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मकर संक्रांति: ब्रह्मांडीय चेतना, खगोलीय विज्ञान और भीष्म के संकल्प का महाख्यान

मकर संक्रांति विशेष_15/01/2026

खगोलीय विज्ञान और उत्तरायण
वैज्ञानिक दृष्टि से जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है, तो उसे ‘मकर संक्रांति’ कहते हैं। इस दिन से सूर्य ‘उत्तरायण’ हो जाते हैं, जिसका अर्थ है पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध का सूर्य की ओर झुकना। इससे दिन लंबे होने लगते हैं और प्रकाश की अवधि बढ़ जाती है। यह अंधकार से प्रकाश और जड़ता से चेतना की ओर बढ़ने का प्रतीक है।

भीष्म पितामह: संकल्प और ब्रह्मचर्य की पराकाष्ठा
इस पर्व का सबसे प्रेरणादायक आध्यात्मिक पक्ष भीष्म पितामह से जुड़ा है। आजीवन अखंड ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले भीष्म को ‘इच्छा मृत्यु’ का वरदान प्राप्त था। महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन के बाणों से बिंधकर जब वे ‘शर-शय्या’ (बाणों की शय्या) पर लेटे थे, तब सूर्य दक्षिणायन में था।

ब्रह्मचर्य और योग बल के धनी पितामह ने उस भीषण पीड़ा में भी अपने प्राणों को रोके रखा। उन्होंने दक्षिणायन में शरीर त्यागना उचित नहीं समझा, क्योंकि शास्त्रों में उत्तरायण को मोक्ष का मार्ग माना गया है। जैसे ही मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण हुए, उन्होंने अपनी इच्छा से प्राण त्याग कर निर्वाण प्राप्त किया। यह घटना दर्शाती है कि एक अनुशासित और ब्रह्मचारी मन प्रकृति की शक्तियों पर भी विजय प्राप्त कर सकता है।

प्रकृति और दान का संदेश
हिंदुस्तानी संस्कृति प्रकृति पूजक है। हमारे वेद प्रकृति से और उपनिषद दर्शन से जुड़े हैं। मकर संक्रांति पर तिल, गुड़ और खिचड़ी का सेवन न केवल स्वास्थ्य (विज्ञान) के लिए लाभकारी है, बल्कि यह नई फसल का उत्सव भी है। वर्ष 2026 में 15 जनवरी को सूर्य देव की उपासना और पवित्र नदियों में स्नान कर हम उसी ऊर्जा को नमन करते हैं, जो भीष्म जैसे महापुरुषों के संकल्प का आधार थी।

रायपुर क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक बड़ी खबर:भारत और न्यूजीलैंड का होगा T20 में मुकाबला

दोनों टीमें 22 जनवरी को रायपुर पहुंचेंगी। क्रिकेट प्रेमियों में इस मैच को लेकर भारी उत्साह है, क्योंकि यह श्रृंखला आगामी T20 विश्व कप की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

रायपुर/ छत्तीसगढ़ _14/01/2026

खबर वाकई क्रिकेट प्रेमियों के लिए बड़ी है! रायपुर का शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय रोमांच की मेजबानी के लिए तैयार है।
23 जनवरी 2026 को भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले इस दूसरे T20 मैच के लिए सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर प्रशासन ने बेहद कड़े और नए कदम उठाए हैं।

सुरक्षा के बड़े इंतजाम और नए नियम बनाए गए है।
पिछली घटनाओं और भीड़ प्रबंधन से सबक लेते हुए, इस बार सुरक्षा व्यवस्था में “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई जा रही है:
नोएंट्री (प्रथम पारी के बाद):
छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ ने स्पष्ट किया है कि पहली पारी (First Innings) समाप्त होने के बाद किसी भी दर्शक को स्टेडियम के अंदर प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
बाउंसर्स की भारी तैनाती से सुरक्षा व्यवस्था होगी मजबूत:
स्टेडियम की सुरक्षा और दर्शकों के बीच व्यवस्था बनाए रखने के लिए 350 से अधिक निजी बाउंसर तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा बड़ी संख्या में पुलिस बल और 45 क्रिकेट संघ के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

लोहे की रेलिंग की व्यवस्था
बिना टिकट के अवैध प्रवेश को रोकने के लिए स्टेडियम के सभी 13 गेट्स पर लोहे की रेलिंग लगाई गई है। सीढ़ियों और एंट्री पॉइंट्स पर भी सुरक्षा घेरा बढ़ाया गया है।

खाद्य पदार्थों पर निगरानी पर ध्यान
पिछली बार खाने-पीने की चीजों के बढ़े हुए दामों की शिकायतों को देखते हुए, इस बार स्टॉल्स पर कीमतों की कड़ी निगरानी की जाएगी ताकि दर्शकों से अधिक पैसे न वसूले जा सकें।

मैच का विवरण:_
भारत बनाम न्यूजीलैंड, दूसरा T20,दिनांक _23 जनवरी, 2026,समय | शाम 7:00 बजे (IST) स्थान _शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम, नवा रायपुर |भारतीय कप्तान _सूर्यकुमार यादव ।

आस्था की आड़ में प्रलोभन का प्रहार—कब रुकेगा धर्मांतरण का यह खेल?

