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ब्रह्मांड का ‘पावरहाउस’: अलकनंदा आकाशगंगा के नए डेटा ने खगोलविदों को चौंकाया, क्या यह मंदाकिनी के भविष्य का आईना है?

​”अलकनंदा केवल एक आकाशगंगा नहीं, बल्कि एक ‘टाइम मशीन’ है। इसे देखकर हम समझ सकते हैं कि हमारी अपनी मंदाकिनी अरबों साल पहले कैसी दिखती होगी।” — वरिष्ठ खगोलशास्त्री (शोध टीम के सदस्य)

नई दिल्ली/इंटरनेशनल डेस्क (18 जनवरी 2026)

खगोल विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी हलचल देखी गई जब भारतीय खगोलविदों के नेतृत्व में ‘अलकनंदा’ (Alaknanda) आकाशगंगा के नवीनतम विश्लेषण जारी किए गए। यह खोज न केवल इसके विशाल आकार की पुष्टि करती है, बल्कि यह भी बताती है कि यह आकाशगंगा ब्रह्मांड के ‘अंधेरे युग’ से बाहर आने वाली सबसे सक्रिय संरचनाओं में से एक है।

ताज़ा खुलासा: हर साल बन रहे हैं 50 से अधिक नए सूर्य।हालिया शोध के अनुसार, अलकनंदा में तारा निर्माण (Star Formation) की दर पहले के अनुमानों से भी अधिक पाई गई है।नई दर: जहाँ हमारी मंदाकिनी साल भर में औसतन 1-2 नए तारे बनाती है, वहीं अलकनंदा में 50 से 60 नए तारों का जन्म हो रहा है।

ऊर्जा का भंडार: वैज्ञानिकों ने पाया कि अलकनंदा के केंद्र में मौजूद गैस के बादल इतने सघन हैं कि वे आने वाले करोड़ों वर्षों तक इसी गति से तारों का निर्माण जारी रख सकते हैं।
JWST की ‘डीप स्पेस’ तस्वीरों ने खोली परतें
जेम्स वेब टेलिस्कोप (James Webb Telescope) द्वारा हाल ही में भेजी गई इन्फ्रारेड तस्वीरों ने इसकी सर्पिल भुजाओं (Spiral Arms) के भीतर छिपे ‘स्टेलर नर्सरी’ (जहां तारे पैदा होते हैं) को पहली बार स्पष्ट रूप से दिखाया है।

गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग का चमत्कार: शोधकर्ताओं ने बताया कि एक सुदूर गैलेक्सी क्लस्टर के पीछे स्थित होने के कारण गुरुत्वाकर्षण ने इसकी रोशनी को 15 गुना बड़ा कर दिया है, जिससे हमें 10 अरब साल पहले की स्थिति को आज लाइव देखने जैसा अनुभव मिल रहा है।

क्यों खास है ‘अलकनंदा’ का नाम?
आईआईटी इंदौर और अंतरराष्ट्रीय टीम के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि “मंदाकिनी” और “अलकनंदा” का संबंध केवल पौराणिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक भी है। जिस तरह अलकनंदा नदी अपने वेग से नई धाराओं को जन्म देती है, यह आकाशगंगा भी ब्रह्मांड में नई ऊर्जा और प्रकाश का स्रोत है।

अस्वीकरण:_ब्रह्मांडीय खोजों और खगोलीय डेटा पर आधारित यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए है।

असम में शुरू सियासी शंखनाद: पीएम मोदी की ‘सांस्कृतिक हुंकार’ बनाम प्रियंका की ‘रणनीतिक घेराबंदी’

जनसभा को संबोधित करते पीएम मोदी ने कहा “कांग्रेस ने वोट बैंक के लिए असम की अस्मिता को घुसपैठियों के हवाले किया, जबकि भाजपा ने इसे सुरक्षा और सम्मान दिया।”

