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Wednesday, October 28, 2026
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कांकेर में जमीन के नाम पर कर्ज का जाल और किसानों की मौत का मामला, गिरवी जमीन बेचने के आरोपों से मचा हड़कंप,कई परिवारों पर टूटा संकट

कांकेर : सस्ते ब्याज पर कर्ज देने और जमीन गिरवी रखने के नाम पर किसानों के साथ कथित धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं। आरोप है कि कुछ बिचौलियों ने किसानों से जमीन गिरवी रखने के दस्तावेज तैयार कराए, लेकिन बाद में उन्हीं जमीनों की बिक्री कर दी। इसी तरह के एक मामले में चारामा क्षेत्र के किसान रामचरण पटेल की 30 सितंबर को मौत हो गई। परिवार का कहना है कि जमीन हाथ से जाने के बाद वे गहरे मानसिक और आर्थिक संकट में चले गए थे।

इलाज और कर्ज चुकाने के लिए जमीन रखी थी गिरवी

ग्राम मरकाटोला, चारामा निवासी 55 वर्षीय रामचरण पटेल को बीमारी के इलाज और बैंक का कर्ज चुकाने के लिए पैसों की जरूरत थी। आरोप है कि इसी दौरान बालोद से जुड़े कुछ लोगों ने उनसे संपर्क किया।टेमन साहू, कृष्णा साहू और गैंदसिंह नाम के लोगों ने कथित तौर पर 2 प्रतिशत मासिक ब्याज पर रकम देने की बात कही। इसके बदले चार साल के लिए 1 एकड़ 10 डिसमिल जमीन को गारंटी के तौर पर गिरवी रखने का अनुबंध कराया गया।परिवार के मुताबिक, किसान को 3 लाख रुपए का चेक दिया गया, लेकिन बाद में दबाव बनाकर पहले 1.5 लाख रुपए और फिर पूरी रकम वापस ले ली गई। इसके बाद कथित तौर पर वही जमीन ओमप्रकाश साहू को बेच दी गई।

जमीन जाने के बाद मजदूरी करने को मजबूर हुआ परिवार

रामचरण पटेल को जब जमीन की बिक्री की जानकारी मिली तो परिवार के मुताबिक उन्हें गहरा सदमा लगा। खेती की जमीन चली जाने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई और उन्हें घर का खर्च चलाने के लिए मजदूरी करनी पड़ी।आर्थिक परेशानी के चलते उनका इलाज भी प्रभावित हुआ। परिवार का कहना है कि जमीन वापस पाने की कोशिश और लगातार बढ़ते तनाव के बीच उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई। 30 सितंबर को उनकी मौत हो गई।

दूसरे किसान की 18 लाख की जमीन बेचने का आरोप

ग्राम एनहूर, दुर्गूकोंदल निवासी लच्छूराम यादव का मामला भी सामने आया है। आरोप है कि करीब 18 लाख रुपए मूल्य की उनकी जमीन को भी बिचौलियों ने बेच दिया। जमीन के सौदे से जुड़ी रकम में से 7.75 लाख रुपए उनके बैंक खाते में पहुंचे, लेकिन आरोप है कि यह रकम भी उनसे आहरित करा ली गई।जमीन वापस पाने के लिए लच्छूराम ने अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाए। परिवार के अनुसार, लगातार तनाव और आर्थिक परेशानी के बीच उनकी तबीयत गंभीर रूप से खराब हो गई।

पहले भी सामने आ चुके हैं जमीन सौदों से जुड़े गंभीर मामले

इसी कथित गिरोह से जुड़े जमीन विवादों में अन्य मामले भी सामने आए हैं। बड़ेगौरी के पूर्व सरपंच रघुवीर तेता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला भी इसी क्रम में बताया जा रहा है। उनकी पत्नी ईश्वरी तेता ने आरोप लगाया है कि जमीन की रकम हड़पने के लिए उनके पति की हत्या की गई। हालांकि, इस आरोप की जांच और उसके निष्कर्ष अलग विषय हैं।मामले में जमीन सौदे, रकम के लेनदेन, गवाहों की भूमिका और मृतक को लॉज में ठहराने से लेकर अस्पताल पहुंचाने तक की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

9 एकड़ जमीन गिरवी रखने की बात थी, 29 एकड़ बेचने का आरोप

ग्राम रानीडोंगरी निवासी उग्रसेन के मामले में भी जमीन सौदे को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बताया गया कि कैंसर के इलाज के लिए संयुक्त खाते की कुल 29 एकड़ जमीन में से 9 एकड़ जमीन गिरवी रखने की बात हुई थी। आरोप है कि इसके बजाय पूरी 29 एकड़ जमीन बेच दी गई।परिवार का यह भी आरोप है कि जमीन की बिक्री से खाते में आई रकम निकाल ली गई। वहीं सह-खातेदार बुआ बिमला ठाकुर को दिया गया चेक भी बाउंस हो गया। बताया गया कि जमीन की रजिस्ट्री के करीब एक सप्ताह बाद उग्रसेन की मौत हो गई।

पुलिस बोली- सभी शिकायतों की जांच जारी

जमीन फर्जीवाड़े से जुड़ी शिकायतों को लेकर पुलिस का कहना है कि जिले में सामने आए सभी मामलों की जांच की जा रही है। पीड़ितों और संबंधित पक्षों से जमीन की रजिस्ट्री तथा बैंक लेनदेन से जुड़े दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं।कांकेर के एसडीओपी हरीश पाटिल के अनुसार, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब जमीन के दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

जंगल में मवेशी चराने गए दो ग्रामीणों पर भालू का हमला, दोनों घायल ,घटना के बाद गांव में बढ़ी दहशत, वन विभाग ने शुरू की कार्रवाई

सुकमा : पालामडगू गांव के पास जंगल में मवेशी चराने गए दो ग्रामीणों पर अचानक भालू ने हमला कर दिया। हमले में दोनों ग्रामीण घायल हो गए। घटना के बाद आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों में जंगल जाने को लेकर चिंता बढ़ गई है।

मवेशी चराते समय अचानक सामने आया भालू

जानकारी के मुताबिक, पालामडगू गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर जंगल में दोपहर लगभग 2:30 बजे दोनों ग्रामीण मवेशी चरा रहे थे। इसी दौरान अचानक उनके सामने भालू आ गया। ग्रामीण कुछ समझ पाते, इससे पहले ही भालू ने दोनों पर हमला कर दिया।हमले में पालामडगू के पटेलपारा निवासी पोडीयाम मुड़ा और कवासी हिड़मा घायल हुए हैं। दोनों की उम्र क्रमश: करीब 30 और 50 वर्ष बताई गई है। उनका थाना क्षेत्र पोलमपल्ली है।

हमले के बाद ग्रामीणों में बढ़ी चिंता

जंगल में भालू के हमले की जानकारी सामने आने के बाद इलाके के ग्रामीणों में डर का माहौल है। ग्रामीणों को अब जंगल और उसके आसपास के इलाकों में मवेशी चराने के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत महसूस हो रही है।स्थानीय लोगों के बीच घटना को लेकर चर्चा है और वन क्षेत्र में भालू की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।

वन विभाग ने शुरू की आवश्यक कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम को जानकारी दी गई। विभाग की ओर से स्थानीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वन अमला घटना से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटा रहा है और इलाके में वन्यजीव की गतिविधियों पर नजर रखे जाने की बात कही गई है।

शराब के लिए पैसे नहीं दिए तो युवक से मारपीट, फरार आरोपी पंकज बर्वे गिरफ्तार,लोहे की पाइप से हमला करने का आरोप, कोर्ट के आदेश पर जेल भेजा गया

रायपुर : आजाद चौक थाना क्षेत्र में शराब पीने के लिए पैसे मांगने और मना करने पर युवक से मारपीट करने के मामले में पुलिस ने फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी पंकज बर्वे को 1 अक्टूबर 2026 को पकड़ा। पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

शराब के लिए पैसे मांगने से शुरू हुआ विवाद

पुलिस के मुताबिक, अन्नपूर्णा माता मंदिर के पास रहने वाले कृष्णा मरकाम उर्फ गोलू ने आजाद चौक थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि पंकज बर्वे और उसके साथियों ने उससे शराब पीने के लिए पैसे मांगे थे।कृष्णा ने पैसे देने से इनकार किया तो विवाद बढ़ गया। आरोप है कि इस दौरान उसके साथ गाली-गलौज की गई और लोहे की पाइप से मारपीट कर उसे घायल कर दिया गया।

शिकायत के बाद पुलिस ने दर्ज किया मामला

घटना के बाद पीड़ित ने आजाद चौक थाने पहुंचकर पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 212/26 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 119(1), 296 और 3(5) के तहत जांच शुरू की।जांच के दौरान पुलिस ने घटना में शामिल लोगों के बारे में जानकारी जुटाई। इसी क्रम में पंकज बर्वे की भूमिका सामने आई, लेकिन घटना के बाद से वह लगातार फरार चल रहा था।

