21 C
Raipur
Saturday, October 31, 2026
Home Blog Page 210

राज्यसभा में बदलेगा संख्या संतुलन, 2026 में 75 सीटों पर होंगे चुनाव

वर्तमान स्थिति में राज्यसभा में एनडीए के पास 129 सीटें हैं, जबकि विपक्ष के पास 78 सीटें हैं। 2026 के ये चुनाव न केवल संख्या संतुलन बदल सकते हैं, बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीतियों और विधायी दिशा को भी प्रभावित कर सकते हैं।

नई दिल्ली, 23 दिसंबर 2025

साल 2026 देश की राजनीति के लिए अहम रहने वाला है। एक ओर कई बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, वहीं दूसरी ओर राज्यसभा में भी बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिलेगा। वर्ष 2026 में उच्च सदन की कुल 75 सीटों पर चुनाव होने हैं, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संख्या संतुलन प्रभावित हो सकता है।

राज्यसभा की ये सीटें अप्रैल, जून और नवंबर 2026 के दौरान खाली होंगी। इनमें उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक 10 सीटें रिक्त होने जा रही हैं, जबकि बिहार से 5 सीटों पर चुनाव होंगे। इसके अलावा महाराष्ट्र, झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर राज्यों से भी कई सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होगा। इस व्यापक बदलाव को उच्च सदन में एक निर्णायक चरण के रूप में देखा जा रहा है।

2026 में जिन वरिष्ठ नेताओं का कार्यकाल समाप्त होगा, उनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, दिग्विजय सिंह और शरद पवार जैसे नाम शामिल हैं। सत्तापक्ष से भी कुछ केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राजनीतिक दल अपने अनुभवी नेताओं को फिर मौका देते हैं या नए चेहरों को आगे बढ़ाते हैं।

बिहार में अप्रैल 2026 में राज्यसभा की 5 सीटें खाली होंगी, जिनके लिए मार्च तक चुनाव होने की संभावना है। वहीं उत्तर प्रदेश की 10 सीटें नवंबर 2026 तक रिक्त हो जाएंगी, जिससे देश के सबसे बड़े राज्य की भूमिका निर्णायक हो सकती है। इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश, असम, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी सदस्य बदलेंगे।

सक्ती जिले में जल जीवन मिशन की बड़ी उपलब्धि, 1.37 लाख घरों तक पहुंचा नल से जल

रायपुर, 22 दिसंबर 2025

छत्तीसगढ़ के नवगठित सक्ती जिले में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। जिले में अब तक 1 लाख 37 हजार 139 घरों में नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा चुकी है।

जिला गठन के समय यह संख्या बेहद सीमित थी और केवल कुछ ही गांव हर घर जल की श्रेणी में आते थे।
9 सितंबर 2022 को जांजगीर-चांपा से विभाजित होकर अस्तित्व में आए सक्ती जिले में प्रशासन ने जल जीवन मिशन को प्राथमिकता देते हुए तेज गति से कार्य किया। मिशन के अंतर्गत जिले के 456 गांवों के लिए कुल 565 जल आपूर्ति योजनाएं स्वीकृत की गई हैं।

इन योजनाओं पर लगभग 601.72 करोड़ रुपये की लागत से काम चल रहा है, जिसका उद्देश्य 1 लाख 56 हजार 245 ग्रामीण परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराना है।

जल जीवन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम यह है कि जिले के 181 गांव अब ‘हर घर जल’ प्रमाणित हो चुके हैं, जबकि जिला गठन के समय यह संख्या मात्र तीन थी। चारों विकासखंड—सक्ती, जैजैपुर, डभरा और मालखरौदा—में नल-जल योजनाओं का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। सक्ती विकासखंड में अधिकांश परिवारों को नल कनेक्शन मिल चुका है, वहीं जैजैपुर, डभरा और मालखरौदा में भी बड़ी संख्या में घरों तक जल आपूर्ति शुरू हो चुकी है।