बिलासपुर/छत्तीसगढ़_14/01/2026

छत्तीसगढ़ की शांत आबोहवा में धर्मांतरण का जहर जिस तेजी से घुल रहा है, वह अब केवल चिंता का विषय नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक चुनौती बन चुका है। बिलासपुर के मस्तूरी क्षेत्र के मल्हार में हाल ही में हुई पास्टर रामकुमार केवट की गिरफ्तारी ने एक बार फिर उस कड़वी सच्चाई को उजागर किया है, जिसे अक्सर ‘प्रार्थना सभा’ की चादर से ढंकने की कोशिश की जाती है।

चंगाई की आड़ में मानसिक प्रहार, अंधविश्वास को बढ़ावा
धर्मांतरण के इस पूरे खेल का सबसे डरावना पहलू है ‘मनोवैज्ञानिक दबाव’। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में जब कोई व्यक्ति बीमारी, पारिवारिक कलह या गरीबी से टूट चुका होता है, तब ये मिशनरी तत्व सक्रिय होते हैं। मल्हार की घटना इसका जीता-जागता उदाहरण है। छत पर बने हॉल में महिलाओं और युवतियों को इकट्ठा करना और उन्हें यह विश्वास दिलाना कि “विशेष प्रार्थना से पुरानी बीमारियां ठीक हो जाएंगी”, सीधे तौर पर उनके अंधविश्वास और लाचारी का फायदा उठाना है।

क्या सरकार की योजनाओं में वह दम नहीं है जो प्रलोभन और भौतिक लाभ के जाल में है।
सिर्फ आध्यात्मिक झांसा ही नहीं, बल्कि ‘भोजन और भौतिक सुख-सुविधाओं’ का लालच देकर धर्म परिवर्तन कराना यह दर्शाता है कि यह कृत्य आस्था से प्रेरित नहीं, बल्कि एक सुनियोजित एजेंडा है। छत्तीसगढ़ में आए दिन अखबारों की सुर्खियां बनती ऐसी खबरें यह बताने के लिए काफी हैं कि सामाजिक संगठन भले ही सक्रिय हों और पुलिस कार्यवाही भी कर रही हो, लेकिन धर्मांतरण की जड़ें बहुत गहरी हो चुकी हैं।

प्रशासन और समाज की दोहरी जिम्मेदारी
मल्हार चौकी पुलिस और डीएसपी लालचंद मोहले की त्वरित कार्यवाही सराहनीय है, लेकिन क्या केवल गिरफ्तारी ही समाधान है? सवाल यह भी उठता है कि आखिर क्यों हमारा गरीब तबका इन प्रलोभनों का इतनी आसानी से शिकार हो जाता है?

सरकार की सख्त कदम की जरूरत
धर्मांतरण के इस संगठित ढांचे को तोड़ने के लिए केवल कानून का डंडा काफी नहीं है। समाज को जागरूक होना होगा और शासन को उन बुनियादी कमियों (स्वास्थ्य और शिक्षा) को दूर करना होगा, जिनका फायदा उठाकर ये तत्व लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ करते हैं। अगर आज “प्रार्थना सभाओं” के पीछे छिपे इन मंसूबों को नहीं पहचाना गया, तो आने वाले समय में यह सामाजिक समरसता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

खबर पश्चिम बंगाल: जानलेवा ‘निपाह’ की आहट, मृत्यु दर 70% तक; हाई अलर्ट पर प्रशासन

कोलकाता/बारासात | 14 जनवरी, 2026

भारत अभी कोरोना के जख्मों से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि पश्चिम बंगाल से आई एक खबर ने देश की चिंता बढ़ा दी है। उत्तर 24 परगना जिले के बारासात में निपाह वायरस (Nipah Virus) के संदिग्ध मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह वायरस बेहद घातक है, जिसकी मृत्यु दर 40% से 70% के बीच रहती है।

