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Saturday, October 31, 2026
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राष्ट्रीय एकता की मिसाल: सेना दिवस पर रायपुर में होगा ऐतिहासिक ‘वंदे मातरम’, 5 लाख विद्यार्थी करेंगे शंखनाद:_बृजमोहन अग्रवाल

वन्देमातरम की इस 150वीं वर्षगांठ पर होने वाला यह आयोजन न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए राष्ट्रीय एकता की एक मिसाल पेश करेगा।

रायपुर/छत्तीसगढ़_05/01/2026

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर 15 जनवरी को एक अभूतपूर्व स्वर्णिम अध्याय की साक्षी बनने जा रही है। सेना दिवस और महान राष्ट्रभक्त बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित ‘वन्देमातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के गौरवशाली अवसर पर रायपुर लोकसभा क्षेत्र में देशभक्ति का महाकुंभ आयोजित होगा। इस ऐतिहासिक आयोजन में रायपुर और बलौदा बाजार–भाटापारा जिले के करीब 5 लाख विद्यार्थी एक सुर में राष्ट्रीय गीत का गान करेंगे।

सुभाष स्टेडियम में होगा भव्य मुख्य आयोजन
रायपुर सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता श्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस विशाल आयोजन की तैयारियों को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत क्षेत्र के लगभग 3000 शासकीय एवं निजी शिक्षण संस्थानों (स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय) में एक साथ कार्यक्रम होंगे।

सांसद श्री अग्रवाल ने कहा:_यह आयोजन केवल एक गायन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को भारत माता के प्रति अटूट श्रद्धा और सेना के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का एक ऐतिहासिक संकल्प है।” — बृजमोहन अग्रवाल, सांसद

आयोजन का मुख्य केंद्र रायपुर का सुभाष स्टेडियम होगा, जहाँ 25,000 छात्र-छात्राएं सामूहिक रूप से वन्देमातरम गाएंगे। इस दौरान सेना के प्रति सम्मान और राष्ट्रभक्ति के उत्साह को बढ़ाने के लिए विद्यार्थियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की जाएगी।
नई पीढ़ी में अनुशासन और राष्ट्रप्रेम का संचार
करने के लिए इस कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप दिया गया है। सुबह 11:00 बजे: सभी संस्थानों में विद्यार्थियों का एकत्र होना।
11:30 – 12:30 बजे: देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ।
दोपहर 12:55 बजे: पूरे क्षेत्र में एक साथ सामूहिक ‘वन्देमातरम’ गान का प्रारंभ।

प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां
इस महा-अभियान की सफलता के लिए NCC, NSS, रेडक्रॉस और स्काउट्स एंड गाइड्स के कैडेट्स सक्रिय भूमिका निभाएंगे। सांसद द्वारा ली गई बैठक में जिला पंचायत सीईओ कुमार विश्वरंजन, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलसचिव, नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर और एनसीसी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़: संभावनाओं का गढ़ – कांगेर घाटी में मिली दुर्लभ ‘ग्रीन केव’

रायपुर/छत्तीसगढ़ _05/01/2026

छत्तीसगढ़ के बस्तर में पर्यटन की नई संभावनाएं खुल रही हैं। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में एक अनोखी “ग्रीन केव” (हरी गुफा) मिली है, जो अपनी प्राकृतिक खूबसूरती से दुनिया को हैरान करने के लिए तैयार है।

क्यों अनोखी है यह गुफा?
कोटुमसर क्षेत्र में स्थित इस गुफा की दीवारों और चूने की आकृतियों (Stalactites) पर हरे रंग की सूक्ष्मजीवी परतें जमी हैं। इसी दुर्लभ विशेषता के कारण इसे ‘ग्रीन केव’ नाम दिया गया है। गुफा के भीतर विशाल कक्ष और चमकते पत्थरों की संरचनाएं सैलानियों के लिए मुख्य आकर्षण होंगी।

विकास और रोजगार के नए अवसर:
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार, इस स्थल को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इस नई खोज से बस्तर में स्थानीय रोजगार बढ़ेगा और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

