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Saturday, October 31, 2026
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स्मार्ट सिटी में गड्ढों की भरमार, मुख्यमंत्री से की गई शिकायत

रायपुर_08/01/2026

राजधानी रायपुर को स्मार्ट सिटी का दर्जा प्राप्त है, लेकिन जमीनी हकीकत सरकारी दावों से उलट नजर आ रही है। ताजा मामला रायपुर नगर निगम के वामनराव लाखे वार्ड क्रमांक 66 कुशालपुर का है, जहां वर्षों से सड़कों की बदहाली लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।

वार्ड के राम-जानकी सामुदायिक भवन, छत्रपति शिवाजी स्कूल के पास, तिरंगा चौक समीक्षा मेडिकल के समीप तथा पहाड़ी तालाब बंजारी मंदिर के आसपास कई स्थानों पर सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये गड्ढे पिछले चार वर्षों से जस के तस हैं और नगर निगम द्वारा अब तक कोई स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई है।

हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग से सांसद, महापौर, विधायक सहित नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से आवागमन करते हैं, इसके बावजूद इन गड्ढों पर अब तक ध्यान नहीं दिया गया। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि यह स्थिति केवल एक वार्ड की नहीं, बल्कि रायपुर के लगभग 70 वार्डों में कमोबेश यही हाल है। कहीं सड़क में गड्ढे हैं तो कहीं गड्ढों में सड़क नजर आती है।

सामाजिक कार्यकर्ता विजय सोना ने आरोप लगाया कि ट्रिपल इंजन सरकार के तहत विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बद से बदतर हैं। उन्होंने कहा कि केवल होर्डिंग और फ्लैक्स के जरिए विकास का प्रचार किया जा रहा है, जबकि इन गड्ढों की मरम्मत विज्ञापन बजट के आधे से भी कम खर्च में संभव है।

इस गंभीर समस्या को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता विजय सोना ने मुख्यमंत्री से औपचारिक शिकायत करते हुए मांग की है कि रायपुर शहर की सड़कों की तत्काल मरम्मत कराई जाए, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके और स्मार्ट सिटी की अवधारणा साकार हो सके।



ई-मेल से बम धमकी: देशभर की अदालतों में हड़कंप, कई राज्यों में कोर्ट परिसर खाली

नई दिल्ली/छत्तीसगढ़, 08 जनवरी 2026

_देश के कई राज्यों में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब जिला अदालतों और उच्च न्यायालयों को ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिली। बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब की अदालतें इस धमकी की चपेट में रहीं। सुरक्षा के मद्देनज़र तत्काल न्यायालय परिसरों को खाली कराया गया और सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया।

छत्तीसगढ़ में बिलासपुर और राजनांदगांव जिला न्यायालय, जबकि मध्य प्रदेश के रीवा जिला न्यायालय को धमकी भरा ई-मेल मिला। सूचना मिलते ही पुलिस, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड मौके पर पहुंचे। पूरे परिसर की जांच की गई, हालांकि किसी भी स्थान से संदिग्ध वस्तु बरामद होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बिहार के पटना, गया और किशनगंज जिला अदालतों में भी बम धमकी से अफरा-तफरी मच गई। पटना सिविल कोर्ट को खाली कराया गया, वहीं गया और किशनगंज में कोर्ट परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। जांच एजेंसियां धमकी भरे ई-मेल की तकनीकी जांच में जुटी हैं।

ओडिशा हाईकोर्ट को भी ई-मेल के जरिए धमकी मिली, जिसके बाद एहतियातन कोर्ट परिसर खाली कर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इसी तरह हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट को उड़ाने की धमकी मिलने पर बम डिफ्यूज स्क्वॉड ने पूरे परिसर की गहन तलाशी ली।

पंजाब में भी रूपनगर, श्री आनंदपुर साहिब, फिरोजपुर और मोगा की जिला अदालतों को धमकी मिलने से हड़कंप रहा। लुधियाना में सुरक्षा एजेंसियों ने मॉक ड्रिल भी की।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सभी मामलों में धमकी ई-मेल के जरिए दी गई है। साइबर सेल भेजने वाले की पहचान, लोकेशन और IP एड्रेस की जांच कर रही है। फिलहाल इसे दहशत फैलाने की साजिश माना जा रहा है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां किसी भी आशंका को नजरअंदाज नहीं कर रहीं।

