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UGC 2026 के नए नियम पर सर्वोच्च न्यायालय ने लगाई रोक

नई दिल्ली: 29/01/2026

देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव मिटाने के उद्देश्य से लाए गए ‘UGC (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम 2026’ पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन नियमों को “अत्यधिक व्यापक” और “अस्पष्ट” बताते हुए फिलहाल 2012 के पुराने नियमों को ही प्रभावी रखने का आदेश दिया है।

​ कोर्ट ने रोक क्यों लगाई? (मुख्य कारण)

​सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कई गंभीर चिंताएँ जताईं:

  • ​परिभाषा पर विवाद: नए नियमों के रेगुलेशन 3(c) में ‘जाति-आधारित भेदभाव’ को केवल SC, ST और OBC के खिलाफ होने वाले भेदभाव तक सीमित रखा गया था। कोर्ट ने माना कि यह परिभाषा अधूरी हो सकती है और सामान्य श्रेणी के छात्रों को सुरक्षा के दायरे से बाहर करती है।
  • ​दुरुपयोग की आशंका: कोर्ट ने टिप्पणी की कि नियमों के प्रावधान अस्पष्ट हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है।
  • ​समावेशिता का अभाव: याचिकाओं में तर्क दिया गया कि भेदभाव किसी भी दिशा में हो सकता है, लेकिन ये नियम केवल आरक्षित श्रेणियों को ही पीड़ित के रूप में मान्यता देते हैं।

CJI की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ

​सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने हाशिए पर पड़े समाज और न्याय के बीच संतुलन पर जोर दिया:

​“हम सामान्य श्रेणी की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं, लेकिन हाशिए पर पड़े (marginalized) लोगों के लिए निवारण प्रणाली यथावत रहनी चाहिए। याचिकाकर्ताओं को न्याय के बिना नहीं छोड़ा जा सकता।”

​कोर्ट ने यह भी कहा कि वह पीछे नहीं जाना चाहते और समाज को बांटने वाले किसी भी नियम पर पुनरावलोकन जरूरी है। इसके लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने का सुझाव भी दिया गया है।

  • 19 मार्च 2026: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
  • ​समिति का गठन: संभावना है कि कोर्ट इन नियमों की समीक्षा के लिए कानूनी विशेषज्ञों और समाजशास्त्रियों की एक कमेटी बनाए।
  • ​पुराना सिस्टम जारी: जब तक कोर्ट का अगला आदेश नहीं आता, तब तक कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 2012 के नियम ही लागू रहेंगे।

शंकराचार्य की वापसी: हिंदुत्व की विजय या सत्ता का अहंकार?

सत्ता और परंपरा का द्वंद्व_जब कोई बेटा बाप से पूछे आपकी हैसियत क्या है पहचान क्या है??जन चौपाल 36 चौपाल से चौपाटी तक ।

आलेख | 29 जनवरी, 2026

हमने पढ़ा है कि एक बार रणभूमि में भगवान परशुराम और पितामह भीष्म का आमना-सामना हुआ। भीष्म युद्धकला में परशुराम के ही शिष्य थे। परशुराम ने कहा— “भीष्म, तुम रणभूमि छोड़ दो क्योंकि तुम गंगा पुत्र हो और तुम्हारे पास इच्छा मृत्यु का वरदान है।” यह प्रसंग याद दिलाता है कि जब गुरु और शिष्य, या परंपरा और शक्ति आमने-सामने होते हैं, तो विजय केवल शस्त्रों की नहीं, बल्कि मर्यादाओं की होनी चाहिए।
आज माघ मेले के तट पर भी कुछ ऐसा ही दृश्य उभरा है। क्या अब देश में सनातन धर्म की नई परिभाषा लिखी जाएगी? विडंबना देखिए, जिस प्रशासन का कार्य व्यवस्था संभालना है, वह आध्यात्मिक शिखर के प्रतीक ‘शंकराचार्य’ से उनकी पहचान का साक्ष्य मांग रहा है। यह वैसा ही है जैसे कोई बच्चा बड़ा होकर पिता से पूछे कि ‘आपकी हैसियत क्या है?’

