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Saturday, October 31, 2026
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नए लेबर कोड लागू: आपकी इन-हैंड सैलरी घटेगी या बढ़ेगी? जानिए पूरा असर

थोड़ा विरोध, लेकिन बड़ा बदलाव
कुछ श्रम संगठन हायर-एंड-फायर वाले प्रावधानों का विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार का कहना है कि इससे रोजगार बाजार अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनेगा।

नई दिल्ली/9 दिसंबर 2025

केंद्र सरकार ने देशभर में चार नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं, जिनकी जगह पहले 23 से अधिक पुराने श्रम कानून लागू थे। सरकार का दावा है कि नए नियम आधुनिक वर्क कल्चर के अनुरूप हैं और इससे श्रमिकों का भविष्य अधिक सुरक्षित होगा। हालांकि शुरुआती असर कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी पर पड़ने वाला है।

टेक-होम सैलरी घट सकती है, PF और ग्रेच्युटी बढ़ेगी
नए नियम के तहत किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी उसके कुल पैकेज (CTC) की कम से कम 50% होनी चाहिए।
अगर अभी आपकी बेसिक सैलरी 35% है और आपकी मासिक आय 1 लाख रुपये है, तो नए नियम के बाद यह बढ़कर 50,000 रुपये हो जाएगी।पहले आपका PF 4,200 रुपये कटता था, लेकिन अब यह बढ़कर 6,000 रुपये हो जाएगा।

यानी—
आज इन-हैंड सैलरी कम मिलेगी, लेकिन PF और ग्रेच्युटी के रूप में भविष्य की बचत बढ़ेगी।
सभी कामगारों को न्यूनतम वेतन की गारंटी
अब संगठित और असंगठित—दोनों सेक्टरों में हर कामगार को मिनिमम वेज मिलेगा। इससे लाखों मजदूरों को सीधा फायदा होगा।

सैलरी समय पर देना अनिवार्य
दिहाड़ी मजदूर: शिफ्ट खत्म होने पर भुगतान
मासिक वेतनभोगी: महीने खत्म होने के 2–3 दिनों के भीतर सैलरी
काम के घंटे और ओवरटाइम की नई व्यवस्था
एक दिन में 8 से 12 घंटे तक काम किया जा सकता है, लेकिन सप्ताह में कुल 48 घंटे से अधिक नहीं।
12 घंटे की शिफ्ट होने पर सप्ताह में केवल 4 दिन काम होगा।
ओवरटाइम केवल कर्मचारी की सहमति से होगा और इसके बदले डबल पेमेंट मिलेगी।

महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण बदलाव
महिलाएं अब सभी क्षेत्रों में नाइट शिफ्ट कर सकेंगी, बशर्ते—
लिखित सहमति हो
सुरक्षा, ट्रांसपोर्ट और निगरानी की पुख्ता व्यवस्था हो_थोड़ा विरोध, लेकिन बड़ा बदलाव

जम्मू में रोहिंग्या बसावट हुई स्थायी: सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी के बावजूद ‘बर्मा बस्ती’ का विस्तार, बढ़ी सुरक्षा चिंताएँ”

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राष्ट्रीय खबर /जम्मू कश्मीर/ 10/12/2025

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी—“भारत में घुसपैठियों के लिए किसी तरह का रेड-कार्पेट वेलकम नहीं होना चाहिए”—के बावजूद जम्मू में रोहिंग्या समुदाय की उपस्थिति तेजी से स्थायी स्वरूप लेती जा रही है।

नरवाल, सुंजवां और भटिंडी जैसे संवेदनशील इलाकों में रोहिंग्या परिवारों ने अब न सिर्फ झुग्गियों का विस्तार किया है, बल्कि स्थायी बस्तियाँ, छोटी दुकानें, बाजार और मदरसे तक खड़े कर लिए हैं। यह स्थिति सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनकर सामने आई है।

ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, पहले रोहिंग्या समुदाय अस्थायी कैम्पों तक सीमित था, लेकिन 2007 के बाद इनकी संख्या बड़े स्तर पर बढ़ने लगी। 2009 के बाद तो इनकी मौजूदगी में अचानक तेज उछाल आया। 1994 में दो बच्चों सहित एक रोहिंग्या परिवार के आगमन से शुरू हुई यह कहानी अब हजारों तक पहुँच चुकी है। कासिम नगर के नाम से पहचाना जाने वाला क्षेत्र आज ‘रोहिंग्या बस्ती’ और बाद में ‘बर्मा बस्ती’ के रूप में जाना जाने लगा है, जो उनके बढ़ते प्रभाव और स्थायी पहचान की तलाश को दर्शाता है।

चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ रोहिंग्या न केवल स्थानीय स्कूलों में दाख़िला ले चुके हैं, बल्कि शिक्षकीय पदों तक पहुँच गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रोहिंग्या मूल का एक व्यक्ति—सादिक—स्कूल में शिक्षक के रूप में बच्चों को पढ़ा रहा है। वहीं, रोहिंग्या बच्चों के लिए अलग से मदरसे भी संचालित हो रहे हैं, जिस पर सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर निगरानी बढ़ाती रहती हैं। आर्थिक मोर्चे पर भी ये समुदाय कबाड़, मजदूरी, रेहड़ी-फड़ी और कपड़ों की छोटी दुकानों के जरिए स्थानीय अर्थव्यवस्था में पैठ बना रहा है।

इनकी बढ़ती संख्या ने जनसांख्यिकीय बदलाव, अवैध दस्तावेजों और सुरक्षा जोखिमों को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। कई सत्यापन अभियानों में फर्जी पहचान पत्र, संदिग्ध दस्तावेज़ और अवैध बसावट के मामले पकड़े गए।

जम्मू जैसे संवेदनशील बॉर्डर क्षेत्र में रोहिंग्या की यह स्थायी होती मौजूदगी, सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी और जमीनी हकीकत के बीच के गहरे विरोधाभास को उजागर करती है—जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बेहद गंभीर चिंता बन चुकी है।

वेदों का संदेश—सुख-दुख का सत्य और धर्म जागरण का उदय:_स्वामी ज्योतिर्मयानंद

बेमेतरा_10/12/2025

कृषि उपज मंडी परिसर में चल रहे सुबह से शाम तक भक्तिमय गौ-यज्ञ और शिव महापुराण ज्ञानामृत धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन आस्था और अध्यात्म संगम देखने को मिल रहा है। 6 से 14 दिसंबर तक चल रहे इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती जी के दिव्य प्रवचनों का लाभ ले रहे हैं। स्वामी जी आज के प्रवचन में जीवन के मूल प्रश्न—
सुख और दुख—के वेदसम्मत अर्थ को सरल भाषा में समझाया।
आज मनुष्य का जीवन दुख और सुख की दो राहों पर खड़ी है जहां तय नहीं हो पाता हम किधर चलें, इसके लिऐ सर्वोत्तम उपाय है वेद वेदों की ओर चलें।


स्वामी ज्योतिर्मयानंद जी ने कहा कि वेदों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि “अनुकूल वेद नियम सुखम्, प्रतिकूल वेद नियम दुखम्।” अर्थात जब मनुष्य वेदों के अनुकूल आचरण करता है, तो जीवन में सुख की प्राप्ति होती है, और वेद-विरुद्ध आचरण करने पर दुख अनिवार्य रूप से आता है। वेदों के अनुसार सुख एक अनुकूल क्षण है, जबकि दुख प्रतिकूल क्षण है, और दोनों ही मनुष्य के कर्म और धर्माचरण से जुड़े हैं। स्वामी जी ने कहा कि दुख से मुक्ति का मार्ग भी धर्मशास्त्रों में पूर्ण रूप से वर्णित है_
धर्म पालन, सत्य, यज्ञ, सेवा और सदाचार ही दुःख निवारण के वास्तविक साधन हैं।

वेद—समस्त मानवता के लिए
स्वामी जी ने अपने प्रवचन में यह भी कहा कि वेद किसी एक व्यक्ति, वर्ग या जाति के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए हैं। वेद मानव धर्म का सार्वभौमिक मार्गदर्शन करते हैं और जीवन को संतुलित, शांत और सार्थक बनाने का पवित्र संदेश देते हैं।