लाइसेंस व्यवस्था पर अड़े खादिम: अजमेर दरगाह से जुड़े 3 हजार लोगों ने केंद्र के आदेश ठुकराए

जयपुर | 08/01/2026

अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में प्रशासनिक सुधार को लेकर विवाद बढ़ गया है। दरगाह से जुड़े करीब तीन हजार खादिमों ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के निर्देशों को मानने से इनकार कर दिया है। मंत्रालय ने जायरीनों से अभद्रता और अवैध वसूली रोकने के लिए खादिमों के लिए लाइसेंस व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।

इस संबंध में दरगाह कमेटी के नाजिम ने 5 जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन मांगे थे, लेकिन तय समय तक एक भी खादिम ने आवेदन नहीं किया। इससे प्रशासन और खादिम संगठनों के बीच टकराव गहरा गया है।
लाइसेंस व्यवस्था का अंजुमन सैयद जागदान और अंजुमन शेख जागदान विरोध कर रही हैं। अंजुमन सैयद से करीब 2200 और अंजुमन शेख से लगभग 800 खादिम जुड़े हैं। संगठनों का कहना है कि यह उनकी पारंपरिक भूमिका और अधिकारों में दखल है।

पूर्व बीएसएफ डीआईजी बिलाल खान ने कहा कि दरगाह ख्वाजा साहब अधिनियम, 1955 की धारा 11(एफ) के तहत लाइसेंस व्यवस्था पूरी तरह वैध है और इससे पारदर्शिता आएगी।
वहीं, अंजुमन सैयद जागदान के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने इसे “तुगलकी फरमान” बताते हुए कहा कि खादिम इसे नहीं मानेंगे। उनका आरोप है कि मंत्रालय दरगाह पर खर्च नहीं करता और अमले का भुगतान दरगाह की आय से होता है।

जायरीन और शिकायतें
जिला प्रशासन के अनुसार, दरगाह में रोजाना करीब एक लाख जायरीन पहुंचते हैं। 17 से 27 दिसंबर के उर्स में 14 लाख से अधिक श्रद्धालु आए। प्रशासन का कहना है कि मारपीट, धमकी और अवैध वसूली की शिकायतें मिलती रहती हैं।


जनगणना 2027: स्व-गणना का विकल्प, 30 लाख कर्मियों के सहारे होगा डेटा संग्रह

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जनसंख्या गणना चरण में जाति संबंधी जानकारी भी शामिल की जाएगी, जो स्वतंत्र भारत की जनगणना में पहली बार होगा। जनगणना से प्राप्त डेटा नीति-निर्माण और विकास योजनाओं के लिए अहम आधार बनेगा।

नई दिल्ली | 08/01/2026

केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के पहले चरण की समयसीमा को औपचारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पहले चरण में घर और आवास सूचीकरण (हाउस लिस्टिंग ऑपरेशंस) का कार्य किया जाएगा, जो 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच पूरा होगा।

इस चरण में प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने-अपने स्तर पर तय की गई 30 दिनों की अवधि में यह प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके तहत देशभर के सभी घरों की स्थिति, सुविधाओं और आवास संबंधी जानकारी एकत्र की जाएगी।

अधिसूचना में पहली बार स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प भी शामिल किया गया है। इसके तहत घर-घर सर्वे शुरू होने से 15 दिन पहले नागरिकों को मोबाइल ऐप या पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुगम होगी।

यह जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हुई जनगणना 2021 के बाद आयोजित की जा रही है और इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहला चरण घरों और आवासों की सूचीकरण का होगा, जबकि दूसरा चरण जनसंख्या गणना का होगा, जो फरवरी 2027 में कराया जाएगा। जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की आधी रात निर्धारित की गई है। हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए यह तिथि सितंबर 2026 रखी गई है।

पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना
यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। डेटा संग्रह के लिए एंड्रॉइड और आईओएस आधारित मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (CMMS) पोर्टल के जरिए रीयल-टाइम निगरानी की जाएगी।

करीब 30 लाख जमीनी कर्मी, जिनमें अधिकांश सरकारी शिक्षक होंगे, इस अभियान में शामिल किए जाएंगे। पिछले वर्ष केंद्रीय कैबिनेट ने जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये की लागत को मंजूरी दी थी।

समुद्र की गहराइयों में दिखी पीले पत्थरों जैसी सड़क, सोशल मीडिया पर मचा हंगामा; वैज्ञानिकों ने बताई सच्चाई

वैज्ञानिकों का कहना है कि ज्वालामुखीय गतिविधियों और चट्टानों के टूटने से समुद्र के नीचे ऐसी सीधी संरचनाएं बन सकती हैं, जो इंसानी बनाई सड़क जैसी प्रतीत होती हैं।

डिजिटल डेस्क _08/01/2026

समुद्र की गहराइयों में छिपे रहस्य हमेशा से इंसानों को हैरान करते रहे हैं। कभी डूबी हुई सभ्यताओं की चर्चा होती है, तो कभी ऐसे दृश्य सामने आते हैं जिन्हें देखकर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। हाल ही में प्रशांत महासागर में दिखाई दी एक रहस्यमयी संरचना ने सोशल मीडिया पर सनसनी मचा दी है।

हवाई द्वीप के पास समुद्र की सतह से लगभग 3000 मीटर नीचे वैज्ञानिकों को पत्थरों जैसी एक सीधी और समतल संरचना नजर आई। यह संरचना देखने में बिल्कुल सड़क जैसी लग रही थी। कैमरों की रोशनी पड़ते ही ये पत्थर पीले रंग में चमक उठे, जिसके बाद इसे ‘येलो ब्रिक रोड’ कहा जाने लगा।

यह नजारा Ocean Exploration Trust के रिसर्च जहाज E.V. Nautilus के एक लाइव मिशन के दौरान सामने आया। वैज्ञानिक समुद्र तल की मैपिंग कर रहे थे, तभी कैमरे में आयताकार आकार के पत्थरों की कतार दिखाई दी। पत्थर एक-दूसरे से जुड़े हुए थे और किसी प्राचीन जमाने की पक्की सड़क जैसा आभास दे रहे थे।

वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की कल्पनाएं उड़ान भरने लगीं। कई यूजर्स ने इसे खोई हुई सभ्यता अटलांटिस से जोड़ दिया, तो कुछ ने इसे पाताल लोक का रास्ता बताया। वहीं कई लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि समुद्र के नीचे किसी रहस्यमयी दुनिया की सड़क मिल गई है। यह वीडियो EVNautilus नाम के यूट्यूब चैनल पर शेयर किया गया, जिसे लाखों लोग देख चुके हैं।

हालांकि वैज्ञानिकों ने इन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक यह कोई इंसानी निर्माण नहीं है, बल्कि पूरी तरह प्राकृतिक संरचना है। यह इलाका Papahānaumokuākea Marine National Monument में आता है, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है।

डीआरआई ने सीमा पार सोने की तस्करी करने वाले अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का किया भंडाफोड़

₹40 करोड़ से अधिक का सोना और ₹2.9 करोड़ नकद जब्त, चार आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली : 07 जनवरी 2026 (PIB)

सीमा पार तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने दिल्ली और अगरतला में एक साथ तलाशी अभियान चलाकर दुबई और बांग्लादेश से संचालित एक अंतरराष्ट्रीय संगठित सोना तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है।

इस कार्रवाई में कुल 29.2 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹40 करोड़ है, तथा ₹2.90 करोड़ नकद बरामद किया गया है। नकद राशि में भारतीय एवं बांग्लादेशी मुद्रा शामिल है।

विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर 6 जनवरी 2026 को डीआरआई ने सिंडिकेट के एक प्रमुख सदस्य को दिल्ली स्थित एक घरेलू लॉजिस्टिक्स वेयरहाउस से उस समय गिरफ्तार किया, जब वह अगरतला (त्रिपुरा) से आई दो खेपों की डिलीवरी ले रहा था। खेप की जांच करने पर 15 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना बरामद किया गया, जिस पर अंतरराष्ट्रीय रिफाइनरी के निशान थे। इस सोने का मूल्य लगभग ₹20.73 करोड़ आंका गया है।

इसके बाद दिल्ली और अगरतला में कई ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें अतिरिक्त 14.2 किलोग्राम सोना और ₹2.90 करोड़ नकद जब्त किया गया। सीमा शुल्क अधिनियम के तहत कुल जब्ती के साथ ही सिंडिकेट के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।
जांच में सामने आया है कि यह सिंडिकेट त्रिपुरा के रास्ते भारत-बांग्लादेश सीमा से सोने की तस्करी कर रहा था।

