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Friday, October 23, 2026
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छत्तीसगढ़ के सिरपुर को मिली बड़ी पहचान, UNESCO की सूची में शामिल होते ही विश्व धरोहर बनने की उम्मीद बढ़ी

 छत्तीसगढ़ :  ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि सामने आई है। महासमुंद जिले में स्थित प्राचीन ऐतिहासिक स्थल सिरपुर को UNESCO की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। इस फैसले से सिरपुर के भविष्य में विश्व धरोहर स्थल बनने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। इसे राज्य के इतिहास, संस्कृति और पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारत सरकार ने भेजा था प्रस्ताव

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत सरकार ने 28 सितंबर 2026 को सिरपुर को UNESCO की अस्थायी विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए प्रस्ताव भेजा था। इसके बाद 19 अक्टूबर को जिनेवा में हुई प्रक्रिया के तहत इसे सूची में शामिल किए जाने की घोषणा की गई।इस उपलब्धि से महासमुंद सहित पूरे छत्तीसगढ़ में उत्साह का माहौल है। अब सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की उम्मीद और बढ़ गई है।

प्राचीन दक्षिण कोसल की राजधानी रहा है सिरपुर

सिरपुर का इतिहास बेहद समृद्ध रहा है। प्राचीन काल में यह दक्षिण कोसल की राजधानी के रूप में महत्वपूर्ण स्थान रखता था। यहां हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मों से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरें एक साथ मौजूद हैं, जो इस क्षेत्र की धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती हैं।महानदी के तट पर बसे इस ऐतिहासिक क्षेत्र में प्राचीन मंदिर, बौद्ध मठ, स्तूप और जैन प्रतिमाएं मौजूद हैं। ये अवशेष उस दौर की कला, स्थापत्य और धार्मिक परंपराओं की झलक पेश करते हैं।

लक्ष्मण मंदिर से लेकर बौद्ध विहारों तक फैली विरासत

सिरपुर में पुरातात्विक उत्खनन के दौरान कई महत्वपूर्ण अवशेष सामने आए हैं। यहां का लक्ष्मण मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है। ईंटों से निर्मित यह मंदिर भारतीय प्राचीन स्थापत्य कला का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।इसके अलावा आनंदप्रभु कुटी विहार, गंधेश्वर महादेव मंदिर और स्वास्तिक विहार भी सिरपुर की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा हैं। यहां मिले पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि पांचवीं से आठवीं शताब्दी के बीच सिरपुर राजनीतिक, धार्मिक और व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा था।

अस्थायी सूची के बाद क्या है अगला कदम?

UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने की प्रक्रिया में अस्थायी सूची महत्वपूर्ण शुरुआती चरण है। इसके बाद संबंधित देश को स्थल के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक या प्राकृतिक महत्व के प्रमाणों के साथ विस्तृत नामांकन प्रस्ताव तैयार करना होता है। आगे मूल्यांकन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किसी स्थल को अंतिम विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जा सकता है।सिरपुर का अस्थायी सूची में पहुंचना इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब इसके स्थायी नामांकन के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से आगे की तैयारी किए जाने की उम्मीद है।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है फायदा

सिरपुर को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने से छत्तीसगढ़ में ऐतिहासिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इससे देश-विदेश के पर्यटकों की रुचि इस स्थल में बढ़ने, स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा होने और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।हालांकि, UNESCO की अस्थायी सूची में शामिल होना अंतिम विश्व धरोहर दर्जा मिलने के बराबर नहीं है। इसके बावजूद यह उपलब्धि सिरपुर की ऐतिहासिक महत्ता को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक अहम कदम है।

सत्य और धर्म की विजय का शाश्वत संदेश देता है विजयादशमी का पर्व : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 प्रभु श्रीराम से छत्तीसगढ़ का गहरा आत्मीय नाता, माता कौशल्या का मायका और भगवान श्रीराम का ननिहाल है छत्तीसगढ़

सत्य, न्याय और मानवता के पक्ष में खड़े रहना ही प्रभु श्रीराम के आदर्शों का वास्तविक अनुसरण : मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री ने रायपुर के ऐतिहासिक डब्ल्यूआरएस मैदान में किया रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध भारत ने दिखाई दृढ़ इच्छाशक्ति, छत्तीसगढ़ में माओवाद के विरुद्ध अभियान को मिली निर्णायक गति

श्रीरामलला दर्शन योजना से छत्तीसगढ़ के 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को मिला अयोध्या धाम में दर्शन का सौभाग्य

रायपुर :  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि विजयादशमी का पर्व केवल बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव नहीं, बल्कि सत्य, धर्म, न्याय और मानवता के मार्ग पर अडिग रहने का शाश्वत संदेश देने वाला महान सांस्कृतिक पर्व है। प्रभु श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि सत्य का मार्ग कितना भी कठिन और चुनौतियों से भरा क्यों न हो, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। जीवन में जब भी सही और गलत में से किसी एक पक्ष को चुनने का अवसर आए, हमें सदैव सत्य, न्याय और मानवता के पक्ष में खड़ा होना चाहिए, क्योंकि हम किसके साथ खड़े हैं, यही हमारे चरित्र और संस्कारों की वास्तविक पहचान है।

मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक डब्ल्यूआरएस मैदान में आयोजित विजयादशमी महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने हजारों लोगों की उपस्थिति और प्रभु श्रीराम के जयकारों के बीच धनुष-बाण से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल की कामना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विजयादशमी हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। यह पर्व हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ समाज में सद्भाव, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रायपुर का डब्ल्यूआरएस मैदान पांच दशकों से अधिक समय से विजयादशमी उत्सव की गौरवशाली परंपरा का साक्षी रहा है। प्रतिवर्ष यहां रावण दहन के माध्यम से अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश जन-जन तक पहुंचता है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना को जीवंत रखने और नई पीढ़ी को भारतीय जीवन मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने कहा कि विजयादशमी हमें यह स्मरण कराती है कि समाज और राष्ट्र की वास्तविक शक्ति सत्य, सदाचार, एकता और न्याय में निहित होती है। हमारी सांस्कृतिक परंपराओं में निहित यही मूल्य पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमें सही मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहे हैं।

प्रभु श्रीराम से छत्तीसगढ़ का गहरा और आत्मीय संबंध

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़वासियों के लिए विजयादशमी का पर्व विशेष महत्व रखता है, क्योंकि प्रभु श्रीराम का इस पावन धरती से अत्यंत गहरा और आत्मीय नाता है। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम ने माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ छत्तीसगढ़ के वनांचलों में लंबा समय व्यतीत किया था। इसीलिए छत्तीसगढ़ की लोकआस्था, संस्कृति और जनजीवन में भगवान श्रीराम रचे-बसे हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन त्याग, मर्यादा, धैर्य, साहस और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा का अनुपम उदाहरण है। वनवास के दौरान अनेक कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करने के बावजूद वे कभी अपने कर्तव्य और धर्म के मार्ग से विचलित नहीं हुए। उनका जीवन हमें विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, मर्यादा और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