धर्म जागरण का नया युग
जनचौपाल-36 के संपादकीय स्वर में स्वामी जी के प्रवचनों की सारगर्भित पंक्तियाँ हमें भारत के धर्म-जागरण की याद दिलाती हैं। वह समय जब विदेशी आक्रमणों के कारण हमारी संस्कृति संकट में थी, तब राजा राममोहन राय, दयानंद सरस्वती और विवेकानंद जैसे महापुरुषों ने देश में धार्मिक चेतना जगाई और समाज को नए धर्म, नए कर्म और नए आत्मविश्वास की राह दिखाई।

आज का यह धार्मिक आयोजन उसी जागृति की पुनरावृत्ति जैसा प्रतीत होता है। वेद-धर्म न केवल अध्यात्म का आधार है, बल्कि यह देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक स्वाभिमान का भी संरक्षक है। धर्म और वेद-पथ पर चलकर ही मनुष्य सच्चे सुख की प्राप्ति कर सकता है—यही संदेश स्वामी ज्योतिर्मयानंद जी ने श्रद्धालुओं को प्रदान किया।

शिव महापुराण कथा में स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती ने बताया—धर्म, गुरु और शिवभक्ति ही कल्याण का मार्ग

बेमेतरा_09/12/2025

कृषि उपज मंडी प्रांगण में चल रही शिव महापुराण कथा में आज स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती जी ने अपने ज्ञानामृत प्रवचनों से बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुजनों को धर्म, गुरु और शिवभक्ति का सार समझाया। कथा की शुरुआत उन्होंने गुरु वंदना से करते हुए कहा कि—

“गुरु ही धर्म से जोड़ते हैं, गुरु ही ज्ञान का प्रकाश देते हैं। बिना गुरु ज्ञान नहीं और बिना गुरु कल्याण नहीं।”

स्वामी जी ने बताया कि भगवान शिव ही सृष्टि के आरंभकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता हैं। “शिवमय जगत सर्वम्” का अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि संसार में जो भी दिखाई देता है, वह शिव की ही प्रेरणा है। उन्होंने पूर्व दिवस की कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि पंचभूत—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—स्वयं शिव का स्वरूप हैं, और जो इन तत्वों की पूजा करता है, उसे शिवलोक की प्राप्ति होती है।

कथा के दौरान ज्योतिर्मयानंद स्वामी जी ने कहा कि शिव महापुराण का पठन पापियों और दुराचारियों को भी शुद्ध कर सकता है, क्योंकि धर्म और ज्ञान ही मनुष्य-जीवन का सच्चा उद्धार करते हैं। अधर्म और गुरु-विरोध को उन्होंने राक्षसी प्रवृत्ति का गुण बताते हुए कहा कि जो माता-पिता, गुरु और धर्म का विरोध करता है, वह पवित्रता से दूर होकर अशुद्धता की ओर जाता है।जो ज्ञान से दूर होता है धर्म से दूर होता है मातापिता और ब्राह्मण का विरोध करता है वह निश्चय ही राक्षस होता है।जो हमेशा धर्म विरूद्ध आचरण कर जगत में पाप फैलाता है यह सब ही राक्षस के गुण है लक्षण है जिसे हम दुर्गुण कह सकते हैं।

उन्होंने बिल्व पत्र और रुद्राक्ष की उत्पत्ति का दिव्य वर्णन किया—
बिल्व पत्र माता पार्वती के पसीने की बूंदों से उत्पन्न माना जाता है और शिव-पार्वती को अत्यंत प्रिय है।रुद्राक्ष का जन्म भगवान शिव के ततोपरांत बहाए गए अश्रुओं से हुआ, जिसे शिव का ही स्वरूप माना जाता है।

स्वामी जी ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा रखने वाले भक्तों को सवा लाख पार्थिव शिवलिंग स्थापना का विधान भी बताया।

कथा के अंत में आज बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी उपस्थित हुए और भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति और सदस्य और स्वामी जी की टीम निरंतर व्यवस्था में सहयोग दे रही है।

“वंदे मातरम्—जनमन की आवाज़, जिसे कोई सरकार नहीं दबा सकती”

प्रधानमंत्री ने वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर लोकसभा में विशेष चर्चा के दौरान अपने संबोधन की झलकियां साझा कीं।