गुवाहाटी/कलियाबोर:18/01/2026

असम की लाल मिट्टी और चाय के बागानों के बीच 2026 की चुनावी बिसात बिछ चुकी है। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कलियाबोर की धरती से जहाँ विकास और विरासत का कार्ड खेला, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने प्रियंका गांधी के हाथों में राज्य की कमान सौंपकर यह साफ कर दिया है कि इस बार दिसपुर की जंग ‘वॉकओवर’ नहीं होने वाली।

विकास का ‘कॉरिडोर’ और बोडो समुदाय को साधने की कोशिश
प्रधानमंत्री मोदी ने आज ₹6,957 करोड़ की लागत वाले काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का शिलान्यास कर इसे असम के भविष्य की जीवनरेखा करार दिया। लेकिन चर्चा केवल कंक्रीट के पुलों की नहीं, बल्कि ‘बागुरंबा’ नृत्य की रही। 10,000 बोडो कलाकारों के बीच पीएम की मौजूदगी ने उन 81 विधानसभा क्षेत्रों में हलचल पैदा कर दी है, जहाँ बोडो वोट बैंक किंगमेकर की भूमिका निभाता है।

कांग्रेस की रणनीति
सत्तापक्ष की इस घेराबंदी के बीच कांग्रेस ने इस बार अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। प्रियंका गांधी वाड्रा को राज्य की स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया जाना यह संकेत है कि आलाकमान अब पूर्वोत्तर को लेकर गंभीर है। जमीन पर सांसद गौरव गोगोई की बढ़ती लोकप्रियता मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के लिए नई चुनौती पेश कर रही है। सर्वे के आंकड़े बता रहे हैं कि विकास के दावों के बीच ‘अन्याय’ और ‘भेदभाव’ के मुद्दे पर विपक्ष को अप्रत्याशित समर्थन मिल रहा है।

इस बार चुनाव को प्रभावित करेंगे:_घुसपैठ, अल्पसंख्यक मत और युवा और रोजगार: चाय बागान श्रमिकों और बेरोजगार युवाओं का झुकाव किस ओर होगा?


विदिशा से विकास का शंखनाद: ₹16,000 करोड़ का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे और ₹4,400 करोड़ की नई सौगातें

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दिल्ली-मुंबई, भोपाल-कानपुर और लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे से कनेक्टिविटी।

विदिशा/भोपाल | 17 जनवरी 2026

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को विदिशा संसदीय क्षेत्र के लिए विकास का बड़ा रोडमैप पेश किया। उन्होंने घोषणा की कि विदिशा-सागर-कोटा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को मंजूरी मिल गई है। लगभग ₹16,000 करोड़ की लागत से बनने वाला यह एक्सप्रेस-वे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदल देगा। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भले ही अब दिल्ली में केंद्रीय मंत्री हैं, लेकिन विदिशा और मध्यप्रदेश के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पहले जैसी ही अडिग है।

75 किमी कम होगी दूरी, बड़े शहरों से सीधा जुड़ाव
श्री चौहान ने बताया कि यह नया एक्सप्रेस-वे न केवल यात्रा का समय बचाएगा, बल्कि दिल्ली-मुंबई और लखनऊ-कानपुर जैसे प्रमुख गलियारों से सीधा जुड़ाव प्रदान करेगा। इससे दूरी में भी 75 किलोमीटर की कमी आएगी। साथ ही, नागपुर-ग्वालियर नेशनल हाईवे का विदिशा से गुजरना इस क्षेत्र के लिए व्यापारिक और भौगोलिक दृष्टि से मील का पत्थर साबित होगा।

नितिन गडकरी का जताया आभार
विकास कार्यों का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने विदिशा को ₹4,400 करोड़ की सौगातें दी हैं। इसके अलावा, CRF के तहत प्रदेश को मिले ₹1,600 करोड़ में से ₹400 करोड़ विशेष रूप से विदिशा क्षेत्र की आठों विधानसभाओं के सड़क नेटवर्क के लिए आवंटित किए गए हैं।

