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घरेलू विवाद पर हत्या, पति ने पत्नी को उतारा मौत के घाट; नांदघाट पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार

बेमेतरा/छत्तीसगढ़_07/03/2026

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के थाना नांदघाट अंतर्गत ग्राम सेमरिया में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ महज मामूली घरेलू विवाद के चलते एक पति ने अपनी ही पत्नी की बेरहमी से पिटाई कर दी, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

खाने को लेकर हुआ था विवाद
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी भागवत पात्रे (55 वर्ष) ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। घटना के दिन दोपहर करीब 1 बजे आरोपी ने अपनी पत्नी कुमारी बाई पात्रे से खाना मांगा था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। गुस्से में आकर आरोपी ने पहले अपनी पत्नी को जोरदार थप्पड़ मारा और फिर पास रखी जलौनी लकड़ी (डंडा) से उसकी जमकर पिटाई कर दी।

अस्पताल ले जाते समय हुई मौत
मारपीट के दौरान महिला जमीन पर गिरकर बेहोश हो गई। घबराए आरोपी ने उसे उठाकर खाट पर लिटाया और ग्रामीणों को इसकी सूचना दी। ग्रामीणों की मदद से पीड़िता को एंबुलेंस के जरिए नवागढ़ शासकीय अस्पताल ले जाया गया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की रिपोर्ट मृतिका के रिश्तेदार धर्मेंद्र घृतलहरे ने थाने में दर्ज कराई थी।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए DIG रामकृष्ण साहू (IPS) और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश कुमार यादव के मार्गदर्शन में नांदघाट थाना प्रभारी निरीक्षक लेखराम ठाकुर की टीम गठित की गई। पुलिस ने आरोपी भागवत पात्रे को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, जिसमें उसने हत्या की बात स्वीकार की।

आरोपी के खिलाफ आपराधिक धारा
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 103(1) BNS के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आज दिनांक 06.03.2026 को आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

घटना के मुख्य बिंदु:
स्थान: ग्राम सेमरिया, थाना नांदघाट, जिला बेमेतरा।
आरोपी: भागवत पात्रे (55 वर्ष)।
वजह: घरेलू विवाद और खाने की बात पर मारपीट।
पुलिस टीम: निरीक्षक लेखराम ठाकुर एवं प्रधान आरक्षक रविन्द्र तिवारी, राजकुमार चौबे,विजय शुक्ला, नैनदास रात्रे, आरक्षक प्रताप सिंह यादव, नरेन्द्र बंजारे, मिथुन चंद्रवंशी, अजय गोयल, संजय साहू सहित थाना नांदघाट के समस्त पुलिस स्टाफ का सराहनीय योगदान रहा।


थाईलैंड में फंसे 6 भारतीय श्रमिकों को राहत, एनएचआरसी के हस्तक्षेप के बाद 4 की स्वदेश वापसी

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अधिकारियों के अनुसार, शेष दो श्रमिकों की वापसी के लिए भी लगातार प्रयास जारी हैं और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उन्हें भी जल्द भारत लाया जाएगा।(सूत्र पीआईबी)

नई दिल्ली, 7 मार्च 2026।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के स्वतः संज्ञान लेने के बाद विदेश मंत्रालय की पहल से थाईलैंड में परेशानियों का सामना कर रहे छह भारतीय श्रमिकों को राहत मिली है। इनमें से चार श्रमिकों को सुरक्षित भारत वापस लाया जा चुका है, जबकि दो अन्य की वापसी की प्रक्रिया जारी है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एनएचआरसी ने 20 फरवरी 2026 को इस मामले में विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर श्रमिकों की स्थिति पर ध्यान देने और मदद करने का अनुरोध किया था। इसके अगले ही दिन मंत्रालय ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार श्रमिकों को बैंकॉक से भारत भेजने की व्यवस्था कराई। ये श्रमिक कोलकाता पहुंचे और उनकी वापसी का खर्च उनके नियोक्ता द्वारा वहन किया गया।

विदेश मंत्रालय के दक्षिणी प्रभाग ने बताया कि बाकी दो श्रमिकों की स्वदेश वापसी के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। वे फिलहाल थाईलैंड में वीजा अवधि से अधिक समय तक रहने के कारण स्थानीय कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं, इसलिए उनकी वापसी में कुछ औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