नई दिल्ली_ 09/12/2025

प्रधानमंत्री के वक्तव्य के कुछ अंश_
“मैं आपका और सदन के सभी माननीय सदस्यों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं कि हमने इस महत्वपूर्ण अवसर पर एक सामूहिक चर्चा का रास्ता चुना है, जिस मंत्र ने, जिस जय_घोष ने देश की आजादी के आंदोलन को ऊर्जा दी थी, प्रेरणा दी थी, त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया था, उस वंदे मातरम् का पुण्य स्मरण करना, इस सदन में हम सबका यह बहुत बड़ा सौभाग्य है। और हमारे लिए गर्व की बात है कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष निमित्त, इस ऐतिहासिक अवसर के हम साक्षी बने हुए हैं।”

“सत्ता से नहीं, जनता के दिल से उठती आवाज़—वंदे मातरम्”
उन्होंने कहा कि इस 150-वर्ष की यात्रा ने देश को अनेक कालखण्डों से गुजरते हुए आजादी दिलाने तक पहुँचाया। वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं था — यह स्वतंत्रता की लड़ाई, भारत माता की स्वतंत्रता की जंग का स्वप्न और संकल्प था।

“गले का हार वंदे मातरम्—हर गरीब का अभिमान
मोदी ने यह भी स्मरण कराया कि जब वंदे मातरम् के 50 वर्ष हुए थे, देश गुलामी में था; 100 वर्ष पूरे हुए, तब देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा था।

150-वर्ष पूरा होना इसलिए भी खास है कि यह हमें हमारी आज़ादी की लड़ाई, हमारी संस्कृति और एकता को याद कराने वाला अवसर है।

“गरीबों की जुबान का उजाला—वंदे मातरम्”
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् ने केवल राजनैतिक आज़ादी की लड़ाई में नहीं बल्कि भारत की “संस्कृति, आत्म-विश्वास और राष्ट्रीय पहचान” को मजबूत करने में भी योगदान दिया।


दंडामी लक्जरी रिसॉर्ट, चित्रकोट बस्तर में छत्तीसगढ़ी एवं जनजातीय व्यंजन प्रतियोगिता आयोजित

रायपुर, 09 दिसंबर 2025।

छत्तीसगढ़ स्थापना के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड द्वारा राज्य की संस्कृति, परंपराओं और पर्यटन को नए आयाम देने के उद्देश्य से विशेष गतिविधियों की श्रृंखला शुरू की गई है। इसी क्रम में 09 दिसंबर 2025 को बस्तर के प्रसिद्ध दंडामी लक्जरी रिसॉर्ट, चित्रकोट में पारंपरिक छत्तीसगढ़ी एवं जनजातीय व्यंजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसने स्थानीय खानपान और जनजातीय पाक-कला की समृद्ध विरासत को एक मंच पर उजागर किया।

कार्यक्रम में प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों—जैसे चिला, फरा, चीला, बैरा, लाल भाजी, बोड़ा, कोदो-कुटकी आधारित पकवान, जनजातीय समुदायों के विशिष्ट भोज्य पदार्थ, और बस्तर के पारंपरिक महुआ व सल्फी आधारित व्यंजनों की विशिष्ट प्रस्तुति देखने को मिली। आयोजन का उद्देश्य स्थानीय भोजन संस्कृति को बढ़ावा देना, घरेलू और बाहरी पर्यटकों को छत्तीसगढ़ के असल स्वाद से परिचित कराना और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना रहा।

पर्यटन बोर्ड के अनुसार प्रतियोगिता में पूरे भारत से 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रतिभागियों को हिस्सा लेने का अवसर दिया गया, जो इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर का स्वरूप प्रदान करता है। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार 7000 रुपये, द्वितीय पुरस्कार 5000 रुपये और तृतीय पुरस्कार 3000 रुपये निर्धारित किए गए हैं। सभी विजेताओं को प्रमाणपत्र भी प्रदान किए जाएंगे।

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड ने बताया कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पूरे वर्षभर सांस्कृतिक, पर्यटन और जनजातीय गौरव से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इस प्रतियोगिता से न केवल स्थानीय पारंपरिक भोजन संस्कृति को प्रोत्साहन मिला है, बल्कि बस्तर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी नई ऊर्जा मिली है।