“ग्रीन गुफा का पर्यटन मानचित्र पर आना केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास का एक नया द्वार है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, होम-स्टे और परिवहन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।”
— केदार कश्यप, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री


तैयारियां जारी:
वन विभाग वर्तमान में गुफा की सुरक्षा, पहुंच मार्ग और पैदल पथ तैयार करने में जुटा है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में इसे जल्द ही पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।
निष्कर्ष: यह गुफा सिद्ध करती है कि छत्तीसगढ़ वास्तव में ‘संभावनाओं का गढ़’ है, जहाँ प्रकृति के अनमोल खजाने आज भी पर्यटन को नई ऊंचाई दे रहे हैं।

राजस्थान टोंक का रहस्यमयी घड़ा – कौतूहल और कानून के बीच

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टोंक (राजस्थान) के देवरी गांव_ 05/01/2026

राजस्थान की वीर प्रसूता भूमि अक्सर अपने आंचल से इतिहास के पन्ने और अतीत के अवशेष उगलती रही है। टोंक जिले के देवरी गांव में जमीन के भीतर 10 फीट की गहराई पर मिली 150 किलो की मिट्टी की विशाल डेग (घड़ा) ने एक बार फिर हमारी उत्सुकता और अंधविश्वास की सीमाओं को आमने-सामने खड़ा कर दिया है। जैसे ही जेसीबी का पंजा उस ठोस धातु या मिट्टी से टकराया, न केवल जमीन फटी, बल्कि अफवाहों और अटकलों का एक ऐसा गुबार उठा जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी।

भीड़ का मनोविज्ञान और सुरक्षा की चुनौती
इस घटना ने एक बार फिर ‘भीड़ के मनोविज्ञान’ को उजागर किया है। जैसे ही यह खबर फैली कि घड़े में सोने-चांदी की अशर्फियां हो सकती हैं, मौके पर जमा भीड़ अनियंत्रित हो गई। लोगों का लूटपाट के इरादे से भागना और कुछ वस्तुओं को लेकर खेतों में छिपना यह दर्शाता है कि आज भी ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति नागरिक जिम्मेदारी से ज्यादा व्यक्तिगत लालच हावी है। गनीमत रही कि पुलिस ने समय रहते स्थिति को संभाला और बल प्रयोग कर भीड़ को खदेड़ा, वरना किसी बड़ी अनहोनी या ऐतिहासिक साक्ष्यों के नष्ट होने से इनकार नहीं किया जा सकता था।

आस्था, तंत्र-मंत्र और आधुनिक समाज
घटनास्थल पर गुलाब के फूल, चप्पल और टायरों के निशान मिलना इस पूरे मामले को एक रहस्यमयी मोड़ देता है। क्या यह किसी पुराने खजाने को निकालने की तांत्रिक कोशिश थी? या फिर लोगों को डराने के लिए रचा गया कोई प्रपंच? यह चिंता का विषय है कि वैज्ञानिक युग में भी हम किसी पुरातात्विक खोज को सीधे तंत्र-मंत्र या ‘गड़े धन’ के चमत्कार से जोड़कर देखने लगते हैं। इस तरह की सोच अक्सर वैज्ञानिक अन्वेषण के मार्ग में बाधा बनती है।

कानून और पुरातत्व की भूमिका
प्रशासन ने इस मामले में ‘भारतीय खजाना निधि अधिनियम’ (Indian Treasure Trove Act) के तहत कार्रवाई कर परिपक्वता दिखाई है। घड़े को सील कर ट्रेजरी (खजाने) में सुरक्षित रखना और पुरातत्व विभाग (Archaeological Survey) को सूचित करना ही एकमात्र कानूनी रास्ता है। अब गेंद पुरातत्वविदों के पाले में है। वही यह तय करेंगे कि यह मध्यकालीन भारत की कोई ऐतिहासिक धरोहर है, किसी समृद्ध परिवार की संचित पूंजी या फिर महज एक पुराना बर्तन।

