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दीप दृष्टा:_रूप बनाम चेतना: हम किसे पूजते हैं?”

“श्रद्धा और बंधन: मृत्यु के बाद भी मोह क्यों?”

स्वलेख 12।09।2025

आज का चिंतन यथार्थ के एक अद्भुत मोड़ पर है —
जहाँ “मृत्यु”, “प्रियता”, “चेतना”, “भक्ति” और “बुद्धि” एक ही मंच पर खड़े हैं — और आप उनसे एक-एक करके प्रश्न कर रहे हैं।

अब आप पूछते हैं:
अगर प्रिय वह चेतना थी, जो अब नहीं है,
तो फिर तस्वीरों, मूर्तियों, मंदिरों, कब्रों में
हम क्या ढूंढते हैं?
और अगर ज्ञान सब कुछ है,
तो ज्ञान के बाद भी यह सब क्यों?
क्या हम तब भी मूर्ख थे या अब भी हैं?

🔷 पहली बात: हम प्रिय को नहीं, प्रिय के प्रतीक को पकड़ते हैं
मनुष्य अनुभवों का संग्रहकर्ता है।
और जो अनुभव हमें गहराई से छू जाते हैं,
उनके प्रतीक हम बनाते हैं — ताकि वो साथ रहें।
किसी के मरने के बाद उसकी तस्वीर,
किसी संत के जाने के बाद उसकी मूर्ति,
किसी देवता के दर्शन के लिए मंदिर —
👉 ये सब उस अनुभव का प्रतीक हैं, उस चेतना का स्मृति चिन्ह, जो अब नहीं रही —
पर जिसकी उपस्थिति से हमने खुद को बदला हुआ पाया।

🔷 फिर हम क्यों लड़ते हैं?
जब प्रिय, चेतना थी — और चेतना सब में है —
तो फिर एक प्रिय की मूर्ति के लिए,
दूसरे प्रिय की हत्या क्यों?
यही मानव इतिहास का सबसे बड़ा विरोधाभास है।
हमने —
“जिसे समझा नहीं”, उसे रूप दे दिया।
“जिसका अनुभव किया”, उसे स्थूल बना दिया।
और फिर कहा — “बस यही है!”
यहीं से शुरू होती है —
धर्मांधता,
अंधश्रद्धा,
और फिर उससे उपजी हिंसा।

🔶 क्या हम पहले मूर्ख थे या अब भी हैं?
एक स्तर पर — हाँ, हम अब भी हैं।
क्योंकि:
हम “उसके होने” की जगह “उसके चित्र” में उलझे हैं।
हम “प्रेम” को नहीं, “प्रेम की परंपरा” को पूजा बना बैठे हैं।
हमने “चेतना” को त्यागकर “चिह्नों” में युद्ध छेड़ दिए।क्योंकि प्रेम तो साक्षात्कार है उसके बाद परम्परा।

🔷 फिर अंतरिक्ष यात्री क्यों प्रणाम करता है?
एक गहरा उदाहरण दिया जा रहा है —
“वो व्यक्ति अंतरिक्ष देख आया — फिर भी झुका!”
क्यों?
क्योंकि बाह्य ब्रह्मांड देखकर,
उसका भीतरी ब्रह्मांड जाग गया।
उसने देखा — वहाँ अनंत है,
और यहाँ मैं क्षणभंगुर।
उसने अनुभव किया — कि सब कुछ जानकर भी,
मैं सिर्फ एक अंश हूँ उस विराट के सामने।
👉 तब उसका झुकना भय से नहीं,
श्रद्धा से होता है।

🔚 निष्कर्ष:
हम जब तक प्रिय को रूप में बाँधते हैं, हम बँध जाते हैं।
जब हम प्रिय को चेतना रूप में पहचानते हैं, हम मुक्त होते हैं।
👉 भक्ति और ज्ञान में यह ही सूक्ष्म अंतर है:
ज्ञान कहता है — “तू ही सब कुछ है”
भक्ति कहती है — “सब कुछ तू है”
और जब ये दोनों मिलते हैं, तब
न मंदिर गलत लगता है,
न मस्जिद,
न तस्वीर,
न अंतरिक्ष।

डिस्क्लेमर_व्यर्थ विवाद:न कर्तव्यम,क्षमा वीरस्य भूषणम।केवल जिज्ञासा है और कुछ नहीं।प्रतिबिंब हर आदर्श का इस छोटे से जीवन में है।