प्राथमिकता में मेडिकल कॉलेज और बेतवा सौंदर्यीकरण
बुनियादी ढांचे के साथ-साथ श्री चौहान ने स्थानीय विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि रायसेन मेडिकल कॉलेज का कार्य जल्द पूरा करना, बेतवा नदी के घाटों का सौंदर्यीकरण, अंडरग्राउंड बिजली वायरिंग और एक आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण उनकी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने दोहराया कि नर्मदा-क्षिप्रा की तरह ही अब नर्मदा-बेतवा लिंक परियोजना से इस पूरे अंचल में समृद्धि के द्वार खुलेंगे

सड़क सुरक्षा माह: रायपुर-बिलासपुर हाईवे पर NHAI की अनूठी पहल

वाहन चालकों को बांटे हेलमेट, लगाया ब्लड डोनेशन कैंप।

रायपुर | 17 जनवरी 2026

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं को शून्य पर लाने के लिए ‘मिशन मोड’ में काम कर रहा है। इसी कड़ी में आज रायपुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक वृहद जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसमें न केवल सुरक्षा नियमों की सीख दी गई, बल्कि जीवन रक्षा के लिए हेलमेट वितरण और रक्तदान शिविर जैसे सराहनीय कार्य भी किए गए।

​जागरूकता के साथ सुरक्षा का उपहार

​अभियान के दौरान NHAI की टीम ने दोपहिया वाहन चालकों को रोककर उन्हें सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। जो चालक बिना हेलमेट के यात्रा कर रहे थे, उन्हें हेलमेट भेंट कर यह संकल्प दिलाया गया कि वे भविष्य में बिना सुरक्षा गियर के सड़क पर नहीं उतरेंगे। साथ ही, भारी वाहन चालकों को सीट बेल्ट और ‘लेन ड्राइविंग’ के महत्व के बारे में प्रशिक्षित किया गया।

​रक्तदान से जीवन बचाने का संदेश

​इस कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण ब्लड डोनेशन कैंप रहा। सड़क दुर्घटनाओं में समय पर रक्त की उपलब्धता के महत्व को रेखांकित करते हुए, अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया।

​प्रमुख अधिकारियों के विचार

​”सड़क सुरक्षा केवल नियमों की किताब नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी है। हेलमेट पहनना और सीट बेल्ट लगाना छोटे कदम लग सकते हैं, लेकिन यही कदम एक परिवार की खुशियां उजड़ने से बचाते हैं।”

— प्रदीप कुमार लाल, क्षेत्रीय अधिकारी, NHAI

​”हम राजमार्गों को तकनीकी रूप से सुरक्षित बना रहे हैं, लेकिन जन-जागरूकता के बिना लक्ष्य पाना कठिन है। हमारा उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं की दर को न्यूनतम स्तर पर लाना है।”

— मुकेश कुमार, परियोजना निदेशक, बिलासपुर

बीएमसी चुनाव: जीत के जश्न में कंगना का पुराना ‘बदला’—लोकतंत्र की जीत या व्यक्तिगत प्रतिशोध का उत्सव?

नई दिल्ली | 18 जनवरी, 2026

मुंबई महानगर निगम (BMC) चुनाव 2026 के नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत कर दी है। भारतीय जनता पार्टी की निर्णायक जीत के बाद मंडी से सांसद कंगना रनौत का ताजा बयान इस सियासी हलचल को ‘न्याय बनाम अन्याय’ की लड़ाई में बदलता नजर आ रहा है। कंगना ने न केवल बीजेपी की जीत पर पीएम मोदी और देवेंद्र फडणवीस को बधाई दी, बल्कि शिवसेना (यूबीटी) की हार को अपने अपमान के ‘बदले’ के तौर पर पेश किया।

​व्यक्तिगत पीड़ा और राजनीतिक प्रतिशोध

​कंगना का यह कहना कि “मेरा घर तोड़ना दुर्भावनापूर्ण था,” उस 2020 की घटना की याद दिलाता है जब बीएमसी ने उनके पाली हिल स्थित दफ्तर पर बुलडोजर चलाया था। हालांकि बॉम्बे हाई कोर्ट ने उस कार्रवाई को “दुर्भावनापूर्ण” करार देकर कंगना के पक्ष में मोहर लगाई थी, लेकिन 2026 के चुनाव परिणामों को उस निजी क्षति से जोड़ना एक समालोचनात्मक प्रश्न खड़ा करता है—क्या चुनावी जनादेश व्यक्तिगत हिसाब बराबर करने का जरिया है?