इसके बाद दुबई और बांग्लादेश में बैठे हैंडलर्स तथा अगरतला में ज्वेलरी दुकानों से जुड़े स्थानीय ऑपरेटरों की मिलीभगत से घरेलू कार्गो सेवाओं के जरिए सोना दिल्ली भेजा जाता था।
अवैध सोने की आपूर्ति पर प्रभावी रोक लगाकर डीआरआई देश की आर्थिक एवं वित्तीय स्थिरता की रक्षा करने के साथ-साथ निष्पक्ष और पारदर्शी व्यापार वातावरण सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। मामले में आगे की जांच जारी है।

हरियाणा में पटरी पर उतरने को तैयार देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, अंतिम परीक्षण तेज

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डिजिटल मीडिया | 07/01/2026

भारतीय रेलवे हरित ऊर्जा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन बनकर पूरी तरह तैयार हो चुकी है और इसे पटरी पर उतारने से पहले अंतिम तकनीकी व सुरक्षा परीक्षण किए जा रहे हैं। यह अत्याधुनिक ट्रेन हरियाणा के जींद पहुंच चुकी है, जहां रेलवे के अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO), लखनऊ की विशेषज्ञ टीम इसकी बारीकी से जांच कर रही है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, परीक्षण का मुख्य उद्देश्य ट्रेन की सुरक्षा, स्थिरता और संचालन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परखना है। टेस्टिंग के दौरान पावर कार, हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम, कंट्रोल यूनिट और सेफ्टी उपकरणों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्पीड सेंसर और कंट्रोल सिस्टम को अलग-अलग गति पर चलाकर रिकॉर्ड किया गया, ताकि किसी भी तकनीकी खामी की पहचान की जा सके। इसके साथ ही कोचों के पायदान, दरवाजों और ऊंचाई मानकों की भी जांच की गई।

यह हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद–सोनीपत रूट पर चलाई जाएगी। इसके लिए जींद में स्थापित हाइड्रोजन प्लांट को अंतिम कमीशनिंग चरण में लाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि प्लांट के निर्बाध संचालन के लिए 11 केवी की स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई है, ताकि ईंधन उत्पादन और भंडारण में किसी प्रकार की रुकावट न आए।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की निगरानी राज्य स्तर पर भी की जा रही है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बिजली वितरण निगम के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए कि हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना में किसी भी स्तर पर बाधा स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने नियमित समीक्षा, मजबूत बैकअप व्यवस्था और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए।

रूस-यूक्रेन संघर्ष को कई विश्लेषक नाटो बनाम ब्रिक्स के उभरते शक्ति-संतुलन के संदर्भ में देखते हैं।”

शक्ति प्रदर्शन, विज्ञान का मिथ्याभिमान और मानवता के सामने खड़ा वैश्विक संकट।विकास, शक्ति और विनाश : सभ्यता किस दिशा में जा रही है?

वैश्विक हालात:_07/01/2026

सत्य कभी किसी गलत का समर्थन नहीं करता। आज की वैश्विक परिस्थितियों को देखकर यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या विश्व एक और महायुद्ध की ओर बढ़ रहा है? यदि हाँ, तो इसका कारण क्या है—मानवता की रक्षा या शक्ति का प्रदर्शन?
महाभारत में अर्जुन युद्धभूमि में खड़े होकर कृष्ण से पूछते हैं—
“हे माधव, इन अपने ही लोगों से युद्ध करके मुझे क्या मिलेगा?”
यह प्रश्न केवल अर्जुन का नहीं था, यह हर युग में चेतन मनुष्य का प्रश्न रहा है। युद्ध के सामने खड़ा विवेक यही पूछता है कि हर विकास का अंतिम परिणाम क्या वास्तव में विनाश ही है?