अब तक स्वीकृत 565 योजनाओं में से 221 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। केंद्र सरकार द्वारा जल जीवन मिशन की अवधि वर्ष 2028 तक बढ़ाए जाने के बाद शेष योजनाओं को भी चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। प्रशासनिक सक्रियता, विभागीय समन्वय और ग्राम पंचायतों की सहभागिता से सक्ती जिला ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक मजबूत उदाहरण बनकर उभर रहा है।

अरावली पर उठे सवालों के बीच केंद्र की सख्ती, पर्यावरण मंत्री ने किया भ्रम दूर

0

‘ग्रीन अरावली’ के तहत संरक्षण और निगरानी पर सरकार का ज़ोर ‘ग्रीन अरावली’ से संरक्षण को मिली मजबूती।

नई दिल्ली, 23 दिसंबर 2025।

अरावली पहाड़ियों में खनन को लेकर हाल के दिनों में पैदा हुए भ्रम और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि अरावली क्षेत्र में खनन को लेकर किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी गई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अरावली का 90 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र पूरी तरह संरक्षित है और यह सुरक्षा पहले से अधिक मजबूत हुई है।

मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप अरावली को लेकर स्पष्ट परिभाषा तय की गई है, ताकि पर्यावरण संरक्षण में किसी तरह की अस्पष्टता न रहे। उन्होंने उन दावों को गलत बताया जिनमें कहा जा रहा था कि नए नियमों से खनन को बढ़ावा मिलेगा। उनके अनुसार, सरकार का उद्देश्य केवल और केवल अरावली की प्राकृतिक विरासत को बचाना है।

भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया और कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलाए जा रहे “100 मीटर नियम” को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि इस नियम को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे आम लोगों में भ्रम फैला। वास्तविकता यह है कि 100 मीटर की सीमा पहाड़ी की चोटी से नहीं, बल्कि उसके आधार से मानी जाती है। इस दायरे में किसी भी तरह की खुदाई या व्यावसायिक गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित है।

उन्होंने बताया कि यदि दो अरावली पहाड़ियों के बीच की दूरी कम है, तो उनके बीच की समतल भूमि भी अरावली का हिस्सा मानी जाएगी और वह भी संरक्षण के दायरे में आएगी। दिल्ली के संदर्भ में मंत्री ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अरावली से जुड़े इलाकों में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध पहले की तरह लागू रहेगा।

बांग्लादेश संकट पर मोहन भागवत का बयान: हिंदुओं की एकजुटता और मानवीय सुरक्षा पर ज़ोर

0

संघ सामाजिक संगठन है, राजनीतिक नहीं।संघ को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक नैरेटिव पर डॉ भागवत की प्रतिक्रिया

22/12/2025
नई दिल्ली_(संदर्भ कोलकाता व्याख्यान माला)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बांग्लादेश में जारी अशांति और वहां हिंदू समुदाय की स्थिति पर चिंता जताते हुए एकजुटता और मानवीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक हैं और वर्तमान परिस्थितियों में उनके सामने कई तरह की चुनौतियाँ हैं, ऐसे में समुदाय का संगठित रहना उनकी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

भागवत ने कहा कि कठिन हालात में अधिकतम सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेश के हिंदुओं को आपसी एकता बनाए रखनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने वैश्विक हिंदू समाज से अपील की कि वह मानवीय स्तर पर सहयोग और समर्थन के लिए आगे आए। उनके अनुसार, भारत अपनी सीमाओं के भीतर रहकर जितनी सहायता संभव है, उतनी सहायता करने का प्रयास कर रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आधार रहा है, इसलिए इस विषय पर भारत सरकार को संज्ञान लेना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई बार सरकारी प्रयास सार्वजनिक रूप से दिखाई देते हैं और कई बार कूटनीतिक कारणों से नहीं दिखते, लेकिन स्थिति को लेकर कुछ न कुछ कदम उठाए जाते हैं।

मोहन भागवत ने यह भी कहा कि यदि समाज संगठित होकर खड़ा होता है, तो परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव संभव है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि राजनीतिक परिवर्तन के बारे में सोचना उनका दायित्व नहीं है। उनके अनुसार, संघ सामाजिक परिवर्तन और समाज को संगठित करने के उद्देश्य से कार्य करता है।