​सत्ता परिवर्तन और न्याय का नैरेटिव

​कंगना ने उद्धव ठाकरे पर तंज कसते हुए इसे ‘न्याय का पल’ बताया है। गौर करने वाली बात यह है कि राजनीति में जब कोई सेलिब्रिटी सांसद इस तरह के भावनात्मक कार्ड खेलता है, तो वह सुशासन के असली मुद्दों को पीछे धकेल देता है। बीजेपी की जीत निश्चित रूप से सुशासन और विकास के एजेंडे पर आधारित हो सकती है, लेकिन कंगना का बयान इसे ‘प्रतिशोध की राजनीति’ के रंग में रंगने की कोशिश कर रहा है।

​निष्कर्ष: भविष्य की सियासत

​2020 के ध्वस्तीकरण से लेकर 2026 के चुनावी परिणामों तक, कंगना रनौत ने खुद को एक ‘विक्टिम’ और अब ‘विजेता’ के रूप में स्थापित किया है। बीएमसी की सत्ता से शिवसेना का हटना सिर्फ एक चुनावी हार नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक कार्यशैली की हार भी मानी जा रही है जिसे कोर्ट ने गलत ठहराया था। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नई सत्ता बीएमसी की कार्यप्रणाली में वह पारदर्शिता लाएगी जिसकी मांग कंगना और उनके समर्थक करते रहे हैं।

अंधभक्ति, श्रद्धा या चमत्कार? बिजनौर में कुत्ते की ‘परिक्रमा’ देख उमड़ा जनसैलाब

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खबर बहुत ही दिलचस्प और संवेदनशील समाचार है। ऐसी घटनाओं में अक्सर आस्था और तर्क के बीच एक महीन रेखा होती है।

बिजनौर (उत्तर प्रदेश) | 18 जनवरी, 2026

नंदपुर गांव का यह मंदिर कौतूहल का केंद्र बना हुआ है। लोग दूर-दूर से इस ‘परिक्रमा’ को अपनी आंखों से देखने पहुंच रहे हैं। क्या यह वाकई कोई चमत्कार है या कुत्ते की कोई मानसिक स्थिति, यह अभी भी रहस्य बना हुआ है।

डॉक्टरों की टीम ने क्या कहा?पशुचिकित्सकों ने कहा,👉
मामला चर्चा में आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पशु चिकित्सकों की एक टीम मौके पर पहुंची। डॉक्टरों द्वारा की गई प्राथमिक जांच के परिणाम चौंकाने वाले थे,,!
👉 “कुत्ता शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है। उसे न तो कोई चोट लगी है और न ही वह किसी स्पष्ट बीमारी से ग्रस्त है। उसका इस तरह का व्यवहार असामान्य है, लेकिन चिकित्सकीय रूप से वह फिट है।”

खबर सूत्रों से
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नगीना क्षेत्र से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने विज्ञान और विश्वास के बीच नई बहस छेड़ दी है। नंदपुर गांव के एक प्राचीन हनुमान मंदिर में पिछले तीन दिनों से एक कुत्ता लगातार मूर्तियों की परिक्रमा कर रहा है। जहां श्रद्धालु इसे ‘ईश्वरीय संकेत’ मानकर कुत्ते के पैर छू रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे पशु व्यवहार या अंधविश्वास का नाम दे रहे हैं।

घटनाक्रम: 72 घंटों से जारी है ‘भक्ति’
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह सिलसिला सोमवार सुबह 4 बजे शुरू हुआ।
सूत्रों अनुसार कुत्ता सबसे पहले हनुमान जी की प्रतिमा के चारों ओर चक्कर काटते देखा गया।दो दिनों तक हनुमान जी की परिक्रमा करने के बाद, बुधवार से उसने मां दुर्गा की प्रतिमा के चक्कर लगाने शुरू कर दिए।