सत्ता और परंपरा का द्वंद्व

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का माघ मेला क्षेत्र छोड़ना केवल एक संत का प्रस्थान नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार और अध्यात्म की मर्यादा के बीच के टकराव का संकेत है। स्वामी जी के वक्तव्यों ने वर्तमान प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। सूबे के मुखिया और प्रशासन की इस विषय पर चुप्पी ने उस पीड़ा को और गहरा किया है, जो एक सन्यासी ने मौनी अमावस्या जैसे पावन पर्व पर गंगा स्नान से वंचित रहकर झेली है।

अस्तित्व का प्रश्न

उनके आरोप गंभीर हैं—प्राचीन मंदिरों की स्थिति और सनातनी संस्कारों पर ‘कथित’ सुनियोजित प्रहार। यदि आज सत्ता के गलियारे और वैधानिक संस्थाएं यह तय करने लगेंगी कि ‘हिंदू’ कौन है, तो आने वाली पीढ़ियां एक स्वतंत्र और शाश्वत सनातन के बजाय एक ‘संयोजित व्यवस्था’ को विरासत में पाएंगी।
धर्म एक परंपरा है और राजनीति एक बिसात; जहाँ एक तरफ अटूट आस्था है, तो दूसरी तरफ सत्ता की बिछी चालें। फैसला अब समाज को करना है कि वह ‘शाश्वत’ के साथ खड़ा है या ‘सामयिक’ के साथ।
अब यहां पर परशुराम कौन है और भीष्म कौन है यह एक यक्ष प्रश्न है??

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख लेखक के निजी विचार और उपलब्ध तथ्यों के विश्लेषण पर आधारित है, जिसका उद्देश्य किसी की मानहानि या किसी संस्था की अवमानना करना नहीं है।

लाइफ मंत्रा: स्वयं को जानना ही जीवन है, केवल पाना और खोना नहीं

आज का मंत्र: जल, थल और गगन तक मनुष्य की पहुँच है, लेकिन उसकी सबसे लंबी और सबसे जरूरी यात्रा उसके ‘स्वयं के भीतर’ की है। जिस दिन आप खुद को पा लेंगे, दुनिया को पाने की प्यास खत्म हो जाएगी। जन चौपाल 36/चौपाल से चौपाटी तक

आलेख | 29 जनवरी, 2026

अक्सर हम कहते हैं कि हम जिंदगी जी रहे हैं, लेकिन क्या कभी हमने रुककर यह सुना है कि जिंदगी हमसे क्या कह रही है? हम बाहरी दुनिया को समझने के लिए कोचिंग सेंटर, किताबों और गुरुओं का सहारा लेते हैं, पर सत्य तो यह है कि जो सबक हमें ‘समय और अनुभव’ की पाठशाला सिखाती है, वह दुनिया की कोई भी संस्था नहीं सिखा सकती।

जिंदगी के इस सफर में कुछ कड़वे लेकिन जरूरी सच छिपे हैं, जिन्हें समझना ही वास्तविक सुख का आधार है:

1. भाग्य नहीं, प्रतिभा और संयम है आधार
जिंदगी कहती है कि मनुष्य बहुत कुछ चाहता है और बहुत कुछ पाता भी है, लेकिन जो नहीं मिल पाया, उसके लिए वह अक्सर भाग्य या दूसरों को दोषी ठहरा देता है। वास्तविकता यह है कि अक्सर हमारी शक्ति, संयम और प्रतिभा की कमी ही हमारी असफलता का कारण होती है। जिस दिन हम अपनी कमियों को स्वीकार कर लेते हैं, उसी दिन से सुधार का मार्ग खुल जाता है।