शक्ति से बड़ी है सत्य और धर्म की सामर्थ्य

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रावण के पास अपार सैन्य शक्ति, अस्त्र-शस्त्र और महाबली योद्धाओं की विशाल सेना थी। दूसरी ओर प्रभु श्रीराम वनवासी जीवन व्यतीत कर रहे थे। उन्होंने वनवासियों और वानर सेना को संगठित कर रावण जैसी प्रबल शक्ति का सामना किया और विजय प्राप्त की। यह प्रसंग हमें बताता है कि संसाधनों और बाहुबल से कहीं अधिक बड़ी शक्ति सत्य, धर्म, दृढ़ संकल्प और सामूहिक पुरुषार्थ की होती है।

उन्होंने कहा कि विजयादशमी हमें अपने जीवन में सही और गलत के बीच अंतर समझने तथा सत्य के पक्ष में दृढ़ता से खड़े होने का साहस देती है। प्रभु श्रीराम का संघर्ष केवल रावण के विरुद्ध युद्ध नहीं था, बल्कि अन्याय, अत्याचार और अधर्म के विरुद्ध धर्म एवं न्याय की स्थापना का संघर्ष था।

अधर्म का साथ देने वाला भी उसके परिणाम से नहीं बच सकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि रावण के साथ मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन भी एक गहरा संदेश देता है। असत्य और अधर्म का साथ देने वाला व्यक्ति चाहे कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः उसे उसके परिणाम का सामना करना पड़ता है। इसलिए हमें जीवन के प्रत्येक अवसर पर सत्य, न्याय, करुणा और मानवता को सर्वोच्च स्थान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों का वास्तविक अनुसरण केवल उनकी आराधना में नहीं, बल्कि उनके जीवन मूल्यों को अपने आचरण में उतारने में है। समाज में न्याय के पक्ष में खड़ा होना, कमजोर और जरूरतमंद का साथ देना तथा अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना ही रामराज्य की मूल भावना है।

आतंकवाद के विरुद्ध भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक है ऑपरेशन सिंदूर

मुख्यमंत्री श्री साय ने विजयादशमी के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध भारत की दृढ़ नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से देश ने राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि देश की सुरक्षा और नागरिकों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास स्थापित करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। बस्तर सहित प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में विश्वास, विकास और खुशहाली का वातावरण निर्मित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। शांति और सुरक्षा के साथ विकास की रोशनी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सरकार का लक्ष्य है।

रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा करोड़ों भारतीयों के संकल्प और आस्था की सिद्धि

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन हमें संकल्प लेने और उसे पूर्ण करने की प्रेरणा देता है। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, तप और लंबे संघर्ष से जुड़े संकल्प की पूर्ति का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि 22 जनवरी 2024 का दिन भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। इस दिन अयोध्या में नवनिर्मित भव्य श्रीराम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। यह अवसर देश और दुनिया के करोड़ों रामभक्तों के लिए अत्यंत भावुक, गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण था।

49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए श्रीरामलला के दर्शन

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेशवासियों की भगवान श्रीराम के प्रति अगाध श्रद्धा और धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए श्रीरामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना प्रारंभ की है। इस योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश के 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम जाकर रामलला के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है और भगवान श्रीराम से जुड़े धार्मिक स्थलों का इसमें विशिष्ट स्थान है। राज्य सरकार प्रदेश की संस्कृति, आस्था और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलकर समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण का आह्वान

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की पुनः शुभकामनाएं देते हुए आह्वान किया कि हम सभी प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें। सत्य, न्याय, सद्भाव, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलते हुए अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करें तथा एक शांतिपूर्ण, समरस, सुरक्षित और समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण में अपनी सहभागिता निभाएं।

कार्यक्रम को राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा एवं रायपुर उत्तर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक श्री कुलदीप सिंह जुनेजा, श्री जयंती भाई पटेल, श्री सूर्यकांत राठौर, आयोजन समिति के प्रमुख श्री जी. स्वामी, नेशनल क्लब एवं आयोजन समिति के पदाधिकारीगण सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

शहरों के सुनियोजित विकास और आधुनिक अधोसंरचना को मिलेगी नई रफ्तार

 मुख्यमंत्री साय 21 अक्टूबर को अर्बन चैलेंज फंड एवं अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग पर क्षेत्रीय कार्यशाला का करेंगे शुभारंभ

शहरी विकास में निवेश के नए द्वार खोलने मुख्यमंत्री की उपस्थिति में होंगे दो महत्वपूर्ण एमओयू

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग का हुडको और सेप्ट यूनिवर्सिटी के साथ होगा एमओयू

नवा रायपुर में जुटेंगे शहरी विकास और वित्तीय प्रबंधन के विशेषज्ञ, म्युनिसिपल बॉन्ड, पीपीपी मॉडल और निवेश आधारित परियोजनाओं पर होगा मंथन

नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

रायपुर/ छत्तीसगढ़ के शहरों के सुनियोजित एवं टिकाऊ विकास, आधुनिक शहरी अधोसंरचना के विस्तार और नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम बनाने की दिशा में राज्य सरकार एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 21 अक्टूबर को प्रातः 10 बजे नवा रायपुर में अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) एवं अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग पर आयोजित एक दिवसीय क्षेत्रीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे।

कार्यशाला में देशभर के शहरी विकास, वित्तीय प्रबंधन और अधोसंरचना क्षेत्र के नीति-निर्माता एवं विशेषज्ञ भाग लेंगे। इस दौरान शहरों के विकास के लिए नए वित्तीय संसाधन जुटाने, निजी निवेश आकर्षित करने, म्युनिसिपल बॉन्ड जारी करने, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से अधोसंरचना विकसित करने तथा किफायती आवास परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन मंथन होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय की उपस्थिति में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा हुडको तथा सेप्ट यूनिवर्सिटी के साथ दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए जाएंगे। इन समझौतों के माध्यम से नगरीय निकायों की संस्थागत एवं वित्तीय क्षमता को मजबूत करने, आधुनिक शहरी नियोजन को बढ़ावा देने और निवेश आधारित अधोसंरचना परियोजनाओं को गति देने की दिशा में सहयोग बढ़ाया जाएगा।

राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और हुडको द्वारा संयुक्त रूप से नवा रायपुर स्थित होटल मेफेयर लेक रिसॉर्ट में आयोजित कार्यशाला में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू तथा उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

कार्यशाला में अर्बन चैलेंज फंड तथा अर्बन इन्वेस्ट विंडो (UiWIN) के माध्यम से शहरी विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने और नगरीय निकायों को निवेश योग्य परियोजनाएं तैयार करने में सक्षम बनाने पर विशेष फोकस रहेगा। इसके साथ ही शहरी परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने, उनकी वित्तीय योजना तैयार करने और दीर्घकालिक वित्तीय प्रबंधन की आधुनिक व्यवस्थाओं पर भी विशेषज्ञ मार्गदर्शन देंगे।