निष्कर्ष
टोंक की यह डेग केवल एक मिट्टी का पात्र नहीं है, बल्कि यह हमारे अतीत की एक कड़ी हो सकती है। जब तक पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट नहीं आती, तब तक धैर्य बनाए रखना अनिवार्य है। प्रशासन को चाहिए कि वह न केवल उस स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करे, बल्कि उन लोगों की भी पहचान करे जिन्होंने मौके से सामान चुराने की कोशिश की।
अंधविश्वास और अफवाहों के इस दौर में सच का सामने आना जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जमीन के नीचे दबा वह ‘खजाना’ वास्तव में देश की ऐतिहासिक संपत्ति है या सिर्फ समय की धूल में लिपटा एक भ्रम।

वेनेजुएला संकट: अमेरिकी कार्रवाई, भारत की चिंता और आम नागरिक का नजरिया

एक जिम्मेदार नागरिक का काम केवल खबर पढ़ना नहीं, बल्कि उस पर तर्क (Logic) करना है।


नई दिल्ली/05/01/2026

दक्षिण अमेरिका का तेल समृद्ध देश वेनेजुएला इस समय एक बड़े वैश्विक संकट के केंद्र में है। अमेरिका द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर की गई कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी के दावों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। जहाँ अमेरिका इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई बता रहा है, वहीं कई जानकार इसे संसाधनों पर कब्जे की जंग मान रहे हैं।

भारत पर असर: अवसर या चुनौती?
भारत के लिए यह खबर कूटनीतिक और आर्थिक, दोनों लिहाज से अहम है। सबसे बड़ा असर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर पड़ेगा। वेनेजुएला में अस्थिरता का सीधा मतलब है वैश्विक बाजार में कीमतों का बढ़ना, जिससे भारत में आम आदमी की जेब पर महंगाई की मार पड़ सकती है।

दूसरी ओर, भारत की सरकारी कंपनी ONGC Videsh का लगभग $1 बिलियन वहां फंसा हुआ है। यदि वहां स्थितियां सामान्य होती हैं, तो भारत को न केवल अपना पुराना पैसा वापस मिलेगा, बल्कि भविष्य के लिए सस्ते तेल का एक बड़ा स्रोत भी खुलेगा।

आम नागरिक का अधिकार और राय
एक आम नागरिक के तौर पर यह सोचना गलत है कि सात समंदर पार की खबर का हमसे वास्ता नहीं। हम ऐसी खबरों पर जीते और सोचते हैं क्योंकि ये हमारी दुनिया की दिशा तय करती हैं। नागरिकों को यह पूछने का पूरा अधिकार है कि क्या किसी शक्तिशाली देश का हस्तक्षेप उचित है?

इंसान खबरों के जरिए ही अपनी समझ विकसित करता है। वेनेजुएला का संकट हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि वैश्विक राजनीति कैसे हमारे किचन के बजट और देश की विदेश नीति को प्रभावित करती है।

निष्कर्ष: यह मामला केवल दो देशों का नहीं, बल्कि वैश्विक न्याय और ऊर्जा सुरक्षा का है। एक जागरूक समाज के रूप में तथ्यों को जानना और उन पर निष्पक्ष राय रखना हमारा लोकतांत्रिक कर्तव्य है।


1925 का वह निर्णायक मोड़: दो विचारधाराओं के 100 साल का एक तुलनात्मक विवरण

विशेष आलेख | दिनांक: 04.01.2026

भारत के वैचारिक इतिहास में साल 1925 एक सबसे निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज है। यह वही साल था जब नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना हुई और लगभग इसी दौर में कम्युनिस्ट विचारधारा ने भी संगठित रूप से भारतीय राजनीति और समाज में प्रवेश किया। आज, जब इस वैचारिक संघर्ष को लगभग 100 साल हो चुके हैं, तो यह समझना महत्वपूर्ण है कि एक ही समय शुरू हुईं ये दो धाराएं किन दिशाओं में आगे बढ़ीं।