2. स्वयं की पहचान: दुखों का अंत
हमारी अधिकांश तकलीफों का कारण यह है कि हम जानते ही नहीं कि “हम वास्तव में कौन हैं?” हम खुद को केवल शरीर या मन मान लेते हैं। जिस दिन हम आत्म-साक्षात्कार (स्वयं को जानना) कर लेंगे और स्वयं से सही सवाल पूछना शुरू करेंगे, उसी पल हमारी आधी परेशानियां मिट जाएंगी। जिंदगी पाने या खोने का नाम नहीं, बल्कि स्वयं को खोजने का नाम है।

3. सकारात्मकता: विचार नहीं, जीवनशैली
जिंदगी कहती है कि सकारात्मक रहना कोई एक दिन का अभ्यास नहीं है, बल्कि इसे दिनचर्या का हिस्सा बनाना पड़ता है। जब कोई सोच हमारी दिनचर्या बन जाती है, तो वह केवल विचार नहीं रहती, वह स्वयं ‘जिंदगी’ बन जाती है। यदि आपकी सोच नकारात्मक है, तो उसे एकदम से बदलने का दबाव न डालें; बस स्वयं से संवाद शुरू करें। जब आप खुद की आदतों पर खुद से बात करेंगे, तो दूसरों को कोसने की प्रवृत्ति अपने आप खत्म हो जाएगी।

4. श्रेष्ठता का मूल: सबको बांटना
मनुष्य को धरती का सर्वश्रेष्ठ प्राणी इसलिए कहा गया है क्योंकि उसके पास ‘सर्वश्रेष्ठ’ देने की क्षमता है। यह क्षमता केवल स्वयं के लिए नहीं है। कुदरत का नियम है कि आप जो बांटते हैं, वही कई गुना होकर आपके पास लौटता है। यदि आप अपनी प्रतिभा, प्रेम और सर्वश्रेष्ठ योगदान समाज को देते हैं, तो आपका जीवन स्वतः ही सर्वश्रेष्ठ बन जाता है।

दोस्ती शराब और हत्या:बेरला पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा,तालाब से बरामद हुई लाश

आरोपियों ने युवक की हत्या कर शव को तालाब के पानी में भारी पत्थर से दबा दिया था। जन चौपाल 36 _चौपाल से चौपाटी तक।

बेमेतरा:28/01/2026

बेरला पुलिस ने 25 जनवरी से लापता युवक प्रवीण उर्फ प्रीत द्विवेदी (24 वर्ष) की हत्या की गुत्थी सुलझाते हुए उसके दो दोस्तों को गिरफ्तार किया है।आरोपी वैभव सोनी से घटना में प्रयुक्त मोटर सायकल एवं मोबाईल को जप्त किया गया।प्रवीण के शव को तालाब से बाहर निकला गया शव का पहचान पंचनामा तैयार कर, बरामदगी पंचनामा तैयार कर प्रार्थी की रिपोर्ट पर अपराध सदर धारा धारा 103(1), 3(5) BNS कायम कर विवेचना में लिया गया।


गुमशुदगी की जांच में खुला कत्ल का राज

घटना का खुलासा तब हुआ जब 27 जनवरी को मृतक के पिता सतीश द्विवेदी की गुमशुदगी रिपोर्ट पर पुलिस ने संदेह के आधार पर उसके दोस्तों से पूछताछ की। आरोपी ढालेन्द्र ने बताया कि 25 जनवरी की रात तीनों ने साथ बैठकर शराब पी थी। इस दौरान प्रवीण द्वारा फोन पर और बाद में आमने-सामने अश्लील गाली देने और मारपीट करने से विवाद बढ़ गया। शराब के नशे में विवाद और गाली देने से भड़के दोस्तों ने गला दबाकर की हत्या, साक्ष्य छिपाने तालाब में पत्थर से दबाया शव।