कार्यशाला में हुडको के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री संजय कुलश्रेष्ठ मुख्य वक्तव्य देंगे। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा प्रदेश में शहरी विकास की प्राथमिकताओं, नगरीय अधोसंरचना की आवश्यकताओं तथा कार्यशाला के उद्देश्यों पर अपने विचार रखेंगे।

तीन तकनीकी सत्रों में होगा शहरी विकास के वित्तीय मॉडल पर मंथन

कार्यशाला के अंतर्गत दोपहर 12 बजे से तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में देश के विभिन्न राज्यों एवं संस्थाओं के विशेषज्ञ शहरी विकास के सफल मॉडल, वित्तीय नवाचार और परियोजनाओं को निवेश योग्य बनाने के व्यावहारिक पहलुओं पर अपने अनुभव साझा करेंगे।

पहले तकनीकी सत्र में हुडको के महाप्रबंधक डॉ. विवेक अर्बन चैलेंज फंड और अर्बन इन्वेस्ट विंडो की अवधारणा, कार्यप्रणाली और शहरी विकास परियोजनाओं में इनके उपयोग की संभावनाओं पर प्रस्तुति देंगे। तेलंगाना शासन की सचिव डॉ. टी.के. श्रीदेवी तेलंगाना में अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन के अनुभव साझा करेंगी। इससे नगरीय निकायों को शहरी विकास के विभिन्न मॉडलों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन को समझने का अवसर मिलेगा।

बैंकेबल प्रोजेक्ट और पीपीपी मॉडल पर रहेगा विशेष फोकस

दोपहर दो बजे से आयोजित दूसरे तकनीकी सत्र में अर्बन स्पेशलिस्ट सुश्री आस्था जैन परियोजनाओं की अवधारणा तैयार करने से लेकर उनके निर्माण तथा विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया पर प्रस्तुति देंगी।

सिटीज (CITIES) फोरम के श्री प्रकाश गौर बैंकेबल शहरी अधोसंरचना परियोजनाओं, किफायती आवास परियोजनाओं और पीपीपी स्ट्रक्चरिंग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे। विश्व बैंक के श्री रघु केसवन म्युनिसिपल फाइनेंस तथा रेवेन्यू रिंग फेंसिंग के माध्यम से शहरी परियोजनाओं के बेहतर वित्तीय प्रबंधन के तरीकों की जानकारी देंगे।

यह सत्र नगरीय निकायों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगा, क्योंकि इससे उन्हें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप ऐसी परियोजनाएं तैयार करने में मार्गदर्शन मिलेगा, जिनमें संस्थागत वित्त और निजी निवेश आकर्षित करने की क्षमता हो।

म्युनिसिपल बॉन्ड से शहरों के विकास के लिए संसाधन जुटाने पर चर्चा

शाम सवा चार बजे आयोजित तीसरे तकनीकी सत्र में टिपसन्स के श्री उमेश खंडेलवाल म्युनिसिपल बॉन्ड के माध्यम से शहरी विकास के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। म्युनिसिपल बॉन्ड जैसे आधुनिक वित्तीय साधनों के प्रभावी उपयोग से नगरीय निकाय बड़े अधोसंरचना प्रोजेक्ट्स के लिए वैकल्पिक वित्तीय संसाधन जुटाने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।

इसके बाद हुडको के क्षेत्रीय प्रमुख श्री हितेश बोरड अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत बैंकेबल शहरी अधोसंरचना और किफायती आवास परियोजनाओं के लिए हुडको द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली वित्तीय सुविधाओं की जानकारी देंगे।

शाम 5:20 बजे हुडको के महाप्रबंधक डॉ. विवेक के साथ पैनल डिस्कशन एवं प्रश्नोत्तरी सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रतिभागी शहरी विकास, परियोजनाओं की वित्तीय संरचना, निवेश जुटाने और परियोजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े व्यावहारिक विषयों पर विशेषज्ञों से सीधा संवाद कर सकेंगे।

नगरीय निकायों की वित्तीय क्षमता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

कार्यशाला के माध्यम से राज्य के नगरीय निकायों को परंपरागत वित्तीय संसाधनों के साथ-साथ निवेश आधारित विकास, म्युनिसिपल बॉन्ड, पीपीपी और संस्थागत वित्त जैसे आधुनिक विकल्पों के प्रभावी उपयोग की जानकारी मिलेगी। इससे नगरीय निकायों को अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और आर्थिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाएं तैयार करने तथा उनके लिए वित्तीय संसाधन जुटाने की क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।

कार्यशाला में होने वाला विचार-मंथन छत्तीसगढ़ के शहरों में आधुनिक अधोसंरचना के निर्माण, किफायती आवास, बेहतर नागरिक सुविधाओं और निवेश आधारित विकास को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। इसके साथ ही नगरीय निकायों को दीर्घकालिक रूप से वित्तीय रूप से सक्षम बनाते हुए प्रदेश के शहरों को अधिक सुव्यवस्थित, सुविधाजनक और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में भी यह पहल उपयोगी होगी।

असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का शाश्वत संदेश देता है विजयादशमी का पर्व : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री साय ऐतिहासिक रावणभाठा मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव में हुए शामिल, प्रदेशवासियों को दी दशहरा पर्व की शुभकामनाएं

प्रभु श्रीराम से छत्तीसगढ़ का गहरा आत्मीय नाता, माता कौशल्या का मायका और भगवान श्रीराम का ननिहाल है छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री

भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, धैर्य, साहस और न्याय के प्रति अटूट निष्ठा का अनुपम उदाहरण : मुख्यमंत्री श्री साय

सत्य, सेवा, सुशासन और जनकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का लें संकल्प : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री साय ने रावणभाठा दशहरा उत्सव के आयोजन के लिए प्रतिवर्ष 10 लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा की

रायपुर,/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक रावणभाठा मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव में शामिल हुए। उन्होंने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य, अन्याय पर न्याय और बुराई पर अच्छाई की विजय का शाश्वत संदेश देता है। विजयादशमी हमें अपने जीवन में सत्य, धर्म, न्याय और मानवता के मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा देती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हम प्रतिवर्ष रावण का पुतला दहन करते हैं, लेकिन इस पर्व की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब हम अपने भीतर विद्यमान काम, क्रोध, मद और लोभ रूपी रावण का भी वध करें। विजयादशमी आत्ममंथन का अवसर है। यह पर्व हमें अपनी कमजोरियों और बुराइयों पर विजय प्राप्त कर सद्गुणों को अपनाने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर का ऐतिहासिक रावणभाठा मैदान दशहरा उत्सव की लगभग 170 वर्ष पुरानी गौरवशाली परंपरा का साक्षी है। पीढ़ियों से यहां विजयादशमी का पर्व पूरे उल्लास, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता रहा है। यह मैदान केवल रावण दहन का स्थल नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और सामूहिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। उन्होंने इस ऐतिहासिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए आयोजन समिति और इससे जुड़े सभी लोगों की सराहना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर रावणभाठा दशहरा उत्सव के आयोजन के लिए प्रतिवर्ष 10 लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपराओं और विरासत का संरक्षण तथा संवर्धन हमारी जिम्मेदारी है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