दो विचार, एक समय और अलग रास्ते
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ‘मूल विचार’ भारत को एक सांस्कृतिक राष्ट्र के तौर पर देखने का था। इसकी नींव भारतीय सभ्यता और परंपरा के इर्द-गिर्द रखी गई। दूसरी तरफ, कम्युनिस्ट विचारधारा का संगठित स्वरूप 1925 के कानपुर सम्मेलन के बाद सामने आया। हालांकि इसकी वैचारिक जड़ें सोवियत संघ और पश्चिमी देशों के वर्ग संघर्ष के सिद्धांतों में थीं।

सामाजिक स्वीकार्यता और कार्यशैली
वामपंथी विचारधारा ने समाज को मुख्य रूप से ‘अमीर बनाम गरीब’ के चश्मे से देखा और धर्म व संस्कृति को प्राथमिकता नहीं दी। वहीं RSS ने माना कि भारत का समाज धर्म और संस्कृति की धुरी पर टिका है। कार्यशैली में भी बड़ा अंतर रहा; जहाँ संघ ने ग्रासरूट लेवल (शाखाओं) के माध्यम से आम लोगों से जुड़ाव बनाया, वहीं कम्युनिस्ट पार्टियों ने बौद्धिक संस्थानों और सत्ता के माध्यम से बदलाव का मॉडल अपनाया।

100 साल का निष्कर्ष
इतिहास के पन्नों को देखें तो 1951 के पहले चुनाव में CPI दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन समय के साथ राजनीतिक और सामाजिक समीकरण बदलते गए। आज 100 साल की इस यात्रा के बाद तस्वीर स्पष्ट है। वही विचारधारा अधिक प्रभावी सिद्ध हुई जो समाज की संस्कृति और संवेदनाओं के साथ तालमेल बिठा सकी। यह संघर्ष सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि समाज को समझने और उससे जुड़ने का था।

खबर स्रोत एवं संदर्भ:
यह लेख ऐतिहासिक दस्तावेजों, सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध राजनीतिक इतिहास की पुस्तकों, 1951-52 के चुनाव परिणामों के आंकड़ों और विभिन्न समाचार अभिलेखों (Archives) से प्राप्त संक्षिप्त जानकारी पर आधारित है।

लेखक परिचय:
लेखक एक स्थापित कवि, स्वतंत्र स्तंभकार एवं राजनीतिक रचनाकार हैं। वर्ष 2017 में उनका चर्चित काव्य संग्रह ‘दीप प्रवाह‘ प्रकाशित हो चुका है, जिसका विमोचन गौरवशाली राजनीतिक मंच पर संपन्न हुआ था। इसके अतिरिक्त, प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘अमर उजाला’ में उनकी 100 से अधिक कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं। सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर अपनी गहरी पैठ रखने वाले लेखक के यहाँ व्यक्त विचार उनके निजी और मौलिक हैं।

डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह लेख पोर्टल के ‘विचार’ स्तंभ के अंतर्गत प्रकाशित किया गया है। इसमें प्रस्तुत तथ्य और ऐतिहासिक विश्लेषण लेखक के निजी अध्ययन पर आधारित हैं। लेख में व्यक्त विचारों से संपादक या प्रबंधन का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। इसका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं, बल्कि उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी के आधार पर एक दृष्टिकोण साझा करना है।

(फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमन्स / लाइसेंस: CC BY-SA 3.0)

‘विकसित भारत’ का उद्घोष: अमित शाह ने अंडमान को बनाया सामरिक सुरक्षा और स्वाभिमान का नया केंद्र

श्री विजयपुरम_03/01/2026

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की हालिया श्री विजयपुरम (पूर्व में पोर्ट ब्लेयर) यात्रा भारत के सामरिक और सांस्कृतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है। ₹373 करोड़ की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण केवल बुनियादी ढांचे का विकास नहीं, बल्कि इस द्वीप समूह को ‘बोझ से योगदानकर्ता’ बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