विवाद इतना बढ़ा कि ढालेन्द्र और प्रवीण गुत्थमगुत्था होते हुए खरगा तालाब के पानी में गिर गए, जहाँ ढालेन्द्र ने प्रवीण का गला पानी में दबाकर उसकी हत्या कर दी। साक्ष्य छिपाने की नीयत से आरोपियों ने शव के ऊपर बड़ा पत्थर रखकर उसे पानी में डुबो दिया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी रामकृष्ण साहू और एएसपी हरीश कुमार यादव के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी राजकुमार साहू की टीम ने त्वरित कार्रवाई की। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर तालाब से शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल व मोबाइल जब्त किया। इस पूरी कार्रवाई में उप निरीक्षक राजकुमार साहू, सउनि दिनेश चंद शर्मा और समस्त थाना स्टाफ की सराहनीय भूमिका रही।

अपराध नियंत्रण के लिए हाईटेक पुलिसिंग और सख्त कार्रवाई के निर्देश: DIG रामकृष्ण साहू

“नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस: DIG रामकृष्ण साहू ने पुलिस अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश।”जन चौपाल 36 चौपाल से चौपाटी तक

बेमेतरा:_28/01/2026

डीआईजी रामकृष्ण साहू (IPS) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिले के पुलिस अधिकारियों की बैठक ली।डीआईजी साहू ने पुलिसिंग को आधुनिक बनाने के लिए त्रिनयन एप, सशक्त एप और सायबर प्रहरी अभियान के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया।अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस को स्मार्ट और हाईटेक होने के साथ ही सीसीटीएनएस (CCTNS) में समय पर डायरी एंट्री और एमएलसी/पीएम रिपोर्ट को ऑनलाइन भेजने के निर्देश दिए ताकि विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और तेजी आए।

बैठक में अवैध शराब, जुआ, सट्टा, गांजा और नशीली दवाओं के कारोबार में लिप्त लोगों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने को कहा गया। उन्होंने कहा कि चोरियों पर अंकुश लगाने के लिए रात्रि गश्त, कांबिंग गश्त और पेट्रोलिंग को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।

उन्होंने कहा लंबित मामले: 2024-25 एवं पूर्व के लंबित अपराधों, मर्ग, गुम इंसान और शिकायतों का शीघ्र निराकरण करे।सायबर सुरक्षा द्वारा वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए ‘म्यूल अकाउंट’ धारकों पर वैधानिक कार्रवाई करें।ऑपरेशन मुस्कान से महिलाओं-बच्चों से संबंधित अपराधों के निराकरण और गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए विशेष अभियान चलाएं।

डीआईजी ने दृश्यमान पुलिसिंग से सड़कों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाएं और चेकिंग अभियान तेज करें।सामुदायिक पुलिसिंग से बढ़ेगा जनता का विश्वास
डीआईजी ने “हमर पुलिस हमर बजार” और “हमर पुलिस हमर गांव” अभियानों से स्कूलों, कॉलेजों और बाजारों में जागरूकता कार्यक्रम के निर्देश दिए। थाने आने वाले आगंतुकों, विशेषकर महिलाओं से संयमित व्यवहार करें और उनकी समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई करें ताकि जनता का पुलिस पर विश्वास और मजबूत हो सके।

बैठक के अंत में उन्होंने सोशल मीडिया पर सतत निगरानी रखने और कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाते हुए कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

हवाई हादसे में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम की मौत

प्लेन 16 साल पुराना था जिसमें सवार दो क्रू मेंबर समेत चार अन्य लोगों की भी मौत।जन चौपाल 36_चौपाल से चौपाटी तक

बारामती/28/01/2026

चार्टर्ड विमान Learjet 45XR (रजिस्ट्रेशन VT-SSK) मुंबई से बारामती आ रहा था और सुबह 8:45 बजे लैंडिंग के दौरान रनवे पर नियंत्रण खो बैठा, जिससे यह क्रैश हो गया और आग का गोला बन गया।