प्रभु श्रीराम से छत्तीसगढ़ का आत्मीय और अटूट संबंध

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए विजयादशमी का विशेष महत्व है, क्योंकि प्रभु श्रीराम का इस पावन धरती से अत्यंत गहरा और आत्मीय संबंध रहा है। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वनवास काल में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने छत्तीसगढ़ की धरती पर लंबा समय व्यतीत किया। यही कारण है कि प्रभु श्रीराम की स्मृतियां और उनके आदर्श प्रदेश की लोकसंस्कृति, लोकजीवन और जनमानस में गहराई से रचे-बसे हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन सत्य, मर्यादा, धैर्य, साहस, त्याग और न्याय के प्रति अटूट निष्ठा का अनुपम उदाहरण है। वनवास के दौरान उन्हें अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी धर्म और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा। रावण के पास विशाल सेना, अपार सामर्थ्य और अस्त्र-शस्त्र थे, फिर भी भगवान श्रीराम ने अपने दृढ़ संकल्प और धर्मबल से उसे परास्त किया। यह हमें सिखाता है कि उद्देश्य न्यायपूर्ण हो, संकल्प दृढ़ हो और मार्ग सत्य का हो, तो बड़ी से बड़ी चुनौती पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विजयादशमी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि सत्य का मार्ग कठिन अवश्य हो सकता है, लेकिन अंततः विजय सत्य की ही होती है। प्रभु श्रीराम का रावण के विरुद्ध संघर्ष केवल एक युद्ध नहीं था, बल्कि अन्याय, अत्याचार और अधर्म के विरुद्ध धर्म एवं मानवीय मूल्यों की स्थापना का महान अभियान था।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति के चरित्र की वास्तविक पहचान कठिन परिस्थितियों में होती है। यह महत्वपूर्ण है कि संकट और संघर्ष के समय हम सत्य और न्याय के पक्ष में खड़े होते हैं या नहीं। रावण के साथ मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन भी हमें यही संदेश देता है कि असत्य और अन्याय का साथ देने वाला व्यक्ति चाहे कितना ही सामर्थ्यवान क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है।

आतंकवाद और अन्याय के विरुद्ध भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विजयादशमी का संदेश केवल पौराणिक संदर्भों तक सीमित नहीं है, बल्कि आज भी उतना ही प्रासंगिक है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और सामर्थ्य का परिचय दिया है। भारतीय सेना द्वारा चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर देश के साहस, पराक्रम और आतंकवाद के विरुद्ध अडिग संकल्प का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि चाहे पौराणिक काल का रावण हो अथवा आधुनिक युग में आतंकवाद और अन्याय जैसी बुराइयां, समाज और राष्ट्र को इनके विरुद्ध एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। सत्य और न्याय की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्प तथा सामूहिक शक्ति आवश्यक है।

श्रीरामलला का भव्य मंदिर भारत के सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक

मुख्यमंत्री श्री साय ने अयोध्या में भगवान श्रीरामलला के भव्य मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि 22 जनवरी 2024 का दिन भारत के इतिहास में आस्था, सांस्कृतिक गौरव और आध्यात्मिक चेतना के अविस्मरणीय अवसर के रूप में अंकित हो चुका है। सदियों की प्रतीक्षा के बाद प्रभु श्रीरामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए। यह क्षण करोड़ों देशवासियों की आस्था, विश्वास और संकल्प की पूर्णता का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़वासियों की प्रभु श्रीराम के प्रति गहरी आस्था और आत्मीय संबंध को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने श्रीरामलला दर्शन योजना प्रारंभ की है। इस योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश के 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम पहुंचकर प्रभु श्रीरामलला के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को इस आध्यात्मिक अनुभूति से जुड़ने का अवसर मिले।

अपने भीतर की बुराइयों पर विजय का संकल्प लें

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों से आह्वान करते हुए कहा कि विजयादशमी केवल रावण के पुतले के दहन का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों पर विजय प्राप्त करने और सद्गुणों को अपनाने का अवसर है। हमें भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज में प्रेम, सद्भाव, भाईचारा, न्याय और सेवा की भावना को और मजबूत करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ विकास के नए दौर में आगे बढ़ रहा है। हमारी जिम्मेदारी है कि विकास के साथ अपनी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों को भी सहेजकर आगे बढ़ें। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप हम सभी को मिलकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आइए, इस पावन विजयादशमी पर हम सभी सत्य, सेवा, सुशासन और जनकल्याण के मार्ग पर चलते हुए एक समृद्ध, सशक्त और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प लें। उन्होंने प्रभु श्रीराम से प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए सभी को विजयादशमी की पुनः हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि रावणभाठा का दशहरा उत्सव लगभग 170 वर्ष पुरानी गौरवशाली परंपरा है, जिसका आयोजन दूधाधारी मठ द्वारा प्रतिवर्ष किया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि देश अपनी प्राचीन विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजते हुए विकास के पथ पर आगे बढ़े। उन्होंने माता दुर्गा और प्रभु श्रीराम से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

इस अवसर पर विधायक श्री सुनील सोनी सहित श्री अंजय शुक्ला, श्री सुभाष तिवारी, श्री मनोज वर्मा, श्री सुशील ओझा, श्री उमेश गुप्ता, श्री संजू नारायण, सार्वजनिक दशहरा उत्सव समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ की धरती पर पहली बार भारत-जिम्बाब्वे महिला टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट श्रृंखला का आयोजन

 महिला क्रिकेट की ऐतिहासिक श्रृंखला से प्रदेश की बेटियों को मिलेगी नई प्रेरणा : मुख्यमंत्री श्री साय

खेल प्रतिभाओं को अवसर और विश्वस्तरीय खेल अधोसंरचना का विकास हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री

अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों से छत्तीसगढ़ की वैश्विक पहचान के साथ पर्यटन, व्यापार और रोजगार को भी मिलेगी नई गति

मुख्यमंत्री ने भारत-जिम्बाब्वे महिला टी-20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के तीसरे मुकाबले का लिया आनंद, दोनों टीमों के खिलाड़ियों का किया उत्साहवर्धन

रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह गौरव और हर्ष का अवसर है कि नवा रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच तीन टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की श्रृंखला का आयोजन किया गया है। छत्तीसगढ़ की धरती पर पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट श्रृंखला का आयोजन प्रदेश के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के बीच पहली द्विपक्षीय श्रृंखला की शुरुआत छत्तीसगढ़ से होना इस अवसर को और भी ऐतिहासिक बनाता है।