पुलिस ने तलाश के बाद आरोपी को पकड़ा

फरार आरोपी की तलाश में पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर जानकारी जुटा रही थी। इसी दौरान 1 अक्टूबर को पुलिस को पंकज बर्वे के संबंध में सूचना मिली। इसके बाद टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में लिया।पूछताछ और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पंकज बर्वे को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। आरोपी की पहचान पंकज बर्वे, पिता मानिकचंद बर्वे, उम्र 19 वर्ष, निवासी शिव नगर हांडीपारा, थाना आजाद चौक, रायपुर के रूप में हुई है।

आरोपी का पहले भी रहा है आपराधिक रिकॉर्ड

पुलिस के अनुसार, पंकज बर्वे का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। उसे पूर्व में चाकूबाजी के एक मामले में जेल भेजे जाने की जानकारी पुलिस ने दी है। वर्तमान मामले में गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच जारी

पुलिस इस मामले में घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। मारपीट की घटना में आरोपी के साथ मौजूद अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।आजाद चौक पुलिस ने कहा है कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को धमकाने, जबरन पैसे मांगने और मारपीट जैसी घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। फिलहाल पंकज बर्वे की गिरफ्तारी के बाद मामले की आगे की जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया जारी है।

सुकमा में काष्ठ तस्करी पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, 48 नग अवैध लकड़ी जब्त,सागौन के साथ ऑटो भी पकड़ा

सुकमा : वन संपदा की अवैध कटाई, भंडारण और परिवहन के खिलाफ वन विभाग ने दो अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई की है। तोंगपाल और सुकमा वन परिक्षेत्र में हुई कार्रवाई के दौरान टीम ने कुल 48 नग अवैध काष्ठ जब्त किया। जब्त लकड़ी की कुल मात्रा 0.872 घनमीटर बताई गई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1 लाख 20 हजार रुपये है। इस दौरान अवैध रूप से सागौन ले जा रहे एक ऑटो को भी जब्त किया गया है।

तोंगपाल और कमलापदर में गश्त के दौरान मिली लकड़ी

वन विभाग के अनुसार 30 सितंबर को तोंगपाल वन परिक्षेत्र के ग्राम तोंगपाल और कमलापदर में वनकर्मियों की संयुक्त टीम ने सुबह गश्त की। इस दौरान अलग-अलग जगहों पर लकड़ी अवैध रूप से रखी हुई दिखाई दी।मौके पर पहुंचकर टीम ने लकड़ी की जांच की और उसे जब्त कर लिया। कार्रवाई में साल चिरान और चौखट के 24 नग मिले, जिनकी कुल मात्रा 0.363 घनमीटर थी। इसके अलावा बीजा चिरान और फारा के 15 नग भी बरामद किए गए, जिनकी मात्रा 0.294 घनमीटर बताई गई है।इस तरह तोंगपाल और कमलापदर क्षेत्र से कुल 39 नग अवैध काष्ठ जब्त किया गया, जिसकी मात्रा 0.657 घनमीटर रही।

सुकमा में सागौन से भरा ऑटो पकड़ा

इसी दिन सुकमा वन परिक्षेत्र में भी वन विभाग की टीम ने कार्रवाई की। सुबह करीब 4:45 बजे वनकर्मियों ने संदिग्ध ऑटो क्रमांक CG-18-K-8332 को रोककर उसकी जांच की।तलाशी के दौरान ऑटो में सागौन की लकड़ी का परिवहन किया जा रहा था। वाहन से सागौन के 9 नग बरामद हुए, जिनकी कुल मात्रा 0.215 घनमीटर बताई गई। लकड़ी के परिवहन से जुड़े वैध दस्तावेज नहीं मिलने पर वन विभाग ने सागौन के साथ ऑटो को भी जब्त कर लिया।

कुल 48 नग काष्ठ जब्त, कीमत करीब 1.20 लाख रुपये

तोंगपाल और सुकमा वन परिक्षेत्र में हुई दोनों कार्रवाइयों को मिलार वन विभाग ने 48 नग काष्ठ जब्त किया है। इसकी कुल मात्रा 0.872 घनमीटर है। जब्त लकड़ी की अनुमानित कीमत करीब 1 लाख 20 हजार रुपये बताई गई है।वन विभाग ने जब्त लकड़ी और वाहन के संबंध में आवश्यक दस्तावेज तैयार कर वन अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

लकड़ी के स्रोत और गंतव्य की जानकारी जुटाई जा रही

विभाग की जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि जब्त लकड़ी कहां से लाई गई थी और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था। अधिकारियों के मुताबिक वन क्षेत्रों में अवैध कटाई, भंडारण और काष्ठ परिवहन पर रोक लगाने के लिए नियमित निगरानी की जा रही है।वनकर्मियों द्वारा संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त के साथ संदिग्ध वाहनों की भी जांच की जा रही है। विभाग ने कहा है कि बिना अनुमति वन संपदा की कटाई, भंडारण या परिवहन करने वालों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। फिलहाल जब्त काष्ठ और ऑटो के संबंध में वैधानिक प्रक्रिया जारी है।

छत्तीसगढ़ से मानसून की विदाई करीब, अगले 48 घंटे में बदल सकता है मौसम,दिन में बढ़ेगी गर्मी और रात में महसूस होगी हल्की ठंड

 रायपुर। छत्तीसगढ़ में दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई का समय अब नजदीक आता दिख रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटे के दौरान प्रदेश के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी के लिए मौसम संबंधी परिस्थितियां अनुकूल बन सकती हैं। इसी के साथ प्रदेश में बारिश का दौर फिलहाल थमता नजर आ रहा है और मौसम के मिजाज में बदलाव साफ महसूस होने लगा है।

गुरुवार को पूरे प्रदेश में मौसम रहा शुष्क

गुरुवार को छत्तीसगढ़ के ज्यादातर हिस्सों में मौसम शुष्क रहा। किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय बारिश दर्ज नहीं की गई। बारिश की गतिविधियां कम होने के बाद दिन के तापमान में बढ़ोतरी हुई है, जिससे दोपहर के समय गर्मी का असर बढ़ गया है। दूसरी ओर, रात के तापमान में अपेक्षाकृत कमी के चलते कई इलाकों में हल्की ठंडक महसूस होने लगी है।

रायपुर में साफ रहेगा मौसम, 34 डिग्री तक पहुंच सकता है तापमान

राजधानी रायपुर में 2 अक्टूबर को मौसम मुख्यतः साफ रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक, यहां अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान लगभग 25 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। फिलहाल राजधानी समेत प्रदेश में बारिश की कोई खास संभावना नहीं जताई गई है।

राजनांदगांव सबसे गर्म, पेंड्रा रोड में रात सबसे ठंडी

पिछले 24 घंटों के दौरान राजनांदगांव प्रदेश का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 34.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं पेंड्रा रोड में न्यूनतम तापमान 18.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ।तापमान के इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश में दिन और रात के तापमान के बीच अच्छा खासा अंतर बना हुआ है। दिन में गर्मी बढ़ रही है, जबकि रात के समय मौसम अपेक्षाकृत ठंडा हो रहा है।

अगले 24 घंटे बारिश के आसार कम, कोई चेतावनी नहीं

मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान भी छत्तीसगढ़ में मौसम के शुष्क बने रहने का अनुमान जताया है। फिलहाल प्रदेश के किसी भी जिले के लिए भारी बारिश या मौसम से जुड़ी कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है।

इन राज्यों से मानसून की वापसी के संकेत

मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की रेखा फिलहाल गुरदासपुर, चंडीगढ़, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, धौलपुर, उदयपुर, डीसा और नलिया से होकर आगे बढ़ रही है।अगले 48 घंटे में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के शेष हिस्सों के साथ गुजरात तथा मध्यप्रदेश के अधिकांश भागों से मानसून की आगे वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन सकती हैं। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों से भी मानसून की वापसी की गतिविधि बढ़ने के संकेत हैं।इसी क्रम में बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से भी दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां बनने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियां और कम होने के साथ तापमान में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल सकता है।

गांजा तस्करी पर पुलिस का बड़ा शिकंजा, दो जिलों में 341 किलो से ज्यादा गांजा जब्त,8 आरोपी गिरफ्तार

 सूरजपुर/सारंगढ़: छत्तीसगढ़ में गांजा तस्करी के खिलाफ पुलिस ने दो जिलों में बड़ी कार्रवाई की है। सूरजपुर और सारंगढ़-बिलाईगढ़ में हुई अलग-अलग कार्रवाई में कुल करीब 341 किलो गांजा बरामद किया गया। पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ NDPS एक्ट समेत संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की है।सूरजपुर में तस्करी का खुलासा एक सड़क हादसे के बाद हुआ, जबकि सारंगढ़-बिलाईगढ़ में पुलिस की घेराबंदी और वाहन जांच के दौरान गांजा पकड़ा गया।