विमान में अजित पवार (66 वर्ष), उनके पीएसओ, एक अटेंडेंट और दो क्रू सदस्य समेत कुल 5-6 लोग सवार थे, सभी की मौत हो गई।डीजीसीए ने पुष्टि की है, जांच में तकनीकी खराबी या पायलट एरर पर फोकस है। अधिकारिक सूत्रों पर हादसे में कोई भी यात्री जीवित नहीं बचा बताया गया आगे घटनास्थल से मिली जानकारी और तस्वीर एवं वीडियो में आग धुएं के गुबार, विमान का बुरी तरह क्षतिग्रस्त मलबा और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में ले जाती एम्बुलेंस दिखाई दीं। स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंचकर हर संभव मदद करते नजर आए। पुणे के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के अनुसार, तीन शवों को बारामती मेडिकल कॉलेज भेजा गया है, जबकि अन्य की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

पृष्ठभूमि और प्रतिक्रियाएं
अजित पवार जिला परिषद चुनाव प्रचार के लिए मीटिंग्स में जाना चाहते थे।

शरद पवार को ब्रिज कैंडी अस्पताल में सूचना दी गई, सुप्रिया सुले, सुनेत्रा और पार्थ पवार बारामती रवाना हो रहे हैं।यह 16 साल पुराना विमान था, जो बॉम्बार्डियर द्वारा निर्मित मिड-साइज जेट था।

ऐतिहासिक हादसे
भारत में राजनीतिक नेताओं के विमान हादसे: संजय गांधी (1980), माधवराव सिंधिया (2001),YS राजशेखर रेड्डी (2009) जैसे मामले सुरक्षा पर सवाल उठाते रहे हैं।

ऋषि-कृषि का देश है भारत: राकेश टिकैत का शंकराचार्य विवाद पर बयान

राकेश टिकैत ने कहा संत-किसान नाराज हुए तो देश को भारी पड़ेगा'” ।जनचौपाल36_ चौपाल से चौपाटी तक

पुरकाजी (मुजफ्फरनगर), 27 जनवरी 2026

किसान नेता राकेश टिकैत ने मीडिया से चर्चा के दौरान जो कहा वह प्रयागराज में शंकराचार्य विवाद से संबंधित है। प्रयागराज जो तीर्थ राज कहलाता है वहां का गंगा जल हिंदुओं के घरों में और पूजन में देखा जा सकता है।माघ पूर्णिमा गंगा स्नान को लेकर शंकराचार्य स्नान पर पूरे देश में खुली बहस छिड़ गई है। जिसके चलते अब इस मामले में किसान नेता राकेश टिकैत भी कूद गए हैं।

मीडिया पर चल रही खबर अनुसार:

गणतंत्र दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के पुरकाजी में आयोजित भव्य कार्यक्रम में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के गंगा स्नान विवाद पर बड़ा बयान दिया।

मीडिया से बातचीत में टिकैत ने कहा, “शंकराचार्य जी को स्नान करवा देना चाहिए। अगर संत और किसान नाराज होंगे, तो देश को भारी पड़ेगा। ये देश ऋषि और कृषि का देश है। जब-जब ऋषि और कृषि के साथ छेड़छाड़ होगी, हलचल मचेगी।”

प्रयागराज में चल रहे इस विवाद पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो चुकी है। टिकैत का यह बयान संत समुदाय और किसानों के बीच एकजुटता का संदेश देता नजर आ रहा है। कार्यक्रम में स्थानीय किसानों और नागरिकों ने भी हिस्सा लिया।




UGC नियमों पर सियासी बवाल के साथ सामान्य वर्ग उतरे सड़क पर

भाजपा के 11 पदाधिकारियों का इस्तीफा सोशल मीडिया वायरल,खबर मीडिया सूत्र पर आधारित।जनचौपाल_36 चौपाल से चौपाटी तक।

नई दिल्ली_27/01/2026

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को प्रोत्साहित करने के नियम–2026’ अब गंभीर विवाद के केंद्र में आ गए हैं। देशभर में इन नियमों को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि क्या यह नियम संवैधानिक समानता के नाम पर नए सामाजिक विभाजन को जन्म दे रहे हैं।