अंडमान-निकोबार केवल द्वीपों का समूह नहीं, बल्कि हर भारतीय के लिए एक तीर्थभूमि है। सेलुलर जेल में वीर सावरकर का स्मारक और निरंतर प्रज्ज्वलित मशाल आज भी स्वतंत्रता सेनानियों के उस अदम्य साहस की याद दिलाती है, जिन्होंने यातनाओं को संकल्प में बदला। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इन द्वीपों का नाम ‘शहीद’ और ‘स्वराज’ रखकर न केवल नेताजी सुभाष चंद्र बोस को सम्मान दिया, बल्कि गुलामी की हर निशानी को मिटाने के भारत के संकल्प को भी दोहराया है।

मोदी सरकार की नीतियों के कारण आज यह क्षेत्र भारत की समुद्री शक्ति (Maritime Power) और आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बन रहा है।
📌 ग्रेट निकोबार परियोजना: यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट इस द्वीप को एक वैश्विक कार्गो हब और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करेगा, जिससे यह भारत की सामरिक सुरक्षा का एक अभेद्य स्तंभ बनेगा।
📌 नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy): अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्कूबा डाइविंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित होने से यहाँ पर्यटन और रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं।

श्री विजयपुरम नगर पालिका द्वारा 98% कचरा संग्रहण स्वच्छ भारत मिशन की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इसके साथ ही, गृह मंत्री द्वारा तीन नए कानूनों पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन न्याय प्रणाली में तकनीक और पारदर्शिता के नए युग का संकेत है।

पिछली सरकारों की उपेक्षा के विपरीत, आज अंडमान-निकोबार ‘विकसित भारत’ के विजन में एक महत्वपूर्ण भागीदार है। पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक विकास के बीच संतुलन बनाकर मोदी सरकार इस ‘वीर भूमि’ को दुनिया के नक्शे पर एक समृद्ध और सुरक्षित गंतव्य के रूप में स्थापित कर रही है।
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खाद्य विभाग की शुद्धता जांच: राजनांदगांव में पनीर व डेयरी प्रतिष्ठानों पर सर्जिकल स्ट्राइक

रायपुर/राजनांदगांव, 03 जनवरी 2026

नागरिकों की सेहत से खिलवाड़ रोकने और सुरक्षित खाद्य सामग्री सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने राजनांदगांव जिले में कमर कस ली है। विभाग द्वारा चलाए जा रहे सघन निरीक्षण अभियान के तहत शनिवार को पनीर एवं डेयरी उत्पादों के विनिर्माण और विक्रय केंद्रों पर औचक दबिश दी गई। इस कार्रवाई से मिलावटखोरों और नियमों की अनदेखी करने वाले संचालकों में हड़कंप मच गया है।

नमूने लैब भेजे गए, नियमों के उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने जिले के कुल 08 प्रमुख प्रतिष्ठानों का बारीकी से निरीक्षण किया। इसमें पनीर बनाने वाली डेयरियां, थोक विक्रेता और पनीर के व्यंजन परोसने वाले नामचीन होटल व रेस्टोरेंट शामिल थे।

टीम ने मौके पर पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों के नमूने संकलित कर उन्हें अत्याधुनिक खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा है। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि रिपोर्ट में नमूने अमानक (Substandard), मिथ्याछाप (Misbranded) या असुरक्षित पाए जाते हैं, तो संबंधित संचालकों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

रसोई की स्वच्छता पर विशेष नजर: ‘नौटंकी रेस्टोरेंट’ को नोटिस
डेयरी उत्पादों के अलावा, टीम ने होटल-रेस्टोरेंट में उपयोग होने वाले टमाटर ग्रेवी, प्याज ग्रेवी और आटे के नमूने भी लिए। निरीक्षण के दौरान स्वच्छता के मानकों की अनदेखी करने पर मनगटा टूरिस्ट स्पॉट स्थित ‘नौटंकी रेस्टोरेंट’ को कड़ी फटकार लगाते हुए नोटिस जारी किया गया है।