प्रतिभागियों और इच्छुक लोगों के लिए अधिक जानकारी हेतु संपर्क: +91-99261-60586।

सीरप की बोतल में संदिग्ध वस्तु मिलने का मामला गंभीर

नमूने राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला भेजे गए

रायपुर_08/12/2025

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, देवपुरी में एक कैल्सिड सीरप की बोतल के भीतर मांस जैसी संदिग्ध वस्तु पाए जाने का मामला सामने आया है। 6 दिसंबर को मिली इस सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग और खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी है।

सूचना मिलते ही रायपुर जिले की संयुक्त जांच टीम ने 07 दिसंबर को संबंधित दवा का विधिवत नमूना संग्रहित किया। यह नमूना कैल्सिड सस्पेंशन 200 एमएल, बैच नंबर ALGE 4061, निर्माण तिथि 05/2024, एक्सपायरी 04/2026 का है। दवा का निर्माण हिमाचल प्रदेश के बद्दी स्थित (एक्टिनोवा)एक प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया गया है।

एकत्र किए गए नमूनों को गुणवत्ता परीक्षण के लिए रायपुर स्थित राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला भेज दिया गया है। विभाग का कहना है कि जैसे ही लैब रिपोर्ट प्राप्त होगी, अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल संदिग्ध बैच की निगरानी बढ़ा दी गई है और संबंधित स्वास्थ्य केंद्र से अतिरिक्त जानकारी भी संकलित की जा रही है।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर प्रदेशभर में दवाइयों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए औषधि निरीक्षकों की टीम लगातार निरीक्षण और सैंपलिंग कर रही है। विभाग का दावा है कि किसी भी तरह की मिलावट, मानक से भिन्न गुणवत्ता या सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जा रही है।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन, छत्तीसगढ़ ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी प्रकार की संदिग्ध दवा या गुणवत्ता संबंधी अनियमितता दिखाई दे, तो तुरंत विभाग की हेल्पलाइन 9340597097 पर सूचना दें। विभाग का कहना है कि समय पर सूचना मिलने से त्वरित कार्रवाई संभव हो पाती है और किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सकता है।

बेमेतरा में गौ-यज्ञ एवं शिवपुराण कथा: स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती के सान्निध्य में लोक कल्याण!

बेमेतरा:_08/12/2025 कथा का 3रा दिन

नगर के कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित गौ प्रतिष्ठा यज्ञ एवं शिवमहापुराण कथा का तीसरा दिन अत्यंत धार्मिक एवं श्रद्धापूर्ण माहौल में बीता। प्रातः काल से यज्ञ स्थल की परिक्रमा श्रद्धालुओं द्वारा लगातार की जा रही है। यज्ञाचार्यों ने शिवगंगा आश्रम के बटुकों के साथ मंत्रोच्चारण करते हुए पूरे मण्डी परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से अभिभूत कर दिया।

शिवमहापुराण कथा में भगवान शिव के जीवन, महिमा और लीलाओं का विस्तृत वर्णन किया गया। कथा में शिव के विभिन्न अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, उनके विवाह और भक्तों की कहानियां शामिल हैं। शिवमहापुराण शिव की सर्वोच्च सत्ता, करुणा, ज्ञान और कल्याणकारी स्वरूप पर केंद्रित है तथा शिवभक्ति के मार्ग बताते हुए मोक्ष और सुख प्राप्ति के उपाए प्रकट करता है।

इस यज्ञ में कलयुग धारणाओं पर भी प्रकाश डाला गया कि इस युग में परोपकार, सेवा और नाम-जप ही सबसे बड़ा पुण्य और आध्यात्मिक उन्नति का साधन हैं। भगवान शिव की आरती के बाद स्वामी ज्योर्तिमयानंदः सरस्वती के साथ बड़ी संख्या में नगरवासियों ने यज्ञ भगवान की आरती में भाग लिया।

इस भव्य आयोजन में गुड्डा गुप्ता, रोशन दत्ता, लेखमणी पाण्डेय, जितेन्द्र शुक्ला, मनोज मिश्रा, लव मिश्रा, सुमित चौबे, निति अग्रवाल, अनिता मिश्रा, हेमिन साहू, सरस्वती साहू, कुंती साहू, वर्षा गौतम, माधवी शर्मा सहित नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। संपूर्ण कार्यक्रम ने धार्मिक अनुष्ठान के शास्त्र सम्मत रूप को जीवंत किया और नगरवासियों में आध्यात्मिक चेतना का संचार किया।

छत्तीसगढ़ के आरंग के पास रीवा ग्राम खुदाई में 2000 से अधिक प्राचीन सिक्के मिले.?

आरंग/रायपुर, 08 दिसंबर 2025

खबर मीडिया सूत्र:— छत्तीसगढ़ के आरंग क्षेत्र के निकट ग्राम रीवा में पुरातत्व विभाग की खुदाई में प्राचीन मुद्राओं से भरे हंडे जैसे बर्तन की खोज हुई है। लगभग 2000 से 2500 तक प्राचीन सिक्के मिलने की जानकारी मिली है, जो क्षेत्र के इतिहास को समझने में अहम साबित हो सकते हैं।

हालांकि, पुरातत्व विभाग ने अभी तक इन सिक्कों की आयु, धातु या महत्व को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की है। विभाग इन सिक्कों की जांच और काल निर्धारण कर रहा है, जिससे क्षेत्र के प्राचीन इतिहास का सही चित्र उभर सकेगा।

स्थानीय ग्रामीण इस खोज से उत्साहित हैं और चाहते हैं कि इस धरोहर को गांव में ही संरक्षित किया जाए। वे एक संग्रहालय बनाने की भी मांग कर रहे हैं ताकि यह ऐतिहासिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सके।

ग्रामीणों का कहना है कि खुदाई का काम कोरोना महामारी के समय से चल रहा है, लेकिन अब तक उन्हें खुदाई में मिले अवशेषों के बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं मिली है। मीडिया सूत्रों से ही खबर आ रही है कि खुदाई सफल रही है, लेकिन विभाग ने ग्रामीणों के साथ सूचनाएं साझा नहीं की हैं।

स्थानीय लोगों का अनुरोध है कि पुरातत्व विभाग जल्द ही खुदाई के परिणामों को सार्वजनिक करे और जनता को अवगत कराए ताकि क्षेत्र की प्राचीन संस्कृति और इतिहास बेहतर ढंग से समझा जा सके।


लाल आतंक खात्मे की ओर”1 करोड़ के इनामी नक्सली रामधेर मज्जी ने 11 साथियों के साथ किया सरेंडर”

MMC जोन का बड़ा खुलासा: 12 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, MP नक्सलमुक्त घोषित।

नक्सली सरेंडर/एमपी/छत्तीसगढ़_08/12/2025

खबर है कि 1 करोड़ रुपये के इनामी नक्सली कमांडर रामधेर मज्जी ने 7-8 दिसंबर 2025 की रात को छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के बकरकट्टा थाना क्षेत्र में 11-12 साथियों (जिनमें 6 महिलाएं शामिल) के साथ हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया।

रामधेर मज्जी पर कई गंभीर नक्सली घटनाओं के मामले दर्ज थे और उसे हिड़मा जैसे कमांडर के समकक्ष माना जाता था।सुरक्षाबलों के अभियान और पुनर्वास नीतियों से प्रभावित होकर यह सरेंडर हुआ, जो 2025 में नक्सलियों को लगे झटकों की कड़ी है।

रामधेर मज्जी, जो कुख्यात नक्सली नेता हिडमा के समकक्ष माना जाता था, पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था. इस बड़े आत्मसमर्पण के बाद MMC ज़ोन (महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़) को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है, जो इस क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों की एक निर्णायक जीत है।

आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ के कुम्ही गांव में औपचारिक रूप से पूरा हुआ, जहां रामधेर मज्जी ने AK-47 सहित हथियार सौंपे। साथियों में DVCM, ACM और PM स्तर के नक्सली जैसे चंदू उसेंडी, ललिता, जानकी, प्रेम, रामसिंह दादा शामिल थे। यह MMC जोन (महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़) के KB डिवीजन को कमजोर करने वाली घटना है।