भगवान का प्रश्न: जावेद अख्तर और मुफ्ती शमाइल नदवी के विचार

आस्था, तर्क और इंसानी ज़िम्मेदारी: एक सार्वजनिक बहस का अर्थ।

नई दिल्ली:_22/12/2025

हाल ही में दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में “क्या भगवान मौजूद हैं?” जैसे संवेदनशील और दार्शनिक प्रश्न पर आयोजित सार्वजनिक बहस ने देश में बौद्धिक विमर्श को नई दिशा दी। इस संवाद में कवि-गीतकार जावेद अख्तर और इस्लामिक विद्वान मुफ्ती शमाइल नदवी ने अपने-अपने विचार रखे। यह बहस किसी निष्कर्ष पर पहुँचने के बजाय विचारों के आदान-प्रदान का मंच बनी।

जावेद अख्तर ने ईश्वर की सर्वशक्तिमान और करुणामयी अवधारणा को मानवीय पीड़ा के संदर्भ में परखते हुए नैतिक सवाल उठाए। उन्होंने वैश्विक संघर्षों और हिंसा का उल्लेख कर यह प्रश्न रखा कि आस्था और यथार्थ के बीच संतुलन कैसे समझा जाए। उनकी बातों में व्यंग्य था, असहमति थी, लेकिन मूल स्वर मानवीय संवेदना का था।

वहीं, मुफ्ती शमाइल नदवी ने ईश्वर के अस्तित्व का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि हिंसा और बुराई की जड़ें इंसानी निर्णयों में हैं। उनके अनुसार स्वतंत्र इच्छा के दुरुपयोग से उत्पन्न कृत्यों की जिम्मेदारी ईश्वर पर नहीं, बल्कि समाज और व्यक्ति पर आती है। उन्होंने यह भी कहा कि ईश्वर जैसे विषय पर विज्ञान या धर्मग्रंथ अकेले अंतिम कसौटी नहीं हो सकते।

लोकतांत्रिक समाज में ऐसी बहसों का महत्व इसलिए भी है क्योंकि ये असहमति को स्थान देती हैं। आस्था और तर्क को आमने-सामने खड़ा करने के बजाय उनके बीच संवाद ही समाज को आगे बढ़ाता है। सवाल पूछना, तर्क रखना और सुनना—यही स्वस्थ विचारशीलता की पहचान है।
यह बहस हमें याद दिलाती है कि इंसानी जिम्मेदारी, नैतिकता और संवाद ही किसी भी सभ्य समाज की असली बुनियाद हैं।

“ग्रामीण मजदूरों को समय पर काम, पूरा पारिश्रमिक और पारदर्शिता का भरोसा: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर, 22 दिसंबर 2025।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि विकसित भारत–जी राम जी” ग्रामीण गरीबों, श्रमिकों और मेहनतकश मजदूर वर्ग के जीवन में भरोसा, सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने की एक सशक्त और दूरदर्शी पहल है। यह व्यवस्था समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक समय पर रोजगार, पूरा पारिश्रमिक और पारदर्शी प्रणाली पहुँचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित भारत–जी राम जी के माध्यम से रोजगार प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और जवाबदेह बनाया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न्यूनतम रहे।
यह सुनिश्चित किया गया है कि श्रमिकों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित न किया जा सके और मेहनत का पूरा फल उन्हें समय पर मिले। मजदूरी का भुगतान सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में बिचौलियों की भूमिका समाप्त और आर्थिक सुरक्षा को मजबूती।

उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, रियल-टाइम निगरानी, एआई-आधारित विश्लेषण और नागरिक सहभागिता जैसे आधुनिक तकनीकी प्रावधान शामिल किए गए हैं।इससे कार्यों की गुणवत्ता में सुधार होगा,साथ ही पूरी प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वास का वातावरण बनेगा और श्रमिकों को सम्मानजनक कार्य स्थितियाँ मिलेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कानून प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र को साकार करता है। विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप यह पहल ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, सशक्त और सम्मानजनक आजीविका की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ाने का माध्यम बनेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रमिकों का सम्मान, समय पर रोजगार और पारदर्शी व्यवस्था ही एक सशक्त राष्ट्र की मजबूत नींव है, और विकसित भारत–जी राम जी उसी नींव को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

