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Sunday, November 1, 2026
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केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग:राजस्थान भिवाड़ी

एक केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग लगने से 7 मजदूरों की जिंदा जलने से मौत हो गई, जबकि मलबे और धुएं के बीच अभी भी दो मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। राजस्थान के औद्योगिक हब भिवाड़ी में सोमवार का सूरज काल बनकर उतरा। खुशखेड़ा करौली इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक केमिकल फैक्ट्री में सुबह अचानक भीषण आग लग गई।

भिवाड़ी (राजस्थान)_16/02/2026

राजस्थान के स्थित औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार को एक फैक्ट्री में भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। इस दर्दनाक घटना में कम से कम 7 श्रमिकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 25 से अधिक श्रमिकों के फैक्ट्री के भीतर फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

कैसे लगी आग
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग फैक्ट्री के उत्पादन क्षेत्र में अचानक भड़की। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री में ज्वलनशील सामग्री और केमिकल मौजूद थे, जिससे आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया। तेज लपटों और घने धुएं के कारण अंदर मौजूद कई श्रमिक बाहर नहीं निकल सके।

राहत और बचाव कार्य
घटना की सूचना मिलते ही की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। साथ ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और एम्बुलेंस सेवाओं को भी तुरंत अलर्ट किया गया।
दमकल कर्मियों ने फैक्ट्री के विभिन्न हिस्सों में फंसे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन आग की तीव्रता और धुएं के कारण राहत कार्य में काफी मुश्किलें आईं।

मौतों की पुष्टि और घायलों का इलाज
रेस्क्यू के दौरान अब तक 7 श्रमिकों के शव बाहर निकाले जा चुके हैं। कई अन्य श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा।

प्रशासन का बयान
प्रशासन की ओर से बताया गया है कि आग पर काबू पाने का प्रयास लगातार जारी है और फैक्ट्री के भीतर फंसे संभावित श्रमिकों की तलाश की जा रही है।
ने क्षेत्र को सील कर दिया है ताकि राहत और बचाव कार्य में कोई बाधा न आए।

जांच के आदेश
हादसे के बाद जिला प्रशासन ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। आग लगने के कारणों, सुरक्षा मानकों के पालन और फैक्ट्री प्रबंधन की भूमिका की जांच की जाएगी। प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट या सुरक्षा नियमों की अनदेखी की आशंका जताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

SIR लापरवाही:चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में की सख्त कार्रवाई

SIR अभियान में लापरवाही पर 7 अधिकारियों का निलंबन यह दर्शाता है कि चुनाव आयोग चुनाव से पहले प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सतर्क है। आयोग ने साफ कर दिया है कि मतदाता सूची या चुनावी प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर की गई गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पश्चिम बंगाल_16 फरवरी 2026

पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान में गंभीर अनियमितताओं और लापरवाही के मामले सामने आने के बाद आयोग ने राज्य के 7 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

चुनाव आयोग के अनुसार, SIR प्रक्रिया के दौरान इन अधिकारियों द्वारा कर्तव्य में गंभीर लापरवाही, कदाचार और वैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग के प्रमाण मिले हैं। इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए गंभीर खतरा मानते हुए आयोग ने यह सख्त कार्रवाई की है।

किस कानून के तहत हुई कार्रवाई
आयोग ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC के तहत अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए यह कदम उठाया। यह धारा चुनाव आयोग को यह अधिकार देती है कि वह चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सके।

मुख्य सचिव को सख्त निर्देश
चुनाव आयोग ने को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निलंबित अधिकारियों के विरुद्ध उनके संबंधित कैडर के नियमों के अनुसार तत्काल विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जाए। साथ ही आयोग ने यह भी कहा है कि की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी बिना किसी देरी के उसे उपलब्ध कराई जाए।

चुनाव से पहले बढ़ी सख्ती
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में आने वाले कुछ ही सप्ताहों में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है। ऐसे में आयोग की यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। यह कदम सत्तारूढ़ तंत्र सहित पूरे प्रशासन के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है।

कल की जीत से भारत सुपर-8, क्या पाकिस्तान का सपना अब भी जिंदा?