मुख्यमंत्री श्री साय आज नवा रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम पहुंचे और भारत-जिम्बाब्वे महिला टी-20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के तीसरे मुकाबले का आनंद लिया। उन्होंने दोनों देशों की महिला क्रिकेट टीमों के खिलाड़ियों का छत्तीसगढ़ की धरती पर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा और परिश्रम से पहचान बनाने वाली महिला खिलाड़ी देश की करोड़ों बेटियों के लिए प्रेरणा हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नवा रायपुर में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट मैचों का आयोजन खेलों के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की बढ़ती भूमिका का प्रमाण है। यह केवल एक क्रिकेट श्रृंखला नहीं, बल्कि प्रदेश की बेटियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करने वाला अवसर भी है। हमारी बेटियां जब विश्वस्तरीय खिलाड़ियों को अपने सामने खेलते हुए देखेंगी, तो उनमें भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने और छत्तीसगढ़ तथा देश का नाम रोशन करने का आत्मविश्वास बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक श्रृंखला के अवसर पर माताओं, बहनों और बेटियों के लिए स्टेडियम में निःशुल्क प्रवेश की व्यवस्था की गई है। इसके पीछे उद्देश्य अधिक से अधिक महिलाओं और बालिकाओं को खेलों से जोड़ना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन को प्रत्यक्ष देखने का अवसर उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी केवल खेल मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि आज हमारी बेटियां प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और सामर्थ्य से देश का गौरव बढ़ा रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। खेल अधोसंरचना के विस्तार के साथ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, संसाधन और प्रतिस्पर्धा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ की प्रतिभाओं को अपने ही प्रदेश में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिले।

उन्होंने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण खेल अधोसंरचना है। राज्य सरकार द्वारा स्टेडियम को छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ को लीज पर दिए जाने से यहां नियमित रूप से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्रिकेट प्रतियोगिताओं के आयोजन का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इससे न केवल प्रदेश के क्रिकेट प्रेमियों को विश्वस्तरीय मुकाबले देखने का अवसर मिल रहा है, बल्कि छत्तीसगढ़ के युवा खिलाड़ियों को भी बड़े खिलाड़ियों से सीखने और प्रेरणा लेने का अवसर प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बीते समय में नवा रायपुर में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों का सफल आयोजन किया गया। राज्य सरकार की विशेष पहल पर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के दो आईपीएल मुकाबलों का भी सफल आयोजन हुआ। अब भारत-जिम्बाब्वे महिला टी-20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के आयोजन ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े खेल आयोजन किसी प्रदेश की खेल संस्कृति को मजबूत करने के साथ उसकी अर्थव्यवस्था और पहचान को भी नई ऊर्जा देते हैं। देश-दुनिया से खिलाड़ी, खेल अधिकारी और दर्शक जब छत्तीसगढ़ आते हैं, तो इससे पर्यटन, होटल व्यवसाय, परिवहन, स्थानीय व्यापार और सेवा क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित होते हैं।

उन्होंने कहा कि नवा रायपुर तेजी से आधुनिक अधोसंरचना और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से युक्त शहर के रूप में विकसित हो रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य नवा रायपुर को केवल एक आधुनिक और सुव्यवस्थित राजधानी के रूप में विकसित करना नहीं, बल्कि इसे देश के प्रमुख स्पोर्ट्स एवं इवेंट डेस्टिनेशन के रूप में भी नई पहचान दिलाना है। इसके लिए आधुनिक खेल सुविधाओं का विस्तार, मौजूदा अधोसंरचना का बेहतर उपयोग और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए एक सकारात्मक वातावरण बना है। खेलों में भारत की बेटियां लगातार शानदार उपलब्धियां हासिल कर रही हैं और विश्व मंच पर तिरंगे का मान बढ़ा रही हैं। छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी भावना के अनुरूप प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को पहचानने, तराशने और आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने भारत और जिम्बाब्वे की महिला क्रिकेट टीमों के सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह श्रृंखला उत्कृष्ट खेल भावना, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और दोनों देशों के बीच मैत्री का यादगार उदाहरण बनेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नवा रायपुर में आयोजित यह ऐतिहासिक श्रृंखला प्रदेश की नई पीढ़ी, विशेषकर बेटियों को खेलों से जुड़ने की प्रेरणा देगी और छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास में एक गौरवपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगी।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ एवं भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पदाधिकारी, खेल जगत से जुड़े प्रतिनिधि, अधिकारी तथा बड़ी संख्या में क्रिकेट प्रेमी उपस्थित थे।

बुधवार का पंचांग: शुभ काम के लिए कौन सा समय रहेगा खास? जानें ग्रह-नक्षत्रों का पूरा हाल

पंचांग  : आज 21 अक्टूबर, 2026 बुधवार के दिन आश्विन महीने की शुक्ल पक्ष दशमी तिथि है. इस तिथि पर भगवान शिव के प्रमुख सेनापति वीरभद्र का नियंत्रण है. शुभ समारोह और नए भवन के उद्घाटन के लिए यह तिथि शुभ मानी जाती है.

21 अक्टूबर का पंचांग :

  • विक्रम संवत : 2083
  • मास : आश्विन
  • पक्ष : शुक्ल पक्ष दशमी
  • दिन : बुधवार
  • तिथि : शुक्ल पक्ष दशमी
  • योग : गंड
  • नक्षत्र : धनिष्ठा
  • करण : गर
  • चंद्र राशि : मकर
  • सूर्य राशि : तुला
  • सूर्योदय : 06:25:00 AM
  • सूर्यास्त : 05:45:00 PM
  • चंद्रोदय : 02:55 पी एम
  • चंद्रास्त :02:19 ए एम, अक्टूबर 22
  • राहुकाल : 12:05 से 13:30
  • यमगंड : 07:50 से 09:15

आज का नक्षत्र

आज के दिन चंद्रमा मकर राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा. मकर राश में इस नक्षत्र का विस्तार 23:20 से लेकर कुंभ राशि में 6:40 तक फैला है. इसके देवता अष्टवसु हैं और इस नक्षत्र पर मंगल का शासन है. यह नक्षत्र यात्रा करने, मित्रों से मिलने और आध्यात्मिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ है.

आज के दिन का वर्जित समय

आज के दिन 12:05 से 13:30 बजे तक राहुकाल रहेगा. ऐसे में कोई शुभ कार्य करना हो, तो इस अवधि से परहेज करना ही अच्छा रहेगा. इसी तरह यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम से भी परहेज करना चाहिए.

राशिफल: इन राशियों को व्यापार में लाभ होगा, पारिवारिक जीवन में सुख-शांति छायी रहेगी

मेष: आज 21 अक्टूबर, 2026 बुधवार को मकर राशि में चंद्रमा है. आपकी राशि से चंद्रमा दसवें भाव में है. किसी मीटिंग के लिए होने वाली यात्रा के लिए आज का दिन अच्छा है. व्यापार से सम्बंधित कामों में लाभदायी शुरुआत रहेगी. घर में शुभ प्रसंग का आयोजन होगा. शेयर-सट्टे में आर्थिक लाभ होगा. पत्नी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता रहेगी. परिजनों के साथ कहीं बाहर जाने का कार्यक्रम बनेगा. प्रेम जीवन सकारात्मक रहेगा. आपको लाभ प्राप्त होगा. आज निवेश को लेकर भी कोई फैसला आप कर सकते हैं. स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अच्छा है.