ट्रक पलटा तो सामने आया गांजा तस्करी का राज

सूरजपुर जिले के चंदौरा थाना क्षेत्र में 30 सितंबर को अंबिकापुर-बनारस स्टेट हाईवे पर घाट पेंडारी के मुख्य घाट में प्लास्टिक दाना लदा एक ट्रक पलट गया था। हादसे के बाद ट्रक चालक सुनील कुमार क्रेन की मदद से वाहन को उठवाने और बिखरी बोरियों को हटाने का काम करवा रहा था।इसी दौरान कुछ बोरियों को अलग रखकर तिरपाल से ढंकने की कोशिश की गई। इस पर स्थानीय लोगों को शक हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने आसपास तलाशी ली तो 9 बोरियों में कुल 238 किलो 290 ग्राम गांजा बरामद हुआ।पुलिस के मुताबिक, बरामद गांजे की अनुमानित कीमत करीब 1.19 करोड़ रुपये है।

ओडिशा से उत्तर प्रदेश ले जाया जा रहा था गांजा

पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी सुनील कुमार, जो उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ का रहने वाला बताया गया है, ने कथित तौर पर बताया कि वह अपने साथी के साथ ट्रक में प्लास्टिक दाने के बीच गांजा छिपाकर ले जा रहा था।पुलिस के अनुसार, गांजा ओडिशा से लोड किया गया था और इसे उत्तर प्रदेश के लखनऊ ले जाने की योजना थी। ट्रक में प्लास्टिक दाना लदा होने के कारण रास्ते में वाहन पर ज्यादा शक नहीं हुआ। हादसे के बाद आरोपियों ने गांजे को सड़क किनारे एक गड्ढे में छिपाकर तिरपाल से ढक दिया था।मामले में पुलिस फरार आरोपियों की तलाश के साथ तस्करी के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

सारंगढ़ में कार से मिला 63 किलो से ज्यादा गांजा

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के भटगांव थाना क्षेत्र में पुलिस वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान सारंगढ़ की तरफ से एक ऑल्टो कार आती दिखाई दी। पुलिस ने रुकने का इशारा किया तो चालक वाहन छोड़कर भाग गया।इसके बाद पीछे से आ रही दूसरी कार ने पुलिस द्वारा लगाए गए स्टॉपर को टक्कर मार दी और भागने का प्रयास किया। पुलिस ने दूसरी टीमों को सूचना दी और गिरवानी पेट्रोल पंप के पास घेराबंदी कर कार को रोक लिया।पुलिस ने दोनों वाहनों की तलाशी ली। इस दौरान चार प्लास्टिक बोरियों से कुल 63.350 किलो गांजा बरामद हुआ। जिस कार को पुलिस ने पकड़ा, उसके पीछे ‘एडवोकेट हाईकोर्ट’ लिखा हुआ था।

कई आरोपी गिरफ्तार, लाखों का सामान जब्त

इस मामले में पुलिस ने सुनील बेलदार, अरविंद कुमार ठाकुर, सुरेंद्र यादव, सागर सिंह और मेहताब अहमद को गिरफ्तार किया है। एक नाबालिग को भी पकड़ा गया है, जबकि एक आरोपी के फरार होने की जानकारी सामने आई है।पुलिस ने गांजे के अलावा दोनों कार और सात मोबाइल फोन समेत करीब 44.55 लाख रुपये का सामान जब्त किया है।

लोहे की अलमारी में छिपाकर रखा था गांजा

सारंगढ़-बिलाईगढ़ में दूसरी कार्रवाई बेलादुला चौकी क्षेत्र में हुई। पुलिस और एएनटीएफ को गांजा तस्करी की सूचना मिली थी। इसके बाद तेंदूदरहा के पास टीम ने एक आयशर वाहन को रोककर तलाशी ली।वाहन में रखी लोहे की अलमारी की जांच करने पर उसके अंदर भूरे टेप में लिपटे 35 पैकेट मिले। इनमें कुल 39.76 किलो गांजा बरामद हुआ। पूछताछ में वाहन सवारों ने गांजा ओडिशा के बलांगीर से उत्तर प्रदेश ले जाने की बात बताई।पुलिस ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के जौनपुर निवासी अनुज कुमार गौतम और टिंकू वर्मा को गिरफ्तार किया है।