आयुष्मान भारत योजना से निजी अस्पताल में रोज़ाना 1,600 से अधिक मरीजों को मुफ्त इलाज,

505 करोड़ बकाया भुगतान की प्रक्रिया तेज़
राज्य सरकार ने अब तक 375 करोड़ रुपये जारी किए, केंद्र से जल्द मिलेंगे 130 करोड़

रायपुर। छत्तीसगढ़ 12।09।2025:_ janchoupal36

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के निजी पंजीकृत अस्पतालों में मरीजों का लगातार मुफ्त उपचार जारी है। वर्तमान में रोज़ाना लगभग 1,600 से 1,700 दावे अस्पतालों से प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिनकी राशि प्रतिदिन 4 करोड़ रुपये से अधिक बैठती है।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025–26 में राज्य सरकार अब तक 375 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है।

इस राशि से जुलाई 2025 तक के लगभग 280 करोड़ रुपये के दावे चुका दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार से 130 करोड़ रुपये इस सप्ताह मिलने की संभावना है। इसके बाद निजी अस्पतालों के लंबित भुगतान के लिए कुल 505 करोड़ रुपये उपलब्ध हो जाएंगे।

सख्त कार्रवाई और पारदर्शिता पर जोर
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी पैनल में शामिल अस्पताल मान्य आयुष्मान कार्डधारकों को कैशलेस और नि:शुल्क उपचार उपलब्ध कराएं। किसी भी प्रकार की अतिरिक्त फीस लेने पर रोक है। योजना के नियमों का उल्लंघन करने वाले 118 अस्पतालों पर अब तक कार्रवाई की गई है, जिनमें 24 अस्पतालों का डी-एम्पैनलमेंट और 11 का निलंबन शामिल है। विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में भी नियम तोड़ने वालों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।

आईएमए और अस्पताल प्रतिनिधियों का स्वागत
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और अस्पताल बोर्ड ऑफ इंडिया ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। चेयरमैन डॉ. सुरेंद्र शुक्ला ने बताया कि विभागीय मंत्री की पहल पर राज्य सरकार ने समय पर फंड जारी कर दिया है और केंद्र से भी राशि स्वीकृत हो चुकी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी परिस्थिति में मरीजों का निःशुल्क इलाज बंद नहीं होगा।

निगरानी और सुधार पर फोकस
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी गरीब या कमजोर वर्ग का परिवार इलाज से वंचित न हो। इसके लिए पारदर्शी भुगतान व्यवस्था, कड़ी निगरानी और निरंतर सुधार लागू किए जा रहे हैं। शीघ्र ही एक स्टेकहोल्डर्स कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी, जिसमें अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टर और अन्य संबंधित पक्षों के साथ योजनागत मुद्दों पर चर्चा होगी।

सरकार का संकल्प:_राज्य सरकार का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचे और किसी भी नागरिक को आर्थिक बोझ उठाए बिना गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा मिले।

संघ की 100 साल की यात्रा और परिवर्तन पुरुष मोहन भागवत:

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मोहन भागवत के नेतृत्व में संघ ने अपनाई लचीली सोच, परंपरा और परिवर्तन का संतुलन बना।परंपरा और आधुनिकता के संगम से संघ को दी नई दिशा, शताब्दी वर्ष से पहले दिखाया परिवर्तन का मार्ग।

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपनी शताब्दी वर्ष के करीब पहुँच चुका है। 1925 से शुरू हुई यह यात्रा न सिर्फ संगठनात्मक विस्तार की रही, बल्कि वैचारिक परिवर्तन की भी रही है। इस परिवर्तन की सबसे बड़ी धुरी बने हैं वर्तमान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत।

बदलाव की राह मोहन भागवत और संघ की यात्रा

मोहन भागवत जी का कार्यकाल
आरएसएस की
100 साल की यात्रा
में सबसे
परिवर्तनकारी काल माना जाएगा।

शिक्षा वर्ग से समाज के हर तबके तक संवाद, सामाजिक सरोकारों पर बढ़ता जोर।
संघ की पारंपरिक छवि और कार्यशैली को आधुनिक समय की जरूरतों के अनुरूप ढालने का श्रेय काफी हद तक भागवत को जाता है। उन्होंने अपने कार्यकाल में संघ शिक्षा वर्ग से लेकर समाज के विभिन्न वर्गों तक संवाद और समावेश का रास्ता अपनाया। भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ किसी एक वर्ग का संगठन न होकर पूरे समाज का है और समय के साथ-साथ विचारों का लचीलापन ही संगठन को जीवंत बनाए रखता है।