दरअसल, 17 फरवरी 2026 को मीडिया में एक वीडियो सामने आया था, जिसमें ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले के मजदूरों ने अपनी स्थिति के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था कि बैंकॉक के पास एक प्लाईवुड फैक्ट्री में उनसे लंबे समय तक काम कराया जा रहा था और उन्हें उचित वेतन व भोजन भी नहीं मिल रहा था। साथ ही उनके पासपोर्ट भी नियोक्ता द्वारा रख लिए गए थे।

मामले की जानकारी मिलने के बाद एनएचआरसी ने तुरंत संज्ञान लिया और विदेश मंत्रालय से श्रमिकों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए कहा। इसके बाद मंत्रालय ने थाईलैंड के अधिकारियों और संबंधित कंपनी से संपर्क कर श्रमिकों को मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू की, जिसके परिणामस्वरूप चार श्रमिकों की सुरक्षित वापसी संभव हो सकी।


डिप्टी सीएम यूपी केशव प्रसाद मौर्य सवार: हेलीकॉप्टर की लखनऊ में इमरजेंसी लैंडिंग

2000 फीट पर डिस्प्ले बंद और धुआं भर गया।

लखनऊ, 07 मार्च 2026

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सवार हेलीकॉप्टर को शनिवार सुबह तकनीकी खराबी के कारण लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। लखनऊ के ला मार्टिनियर मैदान से कौशांबी के लिए उड़ान भरने के 15 मिनट बाद 2000 फीट की ऊंचाई पर हेलीकॉप्टर का डिस्प्ले बोर्ड अचानक बंद हो गया और केबिन में धुआं भरने लगा। पायलट की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया।बताया जा रहा है कि, हेलीकॉप्टर उड़ान के दौरान लगभग 50 किलोमीटर दूर बछरावां क्षेत्र तक पहुंच चुका था, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण उसे वापस लखनऊ लाना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, केशव प्रसाद मौर्य हेलीकॉप्टर में पायलट, एक सहयोगी और पीएसओ के साथ थे। धुएं से केबिन में हड़कंप मच गया, लेकिन पायलट ने फौरन अमौसी एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कर ली। सभी यात्री सुरक्षित हैं। हेलीकॉप्टर में आई खराबी के कारणों की जांच चल रही है।

मीडिया के मुताबिक, उड़ान के दौरान हेलीकॉप्टर के केबिन में अचानक धुआं भरने लगा था। देखते ही देखते पूरा केबिन धुएं से भर गया, जिससे अंदर बैठे लोगों में हड़कंप मच गया। हेलीकॉप्टर में उस समय डिप्टी सीएम के अलावा पायलट, एक सहयोगी और एक पीएसओ मौजूद थे। हालांकि, पायलट की सूझबूझ और त्वरित फैसले की वजह से सभी लोग सुरक्षित बच गए।

अधिकारियों ने पुष्टि की कि यह घटना शनिवार सुबह करीब 11 बजे हुई। डिप्टी सीएम का कौशांबी दौरा कार्यक्रम प्रभावित हुआ है।घटना के बाद हेलीकॉप्टर को तकनीकी जांच के लिए रोक दिया गया है। प्रारंभिक जांच में इसे तकनीकी खराबी माना जा रहा है।

नए प्रधानमंत्री होंगे बालेन शाह? युवा मतदाता करेंगे नेपाल में बड़ा बदलाव

डिजिटल डेस्क:07/03/2026

नेपाल में हुए संसदीय चुनावों में पूर्व रैपर और काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ रही है। अभी तक के रुझानों में RSP 96 सीटों पर आगे चल रही है, जो नेपाल की पुरानी और स्थापित पार्टियों के लिए बड़ा झटका है।

खबर सूत्रों की माने तो सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बालेन शाह खुद पूर्वी नेपाल के झापा में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को हजारों वोटों से पीछे छोड़ चुके हैं। अगर मौजूदा रुझान नतीजों में बदलते हैं तो बालेन शाह नेपाल के नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं।

इस जीत के पीछे सबसे बड़ा कारण है Gen-Z युवाओं का समर्थन। पिछले साल नेपाल में युवाओं ने भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किए थे, जिसने ओली सरकार को गिरा दिया था। उन्हीं प्रदर्शनों के बाद यह पहला आम चुनाव हुआ है। बालेन शाह ने युवाओं की नब्ज पकड़ी, सोशल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल किया और भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति का वादा किया।