पाकिस्तान को नामीबिया के खिलाफ हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी।जीत के साथ-साथ उसे अपने नेट रन रेट पर भी नजर रखनी होगी।किसी भी तरह की चूक पाकिस्तान को सुपर-8 की रेस से बाहर कर देगी।

क्रिकेट समाचार _ 16/02/2026

टी20 वर्ल्ड कप में भारत ने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 61 रनों से करारी शिकस्त देकर सुपर-8 में अपनी जगह पक्की कर ली है। कोलंबो में खेले गए महामुकाबले में पहले की विस्फोटक बल्लेबाजी देखने को मिली, इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी। यह हार पाकिस्तान की टी20 वर्ल्ड कप इतिहास में रनों के लिहाज से दूसरी सबसे बड़ी हार बन गई।

ग्रुप-ए में भारत 6 अंकों के साथ शीर्ष पर है। दूसरे स्थान पर है, जिसने चार मैचों में दो जीत के साथ 4 अंक जुटाए हैं। पाकिस्तान के भी 4 अंक हैं, लेकिन भारत से मिली भारी हार के कारण उसका नेट रन रेट यूएसए से काफी नीचे चला गया है, जिससे वह तीसरे स्थान पर खिसक गया है। पाकिस्तान ने अब तक तीन मैच खेले हैं और दो में जीत दर्ज की है।

भारत ने दमदार प्रदर्शन के साथ सुपर-8 का टिकट कटा लिया है, जबकि पाकिस्तान अब ‘करो या मरो’ की स्थिति में पहुंच चुका है। अब सबकी निगाहें पाकिस्तान बनाम नामीबिया मुकाबले पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि क्या पाकिस्तान का सफर आगे बढ़ेगा या यहीं थम जाएगा।

पाकिस्तान के पास क्या है सुपर-8 में पहुंचने का रास्ता?
भारत से हारने के बाद पाकिस्तान के पास अब सुपर-8 में पहुंचने का आखिरी मौका बचा है। सलमान अली आगा की अगुवाई वाली टीम को अपने अंतिम ग्रुप मैच में को हराना हर हाल में जरूरी होगा। अगर नामीबिया ने उलटफेर किया, तो पाकिस्तान का टी20 वर्ल्ड कप सफर यहीं खत्म हो जाएगा।

जीत का साफ समीकरण
पाकिस्तान को नामीबिया के खिलाफ हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी।जीत के साथ-साथ उसे अपने नेट रन रेट पर भी नजर रखनी होगी।किसी भी तरह की चूक पाकिस्तान को सुपर-8 की रेस से बाहर कर देगी।

युद्धक परिस्थितियों के मद्देनजर रक्षा बजट को बढ़ाना सरकार की जरूरत: पीएम मोदी

रणनीतिक फैसला: कैपिटल खर्च का एक बड़ा हिस्सा रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक हथियारों के निर्माण में लगाया जा रहा है।

नई दिल्ली_16 फरवरी, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीटीआई (PTI) के साथ हालिया प्रेस वार्ता में वैश्विक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों पर गहरा विमर्श किया। पीएम ने साफ तौर पर संकेत दिया कि भारत की रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाना और उसके लिए संसाधनों का आवंटन करना अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि समय की मांग और सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है।

एडवांस डिफेंस और बजट: सामरिक आत्मनिर्भरता पर जोर
प्रधानमंत्री ने बजट 2026-27 के संदर्भ में रक्षा क्षेत्र की अहमियत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियां बदल रही हैं, भारत को अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए ‘एडवांस’ होना ही पड़ेगा।
रक्षा बजट में बढ़ोतरी: सरकार का लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में न केवल पूंजी निवेश बढ़ाना है, बल्कि स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना भी है।

ग्लोबल ट्रेड और MSME का रक्षा क्षेत्र में योगदान
पीएम मोदी ने बताया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का सीधा लाभ भारत के MSMEs को मिल रहा है।
“आज हमारे छोटे और मध्यम उद्योग (MSMEs) ग्लोबल वैल्यू चेन का हिस्सा बन रहे हैं। ‘जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट’ का विजन हमारे युवाओं और स्टार्टअप्स को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में विश्व स्तरीय प्रतिस्पर्धी बना रहा है।”

विकसित भारत के लिए ‘हाई-क्वालिटी इंफ्रा’ अनिवार्य
प्रधानमंत्री ने इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर अपना कड़ा रुख दोहराया:
“पुराने और टूटे-फूटे इंफ्रास्ट्रक्चर की उस देश में कोई जगह नहीं है जो विकसित भारत बनने की राह पर है। हाई-क्वालिटी इंफ्रास्ट्रक्चर हमारे बिज़नेस और नागरिकों की सुरक्षा, दोनों के लिए अनिवार्य है।”


बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन:-बीएनपी नेता 17 फरवरी को लेंगे प्रधानमंत्री पद की शपथ

तत्कालीन संसदीय चुनाव में बीएनपी को स्पष्ट बहुमत मिला है। कार्यक्रम में भारत समेत 13 देशों को आमंत्रण भेजा गया है। नई सरकार के गठन से क्षेत्रीय राजनीति में अहम बदलाव की उम्मीद है।

ढाका_बांग्लादेश /नई दिल्ली_ 15/02/2026

बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक रहमान 17 फरवरी की शाम देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। शपथ-ग्रहण समारोह को लेकर ढाका में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। राष्ट्रपति भवन में होने वाले इस कार्यक्रम में सीमित मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ प्रधानमंत्री को शपथ दिलाई जाएगी।

हाल ही में संपन्न 13वें संसदीय चुनाव में ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। चुनाव परिणामों के बाद पार्टी ने सरकार बनाने का दावा पेश किया था, जिसे संवैधानिक प्रक्रिया के तहत मंजूरी मिल गई। इसके साथ ही लंबे समय बाद बीएनपी की सत्ता में वापसी हो रही है।

सूत्रों के अनुसार, शपथ समारोह में भारत, पाकिस्तान, चीन सहित करीब 13 देशों को आमंत्रण भेजा गया है। भारत की ओर से प्रधानमंत्री की उपस्थिति पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, हालांकि किसी वरिष्ठ प्रतिनिधि के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। नई सरकार के गठन के बाद क्षेत्रीय कूटनीति और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर भी सबकी नजर रहेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना बांग्लादेश की घरेलू राजनीति के साथ-साथ दक्षिण एशियाई समीकरणों के लिए भी महत्वपूर्ण होगा। नई सरकार से आर्थिक सुधार, राजनीतिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संतुलन की उम्मीद की जा रही है।

रायपुर इंडिगो की फ्लाइट रफ लैंडिंग के बाद सुरक्षित:एयरपोर्ट पर टला बड़ा विमान हादसा

एयरपोर्ट सूत्रों के मुताबिक घटना की सूचना संबंधित विमानन एजेंसियों को दे दी गई है_खबर सूत्रों से।

रायपुर (छत्तीसगढ़)14/02/2026

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पर शनिवार (14 फरवरी) को एक बड़ा विमान हादसा होते-होते टल गया। भोपाल से रायपुर आ रही की फ्लाइट संख्या 6E 7302 लैंडिंग के दौरान रनवे को छूते ही उछल गई, जिससे विमान में सवार यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि पायलट की सूझबूझ और अनुभव के चलते विमान को दोबारा सुरक्षित रूप से उतार लिया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इंडिगो की यह फ्लाइट दोपहर 1:15 बजे भोपाल से रवाना हुई थी और इसका रायपुर पहुंचने का निर्धारित समय 2:40 बजे था। फ्लाइट तय समय पर रायपुर पहुंच गई, लेकिन जैसे ही विमान ने रनवे पर टचडाउन किया, अचानक झटका लगा और विमान दोबारा हवा में उठ गया। इस अप्रत्याशित स्थिति से यात्रियों में भय का माहौल बन गया।

स्थिति को भांपते हुए पायलट ने तुरंत विमान को ऊपर ले जाकर नियंत्रित किया और करीब 20 मिनट तक एयरपोर्ट के आसपास हवा में चक्कर लगाया। इसके बाद सभी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए दोबारा रफ लैंडिंग कराई गई। अंततः विमान 3:18 बजे रनवे पर सुरक्षित उतरा। इस प्रक्रिया में फ्लाइट को निर्धारित समय से करीब 38 मिनट अधिक लगे। राहत की बात यह रही कि इस घटना में सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित बताए गए हैं।

घटना के बाद एहतियातन फ्लाइट की भोपाल के लिए प्रस्तावित अगली उड़ान को रद्द कर दिया गया। भोपाल जाने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए एयरलाइन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्थाएं की गईं। यात्रियों को दिल्ली, मुंबई और कोलकाता के जरिए कनेक्टिंग फ्लाइटों से भोपाल भेजा गया। कुछ यात्रियों को वाया दिल्ली, कुछ को वाया मुंबई और कुछ को वाया कोलकाता रवाना किया गया।