आज लगभग सभी बड़े राष्ट्र परमाणु शक्ति संपन्न हो चुके हैं या होने की दौड़ में हैं। शक्ति का स्वभाव है—वह स्वयं को सिद्ध करना चाहती है। जहाँ शक्ति है, वहाँ शक्ति-प्रदर्शन होगा। जब सभी शक्तिशाली होंगे, तो एक-दूसरे की ताकत परखने के लिए संघर्ष भी होगा। यही स्थिति विश्व को युद्ध की ओर ले जाती है।
यह स्पष्ट होता जा रहा है कि आधुनिक युद्ध मानवता का नहीं, शक्ति का उत्सव बन चुका है।

महाभारत : पहला विश्वयुद्ध?
हम महाभारत को केवल एक धार्मिक ग्रंथ मानकर पढ़ते हैं, जबकि वह एक ऐतिहासिक चेतावनी भी है। ग्यारह अक्षौहिणी सेना कौरवों की, सात पांडवों की—अनगिनत राजा, अनगिनत सैनिक। दिव्यास्त्रों का प्रयोग हुआ, और अंततः क्या बचा?
एक सुनसान धरती, विध्वंस और पश्चाताप।
वह युद्ध अपने समय का विश्वयुद्ध था। आज के परमाणु अस्त्र उसी दिव्यास्त्रों का आधुनिक रूप हैं। अंतर केवल इतना है कि अब विनाश कहीं अधिक त्वरित और सर्वव्यापी होगा।

भारत और गुटनिरपेक्षता
भारत की परंपरा रही है—गुटनिरपेक्षता। यह कायरता नहीं, बल्कि ऐतिहासिक बोध है। हमने देखा है कि युद्ध में सबसे अधिक हानि मानवता की होती है। इसलिए भारत का दर्शन कहता है—
“अहिंसा परमो धर्मः, धर्म हिंसा तदैव च।”
अर्थात् शक्ति आवश्यक है, लेकिन केवल आत्मरक्षा के लिए—प्रदर्शन के लिए नहीं।
आज हमारे देश के सामने असली युद्ध बेरोज़गारी, भूख, जनसंख्या, जल संकट और बेहतर जीवन के अभाव से है। इनसे लड़ने के लिए परमाणु बम नहीं, विवेक चाहिए।

विज्ञान, ज्ञान और अज्ञान
हम गर्व से कहते हैं कि हम ज्ञानी हैं, वैज्ञानिक युग में जी रहे हैं। पर सच यह है कि हम ज्ञान के उपभोक्ता हैं, ज्ञानी नहीं।
जो ज्ञान हम अपनाते हैं, वह किसी और की लिखी, कही या खोजी हुई बात है। हम अनुयायी हैं, स्रष्टा नहीं।
विडंबना यह है कि जो स्वयं को सबसे बड़ा ज्ञानी मानता है, वही सबसे बड़ा अज्ञानी होता है।

आज विज्ञान अपने चरम पर है, लेकिन उसके साथ मिथ्याभिमान भी जुड़ गया है। हम विज्ञान को साधन नहीं, सत्ता बना चुके हैं। मोबाइल, टीवी, आरओ जल—हर जगह विज्ञान है, पर विवेक नहीं।
हम धरती से अंधाधुंध पानी निकाल रहे हैं, जल संकट खड़ा कर रहे हैं।
“हो गया बिन पानी सब सूना…”—यह पंक्ति अब भविष्य नहीं, वर्तमान बन चुकी है।

प्रकृति, शक्ति और भ्रम
हम प्राकृतिक संपदा को अकूत मानकर उस पर अधिकार जताते हैं, जबकि प्रकृति न तो अकूत है, न किसी की संपत्ति। वह संतुलन के लिए है, दोहन के लिए नहीं।
आज श्रेष्ठ को कमजोर और कमजोर को सत्ता के सहारे श्रेष्ठ बनाया जा रहा है। यही असंतुलन अंततः विनाश को जन्म देता है।

निष्कर्ष
पूरा विश्व आज स्वयं को सुपरपावर समझने की भूल कर रहा है। यही भूल सबसे बड़ा खतरा है।हमें शक्ति संपन्न नहीं, साधन संपन्न होना चाहिए।
शक्ति का प्रयोग रक्षा के लिए हो, प्रदर्शन के लिए नहीं।
यदि विकास का अर्थ केवल अधिक विनाशकारी हथियार बनाना है, तो ऐसा विकास सभ्यता नहीं, आत्महत्या है।
सभ्यता का भविष्य विज्ञान से नहीं, विवेक से सुरक्षित होगा।

डिस्क्लेमर:_“यह लेख लेखक के निजी विचारों और वैचारिक विश्लेषण पर आधारित है।”