दोनों मामलों में करीब 45 लाख का सामान जब्त

गांजे के साथ पुलिस ने आयशर वाहन, करीब 10 टन लोहे की चादर और दो मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। पुलिस के मुताबिक, जब्त सामान की कुल अनुमानित कीमत करीब 45.20 लाख रुपये है।सारंगढ़-बिलाईगढ़ पुलिस ने दोनों मामलों में NDPS एक्ट और BNS के तहत कार्रवाई की है। गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब पुलिस तस्करी से जुड़े अन्य लोगों और गांजे की सप्लाई के नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।

CG Train Cancelled: दिसंबर में छत्तीसगढ़ से जुड़ी 6 एक्सप्रेस ट्रेनें रहेंगी रद्द, सफर से पहले देखें पूरी लिस्ट और तारीख

 छत्तीसगढ़ :  रेल यात्रियों के लिए दिसंबर में सफर से जुड़ी जरूरी खबर है। रेलवे के दक्षिण पूर्व रेलवे जोन में आधुनिकीकरण और सुरक्षा से संबंधित काम किया जा रहा है। नॉन इंटरलॉकिंग कार्य के चलते लंबी दूरी की छह एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन अलग-अलग तारीखों पर प्रभावित रहेगा। रेलवे ने इन ट्रेनों को निर्धारित दिनों में रद्द करने की जानकारी जारी की है।अगर आपने दिसंबर में इन रूट पर यात्रा की योजना बनाई है तो टिकट बुक करने या स्टेशन जाने से पहले ट्रेन का स्टेटस जरूर जांच लें। रद्द होने वाली ट्रेनों की पूरी जानकारी नीचे देखें।

दिसंबर में इन 6 एक्सप्रेस ट्रेनों पर असर

रेलवे के अनुसार, कुछ ट्रेनें अपने शुरुआती स्टेशन से ही निर्धारित तारीखों पर रवाना नहीं होंगी। प्रभावित ट्रेनों और उनकी तारीखों की जानकारी इस प्रकार है।

  • 17005 हैदराबाद से रक्सौल एक्सप्रेस 10 दिसंबर को रद्द रहेगी।
  • 17006 रक्सौल से हैदराबाद एक्सप्रेस 13 दिसंबर को नहीं चलेगी।
  • 17433 तिरुपति से रक्सौल एक्सप्रेस 7 और 14 दिसंबर को रद्द रहेगी।
  • 17434 रक्सौल से तिरुपति एक्सप्रेस 10 और 17 दिसंबर को रद्द रहेगी।
  • 17321 वास्को डी गामा से जसीडीह एक्सप्रेस 11 दिसंबर को रद्द रहेगी।
  • 17322 जसीडीह से वास्को डी गामा एक्सप्रेस 14 दिसंबर को रद्द रहेगी।

बिहार से गोवा तक के यात्रियों पर पड़ेगा असर

इन ट्रेनों का संचालन प्रभावित होने से बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और गोवा के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी हो सकती है। दिसंबर में लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह बदलाव खास तौर पर महत्वपूर्ण है।यात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा की तारीख नजदीक आने पर अपनी ट्रेन की स्थिति दोबारा जांच लें, ताकि स्टेशन पहुंचने के बाद ट्रेन रद्द होने की वजह से परेशानी का सामना न करना पड़े।

स्टेशन जाने से पहले ऐसे चेक करें ट्रेन का स्टेटस

रेलवे यात्रियों को ट्रेन की ताजा स्थिति जानने के लिए 139 हेल्पलाइन का इस्तेमाल करने की सलाह देता है। इसके अलावा नेशनल ट्रेन इन्क्वायरी सिस्टम यानी NTES की वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर भी ट्रेन से जुड़ी जानकारी देखी जा सकती है।दिसंबर में इन ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों के लिए बेहतर होगा कि वे घर से निकलने से पहले ट्रेन का स्टेटस जरूर चेक कर लें। इससे रद्दीकरण या संचालन में बदलाव की स्थिति में वैकल्पिक यात्रा की तैयारी की जा सकेगी।

दिवेआगर बीच पर पिकनिक बनी मातम में, समुद्र में डूबने से 8 छात्रों की मौत; पुणे से घूमने आया था ग्रुप