प्राप्त खबर अनुसार
बारासात के एक निजी अस्पताल में कार्यरत दो स्वास्थ्यकर्मी (एक महिला और एक पुरुष नर्स) अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। उनमें तेज बुखार, सिरदर्द और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण देखे गए, जो निपाह संक्रमण की ओर इशारा करते हैं। फिलहाल दोनों वेंटिलेटर पर हैं और उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। उनके नमूने पुष्टि के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे भेजे गए हैं।

जांच में पता चला है कि ये दोनों कर्मी हाल ही में अपने पैतृक गांव पूर्वी मिदनापुर और पूर्व बर्धमान गए थे, जिसके बाद से संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ गया है।

सरकार की त्वरित कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय सक्रिय हो गया है। केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बात कर स्थिति की समीक्षा की। केंद्र ने नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम (NJORT) को बंगाल रवाना किया है। प्रभावित क्षेत्रों में ‘कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग’ शुरू कर दी गई है ताकि संभावित मरीजों की पहचान की जा सके।
बचाव के लिए क्या करें और क्या न करें?

जब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो जाती, विशेषज्ञों ने निम्नलिखित सावधानियों की सलाह दी है:
करें (Dos): फलों को अच्छी तरह धोकर और छीलकर खाएं। नियमित रूप से साबुन से हाथ धोएं। बुखार या मानसिक भ्रम जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
न करें (Don’ts): जमीन पर गिरे या पक्षियों द्वारा कुतरे गए फल न खाएं। खजूर का कच्चा रस पीने से बचें। संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से बचें।पश्चिम बंगाल में निपाह का इतिहास डराने वाला है। साल 2001 में सिलीगुड़ी में इसके प्रकोप से 45 लोगों की मौत हुई थी। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे पैनिक न करें, बल्कि सतर्क रहें।

भ्रष्टाचार का आरोप:नारायणपुर महिला महाविद्यालय के प्राचार्य सहित 5 प्राध्यापक निलंबित

पीएम उषा फंड (PM-USHA) में वित्तीय अनियमितता पर छत्तीसगढ़ शासन की बड़ी कार्यवाही

रायपुर, 13 जनवरी 2026

छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए एक बड़ी प्रशासनिक कार्यवाही की है। विभाग ने नारायणपुर स्थित शासकीय आदर्श महिला महाविद्यालय में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में प्राचार्य समेत पांच प्राध्यापकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
पूरा मामला और कार्यवाही
यह पूरी कार्यवाही पीएम-उषा (PM-USHA) मद के तहत आवंटित राशि के उपयोग में की गई गड़बड़ी से जुड़ी है। जांच में पाया गया कि महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा सामग्री क्रय (Purchasing) के दौरान छत्तीसगढ़ वित्तीय नियम संहिता 2002 (संशोधित 2025) का उल्लंघन किया गया। बिना किसी निविदा (Tender) प्रक्रिया के बड़ी राशि की सामग्री खरीदी गई और प्रक्रियागत नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया।

निलंबन आदेश के तहत निम्नलिखित अधिकारियों को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 9(1)(क) के अंतर्गत सस्पेंड किया गया है: डॉ. योगेंद्र पटेल (प्राचार्य)श्री भूषण जय गोयल (सहायक प्राध्यापक) श्री किशोर कुमार कोठारी (सहायक प्राध्यापक) श्री हरीश चंद बैद (सहायक प्राध्यापक) श्री नोहर राम (सहायक प्राध्यापक)आदेश के अनुसार, सभी निलंबित अधिकारियों का मुख्यालय क्षेत्रीय अपर संचालक, कार्यालय जगदलपुर (बस्तर) निर्धारित किया गया है। निलंबन की अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रथम दृष्टया दोष सिद्ध होने पर यह कार्यवाही की गई है। इस पूरे प्रकरण की अब विभागीय जांच (Departmental Inquiry) पृथक से की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध बर्खास्तगी जैसी और भी कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जा सकती है।

शासन ने कड़ा संदेश दिया है कि सरकारी योजनाओं के फंड में किसी भी तरह की पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

“ड्रोन घुसपैठ पर आर्मी चीफ का ऐलान: नापाक हरकत का माकूल जवाब”

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नई दिल्ली:_13 जनवरी 2026

भारत-पाक सीमा पर हालिया ड्रोन गतिविधियों के बीच भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पाकिस्तान को सख्त चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी समाप्त नहीं हुआ है और कोई भी दुस्साहस करने की कोशिश की गई तो कड़ा जवाब दिया जाएगा।

जनरल द्विवेदी ने मंगलवार को यहां बताया कि बीते दिनों सीमा पर दिखे ड्रोनों को लेकर पाकिस्तान को पहले ही सूचित कर दिया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा, “ऑपरेशन सिंदूर जारी है। आठ आतंकी ठिकाने अभी भी सक्रिय हैं।

नॉर्दर्न फ्रंट पर स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सतर्कता बरतना जरूरी है।”सेना प्रमुख ने 2025 में हुई कार्रवाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान 31 आतंकियों को मार गिराया गया, जिनमें 65 प्रतिशत पाकिस्तानी नागरिक थे।

उन्होंने उल्लेख किया कि ड्रोन हमलों का स्रोत पहले से ट्रैक किया जा रहा था, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद इसकी कार्रवाई और तेज हो गई है।

“किसी भी उकसावे का माकूल जवाब दिया जाएगा,”

उन्होंने चेतावनी दी।

आवारा कुत्तों के मालिक कौन? काटने पर राज्य सरकार भरेगी मुआवजा

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“आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों पर मुआवजे की जिम्मेदारी डाली।”

नई दिल्ली, 13 जनवरी 2026

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अगर कोई आवारा कुत्ता किसी बच्चे या बुजुर्ग को काट लेता है और इससे चोट या मौत होती है, तो राज्य सरकार को मुआवजा देना होगा। जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने सुनवाई के दौरान कुत्ते प्रेमियों और फीडिंग करने वालों पर भी जिम्मेदारी ठोंकी।

जस्टिस मेहता ने तल्खी से कहा, “अगर कोई आवारा कुत्ता हमला कर दे तो उसकी जिम्मेदारी किसकी? काश अनाथ बच्चों के लिए भी ऐसी भावुकता दिखाई जाती। 2011 में मुझे जज बनाया गया, लेकिन इंसानों के लिए इतने भावुक तर्क कभी नहीं सुने।” उन्होंने मानवीय सहानुभूति की कमी पर सवाल उठाए। जस्टिस नाथ ने फटकार लगाई, “कुत्तों को खाना खिलाने वाले लोग जिम्मेदार होंगे। एक काम करो, उन्हें घर ले जाओ, इधर-उधर भटकने क्यों छोड़ते हो?”ये टिप्पणियां वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी की दलीलों के बाद आईं, जिन्होंने आवारा कुत्तों को ‘भावुक मुद्दा’ बताया।

कोर्ट ने फटकारा, “ये भावुकता सिर्फ कुत्तों के लिए ही दिखती है।” मेनका ने सफाई दी, “हमें लोगों की भी चिंता है।”दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर के शहरों में कुत्तों का कहर बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले 7 नवंबर 2025 को स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। सरकारी-सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों का प्रवेश बंद करने को कहा, लेकिन कई ने विरोध किया। अब मुआवजे का प्रावधान लागू होगा, जो राज्य सरकारों पर भारी पड़ेगा।

कोर्ट ने डॉग लवर्स को चेतावनी दी कि फीडिंग से कुत्ते आबादी बढ़ेगी और खतरा और गहराएगा। ये फैसला जन स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए ऐतिहासिक है।

कानपुर गैंगरेप कांड: आरोपी दारोगा पर 50 हजार का इनाम घोषित, वायरल वीडियो से पुलिस लापरवाही उजागर

कानपुर, 12 जनवरी 2026

कानपुर के सचेंडी में 14 वर्षीय नाबालिग के साथ गैंगरेप की घटना में आरोपी दारोगा अमित मौर्य पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया गया। पीड़िता का बयान कोर्ट में दर्ज होने के बाद पुलिस की लापरवाही उजागर करने वाले वायरल वीडियो ने सनसनी फैला दी।

14 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप की सनसनीखेज घटना के चार दिन बाद सोमवार को पीड़िता का बयान एडिशनल सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के समक्ष दर्ज कराया गया। बंद दरवाजों में करीब 30 मिनट चली इस सुनवाई के दौरान भावुक होकर रो पड़ी पीड़िता को न्याय का भरोसा दिलाते हुए जज ने कहा कि उसे पूरा इंसाफ मिलेगा।

सचेंडी गैंगरेप कांड में पुलिस लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। आरोपी दारोगा अमित मौर्य पीड़िता व भाई को भटकाते नजर आए, जबकि जेल गए शिवबरन ने भाई को धमकाया। आसपास पुलिसकर्मी चुप्पी साधे रहे।आरोपी अमित सरेंडर की कोशिश में हैं। पुलिस की चार टीमें खाली हाथ, ठिकाने पता होने पर भी कार्रवाई ठप। पीड़िता परिवार सुरक्षित, भाई बोले, “दारोगा की आजादी से बहन दहशत में।” पीड़िता बयान से केस मजबूत।

घटना के बाद पुलिस की लापरवाही के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। रविवार को सोशल मीडिया पर दो वायरल वीडियो ने हड़कंप मचा दिया। इनमें आरोपी दारोगा अमित मौर्य के सामने पीड़िता और उसके भाई से पूछताछ होती दिख रही है, जबकि दारोगा चुपके से वीडियो बनवाता नजर आ रहा है। वीडियो में सहमी हुई किशोरी और उसके भाई को भटकाने का प्रयास साफ झलकता है।

पुलिस की बड़ी कार्रवाई: कबीरधाम में 26 किलो गांजा तस्करों के चंगुल से बरामद, दो गिरफ्तार

कवर्धा/छत्तीसगढ़ _12 जनवरी 2026

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में पुलिस ने इंटरस्टेट गांजा तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की।

एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स, कवर्धा पुलिस, बोड़ला थाना और साइबर थाना की संयुक्त टीम ने खुफिया सूचना के आधार पर बोड़ला क्षेत्र में एक संदिग्ध वाहन रोका।तलाशी में वाहन के सीक्रेट चैंबर से 26.860 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ, जिसकी अनुमानित कीमत 25 लाख रुपये है। वाहन भी जब्त कर लिया गया।

आरोपी लाला चर्मकार और राधिका मल्ला (दोनों मध्य प्रदेश के रीवा निवासी) ओडिशा से गांजा लेकर एमपी के रीवा जा रहे थे। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है।डीएसपी ने बताया कि तस्करों ने गांजे को वाहन में छिपाकर नया तरीका अपनाया था, लेकिन पुलिस की चौकसी ने उन्हें चकमा दे दिया।

छत्तीसगढ़ में नए साल पर गांजा तस्करों का नेटवर्क सक्रिय है, जिसके खिलाफ पुलिस लगातार अभियान चला रही है। अधिकांश तस्करी अन्य राज्यों से हो रही है, इसलिए सख्ती बढ़ाने की जरूरत है।

हैदराबाद में 300 आवारा कुत्तों की क्रूर हत्या, 9 पर FIR; सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन?

हनमकोंडा (तेलंगाना), 12 जनवरी 2026:

तेलंगाना के हनमकोंडा जिले के श्यामपेट और अरेपल्ली गांवों में छह से आठ जनवरी के बीच करीब 300 आवारा कुत्तों को जहर देकर बेरहमी से मार डालने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पशु कल्याण कार्यकर्ताओं अदुलपुरम गौतम और फरजाना बेगम की शिकायत पर श्यामपेट पुलिस ने नौ लोगों—जिनमें ग्राम पंचायत सरपंच और सचिव शामिल हैं—के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

कार्यकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों ने दो व्यक्तियों को हायर कर कुत्तों को जहर दिया और शवों को गांव के बाहर फेंक दिए। यह घटना पशु कल्याण के लिए गंभीर चुनौती पैदा करती है, क्योंकि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या रेबीज और हमलों का कारण बन रही है। कार्यकर्ता अदुलपुरम गौतम ने कहा, “यह क्रूरता नहीं, तो क्या है? पशु अधिकारों का सम्मान जरूरी है।”

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का क्या?

हालांकि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई हुई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों का जिक्र महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने सभी राज्यों को हाईवे, सड़कों, एक्सप्रेस-वे से आवारा कुत्तों व मवेशियों को हटाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने शैक्षिक संस्थानों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों आदि में बाड़बंदी अनिवार्य की ताकि आवारा जानवर घुसें नहीं। एक याचिका में 90 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के मामले का जिक्र हुआ, जहां आवारा कुत्तों के हमले को कारण बताया गया। जस्टिस ने तस्वीर देखने से इनकार करते हुए कहा, “ऐसी तस्वीरें दिखाने की जरूरत नहीं।”

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रेबीज संदिग्ध कुत्तों को छोड़ा न जाए, लेकिन सामान्य हत्या पर रोक लगाई। लाइव लॉ के अनुसार, यह आदेश सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाता है। फिर भी, जहर देकर हत्या पशु क्रूरता अधिनियम का सीधा उल्लंघन है।

पशु कल्याण मंत्रालय ने आवारा कुत्तों के लिए टीकाकरण और स्टेरलाइजेशन पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ABC (Animal Birth Control) कार्यक्रम मजबूत करने से ऐसी घटनाएं रुकेंगी। पुलिस जांच पूरी होने पर आरोपी गिरफ्तार हो सकते हैं।