“छत्तीसगढ़ का किसान देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़, उसके हितों से समझौता नहीं: बृजमोहन अग्रवाल

एफसीआई की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता अनिवार्य, लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी

FCI समीक्षा बैठक में सांसद बृजमोहन अग्रवाल का दो टूक संदेश

रायपुर | 21 दिसंबर

छत्तीसगढ़ का किसान देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है और उसके हितों से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार्य नहीं है। यह स्पष्ट और सख्त संदेश रायपुर सांसद एवं छत्तीसगढ़ भारतीय खाद्य निगम (FCI) परामर्शदात्री समिति के अध्यक्ष श्री बृजमोहन अग्रवाल ने एफसीआई की विस्तृत समीक्षा बैठक में दिया। बैठक में एफसीआई के महाप्रबंधक एवं वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में धान खरीदी, भंडारण, मिलिंग, परिवहन और गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।

सांसद अग्रवाल ने किसानों से धान का समय पर उठाव सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी किसान को देरी या अव्यवस्था के कारण परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने राज्य में भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए नए गोदामों के निर्माण तथा डिपो में जगह की कमी को गंभीर बताते हुए त्वरित समाधान के निर्देश दिए। साथ ही चावल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सैंपलिंग मशीनों और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर जोर दिया।

बैठक में बैंक गारंटी से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं और 2024-25 में 200 राइस मिलों को अनुमति न मिलने से उत्पन्न समस्याओं पर सांसद ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे किसानों व मिलर्स दोनों के लिए नुकसानदेह बताया। परिवहन व्यवस्था पर चिंता जताते हुए उन्होंने डोंगरगढ़ सहित अन्य क्षेत्रों में कम दरों के कारण आ रही दिक्कतों और रेलवे रैक की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

तकनीक आधारित पारदर्शिता पर बल देते हुए सांसद ने एफसीआई के मूवमेंट सिस्टम को पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड करने और AI टूल के जरिए योजना निर्माण व मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने प्रत्येक जिले में AGA मशीन, रिजेक्शन की स्थिति में लिखित कारण तथा FRK जांच के लिए राज्य में ही लैब स्थापित करने की आवश्यकता बताई।

पत्रकारों की लेखनी पर्यटन को नई दिशा देने का सशक्त माध्यम: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर, 21 दिसंबर 2025

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पत्रकारों की लेखनी केवल सूचना देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पर्यटन को प्रोत्साहित करने और किसी राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि यदि पत्रकार अपने अनुभवों को संवेदनशीलता और तथ्यपरकता के साथ प्रस्तुत करें, तो वे पर्यटकों के लिए विश्वसनीय मार्गदर्शक बन सकते हैं।

मुख्यमंत्री से राजस्थान के अंतर्राज्यीय अध्ययन भ्रमण से लौटे छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के दल ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान पत्रकारों ने 15 से 20 दिसंबर के बीच राजस्थान भ्रमण के अनुभव साझा किए और वहां की विधायिका, प्रशासनिक कार्यप्रणाली तथा पर्यटन क्षेत्र में अपनाए गए नवाचारों की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने पत्रकारों के लिए अंतर्राज्यीय अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम इस उद्देश्य से शुरू किया है कि अन्य राज्यों के सफल मॉडलों को समझकर प्रदेश में भी नई और प्रभावी पहल की जा सके। उन्होंने पत्रकारों से आग्रह किया कि वे इस यात्रा के अनुभवों को यात्रा-वृत्तांत के रूप में प्रस्तुत करें, जिससे आम पर्यटकों को लाभ मिलेगा।

पर्यटन की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार पर्यटन के समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पर्यटन को राज्य की नई उद्योग नीति में शामिल किया गया है और सुदूर वनांचलों में होम-स्टे को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर मिलेंगे।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से यह क्षेत्र स्वर्ग के समान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प के अनुरूप मार्च 2026 तक नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में सरकार दृढ़ता से कार्य कर रही है। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए गौरव की बात बताया कि धुड़मारास को विश्व के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल किया गया है।