हैरतअंगेज बात: ग्रामीणों का दावा है कि इस दौरान कुत्ते ने अन्न-जल का त्याग कर रखा है। थकान होने पर वह रुकता नहीं, बल्कि लड़खड़ाते हुए भी अपनी परिक्रमा जारी रखता है।

अब आस्था और अंधविश्वास की तकरार
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मंदिर अब एक ‘तीर्थ’ बन चुका है। श्रद्धा ऐसी की महिलाएं कुत्ते के पैर छूकर आशीर्वाद ले रही हैं, लोग इसे भगवान की लीला मानकर पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण कर रहे हैं।

बौद्धिक तर्क:
आलोचकों का कहना है कि किसी पशु के व्यवहार को चमत्कार मानकर उसकी पूजा करना अंधविश्वास को बढ़ावा देता है। इससे पहले मैनपुरी के काल भैरव मंदिर में भी ऐसी ही घटना देखी गई थी।

​धान खरीदी में अनियमितता पर प्रदेश सरकार सख्त; 38 कर्मचारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई:सीएम साय

गड़बड़ी पर जीरो टॉलरेंस: प्रदेश के 12 जिलों में धान खरीदी केंद्रों पर बड़ी कार्रवाई, 38 कर्मचारी नपे

रायपुर | 16 जनवरी 2026

छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत समर्थन मूल्य पर जारी धान खरीदी में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ शासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। विभिन्न जिलों से मिल रही अनियमितताओं की शिकायतों के बाद खाद्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रदेश के 12 जिलों के 38 कर्मचारियों को दंडित किया है। इसमें 31 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि 3 की सेवा समाप्त कर दी गई है। गंभीर मामलों में 3 कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।

​इन जिलों में हुई कार्रवाई

प्रशासन की यह कार्रवाई दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सक्ती, जगदलपुर, रायपुर, गरियाबंद, महासमुंद और बलौदाबाजार-भाटापारा जिलों में हुई है।

​गड़बड़ी का तरीका: फर्जी खरीदी से लेकर अवैध वसूली तक

जांच में पाया गया कि कई केंद्रों पर भौतिक सत्यापन में धान कम मिला, तो कहीं अमानक धान की खरीदी की गई। खाद्य विभाग के अनुसार:

  • ​11 मामले: टोकन और अन्य विविध अनियमितताओं से जुड़े।
  • ​05 मामले: भौतिक सत्यापन में स्टॉक कम पाया गया।
  • ​05 मामले: अमानक धान की खरीदी की गई।
  • ​04 मामले: नीति के विपरीत कार्य और नियमों का उल्लंघन।
  • ​03 मामले: स्टैकिंग (धान की थप्पी) व्यवस्थित नहीं पाई गई। इसके अलावा अवैध वसूली, बिना आवक पर्ची के खरीदी और बारदाना वितरण में भी धांधली पकड़ी गई है।

​दुर्ग और बेमेतरा में सबसे ज्यादा असर

दुर्ग जिले में झीट, गोढ़ी, खिलोराकला सहित 6 केंद्रों के समिति प्रबंधकों को सस्पेंड किया गया है। बेमेतरा में अमानक धान और फर्जी खरीदी के मामले में गाडाडी और बोरतरा के कर्मचारियों पर निलंबन की गाज गिरी है, वहीं मऊ के सहायक प्रबंधक पर एफआईआर दर्ज हुई है। कबीरधाम के कुकदूर में बारदाना वितरण में गड़बड़ी पर कार्रवाई की गई है।

सूचना क्रांति के युग का लक्ष्य: लोकतांत्रिक संस्थाओं को जन-केंद्रित बनाना है—लोकसभा अध्यक्ष

नई दिल्ली में संपन्न हुआ 28वाँ राष्ट्रमंडल पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (CSPOC); अब लंदन में होगा अगला आयोजन

नई दिल्ली | 16 जनवरी 2026

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उद्घाटित ‘राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों का 28वाँ सम्मेलन’ (सीएसपीओसी) आज नई दिल्ली में लोकतंत्र को अधिक जन-केंद्रित बनाने के संकल्प के साथ संपन्न हुआ। समापन सत्र को संबोधित करते हुए लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रासंगिकता तभी बनी रहेगी, जब वे जनता के प्रति पूरी तरह पारदर्शी, समावेशी और जवाबदेह होंगी।

​जनता का विश्वास ही लोकतंत्र की शक्ति

​श्री बिरला ने अपने संबोधन में पारदर्शिता और समावेशन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा, “पारदर्शिता निर्णय लेने की प्रक्रिया में खुलेपन को सुनिश्चित कर जनता के विश्वास को बढ़ाती है। वहीं, समावेशन यह सुनिश्चित करता है कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की आवाज़ भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सुनी और सम्मानित की जाए।” उन्होंने रेखांकित किया कि ये सिद्धांत नागरिक और राज्य के बीच के संबंधों को और अधिक स्थायी व मजबूत बनाते हैं।

​सहमति-असहमति के बीच संसदीय मर्यादा जरूरी

​संसदीय आचरण पर चर्चा करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में सहमति और असहमति दोनों का अपना महत्व है और ये इसकी वास्तविक शक्ति हैं। हालांकि, उन्होंने सचेत किया कि विचारों की अभिव्यक्ति हमेशा संसदीय मर्यादा के दायरे में होनी चाहिए।

​तकनीक से आएगी कार्यकुशलता

​सूचना क्रांति के युग का जिक्र करते हुए श्री बिरला ने कहा कि आज नागरिकों की अपेक्षाएं बढ़ी हैं। उन्होंने ‘ई-संसद’, कागज-रहित कार्यप्रणाली और डिजिटल डेटाबेस जैसी पहलों की सराहना करते हुए कहा कि इन माध्यमों से विधायिकाओं की कार्यकुशलता और पारदर्शिता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

​यूनाइटेड किंगडम को सौंपी गई कमान

​सम्मेलन के समापन पर एक महत्वपूर्ण औपचारिक प्रक्रिया के तहत श्री ओम बिरला ने 29वें सीएसपीओसी की अध्यक्षता यूनाइटेड किंगडम के हाउस ऑफ कॉमन्स के अध्यक्ष, सर लिंडसे होयल को सौंपी। अगला सम्मेलन अब लंदन में आयोजित किया जाएगा।

​इस दो-दिवसीय ऐतिहासिक सम्मेलन में राष्ट्रमंडल देशों के पीठासीन अधिकारियों ने वैश्विक साझेदारियों और नई विश्व व्यवस्था को आकार देने वाली प्रौद्योगिकियों पर विस्तृत चर्चा की।

महाराष्ट्र निकाय चुनाव 2026: ‘महायुति’ का परचम, बीएमसी में पहली बार बीजेपी का दबदबा

मुंबई/पुणे:16/01/2026

महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के लिए हुए चुनाव के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली ‘महायुति’ ने ऐतिहासिक बढ़त हासिल की है। सबसे ज्यादा चर्चा देश की सबसे अमीर महानगरपालिका बृहन्मुंबई (BMC) की है, जहाँ शुरुआती रुझानों और नतीजों ने दशकों पुराने समीकरण बदल दिए हैं।

महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के चुनाव नतीजों में बीजेपी का दबदबा साफ नजर आ रहा है। ताजा रुझानों के मुताबिक राज्य की 23 नगर निगमों में बीजेपी बढ़त बनाए हुए है।

मुख्य चुनाव परिणाम और रुझान (शाम 5:00 बजे तक)बीजेपी (BJP) | 1290+ मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक।शिवसेना (एकनाथ शिंदे) | 350+ ठाणे, संभाजीनगर, कल्याण।कांग्रेस (INC) | 270+ | लातूर, कोल्हापुर, अमरावती |शिवसेना (UBT) | 140+ | मध्य मुंबई के कुछ पॉकेट्स |
NCP (अजित पवार) | 120+ | पिंपरी-चिंचवड़, पुणे (कुछ हिस्से) |

बड़ी खबरें और बड़े उलटफेर
BMC में ऐतिहासिक बदलाव: 2017 के बाद पहली बार हुए इन चुनावों में बीएमसी में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। दशकों तक बीएमसी पर राज करने वाली शिवसेना (UBT) को इस बार कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ा है।

उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एक साथ आने के बावजूद, मुंबई के कई वार्डों में महायुति ने सेंध लगा दी है। कांग्रेस ने लातूर और कोल्हापुर जैसी जगहों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, लेकिन बड़े शहरों में उसे महायुति की लहर का सामना करना पड़ा है।

देवेंद्र फडणवीस (उपमुख्यमंत्री): “यह विकास की जीत है। मुंबई की जनता ने प्रधानमंत्री मोदी के विजन पर भरोसा जताया है।”
एकनाथ शिंदे (मुख्यमंत्री): “लोगों ने असली शिवसेना और विकास के काम को चुना है। हम मिलकर महाराष्ट्र के शहरों का कायाकल्प करेंगे।”

विशेष :_मतगणना अभी भी कुछ वार्डों में जारी है, इसलिए अंतिम आंकड़ों में थोड़ा बदलाव संभव है। विस्तृत नतीजों के लिए आप राज्य चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।

मकर संक्रांति विशेष:शर-शय्या से धर्म का उद्घोष: भीष्म, कृष्ण और विष्णु सहस्रनाम

कुरुक्षेत्र, विशेष डेस्क: 15/01/2026

महाभारत युद्ध के पश्चात जब पांडवों ने विजय प्राप्त की, तब धर्मराज युधिष्ठिर का मन अशांत था। वे रक्तपात और अपनों को खोने के शोक में डूबे थे। तब भगवान श्रीकृष्ण उन्हें एक ऐसे महापुरुष के पास ले गए, जो मृत्यु को अपनी मुट्ठी में थामे ‘शर-शय्या’ पर लेटे सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा कर रहे थे—वे थे भीष्म पितामह।

कृष्ण-भीष्म संवाद: भक्त और भगवान का मिलन
जब श्रीकृष्ण, पांडवों के साथ भीष्म के पास पहुँचे, तो एक अद्भुत दृश्य उपस्थित हुआ। बाणों की शय्या पर लेटे पितामह ने अपने आराध्य को देखते ही नेत्र सजल कर लिए। भीष्म ने कृष्ण से पूछा, “हे केशव! क्या यह सब छल आवश्यक था?” श्रीकृष्ण ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, “पितामह! जब धर्म पर संकट आता है, तब मर्यादाओं से ऊपर उठकर धर्म की रक्षा करना ही परम सत्य होता है।” इस संवाद ने सिद्ध किया कि भीष्म का मौन और कृष्ण का चक्र, दोनों ही नियति के विधान थे।

विष्णु सहस्रनाम: मानवता को अंतिम उपहार
युधिष्ठिर ने जब भीष्म से पूछा कि संसार में सबसे श्रेष्ठ धर्म क्या है और किसका जाप करने से मुक्ति मिलती है, तब पितामह ने ‘विष्णु सहस्रनाम’ का उपदेश दिया। उन्होंने भगवान विष्णु के एक हजार नामों का उच्चारण किया, जिसे सुनकर स्वयं श्रीकृष्ण भावविभोर हो गए। भीष्म ने बताया कि विष्णु के इन नामों का स्मरण ही मनुष्य को भवसागर से पार उतारने वाला एकमात्र सुगम मार्ग है।

उत्तरायण और महाप्रयाण
ब्रह्मचर्य और योग के बल पर भीष्म ने 58 दिनों तक असहनीय पीड़ा को सहा। उन्होंने दक्षिणायन में शरीर त्यागना स्वीकार नहीं किया। जैसे ही मकर संक्रांति के दिन सूर्य ने उत्तर दिशा की ओर रुख किया, पितामह ने अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण कर प्राण त्याग दिए।

यह प्रसंग आज भी हमें सिखाता है कि जीवन में संघर्ष कितना भी कठिन क्यों न हो, यदि मन में ईश्वर के प्रति समर्पण और संकल्प की दृढ़ता हो, तो मृत्यु भी मंगलकारी उत्सव बन जाती है।