नेपाल की प्रतिनिधि सभा में कुल 275 सीटें हैं जिनमें 165 सीटें सीधे चुनाव से और 110 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व से भरी जाती हैं। वोटों की गिनती अभी जारी है।

यह नेपाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो सकती है।विश्लेषकों का मानना है कि बालेन शाह की लोकप्रियता के पीछे उनका काठमांडू के मेयर के रूप में काम और युवाओं के साथ सीधा संवाद बड़ी वजह है।इस नतीजे ने नेपाल की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है कि जनता खासकर युवा मतदाता अब पारंपरिक नेताओं से आगे बढ़कर नए चेहरों को मौका दे रहे हैं।

कुछ पुराने दिग्गज नेताओं ने भी अपनी सीटें बचाई हैं। पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने रुकुम ईस्ट सीट से लगातार पांचवीं बार जीत दर्ज की है, जिससे उनकी राजनीतिक पकड़ अभी भी बरकरार मानी जा रही है।

मिडिल ईस्ट की आग, भारत की रसोई तक पहुंची — LPG सिलेंडर फिर हुआ महंगा

डिजिटल डेस्क _ 07 मार्च 2026
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर अब सीधे भारतीय रसोई पर पड़ने लगा है। आज से देशभर में घरेलू और कमर्शियल — दोनों एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए हैं। इंडियन ऑयल कंपनी (IOC) ने आज सुबह ही अपनी वेबसाइट पर नई रेट लिस्ट अपडेट कर दी।

कितना बढ़ा दाम?
घरेलू सिलेंडर (14.2 किलो): दिल्ली में कीमत ₹853 से बढ़कर ₹913 हो गई, यानी ₹60 की बढ़ोतरी।
कमर्शियल सिलेंडर (19 किलो): दिल्ली में कीमत ₹1,768 से बढ़कर ₹1,883 हो गई, यानी ₹115 की बढ़ोतरी।
यह बढ़ोतरी आम परिवारों के लिए बड़ा झटका है, खासकर उन घरों के लिए जहां पहले से ही बजट तंग है।

क्यों बढ़े दाम? — असली वजह
मध्य पूर्व के देशों में छिड़े युद्ध के चलते कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई बुरी तरह बाधित हुई है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से आयात करता है। जब आयात महंगा होता है, तो उसका बोझ अंततः उपभोक्ता पर ही डाला जाता है — अतिरिक्त भार वहन उपभोक्ता ही करेंगे।

समीक्षात्मक नजरिया: सवाल यह उठता है कि क्या सरकार इस मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए पहले से तैयार थी? क्या बफर स्टॉक पर्याप्त था? विशेषज्ञ लंबे समय से चेताते रहे हैं कि एकल स्रोत पर निर्भरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरनाक है।

सरकार ने क्या किया?
बढ़ती कीमतों और संभावित कमी के बीच सरकार ने कुछ आपातकालीन कदम उठाए हैं:
सभी सरकारी और निजी तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
रिफाइनरियों को प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल उत्पादन की बजाय एलपीजी उत्पादन में प्राथमिकता देने को कहा गया है।
आपातकालीन शक्तियों का उपयोग कर यह आदेश लागू किए गए हैं।
समीक्षात्मक नजरिया: ये कदम सराहनीय हैं, लेकिन “आपातकाल के बाद सक्रिय होना” एक प्रतिक्रियात्मक नीति है, न कि दूरदर्शी। भारत को दीर्घकालिक ऊर्जा विविधीकरण की जरूरत है — जैसे कि नवीकरणीय ऊर्जा और घरेलू गैस उत्पादन में बड़े पैमाने पर निवेश।
आम आदमी पर क्या असर?
होटल, ढाबे और छोटे रेस्तरां — जो कमर्शियल सिलेंडर पर निर्भर हैं — उनकी लागत तेज़ी से बढ़ेगी, जिसका असर खाने-पीने की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर घरेलू सिलेंडर का ₹60 का अतिरिक्त बोझ सालाना ₹720 तक जा सकता है।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए भी यह झटका कम नहीं है।

अब क्या?
मिडिल ईस्ट का संकट अब महज एक भू-राजनीतिक मुद्दा नहीं रहा — यह हर भारतीय की रसोई की आग से जुड़ा सवाल बन चुका है। सरकार के तात्कालिक कदम राहत दे सकते हैं, लेकिन स्थायी समाधान के लिए ऊर्जा नीति में दीर्घकालिक सुधार अनिवार्य है।