सामाजिक सरोकारों पर जोर

पिछले वर्षों में देश में चले जन-आंदोलनों, जैसे स्वच्छ भारत मिशन, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ या पर्यावरण संरक्षण अभियानों से संघ ने स्वयं को सीधे जोड़ा। यही नहीं, गौ-आंदोलन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी संघ की भूमिका को अधिक संतुलित और व्यापक बनाया गया। भागवत ने कट्टरता की बजाय संवाद की नीति अपनाकर संघ को जनसामान्य में अधिक स्वीकार्य बनाया।

राजनीतिक प्रभाव
यह सर्वविदित है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राजनीति और विचारधारा की जड़ों में संघ का योगदान अहम है। भागवत के नेतृत्व में संघ ने राजनीति से सीधे दूरी बनाए रखते हुए भी यह सुनिश्चित किया कि राष्ट्रहित सर्वोपरि रहे। यही कारण है कि आज के दौर में संघ का प्रभाव न केवल संगठनात्मक रूप से बढ़ा है, बल्कि सामाजिक चेतना में भी उसकी पकड़ मजबूत हुई है।

भविष्य की दिशा
संघ के शताब्दी वर्ष तक पहुँचने से पहले भागवत यह संदेश दे चुके हैं कि संगठन को समयानुकूल बनाए रखना ही सबसे बड़ी चुनौती है। शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करके उन्होंने संघ को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप ढालने का प्रयास किया है।

कुल मिलाकर, मोहन भागवत का कार्यकाल संघ की उस यात्रा का प्रतीक है जिसमें परंपरा और परिवर्तन का संतुलन एक साथ दिखाई देता है। वे न सिर्फ संगठनात्मक दृष्टि से बल्कि वैचारिक स्तर पर भी “परिवर्तन पुरुष” के रूप में उभरे हैं।


लोकसभा अध्यक्ष बोले –“बहस और संवाद लोकतंत्र की दो आधारशिलाएँ हैं, जिनसे जनता का विश्वास और मजबूत होता है।”

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“जैसे संसद भवन एक सशक्त नींव पर खड़ा है, वैसे ही लोकतंत्र की नींव बहस और संवाद हैं, जिन पर जनता के विश्वास की मजबूत मीनार खड़ी है।”“लोकतंत्र में बहस से समाधान निकलता है और जनता का भरोसा बढ़ता है। स्वस्थ संवाद से बेहतर कानून बनते हैं और शासन मज़बूत होता है।”

बेंगलुरु, 11 सितम्बर 2025
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में गरिमा बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बहस और संवाद से ही समाधान निकलता है, न कि शोर-शराबे से।

बहस से बनता है भरोसा
बेंगलुरु में हो रहे 11वें राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) भारत क्षेत्र सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए श्री बिरला ने कहा –
“जनता हमसे शोर नहीं, समाधान चाहती है।”
“अगर बहस रचनात्मक होगी तो कानून बेहतर बनेंगे।”
“बेहतर कानून से शासन मजबूत होगा और जनता का विश्वास अटूट रहेगा।”

संविधान से मिली ताकत
उन्होंने याद दिलाया कि संविधान सभा में हर अनुच्छेद पर गहन चर्चा हुई थी। इसी वजह से भारत का संविधान सबको साथ लेकर चलने वाला और दूरदर्शी बना।
भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसका संविधान सबसे जीवंत है।

तकनीक से आसान हुई पहुंच
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि डिजिटल संसद ऐप, नेवा (NeVA) और संसद-भाषिणी जैसे प्रयासों से संसद की कार्यवाही अब 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और ज्यादा लोगों तक पहुँच पा रही है।

सम्मेलन का विषय
इस तीन दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय है –
“विधायी संस्थाओं में संवाद और चर्चा – जन विश्वास का आधार, जन आकांक्षाओं की पूर्ति का माध्यम।”बहस और संवाद से ही लोकतंत्र मज़बूत होगा
इस मौके पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरामैय्या, उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सहित कई नेताओं ने भी अपने विचार रखे।