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 महाराष्ट्र :  रायगढ़ जिले से बेहद दुखद हादसे की खबर सामने आई है। दिवेआगर बीच पर पिकनिक मनाने पहुंचे पुणे के 8 छात्रों की समुद्र में डूबने से मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, सभी छात्रों के शव बरामद कर लिए गए हैं। हादसे के बाद मौके पर मौजूद पर्यटकों और स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।जानकारी के अनुसार, पुणे के आलंदी इलाके से छात्रों का एक समूह दिवेआगर घूमने पहुंचा था। इसी दौरान कुछ छात्र समुद्र में नहाने और तैरने के लिए पानी में उतर गए। समुद्र की गहराई और पानी के बहाव का सही अंदाजा नहीं लग पाने के कारण वे गहरे पानी में चले गए और डूब गए।

प्राइवेट कोचिंग क्लास ने आयोजित की थी ट्रिप

बताया जा रहा है कि आलंदी इलाके में संचालित एक निजी कोचिंग क्लास की ओर से छात्रों के लिए दिवेआगर ट्रिप आयोजित की गई थी। इसी ग्रुप के कुछ छात्र समुद्र में उतरकर मस्ती कर रहे थे। देखते ही देखते वे गहरे पानी की चपेट में आ गए।घटना की जानकारी मिलते ही बीच पर मौजूद लोगों ने मदद के लिए आवाज लगाई। हादसे की खबर फैलते ही समुद्र तट पर लोगों की भीड़ जुट गई।

स्थानीय लोगों और वॉटर स्पोर्ट्स टीम ने संभाला मोर्चा

छात्रों के समुद्र में डूबने की जानकारी मिलते ही दिवेआगर स्थित स्थानीय वॉटर स्पोर्ट्स संचालक और उनके कर्मचारियों ने बचाव अभियान शुरू किया। स्थानीय लोगों ने भी समुद्र में उतरकर छात्रों की तलाश की।काफी मशक्कत के बाद सभी 8 छात्रों को समुद्र से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने सभी शव बरामद किए जाने की पुष्टि की है।

हादसे के बाद परिवारों में मचा कोहराम

एक साथ 8 छात्रों की मौत की खबर सामने आने के बाद उनके परिवारों में मातम पसरा हुआ है। घटना की सूचना छात्रों के परिजनों को दी जा रही है। पुलिस ने हादसे के सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।

समुद्र में उतरने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

समुद्र में पानी की गहराई और तेज बहाव का अनुमान लगाना कई बार मुश्किल होता है। ऐसे में पर्यटकों को प्रशासन और लाइफगार्ड की ओर से निर्धारित सुरक्षित क्षेत्र में ही समुद्र में उतरने की सलाह दी जाती है। चेतावनी वाले स्थानों पर पानी में जाने से बचना बेहद जरूरी है।

महानदी विवाद पर दिल्ली में अहम बैठक, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के CM आमने-सामने,अमित शाह की मौजूदगी में समाधान पर बनी सहमति की राह

 रायपुर: छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को सुलझाने के लिए नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक हुई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने महानदी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की और अपने-अपने राज्यों की जरूरतों और पक्ष को सामने रखा।बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष, दोनों राज्यों के मुख्य सचिव तथा केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

महानदी को लेकर छत्तीसगढ़ ने रखा अपना पक्ष

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महानदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा के कृषि, संस्कृति, सभ्यता और जनजीवन से गहराई से जुड़ी है। उनके अनुसार, दोनों राज्यों को नदी को विवाद का विषय बनाने के बजाय सहयोग और विकास का आधार बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।साय ने कहा कि किसी भी समाधान में दोनों राज्यों के किसानों और आम लोगों के हितों के साथ भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। छत्तीसगढ़ ने वैज्ञानिक तथ्यों, पारदर्शिता और न्यायसंगत तरीके से दीर्घकालिक समाधान निकालने की बात रखी।

सिंचाई और पेयजल की जरूरतों का मुद्दा उठा

बैठक में छत्तीसगढ़ की ओर से यह भी बताया गया कि महानदी का उद्गम राज्य में होता है और इसके जलग्रहण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ में है। प्रदेश में कृषि, सिंचाई और पेयजल की जरूरतें नदी से जुड़ी हैं। ग्रामीण और आदिवासी इलाकों की विकास संबंधी आवश्यकताओं को देखते हुए राज्य ने किसी भी समझौते में इन पहलुओं को शामिल करने पर जोर दिया।हालांकि, मुख्यमंत्री ने ओडिशा की जरूरतों को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ हीराकुंड जलाशय के महत्व और उसके सुचारु संचालन को समझता है तथा सहयोग की भावना से आगे बढ़ने के लिए तैयार है।