वृषभ: आज 21 अक्टूबर, 2026 बुधवार को मकर राशि में चंद्रमा है. आपकी राशि से चंद्रमा नवें भाव में है. आज व्यापार में कुछ नया करने का प्रयास करेंगे. हालांकि भागीदारी के काम में आपको ध्यान रखना होगा. आलस्य और चिंता बनी रहेगी. स्वास्थ्य के प्रति ध्यान रखें. विरोधियों के साथ वाद-विवाद में न उतरें. आग और पानी वाली जगहों से बचकर रहें. हालांकि दोपहर के बाद लेन-देन के मामलों में लाभ होगा. नौकरी में पदोन्नति हो सकती है. बच्चों की प्रगति से मन खुश रहेगा. गृहस्थ जीवन में शांति बनी रहेगी.

मिथुन: आज 21 अक्टूबर, 2026 बुधवार को मकर राशि में चंद्रमा है. आपकी राशि से चंद्रमा आठवें भाव में है. नेगेटिव विचारों को मन से दूर रखें. खान-पान में ध्यान रखें. वाहन चलाते समय आज बहुत सावधानी रखें. आकस्मिक धन खर्च हो सकता है. किसी कारण से बाहर जाने का कार्यक्रम बन सकता है. दोपहर के बाद साहित्यिक गतिविधि में आपकी रुचि रहेगी. हालांकि मन में किसी बात की चिंता बनी रहेगी. आकस्मिक धन खर्च होगा.

कर्क: आज 21 अक्टूबर, 2026 बुधवार को मकर राशि में चंद्रमा है. आपकी राशि से चंद्रमा सातवें भाव में है. स्वादिष्ट और उत्तम भोजन की प्राप्ति होने से आज मन खुश रहेगा. नए वस्त्र खरीदने की योजना बना सकते हैं. आर्थिक मामलों में आपका दिन अच्छा रहेगा. दोपहर बाद किसी बात को लेकर कोई निर्णय नहीं ले पाएंगे. अचानक धन खर्च होगा. पार्टनरशिप के काम में मतभेद बढ़ेगा. नौकरी में परिस्थिति अनुकूल रहेगी. गुस्से को काबू में रखें. नए काम की शुरुआत आज ना करें.

सिंह: आज 21 अक्टूबर, 2026 बुधवार को मकर राशि में चंद्रमा है. आपकी राशि से चंद्रमा छठे भाव में है. आज आप व्यवसाय को बढ़ाने का प्रयास करेंगे. व्यापार में धन की योजना पूरी कर पाएंगे. उचित कारणों पर धन खर्च होगा. विदेश के कामों से लाभ होने की संभावना है. आय की वृद्धि होने से धन की कमी नहीं रहेगी. किसी बात को लेकर परिजनों से विवाद हो सकता है. आकस्मिक धन का खर्च होगा. पार्टनरशिप के काम में आंतरिक मतभेद रहेंगे, फिर भी परिस्थिति अनुकूल रहेगी.

कन्या: आज 21 अक्टूबर, 2026 बुधवार को मकर राशि में चंद्रमा है. आपकी राशि से चंद्रमा पांचवें भाव में है. आज आप का दिन सुख और शांति से गुजरेगा. आभूषणों की खरीदारी करेंगे. कला और संगीत में भी आज रुचि रहेगी. व्यापार के लिए आज का दिन बहुत अच्छा दिन है. धन के मामलों में सरलता रहेगी. घर में शांति और आनंद बना रहेगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. व्यापार में आपको फायदा हो सकता है. सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा.

तुला: आज 21 अक्टूबर, 2026 बुधवार को मकर राशि में चंद्रमा है. आपकी राशि से चंद्रमा चौथे भाव में है. आज का दिन मध्यम फलदायी है. शारीरिक ताजगी और मानसिक प्रसन्नता का अभाव रहेगा. परिवार में उग्र वातावरण रह सकता है. सामाजिक जीवन में मानहानि का प्रसंग बन सकता है. वाणी पर कंट्रोल रखें। दोपहर के बाद आपकी शारीरिक और मानसिक स्थिति में सुधार होगा. आप रचनात्मक कामों में व्यस्त रहने वाले हैं. जीवनसाथी के साथ आपके संबंध मधुर बने रहेंगे.

वृश्चिक: आज 21 अक्टूबर, 2026 बुधवार को मकर राशि में चंद्रमा है. आपकी राशि से चंद्रमा तीसरे भाव में है. आज संपत्ति के कामों में बहुत ध्यान रखना होगा. व्यापार कर रहे लोगों के लिए आज का दिन अनुकूल है. भाई-बंधुओं का व्यवहार सहयोगात्मक रहेगा. विरोधी परास्त होंगे. दोपहर के बाद शारीरिक और मानसिक अनुकूलता रहेगी. हालांकि वाणी पर नियंत्रण रखें. अति उत्साह में कुंटुंबजनों के साथ विवाद हो सकता है. धन हानि का योग है. प्रेम प्रसंग में असंतुष्टि का भाव रहेगा.

धनु: आज 21 अक्टूबर, 2026 बुधवार को मकर राशि में चंद्रमा है. आपकी राशि से चंद्रमा दूसरे भाव में है. आप वाणी पर संयम रखें और लोगों से मनमुटाव को दूर करने का प्रयास करें. आज आपका ध्यान आध्यात्मिक बातों में रहेगा. विद्यार्थियों को एकाग्र होने में दिक्कत आएगी. दोपहर के बाद चिंता का निवारण होने से आप प्रसन्न रहेंगे. आप शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बने रहेंगे. विरोधियों को समय पर जवाब दे पाएंगे. कार्यस्थल पर आज आप अपने टारगेट को पूरा कर पाने की स्थिति में रहेंगे.

मकर: आज 21 अक्टूबर, 2026 बुधवार को मकर राशि में चंद्रमा है. आपकी राशि से चंद्रमा पहले भाव में है. व्यवसाय में अनुकूल लाभ मिलेगा. आज के प्रत्येक काम बिना विघ्न के पूरे हो सकेंगे. गृहस्थ जीवन में विवाद का माहौल बना रहेगा. आध्यात्मिक प्रवृत्ति में आपकी रुचि बढ़ेगी. कार्यालय में आपका प्रभाव बना रहेगा. दोपहर के बाद आपके मन में नेगेटिव विचार आ सकते हैं. आप में डिसीजन लेने की स्थिति में नहीं रहेंगे. घर के काम में धन खर्च होगा. पूंजी निवेश और शेयर बाजार के काम में आपको फायदा हो सकता है.

कुंभ: आज 21 अक्टूबर, 2026 बुधवार को मकर राशि में चंद्रमा है. आपकी राशि से चंद्रमा बारहवें भाव में है. आज मानसिक रूप से धार्मिक भावनाओं का उदय अधिक होगा. धार्मिक काम अथवा धार्मिक यात्रा के पीछे धन खर्च करेंगे. कोर्ट-कचहरी के काम में सफलता प्राप्त हो सकती है. ईश्वर की आराधना से आपके मन मेें शांति रहेगी. दोपहर के बाद आपके प्रत्येक काम सरलता से पूरे होंगे. गृहस्थ जीवन में विवाद हो सकता है. शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा बना रहेगा. इस समय आप कार्यस्थल पर सभी काम आसानी से कर पाएंगे.