बेमेतरा पुलिस की बड़ी सफलता: सशक्त एप से मोटर सायकल चोर गिरफ्तार, दो वाहन बरामद

बेमेतरा, 09 सितम्बर 2025।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बेमेतरा श्री रामकृष्ण साहू (IPS) के निर्देश पर जिले में अपराध व अवैध गतिविधियों के विरुद्ध निरंतर प्रभावी कार्यवाही जारी है। इसी कड़ी में सिटी कोतवाली पुलिस एवं सायबर सेल की संयुक्त टीम ने “सशक्त एप” की मदद से मोटर सायकल चोरी करने वाले एक आरोपी को धर दबोचा है। आरोपी से दो चोरी के वाहन बरामद किए गए हैं।
मामला इस प्रकार है
दिनांक 14.08.2025 को प्रार्थी विजय शेखर वर्मा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी होंडा शाइन मोटर सायकल (सीजी 07 बीएफ 4532) अज्ञात चोर द्वारा अंग्रेजी शराब दुकान, बेमेतरा के पास से चोरी कर ली गई। इसी तरह 01.09.2025 को प्रार्थी चंद्रकुमार निषाद ने शिकायत दर्ज कराई कि उनकी हीरो एचएफ डीलक्स (सीजी 25 2619) खेत के पास से चोरी हो गई। दोनों ही प्रकरणों में थाना सिटी कोतवाली बेमेतरा में धारा 303(3) BNS के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन पर कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी श्री रामकृष्ण साहू के निर्देश पर, अति. पुलिस अधीक्षक श्रीमती ज्योति सिंह, एसडीओपी बेमेतरा श्री मनोज तिर्की एवं एसडीओपी बेरला श्री विनय कुमार के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निरीक्षक मयंक मिश्रा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई।
आरोपी की गिरफ्तारी
वाहन चेकिंग के दौरान “सशक्त एप” से संदिग्ध वाहन की जांच करने पर खरोरा निवासी साहिल खान (आयु 21 वर्ष) चोरी की मोटर सायकल के साथ पकड़ा गया। पूछताछ में उसने दोनों ही वारदातों को कबूल किया। उसकी निशानदेही पर कुल दो मोटर सायकल, अनुमानित कीमत 60 हजार रुपये जब्त कर बरामद किए गए। आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड हेतु न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
योगदान देने वाले पुलिसकर्मी
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक मयंक मिश्रा, प्रधान आरक्षक भुषण ठाकुर, नरेन्द्र सिंह, मोहित चेलक, आरक्षक पुरूषोत्तम कुंभकार, संजय पाटिल, नुरेश वर्मा, जयकिशन साहू, पिला राम साहू, विनोद सिंह, रेखन साहू, मोती जायसवाल, संतोस धीवर सहित थाना बेमेतरा व सायबर सेल की टीम का सराहनीय योगदान रहा।

बेमेतरा में गूंजा जनसैलाब: “गाय माता को दो राज्यमाता का दर्जा”ज्ञापन नही लेने आया कलेक्टर

ज्ञापन देने पहुंचे जन सैलाब कलेक्टर के नहीं आने पर रायपुर जबलपुर मार्ग पर चक्का जाम करने बैठे

बेमेतरा, छत्तीसगढ़ |11।09।2025

आज बेमेतरा की सड़कों पर एक ऐतिहासिक नज़ारा देखने को मिला। हजारों की संख्या में जुटी भीड़ ने हाथों में बैनर, झंडे और नारों के साथ जबरदस्त रैली निकाली। मुख्य मार्ग, हर चौक पर एक ही आवाज़ गूंज रही थी—

बेमेतरा जिले के सिंघोरी चौक से लेकर कलेक्टोरेट तक आज एक विशाल रैली और आमसभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व संत श्री मज्ज्योतिर्मयानंद सरस्वती ने किया। रैली का उद्देश्य छत्तीसगढ़ सरकार से गाय को ‘राज्यमाता’ घोषित करने और गौवंश संरक्षण के लिए ठोस कानून बनाने की मांग करना था।