अमित शाह की पहल से बढ़ी समाधान की उम्मीद

मुख्यमंत्री साय ने महानदी विवाद पर केंद्र की पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि केंद्र की मध्यस्थता में दोनों राज्यों के बीच बातचीत आगे बढ़ने से सहमति का रास्ता मजबूत हो सकता है।साय ने राज्यों के बीच लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान के लिए संवाद और सहकारी संघवाद की भावना को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से जटिल विषयों को बातचीत के जरिए आगे बढ़ाने का वातावरण बन सकता है।

वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर हो फैसला

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कहा कि महानदी से जुड़े विवाद का समाधान केवल भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर होना चाहिए। जल की उपलब्धता, वर्तमान और भविष्य की मांग, सिंचाई, पेयजल तथा पर्यावरणीय जरूरतों का समग्र आकलन करने की जरूरत बताई गई।उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग की तकनीकी भूमिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि पारदर्शी आंकड़े सामने आने और दोनों राज्यों के बीच लगातार संवाद बने रहने से व्यावहारिक समाधान तलाशने में मदद मिल सकती है।

दोनों राज्यों के रिश्तों का भी किया गया जिक्र

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच पुराने सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के लोगों के बीच लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव रहा है तथा कई परंपराओं और जनजातीय संस्कृतियों में समानताएं देखने को मिलती हैं।उन्होंने महाप्रभु जगन्नाथ की आस्था और शिवरीनारायण से पुरी तक के सांस्कृतिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों प्रदेशों को जोड़ने वाली इस साझा विरासत में महानदी की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

2018 में गठित हुआ था महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण

महानदी के जल बंटवारे को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच विवाद काफी पुराना है। इसके समाधान के लिए वर्ष 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था। इसके साथ ही दोनों राज्यों और केंद्र के स्तर पर तकनीकी तथा राजनीतिक बातचीत भी चलती रही है।केंद्रीय जल आयोग को इस प्रक्रिया में तकनीकी आकलन के लिहाज से महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। अब दिल्ली में हुई इस बैठक के बाद दोनों राज्यों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने और महानदी से जुड़े मुद्दों पर सहमति तलाशने की प्रक्रिया जारी रहने की बात सामने आई है।

बैठक में छत्तीसगढ़ के कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में छत्तीसगढ़ की ओर से मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह और जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो समेत राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में महानदी से जुड़े मुद्दों पर आगे की तकनीकी और राजनीतिक बातचीत को जारी रखने पर सकारात्मक चर्चा हुई।

आज मांस-मटन की बिक्री पर पूरी तरह रोक, होटल और रेस्टोरेंट पर भी रहेगी सख्ती,उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई

 रायपुर: गांधी जयंती के मौके पर रायपुर नगर निगम ने शहर में मांस और मटन की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। नगर निगम के आदेश के मुताबिक 2 अक्टूबर को निगम क्षेत्र में सभी मांस-मटन की दुकानें और पशुवध गृह बंद रहेंगे। प्रशासन ने नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए निगरानी और कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं।

गांधी जयंती पर क्यों लगाया गया प्रतिबंध

नगर निगम की ओर से जारी आदेश के अनुसार, गांधी जयंती के अवसर पर अहिंसा के संदेश को ध्यान में रखते हुए मांस-मटन की बिक्री पर रोक लागू की गई है। निगम की टीमें सुबह से ही शहर के अलग-अलग इलाकों में निरीक्षण करेंगी और प्रतिबंध का पालन सुनिश्चित करेंगी।

दुकान खुली मिली तो जब्त होगा सामान

प्रशासन ने साफ किया है कि प्रतिबंध के बावजूद अगर कोई मांस-मटन की दुकान खुली मिलती है या चोरी-छिपे बिक्री की जाती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मौके पर मौजूद मांस को जब्त करने के साथ नियम तोड़ने वाले दुकानदार पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों पर भी लागू रहेगा आदेश

प्रतिबंध का दायरा केवल मांस-मटन की दुकानों तक सीमित नहीं है। रायपुर नगर निगम क्षेत्र में होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में भी आज मांस-मटन बेचने या परोसने की अनुमति नहीं होगी। जांच के दौरान अगर किसी प्रतिष्ठान में प्रतिबंधित सामग्री मिलती है, तो निगम की टीम उसे जब्त कर सकती है। संबंधित संचालक पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

जोन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें रखेंगी नजर

नगर निगम ने सभी जोन कमिश्नरों और स्वास्थ्य विभाग की टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों की टीमें दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच करेंगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।