विभाग ने संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:
📌रसोई क्षेत्र में उच्चतम स्तर की स्वच्छता (Hygiene) बनाए रखें।
📌 किसी भी संक्रामक बीमारी से ग्रसित कर्मचारी को भोजन बनाने के कार्य से दूर रखें।
📌 केवल मानक गुणवत्ता वाले खाद्य तेलों का ही प्रयोग करें।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने सभी कारोबारियों से अपील की है कि वे सुरक्षित विनिर्माण और भंडारण सुनिश्चित करें। विभाग ने संकल्प दोहराया है कि जनता के स्वास्थ्य के साथ समझौता करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा और यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।

प्रयागराज संगम में आस्था का समागम: 400 AI कैमरों और अभूतपूर्व सुरक्षा के बीच माघ मेला शुरु

प्रयागराज | 03 जनवरी, 2026

त्रिवेणी संगम की पावन रेती पर शुक्रवार को माघ मेला-2026 का भव्य शुभारंभ हो गया। तड़के सुबह से ही गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन स्थल पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पहले स्नान पर्व पौष पूर्णिमा के साथ ही 45 दिनों तक चलने वाले इस आध्यात्मिक उत्सव का आगाज शांतिपूर्ण ढंग से हुआ। श्रद्धालुओं ने कड़कड़ाती ठंड के बीच संगम में आस्था की डुबकी लगाई और दान-पुण्य कर सुख-समृद्धि की कामना की।

इस बार माघ मेले में सुरक्षा व्यवस्था को हाई-टेक बनाया गया है। प्रशासन ने पूरे मेला क्षेत्र को डिजिटल किले में तब्दील कर दिया है।
👉 AI निगरानी: मेले की निगरानी के लिए 400 से अधिक AI-इनेबल्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो संदिग्ध गतिविधियों और भीड़ के दबाव को भांपने में सक्षम हैं।

👉ड्रोन और एटीएस: आसमान से ड्रोन के जरिए ट्रैफिक और भीड़ पर नजर रखी जा रही है। जमीन पर ATS, बम डिस्पोजल स्क्वॉड (BDS) और पुलिस की बहुस्तरीय तैनाती की गई है।
👉जल सुरक्षा: संगम के गहरे पानी में एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) के गोताखोर मुस्तैद हैं ताकि किसी भी दुर्घटना को तुरंत टाला जा सके।

प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट और जिला प्रशासन ने पूरे मेला क्षेत्र को कई सेक्टरों में विभाजित किया है। एसीपी अजय पाल शर्मा ने बताया कि ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। यह मेला 15 फरवरी 2026 (महाशिवरात्रि) तक चलेगा। इस बीच मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी जैसे प्रमुख स्नान पर्वों पर करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।

पौष पूर्णिमा के सफल आयोजन ने प्रशासन के आत्मविश्वास को बढ़ाया है। घाटों पर स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और अलाव के पुख्ता इंतजाम दिखे। मेले में आने वाले कल्पवासियों के लिए भी विशेष सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। संगम तट पर गूंजते शंखनाद और मंत्रों के बीच प्रयागराज पूरी तरह भक्तिमय हो गया है।

चुनाव आयोग हुआ सख्त: बंगाल में ‘पर्दे के पीछे’ का खेल उजागर, 5 अफसरों पर गिरेगी गाज

कोलकाता | 03 जनवरी, 2026

पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर और फर्जीवाड़े के आरोप में आयोग ने चार अधिकारियों और एक कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं। यह कार्रवाई मोयना और बारुईपुर पूर्व जैसे क्षेत्रों में पाई गई गंभीर अनियमितताओं के बाद की गई है।

सॉफ्टवेयर ने पकड़ी अफसरों की ‘डिजिटल चोरी’