इस विवाद की शुरुआत उत्तर प्रदेश के बरेली से हुई, जहां सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इन नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया। इसके बाद मामला लखनऊ तक पहुंच गया, जहां भाजपा के 11 पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से पार्टी से इस्तीफा सौंप दिया। ये सभी पदाधिकारी बख्शी का तालाब विधानसभा क्षेत्र के कुम्हरावां मंडल से जुड़े हैं।

इस्तीफा देने वाले नेताओं का आरोप है कि UGC के नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को संदेह के घेरे में खड़ा करते हैं, जिससे उच्च शिक्षा संस्थानों में फर्जी शिकायतों और मानसिक उत्पीड़न की आशंका बढ़ेगी। उनका कहना है कि यह व्यवस्था सामाजिक सौहार्द के बजाय जाति आधारित अविश्वास को बढ़ावा दे सकती है।

राजनीतिक गलियारों में यह बहस भी तेज हो गई है कि जिस तरह कभी तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप कांग्रेस पर लगे, क्या अब भाजपा उसी राह पर चल रही है—बस वर्ग बदल गया है?

आलोचक पूछ रहे हैं कि ‘अखंड भारत’ और ‘सांस्कृतिक एकता’ की बात करने वाली विचारधारा अब शिक्षा नीति में सामाजिक विभाजन को क्यों बढ़ावा दे रही है।

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे में UGC नियमों के साथ-साथ प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे ब्राह्मण समाज और साधु-संत परंपरा के अपमान से जोड़ा।

वहीं, लखनऊ भाजपा जिलाध्यक्ष विजय मौर्या ने कहा है कि उन्हें इस्तीफे का कोई आधिकारिक पत्र अभी प्राप्त नहीं हुआ है, हालांकि सोशल मीडिया पर पत्र वायरल है।
यह पूरा मामला अब केवल UGC नियमों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल खड़ा कर रहा है—
क्या शिक्षा नीति अब वैचारिक और राजनीतिक हस्तक्षेप का औज़ार बनती जा रही है?

गणतंत्र दिवस समारोह :_ विकसित छत्तीसगढ़ से ही बनेगा विकसित भारत: राज्यपाल रमेन डेका

छत्तीसगढ़ का समय आ गया है और हम सब मिलकर इसे देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाएंगे_राज्यपाल रमेन डेका।जनचौपाल_36/चौपाल से चौपाटी तक

रायपुर | 26 जनवरी, 2026

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में तिरंगा फहराया और प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की बधाई दी। अपने संबोधन में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं को नमन करते हुए राज्य की विकास यात्रा का खाका प्रस्तुत किया।

विकसित छत्तीसगढ़ का रोड_मैप: ‘अंजोर विजन’
राज्यपाल ने बताया कि राज्य अपनी स्थापना की रजत जयंती मना रहा है। इस अवसर पर वर्ष 2047 तक छत्तीसगढ़ को एक विकसित राज्य बनाने के लिए ‘अंजोर विजन’ डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है। उन्होंने कहा, “भारत अब विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, और छत्तीसगढ़ इस विकास यात्रा में अपनी खनिज संपदा और औद्योगिक शक्ति के साथ अग्रणी भूमिका निभा रहा है।”

माओवाद का खात्मा और बस्तर का कायाकल्प
सुरक्षा के मोर्चे पर राज्यपाल ने बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सुनियोजित रणनीति और जवानों के साहस के बल पर मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से माओवाद का पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा।

पुनर्वास: पिछले दो वर्षों में 2,500 से अधिक नक्सलियों ने हिंसा छोड़ संविधान में आस्था जताई है।
बुनियादी ढांचा: ‘नियद नेल्ला नार’ जैसी योजनाओं से सुदूर गांवों तक बिजली, पानी और सड़क पहुंचाई जा रही है।
‘कोर सेक्टर’ से ‘हाई-टेक’ की ओर
राज्यपाल ने गर्व से उल्लेख किया कि देश के बुनियादी ढांचे में छत्तीसगढ़ का लोहा (स्टील) बोलता है।