दुबई में 9 दिन फंसे रहे बिलासपुर के तीन दोस्त, भारत सरकार की मदद से हुई सुरक्षित वापसी

छत्तीसगढ़ समाचार_ बिलासपुर | 07 मार्च 2026

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के करगी रोड कोटा क्षेत्र के तीन युवा दोस्त — शिवम मिश्रा, आकाश अग्रवाल और आयुष अग्रवाल — दुबई में लगातार 9 दिनों तक फंसे रहने के बाद आखिरकार सुरक्षित घर लौट आए हैं।

कैसे शुरू हुआ यह सफर?
तीनों दोस्त घूमने के उद्देश्य से दुबई गए थे। यह एक सामान्य पर्यटन यात्रा थी — लेकिन मध्य पूर्व में अचानक बढ़े भू-राजनीतिक तनाव ने उनकी वापसी की राह रोक दी।
28 फरवरी को उनकी वापसी की पहली फ्लाइट थी — वह रद्द हो गई। इसके बाद 3 मार्च की फ्लाइट बुक की — वह भी कैंसल। फिर 5 मार्च की टिकट ली — वह भी नहीं चली।

आखिरकार 6 मार्च की रात उनकी फ्लाइट रवाना हुई और तड़के 3 बजे दिल्ली पहुंचे। वहां से रायपुर होते हुए वे अपने घर कोटा पहुंचे।
परिवार की बेचैनी और सरकार से गुहार
घर पर बैठे परिजनों की चिंता का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। लगातार फ्लाइटें कैंसल होती रहीं, दुबई में सुरक्षा की स्थिति अस्पष्ट थी और खर्च बढ़ता जा रहा था।

परिजनों ने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई। शिवम मिश्रा ने केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू से सीधे फोन पर संपर्क किया, जिन पर उन्होंने मदद का आश्वासन दिया। इस पहल का असर भी दिखा और अंततः तीनों की वापसी सुनिश्चित हो सकी।
तीनों युवक इस पूरे दौरान वीडियो कॉल के जरिए परिजनों से लगातार संपर्क में बने रहे, जिससे घरवालों को कुछ राहत मिलती रही।

कैसा रहा दुबई में 9 दिन का अनुभव?
शिवम मिश्रा ने बताया कि फ्लाइट बार-बार रद्द होने से होटल में रुकने की अवधि बढ़ती गई और खर्च भी लगातार बढ़ता रहा। इसके बावजूद तीनों ने धैर्य रखा और एयरलाइन तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पूरी तरह पालन करते रहे।

समीक्षात्मक नजरिया: यह घटना एक बड़े सवाल की ओर इशारा करती है — क्या भारतीय पर्यटकों को विदेश यात्रा से पहले ट्रैवल एडवाइजरी और आपातकालीन संपर्क नंबरों की पर्याप्त जानकारी दी जाती है? इन तीन युवकों को सरकारी मदद मिली, लेकिन जिन्हें सही संपर्क नहीं पता, उनका क्या?

सुखद अंत, लेकिन सबक जरूरी
9 दिनों की मुश्किल यात्रा के बाद तीनों दोस्त सुरक्षित घर लौटे — यह राहत की बात है। लेकिन यह घटना उन हजारों भारतीय पर्यटकों के लिए एक सबक भी है जो बिना पूरी तैयारी के अशांत क्षेत्रों की यात्रा पर निकल जाते हैं।

विशेषज्ञ सुझाव:
विदेश यात्रा से पहले MEA (विदेश मंत्रालय) की ट्रैवल एडवाइजरी जरूर पढ़ें।
दूतावास का नंबर हमेशा फोन में सेव रखें।
ट्रैवल इंश्योरेंस लेना अनिवार्य समझें।
संकट में स्थानीय जनप्रतिनिधियों से संपर्क करने में संकोच न करें।

छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू का त्वरित हस्तक्षेप और तीनों युवकों का संयमित व्यवहार — दोनों ही इस पूरे प्रकरण के सकारात्मक पहलू हैं। यह घटना दिखाती है कि संकट में सही कदम उठाने से मुश्किल से मुश्किल हालात भी सुलझाए जा सकते हैं।