एयरपोर्ट सूत्रों के मुताबिक घटना की सूचना संबंधित विमानन एजेंसियों को दे दी गई है और तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है। यात्रियों और उनके परिजनों ने पायलट और क्रू की तत्परता की सराहना की, जिससे एक बड़ा हादसा टल सका।

बागेश्वर सामूहिक विवाह महोत्सव: आशीर्वाद देने देश-विदेश से उमड़ रहा जनसैलाब

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8 से 10 लाख श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। कुल मिलाकर यह आयोजन सेवा, संस्कार और समर्पण का भव्य संगम बन गया है।

मीडिया सूत्र, छतरपुर।25/02/2026

देशभर से चयनित 305 गरीब व असहाय कन्याओं के सामूहिक विवाह महोत्सव के लिए पूरी तरह सज-संवरकर तैयार है। मध्य प्रदेश के स्थित इस धाम में 12 से 15 फरवरी तक चलने वाले आयोजन का मुख्य दिन 15 फरवरी 2026 (महाशिवरात्रि) है, जब सातवां सामूहिक विवाह महोत्सव विधिवत संपन्न होगा। पूरे परिसर में पंडाल, मंडप, उपहार काउंटर और वैदिक अनुष्ठानों की व्यवस्था अंतिम चरण में है।

आयोजन समिति के अनुसार 305 जोड़ों के लिए 305 अलग-अलग मंडप बनाए गए हैं, ताकि प्रत्येक बेटी का पाणिग्रहण पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ हो सके। पंडाल में यह भी तय कर लिया गया है कि कौन-सा जोड़ा किस स्थान पर बैठेगा। 300 ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार होगा, जबकि 550 से अधिक सेवादार व्यवस्थाओं में जुटे हैं। सुबह से शहनाइयों की गूंज के बीच घोड़े पर सजे-धजे दूल्हे अपनी बरातों के साथ धाम पहुंचेंगे।

इस महोत्सव में धर्म-पिता की भूमिका निभा रहे कन्याओं के हाथ पीले करेंगे। आयोजन में सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल देखने को मिलेगी, जहां भारत के विभिन्न राज्यों के जनप्रतिनिधियों के साथ अर्जेंटीना, चिली, पेरू, उरुग्वे, कोलंबिया, पनामा, सूरीनाम और पैराग्वे सहित आठ देशों के राजदूत भी कन्याओं को आशीर्वाद देने पहुंचेंगे।

बागेश्वर धाम को रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों और पारंपरिक तोरण द्वारों से ‘जनकपुर’ की तरह सजाया गया है। बेटियों को गृहस्थी का समस्त आवश्यक सामान उपहार स्वरूप दिया जा रहा है। भंडारे की व्यापक व्यवस्था की गई है, जिसमें 5 से 8 लाख लोगों के भोजन का प्रबंध है। सात प्रकार की मिठाइयों के साथ नागपुर से विशेष रसमलाई मंगाई गई है।

अंतिम तीन दिनों में हल्दी और मेहंदी के कार्यक्रम संपन्न हुए, जिनमें बेटियों के साथ संतों ने भी सहभागिता की। वहीं, 1200 साधकों ने सन्यासी बाबा की साधना दीक्षा ली।

शिव तत्व:संसार का सार और जीवन का दर्शन

शिव कोई केवल पूज्य देवता नहीं, बल्कि जीवन-पद्धति हैं।वे सिखाते हैं—भोग में संयम,त्याग में शक्ति,मौन में अर्थ और संतुलन में सृष्टि ,शिव को समझना, वास्तव में स्वयं को समझना है।क्योंकि शिव बाहर नहीं—अंतर में हैं।

महाशिवरात्रि विशेष_15/02/2026

शिव ही संसार का सार हैं।
‘संसार-सार’ का अर्थ केवल सृष्टि का मूल नहीं, बल्कि जीवन जीने की विधि भी है। शिव के गुणों और उनके आचरण को देखें तो प्रतीत होता है कि संसार में जो कुछ है—जैसे जीना है, संतुलन बनाना है, सृजन और संहार के बीच सामंजस्य रखना है—वह सब शिव से अनुकरणीय है।
कभी डमरू की नाद_ध्वनि में सृजन,कभी तांडव में परिवर्तन,कभी गहन समाधि में वैराग्य—यही शिव का जीवन-दर्शन है।