इस अवसर पर पत्रकारों द्वारा दिए गए सुझावों का मुख्यमंत्री ने स्वागत किया और उन पर गंभीरता से विचार कर अमल करने का आश्वासन दिया।

महतारी वंदन योजना से महिलाओं ने शुरू किए स्वरोज़गार, आय में बढ़ोतरी

रायपुर छत्तीसगढ़ 21/12/2025

राज्य सरकार द्वारा संचालित महतारी वंदन योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में उभर रही है। यह योजना महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ स्वरोजगार एवं आजीविका के नए अवसरों से जोड़ रही है।

महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, आत्मसम्मान तथा समाज में उनकी निर्णायक भूमिका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रतिमाह मिलने वाली सहायता राशि का सदुपयोग से महिलाएं छोटे-छोटे व्यवसाय प्रारंभ कर रही हैं, जिससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि परिवार और समाज में उनकी सशक्त पहचान भी बन रही है। 

जांजगीर-चांपा जिले के तहसील मुख्यालय चांपा के वार्ड क्रमांक 02 की निवासी श्रीमती उर्मिला यादव ने हर महीना महतारी वंदन योजना के अंतर्गत मिलने वाली एक हजार रूपए की राशि को बचाकर आर्टिफिशियल गहनों का व्यवसाय प्रारंभ किया। वर्तमान में वे घर से तथा साप्ताहिक हाट-बाजारों में गहनों का विक्रय कर प्रतिमाह लगभग 2000 रुपये की अतिरिक्त आमदनी अर्जित करने लगी है। 

चांपा की ही श्रीमती ज्योति कसेर ने योजना की सहायता राशि से पापड़ व्यवसाय शुरू किया, जिससे उन्हें प्रतिमाह लगभग 5000 रुपये का लाभ प्राप्त हो रहा है। इससे वे अपने परिवार की शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को सहजता से पूरा कर पा रही हैं।

ग्राम सरहर की श्रीमती सुमित्रा कर्ष ने भी योजना से प्राप्त राशि से श्रृंगार सामग्री की दुकान प्रारंभ की, जिससे उन्हें वर्तमान में प्रतिमाह लगभग 1000 रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है। वहीं श्रीमती कुसुम देवी पाण्डेय ने बचत राशि से श्रृंगार दुकान का विस्तार किया है, जिससे उन्हें हर महीने 2000 रुपये का मुनाफा होने लगा है।

भारत की नई पहचान: आत्मविश्वास, नेतृत्व और मानव संसाधन:_एस जयशंकर

नई दिल्ली21/12/2025

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का यह कहना कि आज दुनिया भारत को पहले से अधिक सकारात्मक और गंभीरता से देखती है, बदलते वैश्विक परिदृश्य का सटीक प्रतिबिंब है। बहुध्रुवीय विश्व में भारत ने अपनी जगह संतुलन, संवाद और आत्मविश्वास के साथ बनाई है।

जयशंकर द्वारा नेतृत्व और सेवा की भूमिका को हनुमान के रूपक से समझाना यह दर्शाता है कि देश विज़न से आगे बढ़ते हैं और उसे लागू करने वाली क्षमता से पहचान बनाते हैं।

डायस्पोरा को लेकर विदेश मंत्री के अनुभव यह दर्शाते हैं कि भारतीयों की कार्यसंस्कृति, तकनीकी दक्षता और पारिवारिक मूल्यों ने भारत के नेशनल ब्रांड को मजबूती दी है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स की बढ़ती संख्या, विदेशी कंपनियों में भारतीय टैलेंट की मांग और व्यक्तिगत सफलताएँ—ये सभी संकेत भारत की बदली छवि की पुष्टि करते हैं।

भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका मानव संसाधन है—युवा आबादी, तकनीकी कौशल और वैश्विक स्तर पर सम्मानित डायस्पोरा। यही कारण है कि आज भारत का नेशनल ब्रांड पहले से अधिक मजबूत हुआ है।हालाँकि विकास की राह में अभी चुनौतियाँ शेष हैं, लेकिन भारत की बदली वैश्विक छवि एक ऐसी सच्चाई है जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता