि प्रमुख माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में किए गए श्राद्ध कर्म से पितरों की तृप्ति होती है और उनका आशीर्वाद परिवार को प्राप्त होता है। पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी माना जाता है। इसी कारण हिंदू धर्म में इस पक्ष का विशेष महत्व बताया गया है।

चंपारण्य में 73.42 करोड़ के श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स को केंद्र की मंजूरी

00 राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा चंपारण्य, करीब 15 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का होगा विस्तार
00 चंपारण्य को राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम – अग्रवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रायपुर जिले के चंपारण्य में लगभग 73.42 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स परियोजना को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति ष्टस्रूष्ट ने स्वीकृति प्रदान की है। सीएसएमसी स्वदेश दर्शन 2.0 की केंद्रीय समिति है, जो मिशन निदेशालय की अनुशंसाओं के आधार पर परियोजनाओं की स्वीकृति पर विचार करती है। परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा किया जाएगा तथा इसके लिए 18 माह की प्रस्तावित कार्यान्वयन अवधि निर्धारित की गई है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने परियोजना की स्वीकृति पर कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में पर्यटन, विशेषकर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के विकास को नई गति मिल रही है। चंपारण्य छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली को बेहतर पर्यटक सुविधाओं के साथ राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी। हमारा प्रयास होगा कि श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली की गरिमा और धार्मिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखते हुए यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए उच्च गुणवत्ता की सुविधाएं विकसित हों। यह परियोजना चंपारण्य को देश के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों के बीच और अधिक प्रभावी रूप से स्थापित करने में सहायक होगी।

चंपारण्य में ₹73.42 करोड़ के श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स को केंद्र की मंजूरी


छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। चंपारण्य परियोजना की स्वीकृति छत्तीसगढ़ के आध्यात्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। परियोजना की स्वीकृति के लिए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।
महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य की जन्मस्थली चंपारण्य देशभर में वैष्णव श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य चंपारण्य को केवल तीर्थ यात्रा के एक पड़ाव तक सीमित न रखते हुए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, विरासत एवं अनुभव-आधारित पर्यटन के एक समग्र केंद्र के रूप में विकसित करना है। परियोजना के माध्यम से पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने, उनके ठहराव की अवधि बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस परियोजना में महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य से संबंधित आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स में म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर, कथा ग्राउंड, ओपन एयर थिएटर, वेलनेस एवं मेडिटेशन सुविधाएं, श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं डॉरमेटरी, मल्टीपर्पज हॉल, रेस्टोरेंट और वेंडर शॉप्स जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना में यज्ञ कुंड एवं जल कुंड का उन्नयन, तालाब विकास, दिव्य पाथवे एवं कवर्ड पाथवे, पार्किंग, साइनेज और लैंडस्केपिंग सहित अन्य पर्यटक सुविधाओं का भी विकास प्रस्तावित है। यह श्रद्धालुओं के साथ-साथ परिवारों, सांस्कृतिक पर्यटकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और वेलनेस पर्यटन से जुड़े पर्यटकों के लिए भी आकर्षक अनुभव होगा।
परियोजना की परिकल्पना इस प्रकार की गई है कि चंपारण्य आने वाले श्रद्धालुओं को महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य के जीवन, दर्शन और विरासत से परिचित होने का अवसर मिले। सामान्य पर्यटकों के लिए आधे से पूरे दिन तक के प्रवास तथा धार्मिक आयोजनों एवं वेलनेस गतिविधियों के दौरान अधिक अवधि तक ठहरने की संभावनाओं को भी ध्यान में रखा गया है। परियोजना की डीपीआर एवं कार्य-सीमा तैयार है और स्वीकृति के बाद निविदा प्रक्रिया प्रारंभ करने की तैयारी है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद चंपारण्य में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक, विरासत, शिक्षा और वेलनेस पर्यटन की गतिविधियों को भी विस्तार मिलेगा। इससे पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर सृजित करने की दिशा में भी मदद मिलेगी।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की पहल से भटगांव विधानसभा के 7 धान उपार्जन केंद्र होंगे सुविधा-संपन्न

00 69.58 लाख रुपए से पक्के फड़ एवं समतलीकरण कार्य को मिली स्वीकृति, किसानों को मिलेगी बेहतर उपार्जन सुविधा
रायपुर। किसानों को धान उपार्जन के दौरान बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भटगांव विधानसभा क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल की गई है। भटगांव विधायक एवं कैबिनेट मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से विधानसभा क्षेत्र के 7 धान उपार्जन केंद्रों में पक्के फड़ निर्माण एवं समतलीकरण कार्य के लिए 69.58 लाख रुपए की स्वीकृति मिली है। इससे इन केंद्रों में आधारभूत सुविधाएं मजबूत होंगी और किसानों को धान बेचने के दौरान अधिक व्यवस्थित एवं सुविधाजनक वातावरण मिलेगा।
स्वीकृत कार्यों में सूरजपुर विकासखंड के टमकी, सिरसी, करोटी बी, खोपो, बतरा, सांवारांवां एवं कुर्रीडीह स्थित धान उपार्जन केंद्र शामिल हैं। प्रत्येक केंद्र में 9.94 लाख रुपए की लागत से पक्के फड़ निर्माण एवं समतलीकरण का कार्य किया जाएगा।
धान उपार्जन केंद्रों में पक्के फड़ और समतलीकरण होने से उपार्जन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी। इससे धान की आवक, खरीदी और रख-रखाव के दौरान होने वाली व्यावहारिक परेशानियों को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही किसानों को उपार्जन केंद्रों पर बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में यह कार्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
किसानों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए क्षेत्र में अधोसंरचना विकास को गति देने के क्रम में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े द्वारा भटगांव विधानसभा क्षेत्र में किसानों से जुड़े विषयों को प्राथमिकता से आगे बढ़ाने के प्रयासों का यह एक और परिणाम है। इससे धान उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था मजबूत होने के साथ किसानों को सुविधाजनक उपार्जन व्यवस्था का लाभ मिलेगा।