जांच में खुलासा हुआ कि इन अफसरों ने लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी (Logical Discrepancy) यानी तार्किक विसंगतियों को जानबूझकर नजरअंदाज किया। चुनाव आयोग के एडवांस सॉफ्टवेयर ने अलर्ट जारी किया था कि एक ही मकान नंबर पर 15 से 20 मतदाता पंजीकृत हैं, जो व्यावहारिक रूप से असंभव है। नियमतः अधिकारियों को इसकी फिजिकल वेरिफिकेशन करनी थी, लेकिन अफसरों ने बिना मौके पर जाए ऑफिस में बैठकर ही उन्हें ‘वेरिफाइड’ घोषित कर दिया।

‘अनमैप्ड’ और मृत मतदाताओं का सहारा

आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, हजारों ऐसे मतदाता थे जिनका कोई स्थायी पता या पोलिंग बूथ मैप नहीं था। इन ‘अनमैप्ड’ वोटर्स को हटाने के बजाय सिस्टम में बनाए रखा गया। हद तो तब हो गई जब मोयना में कई मृत व्यक्तियों के नाम भी सूची में ‘जीवित’ मिले। मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध होने के बावजूद फॉर्म-7 (नाम हटाने का आवेदन) को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, ताकि बोगस वोटिंग का रास्ता साफ रहे।

24 लाख संदिग्धों का मास्टरमाइंड कौन?

राज्य में कुल 24 लाख संदिग्ध मतदाताओं की पहचान हुई है। आयोग का मानना है कि यह कोई ‘मानवीय भूल’ नहीं बल्कि एक सोची-समझी आपराधिक साजिश है। एक छोटे से कमरे में दर्जनों मतदाताओं को वैध बताना सीधे तौर पर लोकतंत्र की शुचिता से खिलवाड़ है।

आगे की राह:

पुलिस अब यह जांच करेगी कि क्या ये अधिकारी किसी विशिष्ट राजनीतिक दल के दबाव में काम कर रहे थे? 14 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होनी है। उससे पहले हुई यह कार्रवाई बंगाल के प्रशासनिक गलियारों में स्पष्ट संदेश है—लापरवाही की कीमत अब सीधे जेल होगी।

सोनपैरी में आयोजित भव्य ‘हिंदू सम्मेलन’ में सरसंघचालक भागवत का मार्गदर्शन: बृजमोहन अग्रवाल हुए शामिल

रायपुर (सोनपैरी), 03 जनवरी 2026

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गौरवशाली 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आज ग्राम सोनपैरी में भव्य ‘हिंदू सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। इस गौरवमयी कार्यक्रम में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सम्मिलित होकर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का मार्गदर्शन प्राप्त किया।

एकता और समरसता का संदेश :_बृजमोहन अग्रवाल
सम्मेलन के अनुभव साझा करते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्र के लिए एक ही धर्म सर्वोपरि है और वह है ‘राष्ट्रीयता’। उन्होंने कहा कि सरसंघचालक जी का संबोधन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। डॉ. भागवत ने समाज को एकता और समरसता का सशक्त संदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि हमें जाति, पंथ और भाषा से ऊपर उठकर हर व्यक्ति को अपना मानकर व्यवहार करना चाहिए, यही सच्चे हिंदू संस्कार हैं।

राष्ट्र की अखंडता का संदेश
सांसद अग्रवाल ने डॉ. भागवत के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब हम प्रत्येक व्यक्ति में श्रीराम के दर्शन करेंगे, तभी समाज की सभी व्यवस्थाएं सबके लिए समान रूप से खुलेंगी। यह विचार न केवल हिंदू समाज को संगठित करेगा, बल्कि भारत की एकता और सांस्कृतिक चेतना को भी नई मजबूती प्रदान करेगा।

संतों की उपस्थिति में हुआ आयोजन
इस विशाल सम्मेलन में कबीर पंथ के प्रमुख राष्ट्रीय संत श्री असंग देव जी महाराज, गायत्री परिवार की वरिष्ठ सदस्या पूज्य माता जी श्रीमती उर्मिला नेताम सहित देशभर से पधारे अनेक संतों और धार्मिक विभूतियों का सानिध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में क्षेत्र के हजारों नागरिकों ने हिस्सा लेकर सामाजिक समरसता का संकल्प लिया।