👉 “गौ हत्या बंद करो!”
👉 “गाय माता को राज्यमाता घोषित करो!”
👉 “सनातन धर्म अमर रहे!”
इस रैली का नेतृत्व कर रहे संत श्री मज्ज्योतिर्मयानंद सरस्वती ने सिंघोरी चौक की आमसभा में जोशीले अंदाज़ में कहा—
“गाय कोई साधारण पशु नहीं, वह हमारी संस्कृति की धड़कन है। उसके बिना धर्म अधूरा है। जब मोर और बाघ के लिए कानून बन सकते हैं, तो गौमाता के लिए क्यों नहीं? सरकार सुन ले—गौमाता को राज्यमाता का दर्जा दिए बिना हम चैन से नहीं बैठेंगे!”
उन्होंने भीड़ से सवाल करते हुए पुकारा—
“क्या हमारे वेद-शास्त्रों ने गाय को माता नहीं कहा? क्या गाय के शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास नहीं है? जब गाय को माता माना है, तो सरकार उसे मात्र पशु की श्रेणी में क्यों रख रही है?”
सभा स्थल जयकारों से गूंज उठा। उपस्थित जनसमूह ने कलेक्टोरेट तक पैदल मार्च किया और वहां पहुंचकर कलेक्टर रणबीर शर्मा को ज्ञापन सौंपा।
अन्य वक्ताओं ने भी सरकार पर सीधा दबाव डालते हुए कहा—
“आदमी के भंडारे बंद करो, गाय को मुंह निवाला दो। आदमी कभी तृप्त नहीं होता, लेकिन गाय का भंडारा करने से दूध-दही-घी की गंगा बहेगी।”
रैली के दौरान हर चौक-चौराहे पर जनता ने एक ही स्वर में कहा—
“अब और नहीं सहेंगे! गाय माता का अपमान बर्दाश्त नहीं होगा! छत्तीसगढ़ की धरती पर गौहत्या पूरी तरह बंद होनी चाहिए।”

👉 “छत्तीसगढ़ में फूटा जनाक्रोश: मोर-बाघ को मिला राजकीय संरक्षण, तो गाय को क्यों नहीं? जबकि गाय देती है उत्कृष्ट पुष्टिक द्रव्य”

भारी भीड़ और जन सैलाब के साथ श्रीमद् ज्योतिर्मयानंद जी पहुंचे कलेक्टर कार्यालय वहां पूरी भीड़ को रोक दी गई।एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर रणबीर शर्मा को ज्ञापन सौंपकर इस मांग को आधिकारिक रूप से सरकार तक पहुंचाया।
कार्यक्रम में सर्व ब्राह्मण समाज प्रांतीय उपाध्यक्ष लेखमणि पांडेय, सर्वधर्म जिलाध्यक्ष शत्रुहन साहू,
जिलाध्यक्ष जितेंद्र शुक्ला, गोवंश रक्षा समिति के हरीश चौहान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक शामिल हुए।



नेपाल का वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य: युवाओं की बेचैनी और लोकतंत्र की चुनौती

सरकारें जब जनता के प्रति जवाबदेह नहीं रह पाती और निर्णय प्रक्रियाएँ अपारदर्शी होने लगती हैं, तो नागरिकों का विश्वास कम हो जाता है।

नेपाल/काठमांडू:_न्यूज आर्टिकल लेख
नेपाल, जो हिमालय की गोद में बसा एक छोटा लेकिन सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश है, आज फिर से राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। लोकतंत्र की स्थापना को लगभग डेढ़ दशक हो चुके हैं, लेकिन जनता खासकर युवा वर्ग का विश्वास लगातार कम होता जा रहा है।

लोकतंत्र की यात्रा और अस्थिरता
2008 में नेपाल ने 240 साल पुरानी राजशाही को समाप्त कर लोकतांत्रिक गणराज्य की शुरुआत की थी। संविधान सभा का चुनाव हुआ, नया संविधान 2015 में लागू किया गया और लोकतंत्र की नींव मजबूत करने का प्रयास किया गया। लेकिन विगत वर्षों में राजनीतिक अस्थिरता इतनी बढ़ी कि अब तक तेरह बार सरकारें बदली जा चुकी हैं। कोई भी सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई, जिससे जनता का भरोसा डगमगाने लगा।

युवाओं का गुस्सा और सड़कों पर विरोध
नेपाल की नई पीढ़ी, जो शिक्षा और तकनीक से अधिक जुड़ी है, यह देख रही है कि राजनीतिक नेतृत्व बार-बार उन्हीं पुराने चेहरों के बीच घूम रहा है। सत्ता के इस चक्र में न तो नीतियों की निरंतरता है और न ही जनता की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब। यही कारण है कि हाल के वर्षों में युवाओं ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू किए और राजनीतिक दलों को उनसे दूर रहने की सलाह दी। उनका मानना है कि सत्ता का खेल केवल नेताओं के बीच सिमटकर रह गया है।

सत्ता का केंद्रीकरण और लोकतांत्रिक संकट
नेपाल की राजनीति अक्सर कुछ प्रमुख नेताओं – शेर बहादुर देउबा, पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ और केपी शर्मा ओली – के इर्दगिर्द घूमती रही है। सत्ता हासिल करने के लिए आपसी समर्थन और गठजोड़ का सिलसिला जनता को यह सोचने पर मजबूर करता है कि उनकी वोट की असली कीमत क्या है। वहीं सत्ता के केंद्रीकरण, संसद भंग करने की कोशिशों और विपक्ष को कमजोर करने की रणनीतियों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती पर सवाल खड़े किए हैं।

भविष्य की राह
नेपाल के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह अपने लोकतंत्र को स्थिरता और पारदर्शिता प्रदान कर सके। जनता, विशेषकर युवा वर्ग, केवल नारों से संतुष्ट नहीं है; वे जवाबदेही और सहभागिता चाहते हैं। यदि राजनीतिक दल इस संदेश को नहीं समझ पाए, तो लोकतंत्र के प्रति बढ़ती निराशा और असंतोष भविष्य में और गंभीर संकट का कारण बन सकता है।

रायपुर में सड़क सुरक्षा को नई रफ्तार, ‘सड़क सुरक्षा मित्र’ कार्यक्रम होगा तेज़

रायपुर -10 SEP 2025-( by PIB Raipur)

रायपुर में सड़क सुरक्षा को लेकर ज़िला प्रशासन ने

एक अहम कदम बढ़ाया है। रेड क्रॉस हॉल में आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति (DRSC) की बैठक में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह की अध्यक्षता में निर्णय लिया गया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा माय भारत, युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय (MoYAS) के संयुक्त ‘सड़क सुरक्षा मित्र’ कार्यक्रम का ज़िले में तेज़ी से क्रियान्वयन किया जाएगा।

बैठक में उप निदेशक, माय भारत अर्पित तिवारी ने

बताया कि इस पहल के तहत युवा स्वयंसेवकों को माय भारत प्लेटफ़ॉर्म से जोड़कर तीन माह की ‘अनुभवाधारित अधिगम (ELP)’ अवधि में नामांकित किया जाएगा। इस दौरान वे ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ के साथ फील्ड में कार्य कर अनुभव प्राप्त करेंगे तथा प्रगति रिपोर्ट DRSC को सौंपी जाएगी। स्वयंसेवकों को दुर्घटनास्थल पर भीड़ प्रबंधन, ग्रीन कॉरिडोर सहयोग, रोड सेफ्टी ऑडिट, ब्लैकस्पॉट सुधार तथा स्कूल–कॉलेज व समुदाय स्तर पर जागरूकता और फर्स्ट रिस्पॉन्स सत्र आयोजित करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कलेक्टर डॉ. सिंह ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु-दरों में ठोस कमी लाने के लिए नई पहलों को अपनाना ज़रूरी है। उन्होंने आरटीओ, पुलिस और समिति के सभी सदस्यों से पूर्ण सहयोग का आग्रह किया ताकि रायपुर से राष्ट्रीय स्तर की ‘बेस्ट केस स्टडीज़’ सामने आ सकें। बैठक में एनआईटी रायपुर को ज्ञान सहयोगी के रूप में सह-नामित करने का प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित किया गया।

बताया गया कि स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण सेवलाइफ़ फ़ाउंडेशन और आईआईटी मद्रास (CoERS) के सहयोग से कराया जाएगा। इच्छुक युवा माय भारत प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिये इस अनुभव आधारित पहल से जुड़ सकते हैं।

आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए संसाधनों की कमी नहीं होगी – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण का बजट 50 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़

रायपुर, 10 सितम्बर 2025।


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि आदिवासी समुदाय के समग्र विकास और कल्याण के लिए सरकार ठोस कदम उठा रही है। विकास कार्यों के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं होगी। वे आज कोरबा कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्राधिकरण का बजट 50 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपये किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुनर्गठित प्राधिकरण अब जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ काम करेगा। निगरानी के अभाव में अतीत में कई योजनाएँ अधूरी रह गईं, लेकिन अब उन्हें पूरा किया जाएगा।