मीन: आज 21 अक्टूबर, 2026 बुधवार को मकर राशि में चंद्रमा है. आपकी राशि से चंद्रमा ग्यारहवें भाव में है. शेयर बाजार में निवेश से आज आपको आर्थिक लाभ हो सकता है. विवाह योग्य जातकों का रिश्ता पक्का हो सकता है। व्यापार में लाभ होगा। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति छायी रहेगी. किसी पर्यटन स्थल पर जाने का कार्यक्रम बन सकता है. दोपहर के बाद किसी कारणवश मानसिक रूप से चिंतित रहेंगे. धार्मिक काम के पीछे धन का खर्च होगा. आय की अपेक्षा खर्च की मात्रा अधिक होगा. परिवार में शांतिदायी वातावरण रहेगा. प्रेम जीवन में असंतुष्टि रह सकती है.

थाना सिटी कोतवाली बेमेतरा पुलिस की कार्रवाई

बेमेतरा,20 अक्टूबर 2026

आरोपी के विरुद्ध धारा 296, 351(3) बीएनएस एवं धारा 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध

धारदार हथियार लहराकर जान से मारने की धमकी और गाली-गलौज के मामले में आरोपी गिरफ्तार

प्रार्थी विनोद देवांगन, उम्र 36 वर्ष, निवासी मोहरेंगा, थाना व जिला बेमेतरा ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि दिनांक 18.10.2026 को दोपहर करीब 01:15 बजे आरोपी गोवर्धन जांगड़े उसकी दुकान के सामने हाथ में लोहे का टंगिया और कमर के पीछे करीब 10 इंच लंबा लोहे का चाकू रखकर आया। आरोपी ने घास जमीन में मकान बनाने की बात कहकर पैसों की मांग की। विरोध करने पर आरोपी ने चाकू और टंगिया लहराते हुए अश्लील गाली-गलौज की और जान से खत्म करने की धमकी दी। प्रार्थी ने घटना का वीडियो अपने मोबाइल से बनाया।

प्रार्थी की रिपोर्ट पर थाना सिटी कोतवाली बेमेतरा में आरोपी गोवर्धन जांगड़े के विरुद्ध धारा 296, 351(3) बीएनएस एवं धारा 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की जानकारी दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक श्री त्रिलोक बंसल (भा.पु.से.) के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. हरीश यादव एवं एसडीओपी बेमेतरा श्री भूषण एक्का के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी सिटी कोतवाली बेमेतरा निरीक्षक सोनल ग्वाला को थाना स्टाफ सहित विवेचना हेतु लगाया गया।

विवेचना के दौरान आरोपी गोवर्धन जांगड़े, उम्र 32 वर्ष, निवासी मोहरेंगा को हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर उसने अपराध करना स्वीकार किया। आरोपी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त लोहे का धारदार चाकू, टंगिया एवं अन्य साक्ष्य जप्त किए गए। आरोपी के विरुद्ध पूर्व में मारपीट के 02 और आबकारी के 01 प्रकरण पंजीबद्ध होना पाया गया।

आरोपी गोवर्धन जांगड़े पिता पुनाराम जांगड़े उर्फ जंगलिहा, उम्र 32 वर्ष, निवासी मोहरेंगा को दिनांक 18.10.2026 को विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में न्यायिक रिमांड पर प्रस्तुत किया गया।

इस संपूर्ण कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक सोनल ग्वाला, सहायक उप निरीक्षक सुरेश सिंह राजपूत सहित थाना सिटी कोतवाली बेमेतरा पुलिस स्टाफ का महत्वपूर्ण एवं सराहनीय योगदान रहा।

रावण के दस सिर और मानव का एक — क्या अहंकार के लिए एक ही सिर काफी है? जानिए लोकतंत्र का असली ‘मस्तिष्क’

जय विजयादशमी! बुराई पर अच्छाई की विजय हो। 🏹🔥विजयादशमी का संदेश यही है कि सत्ता या ज्ञान का अहंकार चाहे रावण जैसा विशाल क्यों न हो, अंततः सत्य, जनचेतना और राष्ट्रहित की शक्ति ही विजयी होती है।

विजयादशमी विशेष/20 अक्टूबर 2026
दीपक पाण्डेय 9826157101

आज विजयादशमी का पावन पर्व है। यह पर्व असत्य पर सत्य की, और अहंकार पर विवेक की विजय का प्रतीक है। जब हम रावण के चरित्र पर दृष्टि डालते हैं, तो उसके ज्ञान, प्रखरता, पराक्रम और वीरता से इंकार नहीं किया जा सकता।

पौराणिक कथाओं के अनुसार रावण के पास दस सिर यानी दस मस्तिष्क थे। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो एक साधारण मानव मस्तिष्क में लगभग 86 अरब न्यूरॉन्स होते हैं, जो अनगिनत विचार, गणनाएं और भावनाएं पैदा करते हैं।

ज़रा सोचिए, जिसके पास दस मस्तिष्क रहे हों, उसके भीतर विचारों और बौद्धिक क्षमता का कितना बड़ा समंदर रहा होगा! और शायद यही कारण था कि उस अपार ज्ञान और शक्ति के अहंकार में उसने खुद को सबसे सर्वोपरि मान लिया था।

यह इस कहावत को चरितार्थ करता है कि “ब्रेन इज़ द मेन पार्ट ऑफ़ द बॉडी”, लेकिन जब यही मस्तिष्क अहंकार से भर जाए, तो पतन का कारण बन जाता है।

आज विजयादशमी के इस अवसर पर, रावण के उस प्रतीकात्मक अहंकार से लेकर वर्तमान व्यवस्था और राष्ट्र-रूपक तक, यह सोचने का समय है कि आज के तंत्र और लोकतंत्र का असली ‘मस्तिष्क’ और ‘अंकाराक्षस'(वोट) कहाँ और कैसे काम कर रहा है।

मानव शरीर और राष्ट्र की रूपक : देश का मस्तिष्क कौन?