फौलादी मजबूती: चिनाब रेलवे ब्रिज, आईएनएस विक्रांत और बांद्रा-वर्ली सी लिंक में छत्तीसगढ़ के स्टील का उपयोग हुआ है।
भविष्य की तकनीक: प्रदेश अब केवल कोयला और सीमेंट तक सीमित नहीं है। नया रायपुर में सेमीकंडक्टर प्लांट और एआई (AI) डेटा सेंटर पार्क पर काम चल रहा है।

शिक्षा और स्वास्थ्य में क्रांति

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP): राज्यपाल ने बताया कि अब प्रदेश में MBBS की पढ़ाई हिंदी में शुरू हो गई है। स्थानीय भाषाओं में शिक्षा देने से बच्चों का जुड़ाव बढ़ा है।
स्वास्थ्य: बस्तर के सुदूर क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल वैन पहुंच रही हैं और बंद पड़े स्कूलों को पुनः खोला गया है।

किसान और मातृशक्ति का सम्मान
धान खरीदी: किसानों को ₹3100 प्रति क्विंटल का मूल्य दिया जा रहा है।
महिला सशक्तिकरण: ‘महतारी वंदन योजना’ से 70 लाख महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं।

पर्यावरण और जल संरक्षण
राज्यपाल ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत 7 करोड़ से अधिक पौधे लगाने की सराहना की। उन्होंने भविष्य के जल संकट से निपटने के लिए महानदी और इंद्रावती नदियों को जोड़ने के सर्वे की भी जानकारी दी।

मां भारती के संतानों का जीवन उल्लास से भरा हो: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना से हम एक समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करेंगे। जनचौपाल36 /चौपाल से चौपाटी तक

बिलासपुर, 26 जनवरी 2026

विष्णुदेव साय ने 77वें गणतंत्र दिवस के गौरवशाली अवसर पर बिलासपुर में ध्वजारोहण किया और प्रदेशवासियों को संबोधित किया। अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने आत्मीय छत्तीसगढ़ी बोली में “जय जोहार” के साथ की। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हर नागरिक के हृदय में राष्ट्रप्रेम की लहर है और यह पर्व हमारे महापुरुषों के बलिदान तथा संविधान निर्माताओं के विजन को याद करने का दिन है।

नक्सलवाद का अंत और विकास का सूर्य

मुख्यमंत्री ने सुरक्षा और शांति के मोर्चे पर बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ माओवाद के कलंक को धोने के करीब है। उन्होंने दृढ़ता से कहा, “इसी वर्ष मार्च 2026 तक हम माओवाद को छत्तीसगढ़ की पावन धरा से जड़ से मिटा देंगे।” उन्होंने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने वाली महिलाओं और युवाओं की सराहना की, जो अब हिंसा छोड़ बस्तर कैफे जैसे विकास कार्यों से जुड़ रहे हैं।

किसानों और गरीबों का कल्याण

राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष का उल्लेख करते हुए सीएम साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का ‘धान का कटोरा’ आज लबालब है। पिछले दो वर्षों में सरकार ने किसान हितैषी योजनाओं के जरिए ₹1.5 लाख करोड़ सीधे किसानों के खातों में भेजे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में ‘आवास क्रांति’ चल रही है, जिसके तहत प्रतिदिन 2,000 प्रधानमंत्री आवास बनाए जा रहे हैं।

विरासत का सम्मान और अधोसंरचना

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के नए भवन के लोकार्पण को ‘छत्तीसगढ़ी अस्मिता’ का प्रतीक बताया। उन्होंने डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी, भगवान बिरसा मुंडा और शहीद वीरनारायण सिंह जैसे नायकों को नमन करते हुए कहा कि हमारी सरकार विरासत और विकास को साथ लेकर चल रही है। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और महतारी वंदन योजना के जरिए 70 लाख महिलाओं के सशक्तिकरण को उन्होंने सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।