शिव का स्वरूप : जन्म और मृत्यु से परे
के अनुसार भगवान शिव स्वयंभू हैं—अर्थात् जिनकी उत्पत्ति स्वयं से है। वे न जन्म लेते हैं, न मृत्यु को प्राप्त होते हैं। वे कालातीत हैं।एक वर्णन है कि जब संपूर्ण ब्रह्माण्ड—धरती, आकाश और पाताल—जलमग्न था, तब केवल ब्रह्मा, विष्णु और शिव ही विद्यमान थे। विष्णु शेषनाग पर जल-तल पर शयन कर रहे थे, उनकी नाभि से कमल पर ब्रह्मा प्रकट हुए। सृष्टि के संवाद के मध्य ही शिव का प्राकट्य हुआ—जो यह संकेत देता है कि सृजन, संरक्षण और संहार—तीनों का मूल एक ही चेतना है।

अर्धनारीश्वर : संतुलन का सर्वोच्च प्रतीक
नारी प्रकृति है और नर पुरुष।इसी सत्य को मूर्त रूप देता है शिव का अर्धनारीश्वर स्वरूप—जहाँ आधा भाग शिव (पुरुष तत्व) है और आधा भाग शिवा अर्थात शक्ति (नारी तत्व)।यह रूप सिखाता है कि:
स्त्री और पुरुष एक-दूसरे के पूरक हैं।कोई भी पूर्ण नहीं, जब तक दोनों का संतुलन न हो,सृष्टि का संचालन संयोजन से होता है, प्रतिस्पर्धा से नहीं यह दर्शन आज के समाज के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है जितना सृष्टि के आरंभ में था।

“मैं ही सब हूँ” : शिव का आत्मतत्व
शिव-विवाह की कथा में ब्राह्मण द्वारा पूछे गए प्रश्न—पिता, बाबा, परदादा—का उत्तर शिव का यह कथन है:
“पुत्र भी मैं हूँ, पिता भी मैं हूँ, और मूल भी मैं ही हूँ।”
यह अहंकार नहीं, बल्कि अद्वैत दर्शन है—जहाँ आत्मा और परमात्मा में कोई भेद नहीं।
यह संदेश देता है कि संपूर्ण ब्रह्माण्ड एक ही चेतना की अभिव्यक्ति है।

डमरू और नाद : सृजन की ध्वनि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब देवी सरस्वती प्रकट हुईं, तब उनकी वाणी में स्वर और संगीत का अभाव था। तब शिव ने 14 बार डमरू बजाया और तांडव के माध्यम से नाद को जन्म दिया।यही नाद आगे चलकर भाषा, व्याकरण, संगीत और लय का आधार बना।
इसलिए शिव को केवल संहारक नहीं, बल्कि सृजन के प्रवर्तक भी कहा गया।

नीलकंठ : त्याग और करुणा का चरम रूप
समुद्र मंथन से निकले हला_हल विष को जब कोई भी धारण करने को तैयार न हुआ, तब शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया। इससे उनका कंठ नील_वर्ण हो गया और वे नीलकंठ कहलाए।
यह घटना सिखाती है कि:
सच्चा नेतृत्व स्वयं कष्ट सहकर समाज की रक्षा करता है
दूसरों के लिए विष पी जाना ही करुणा है ।विष के प्रभाव को शांत करने हेतु देवताओं द्वारा जल अर्पित किया गया—इसी से शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा और श्रावण मास का विशेष महत्व जुड़ा है।

सच्चा प्रेम : दो धड़कनें, एक गति

प्रेम कोई सौदा नहीं,कोई शर्त नहीं,कोई अधिकार नहीं।प्रेम एक उत्कृष्ट भाव है—जो देने से बढ़ता है,समर्पण से पवित्र होता है,और विस्तार से अमर बनता है।यदि आज का प्रेम फिर से उस मूल भाव से जुड़ जाए,तो नफरत अपने आप समाप्त हो जाएगी।क्योंकि प्रेम का स्वभाव ही है—सृजन, संरक्षण और समरसता।

वेलेंटाइन’स डे/14/02/2026


जहां दो दिल एक साथ धड़कें,जहां प्रेम पूरा न होने तक भी धड़कता रहे—वही सच्चा प्रेम है।और जब प्रेम पूर्ण होता है, तो दो जिस्म एक जान बनते हैं,और सृष्टि में एक नई जान का आगमन होता है।यही वह क्षण है जहां प्रेम व्यक्तिगत सीमा से निकलकर सृजनात्मक शक्ति बन जाता है।

प्रेम का विस्तार : व्यक्ति से परिवार, समाज और राष्ट्र तक। के
प्रेम जितना सीमित होता है, उसका प्रभाव उतना ही क्षीण हो जाता है।लेकिन जब वही प्रेम—परिवार का रूप लेता है
समाज में जिम्मेदारी बनता है और राष्ट्रहित से जुड़ जाता है
तो वह प्रेम अद्वितीय बन जाता है।
एक युवक-युवती का प्रेम जब विवाह में बदलता है,
फिर परिवार में,और फिर समाज में योगदान देता है—
तभी सृष्टि को दिशा और गति मिलती है।

आध्यात्मिक और ऐतिहासिक प्रेम
प्रेम केवल रोमांटिक नहीं होता।
आध्यात्मिक प्रेम में भी उसकी पराकाष्ठा दिखती है—
जहां भक्ति, आस्था और आत्मसमर्पण होता है।
प्रेम वह भी है जो अन्याय के विरुद्ध खड़ा कर देता है,
जो आत्मसम्मान और सत्य के लिए बलिदान की प्रेरणा देता है।

प्रेम सर्वत्र है, फिर नफरत कहां से आई?
ऐसा कोई मनुष्य नहीं जिसने प्रेम का सामना न किया हो।
प्रेम कभी कविता में बहता है,कभी पूजा में,कभी किसी प्रतिमा के सामने नतमस्तक होकर।हम मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर बनाते हैं—अदृश्य शक्ति की खोज में।वास्तव में यह भी प्रेम की ही पराकाष्ठा है।तो फिर प्रश्न उठता है—
प्रेम से भरे इस संसार में नफरत के बीज किसने बोए?
क्या परिस्थितियों ने?या हमने स्वयं अपने स्वार्थ, अहंकार और अधैर्य से?


दर्शन/तर्क में प्रेम : तब, अब और आगे — एक उत्कृष्ट भाव की यात्रा

एक चेतना एक जागरण जहां साधन नहीं साधना सर्वोत्तम है।

वेलेंटाइन डे:14/02/2026

प्रेम मानव जीवन की सबसे उत्कृष्ट और मौलिक भावना है। इस भावना के सामने अन्य सभी भाव गौण प्रतीत होते हैं। क्योंकि यह केवल एक मानवीय अनुभूति नहीं, बल्कि सृष्टि की आधारशिला है। प्रेम से ही सृजन हुआ, प्रेम से ही जीवन को गति मिली और प्रेम से ही सभ्यता ने आकार लिया।

प्राचीन दृष्टि में प्रेम केवल आकर्षण नहीं था, वह समर्पण, अर्पण और त्याग का नाम था। ईश्वर ने जब एक नर और एक नारी की रचना की, तो उनके बीच प्रेम उत्पन्न हुआ और उसी प्रेम से सृष्टि का विस्तार हुआ। यह तथ्य लगभग सभी धर्मों और दर्शन में स्वीकार्य है।
उस काल में प्रेम पूजा के समान था।

जैसे पूजा में पहले प्रसाद अर्पित किया जाता है और फिर उसे ग्रहण किया जाता है—वैसे ही प्रेम में पहले देने का भाव आता था, पाने की इच्छा बाद में।यही कारण है कि धर्मों में नारी को सृष्टि आदर्श स्वरूप माना गया।प्रेम वहां अधिकार नहीं, आदर था।

आधुनिक प्रेम : अभिव्यक्ति या अधिग्रहण?
आज के समय में प्रेम का स्वरूप बदलता दिखाई देता है। आधुनिक प्रेम में प्रदर्शन अधिक और समर्पण कम होता जा रहा है।

जहां प्रेम का प्रदर्शन सुंदर हो, वहां वह कला है—
लेकिन जहां प्रदर्शन शर्तों से जुड़ जाए, वहां प्रेम प्रोडक्ट और कस्टमर के रिश्ते में बदल जाता है।
आज का प्रेम अक्सर कहता है—
“मैंने इज़हार किया है, अब तुम्हें इकरार करना ही होगा।”
यहीं से प्रेम एकतरफा अधिकार बन जाता है, जबकि सच्चा प्रेम दो दिलों में एक साथ जन्म लेता है—जैसे पौधे में एक साथ कली और पुष्प फूटते हैं।