मानव शरीर और राष्ट्र की रूपक के आधार पर, जहाँ समाज या तंत्र की हर आहट और दर्द की प्रतिक्रिया तय होती है, यदि इन तीन संवैधानिक पदों और संस्थाओं को देखा जाए, तो “देश का मस्तिष्क” किसे माना जाए—यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम उस मस्तिष्क की भूमिका ‘निर्णय और नीति निर्माण’ के रूप में देखते हैं या ‘निष्पक्षता और नियम-नियंत्रण’ के रूप में।

संविधान के तहत देश के ये सर्वोच्च पद और संस्थाएं अलग-अलग भूमिकाएं निभाती हैं:

देश का प्रधानमंत्री और कार्यपालिका: “निर्णय लेने वाला मस्तिष्क”

भूमिका: प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिमंडल देश की नीतियां बनाते हैं, आर्थिक और सामाजिक दिशा तय करते हैं, और संकट के समय निर्णय लेते हैं।

मस्तिष्क से तुलना: जिस प्रकार मस्तिष्क शरीर के अंगों को चलाने के लिए फैसले लेता है और नीतियां तय करता है, उसी प्रकार शासन व्यवस्था में प्रधानमंत्री और सरकार वह केंद्रीय इकाई है जो देश के विकास, सुरक्षा और योजनाओं का संचालन करती है।

चुनाव आयोग (मुख्य निर्वाचन आयुक्त -): “तंत्र का न्यूरोलॉजिकल सिस्टम और सुरक्षा कवच”

रावण के दस सिरों की तरह व्यवस्था के विकारों में अंकाराक्षस(वोट) का मोह भी शामिल है।”

भूमिका: चुनाव आयोग का मुख्य कार्य देश में निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव कराना है। यह लोकतंत्र की वह धुरी है जो जनता की आवाज और सत्ता के बदलाव को शांतिपूर्ण तरीके से संभव बनाती है।

मस्तिष्क से तुलना: इसे आप मस्तिष्क का वह हिस्सा मान सकते हैं जो संतुलन बनाए रखता है और यह सुनिश्चित करता है कि शरीर (देश) का तंत्र सही नियमों से और बिना किसी गड़बड़ी के चलता रहे। लोकतंत्र के संदर्भ में इसे निष्पक्षता का प्रतीक माना जाता है।

देश का राष्ट्रपति: “संविधान का संरक्षक और अंतरात्मा” जहां रावण नाभि, अमृत कुंड था

भूमिका: राष्ट्रपति देश के प्रथम नागरिक और संविधान के सर्वोच्च संरक्षक होते हैं। वे सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों और निर्णयों की संवैधानिक वैधता की जांच करते हैं और संकटकाल में राष्ट्र की एकता का प्रतिनिधित्व करते हैं।

मस्तिष्क से तुलना: राष्ट्रपति को आप देश की ‘नैतिक अंतरात्मा’ मान सकते हैं, जो यह देखती है कि देश का संविधान और मूल्य सुरक्षित रहें। जिस प्रकार रावण की शक्ति और जीवन का मूल स्रोत उसकी नाभि का अमृत कुंड था, उसी तरह हमारे लोकतंत्र, राष्ट्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा का अंतिम स्तंभ संविधान की शक्ति और राष्ट्रपति का पद (संवैधानिक अंतरात्मा) है।

निष्कर्ष: असल में “मस्तिष्क” कौन है?
(विशेष नोट: यह एक विशुद्ध लेखकीय विचार, साहित्यिक रूपक और दार्शनिक विश्लेषण है, यह किसी राजनीतिक वाद-विवाद का विषय-वस्तु नहीं है।)



छत्तीसगढ़ में महाराजा अग्रसेन जयंती पर सरकारी छुट्टी का ऐलान, CM विष्णुदेव साय ने अंबिकापुर में की घोषणा

छत्तीसगढ़ में अग्रवाल समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महत्वपूर्ण घोषणा की है। सरगुजा जिले के अंबिकापुर में 19 सितंबर 2026 को आयोजित अग्र महाकुंभ सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने महाराजा अग्रसेन जयंती पर एक दिन का शासकीय अवकाश घोषित करने का ऐलान किया। इस घोषणा का सम्मेलन में मौजूद समाज के प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने स्वागत किया। इसे अग्रवाल समाज की सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

अग्र महाकुंभ सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने की घोषणा

अंबिकापुर के होटल ग्रैंड वसंत में अग्रवाल समाज की ओर से दो दिवसीय अग्र महाकुंभ सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से समाज के प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सम्मेलन के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान समाज की ओर से महाराजा अग्रसेन जयंती पर सरकारी छुट्टी घोषित करने की मांग रखी गई। इस पर मुख्यमंत्री ने मंच से एक दिवसीय शासकीय अवकाश की घोषणा की। ऐलान के बाद उपस्थित लोगों ने प्रसन्नता जाहिर की और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

लंबे समय से उठ रही थी सरकारी छुट्टी की मांग

महाराजा अग्रसेन जयंती अग्रवाल समाज के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल है। इस अवसर पर समाज के लोग पूजा-अर्चना के साथ सामाजिक सेवा, धार्मिक कार्यक्रम और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन करते हैं।

छत्तीसगढ़ में इस दिन शासकीय अवकाश घोषित करने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि महाराजा अग्रसेन के विचार सामाजिक एकता, समानता, सहयोग और जनकल्याण की प्रेरणा देते हैं। ऐसे में उनकी जयंती पर सरकारी छुट्टी घोषित होने से समाज की परंपराओं को व्यापक पहचान मिलेगी।

शिक्षा, व्यापार और सामाजिक सेवा में योगदान की सराहना

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अग्रवाल समाज के सामाजिक और आर्थिक योगदान की सराहना की। उन्होंने शिक्षा, व्यापार, उद्योग और जनसेवा जैसे क्षेत्रों में समाज की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

मुख्यमंत्री ने सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वहन और प्रदेश की विकास गतिविधियों में समाज की भागीदारी की भी प्रशंसा की। उन्होंने समाज की ओर से किए जा रहे सेवा कार्यों और जनकल्याण से जुड़ी गतिविधियों को सराहनीय बताया।

दो दिवसीय सम्मेलन में हुआ अग्र अलंकरण समारोह

अग्र महाकुंभ सम्मेलन का उद्देश्य समाज के लोगों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना, सामाजिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करना और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करना था।

इस अवसर पर दशम अग्र अलंकरण समारोह भी आयोजित किया गया। इसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोगों और प्रतिभाओं को सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ मंत्री राजेश अग्रवाल, अमर अग्रवाल और सांसद चिंतामणि महाराज सहित कई प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे।

घोषणा पर अग्रवाल समाज ने जताया आभार

महाराजा अग्रसेन जयंती पर शासकीय अवकाश की घोषणा को समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं के सम्मान से जुड़ा कदम बताया। पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

जानकारी के मुताबिक, 11 अक्टूबर 2026 को राजनांदगांव में आयोजित अग्रसेन जयंती समारोह के दौरान भी मुख्यमंत्री की घोषणा के लिए आभार जताया गया था।

कौन थे महाराजा अग्रसेन, क्यों मनाई जाती है जयंती

महाराजा अग्रसेन को समाज में समानता, सहयोग, सेवा और जनकल्याण के आदर्शों से जोड़कर देखा जाता है। अग्रवाल समाज में उनकी जयंती विशेष उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है।

इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामाजिक सेवा और प्रतिभाओं के सम्मान जैसे आयोजन किए जाते हैं। महाराजा अग्रसेन के विचार समाज में आपसी सद्भाव बढ़ाने, जरूरतमंदों की सहायता करने और सामूहिक विकास को प्रोत्साहित करने की प्रेरणा देते हैं। छत्तीसगढ़ में जयंती पर शासकीय अवकाश की घोषणा को इन्हीं परंपराओं के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है।