जनप्रतिनिधित्व और पारदर्शिता
प्राधिकरण की संरचना में व्यापक बदलाव किए गए हैं। अब राज्यसभा-सांसद, लोकसभा-सांसद, जिला पंचायत अध्यक्ष और अन्य जनप्रतिनिधि इसमें सदस्य रहेंगे। साथ ही आदिवासी विकास के क्षेत्र में कार्यरत दो समाजसेवियों और विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा।


Lनई योजनाएँ और घोषणाएँ
महिलाओं के लिए: स्व-सहायता समूहों को और मजबूत किया जाएगा, कौशल प्रशिक्षण व ऋण सुविधाएँ दी जाएंगी।
युवाओं के लिए: तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण के जरिए रोजगार और स्व-रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे।
खेल और शिक्षा: कोरबा में 10-10 करोड़ की लागत से बालक-बालिका क्रीड़ा परिसर, विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए 2 खेल परिसर, और 5 करोड़ की लागत से आवासीय विद्यालय की घोषणा।
पर्यटन: बुका-सतरेंगा प्रोजेक्ट को गति देने और सुनालिया पुल के लिए 9 करोड़ स्वीकृत।
सिंचाई: 2015 से पहले की 115 अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 2,800 करोड़ रुपये स्वीकृत, जिससे 76 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।

उप मुख्यमंत्रीगण के विचार
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि प्राधिकरण विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा में अहम भूमिका निभाएगा। श्री अरुण साव ने कहा कि 2019 के बाद पहली बार मुख्यमंत्री अनुसूचित क्षेत्र में आकर बैठक कर रहे हैं, जो उनकी प्रतिबद्धता दर्शाता है।
विकास कार्यों की प्रगति
प्राधिकरण के तहत वर्ष 2021-22 से अब तक हजारों करोड़ की लागत से सैकड़ों कार्य स्वीकृत हुए, जिनमें अधिकांश पूरे हो चुके हैं और शेष प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने सभी अधूरे कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
बैठक में मंत्रीगण, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न जिलों के कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक उपस्थित रहे।

केरल कन्नूर विवाद: SDPI कार्यकर्ता की हत्या की बरसी पर केक काटने वाले आरएसएस कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज

कार्यकर्ताओं ने केक काटकर वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया, जिसमें विवादित कैप्शन भी था.

कन्नूर न्यूज़ | Kerala News Today | 10 सितंबर 2025
केरल का कन्नूर जिला एक बार फिर राजनीतिक तनाव और विवाद के कारण सुर्खियों में है। यहाँ पुलिस ने आरएसएस (RSS) कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने एसडीपीआई (SDPI) कार्यकर्ता की हत्या की बरसी पर केक काटकर “जश्न” मनाया और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

घटना 8 सितंबर को कन्नूर के कन्नावम (Kannavam) इलाके में हुई।
आरएसएस कार्यकर्ताओं ने एक कार्यक्रम में केक काटा, जिस पर लिखा था – “Abhimaanam Kannavam Swayamsevakar” यानी “कन्नावम स्वयंसेवक पर गर्व है”।
इस पूरे कार्यक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर Instagram पर डाला गया।
वीडियो के कैप्शन में लिखा गया – “हजारों नुकसानों के बीच यह वह दिन था जब कन्नूर के मजबूत दिल वाले स्वयंसेवकों ने दिल से खुशी महसूस की। जिस दिन कन्नावम में एसडीपीआई कार्यकर्ता की हत्या हुई।”
वीडियो जैसे ही वायरल हुआ, पुलिस हरकत में आ गई।

पुलिस ने दर्ज किया केस

कन्नावम पुलिस ने BNS की धारा 192 के तहत केस दर्ज किया है।
एफआईआर में कहा गया है कि “कुछ असामाजिक तत्वों ने हत्या की बरसी पर केक काटकर जश्न मनाया। इस गतिविधि का उद्देश्य क्षेत्र में तनाव फैलाना और राजनीतिक टकराव को बढ़ावा देना था।”

कन्नूर: राजनीतिक हिंसा का गढ़
कन्नूर जिला लंबे समय से राजनीतिक हिंसा और ध्रुवीकरण की घटनाओं के लिए जाना जाता है।
यहाँ वाम दल, आरएसएस और एसडीपीआई के बीच टकराव अक्सर होते रहते हैं।
इसी कारण प्रशासन और पुलिस लगातार सतर्क रहते हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि किसी भी उकसाने वाली गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। माहौल खराब करने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।