पश्चिम बंगाल: चुनावी सरगर्मी में प्रतिष्ठा, राजनीति और नैरेटिव की लड़ाई

पश्चिम बंगाल का चुनाव: मोदी बनाम ममता से आगे की कहानी

दिल्ली की रणनीति और बंगाल की चुनौती_06/01/2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा का चुनाव किसी सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है। यह चुनाव भारतीय जनता पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह—के लिए एक प्रतिष्ठा की लड़ाई का रूप ले चुका है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यह न केवल सत्ता की रक्षा, बल्कि अपनी राजनीतिक पहचान और क्षेत्रीय प्रभाव को बनाए रखने का संघर्ष है।

भाजपा की चुनावी गणित स्पष्ट है—उसे हिंदू मतों के बड़े हिस्से को अपने पक्ष में एकजुट करना होगा। दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के जरिए अपने राजनीतिक संतुलन को साधने की कोशिश की है। जगन्नाथ धाम जैसे कदम यह संकेत देते हैं कि वह भाजपा के नैरेटिव को उसी के मैदान में चुनौती देने का प्रयास कर रही हैं।

अब टकराव महज दो दलों का नहीं, बल्कि दो राजनीतिक संस्कृतियों और नैरेटिव्स की भी लड़ाई है। एक ओर मोदी-केंद्रित राष्ट्रवादी राजनीति है, तो दूसरी ओर ममता बनर्जी की क्षेत्रीय अस्मिता और कल्याणकारी राजनीति। खास बात यह है कि दक्षिण भारत की तरह पश्चिम बंगाल भी उन राज्यों में शामिल है, जहां अब तक मोदी-शाह की चुनावी रणनीति निर्णायक प्रभाव छोड़ने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाई है।

बिहार जैसे राज्यों में गठबंधन से सत्ता तक पहुंचने वाली भाजपा को पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के खिलाफ अकेले लड़ना पड़ रहा है। लेफ्ट और कांग्रेस कमजोर हुई हैं, लेकिन तृणमूल कांग्रेस की पकड़ अब भी बनी हुई है। यह चुनाव भाजपा की संगठनात्मक मजबूती और रणनीति की असली परीक्षा है।

पश्चिम बंगाल भाजपा के लिए ध्रुवीकरण की राजनीति का अहम इम्तिहान है।राज्य में करीब 30 प्रतिशत मुस्लिम और 70 प्रतिशत हिंदू मतदाता हैं।
पिछले चुनावों में मिले 40 प्रतिशत वोट समर्थन बढ़ने का संकेत देते हैं, पर बहुमत अब भी सवाल है।

नेपाल के बीरगंज में हिंसा, मस्जिद में तोड़फोड़ का आरोप; भारत-नेपाल सीमा पर अलर्ट

बीरगंज (नेपाल) | 06 जनवरी 2026

नेपाल के पारसा जिले के बीरगंज में हिंसक झड़पों के बाद तनाव की स्थिति बनी हुई है। आरोप है कि एक मस्जिद में तोड़फोड़ की घटना हुई, जिसके बाद दो समुदायों के बीच विवाद बढ़ गया। कई इलाकों में झड़प और पत्थरबाजी की खबरें सामने आई हैं।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने बीरगंज में कर्फ्यू लागू कर दिया है। बीरगंज भारत-नेपाल सीमा से सटा हुआ इलाका है, ऐसे में सुरक्षा कारणों से भारत की सीमा पर भी अलर्ट जारी किया गया है।

पारसा जिले के चीफ डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर (CDO) भोला दहल ने बताया कि मंगलवार शाम 6 बजे तक कर्फ्यू लागू रहेगा। उन्होंने कहा कि सोमवार को भी हिंसा की घटनाएं सामने आने के बाद कुछ पाबंदियां लगाई गई थीं, लेकिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी, जिसके चलते कर्फ्यू का फैसला लिया गया।

प्रशासन के अनुसार, बीरगंज के धानुशा इलाके में हुई घटना के बाद तनाव फैल गया। स्थानीय मुस्लिम समुदाय का आरोप है कि धानुशा के कमला नगरपालिका क्षेत्र में स्थित एक मस्जिद में तोड़फोड़ की गई थी, जिसके बाद हालात बिगड़ गए।

हिंसक झड़पों के दौरान कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी सूचना है। फिलहाल इलाके में भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि सोमवार रात से ही सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।