होली पर राजधानी रायपुर और दुर्ग में शराब की रिकॉर्ड बिक्री, रायपुर में 58 करोड़ और दुर्ग में 15 करोड़ का आंकड़ा

दुर्ग/रायपुर_ 06 मार्च 2026

होली के त्योहार के दौरान छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री में बड़ा उछाल देखने को मिला। आबकारी विभाग के अनुमान के मुताबिक इस बार प्रदेश भर में 500 करोड़ रुपये से अधिक की शराब बिक्री होने की संभावना जताई गई है। त्योहार के दौरान देसी शराब की तुलना में विदेशी (अंग्रेजी) ब्रांडों की मांग अधिक रही।

राजधानी रायपुर और पड़ोसी जिला दुर्ग में शराब बिक्री ने नया रिकॉर्ड बनाया है। दोनों जिलों में त्योहार के दौरान शराब दुकानों पर भारी भीड़ देखने को मिली और बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ गई।

रायपुर में 4 दिनों में 58 करोड़ की बिक्री
आबकारी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार रायपुर जिले में होली पर्व के दौरान चार दिनों में 58 करोड़ रुपये से अधिक की शराब की बिक्री दर्ज की गई। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 91 लाख रुपये अधिक है।
त्योहार के कारण राजधानी की लगभग सभी दुकानों में ग्राहकों की लंबी कतारें देखी गईं और कई स्थानों पर स्टॉक भी तेजी से खत्म होता नजर आया।

दुर्ग में एक दिन में 15 करोड़ की बिक्री
वहीं दुर्ग जिले में होली से ठीक पहले 3 मार्च को शराब बिक्री का नया रिकॉर्ड बना। एक ही दिन में करीब 15 करोड़ रुपये की शराब की बिक्री दर्ज की गई। दुकानों पर सुबह से देर रात तक खरीदारों की भीड़ लगी रही।

आबकारी विभाग के अनुसार सामान्य दिनों में दुर्ग जिले में शराब की औसत बिक्री 3 से 5 करोड़ रुपये के बीच रहती है, लेकिन होली के अवसर पर यह आंकड़ा बढ़कर सीधे 15 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

63 दुकानों से हो रही बिक्री
दुर्ग जिले में वर्तमान में कुल 63 शराब दुकानें संचालित हैं, जिनमें देसी और विदेशी दोनों प्रकार की शराब उपलब्ध है। त्योहार के कारण बिक्री में इतनी तेजी आई कि कई दुकानों में स्टॉक जल्दी खत्म होने की स्थिति भी बनी।

विदेशी ब्रांडों की ज्यादा मांग
आबकारी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक होली जैसे बड़े त्योहारों में विदेशी ब्रांडों की मांग अपेक्षाकृत अधिक रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने प्रमुख दुकानों में अतिरिक्त स्टॉक और विशेष व्यवस्था भी की थी।
त्योहार के दौरान बढ़ी खरीदारी के कारण प्रदेश में आबकारी राजस्व में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

नक्सली सफलता: नक्सल मुहिम में भारत का सबसे वांटेड माओवादी गणपति नेपाल से गिरफ्तार

बस्तर समाचार_ 06 मार्च 2026

केंद्र और राज्य सरकारों का संयुक्त लक्ष्य मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद और आतंकवाद से मुक्त करना है। इसी दिशा में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। भारत का सबसे मोस्ट वांटेड माओवादी नेता गणपति (मुप्पला लक्ष्मण राव) नेपाल से गिरफ्तार कर भारत लाया गया है।जानकारी के अनुसार गणपति आंध्रप्रदेश के कृष्णा जिले में जन्मे और छात्र जीवन में ही वामपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर धीरे-धीरे उग्र वामपंथी आंदोलन में सक्रिय हो गया।

गणपति कौन हैं? नक्सली आंदोलन का कुख्यात चेहरा
पूरा नाम: मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति।
भूमिका: 2004 से 2018 तक भारतीय माओवादी आंदोलन के महासचिव।पूर्व माओवादी महासचिव गणपति नेपाल से गिरफ्तार भारत लाकर औपचारिक आत्मसमर्पण की तैयारी
दंतेवाड़ा, झीरम घाटी जैसे हमलों का मास्टरमाइंड।
प्रभाव: नक्सली संगठन का सबसे प्रभावशाली और कुख्यात नेता। बड़े माओवादियों में शुमार भारत सरकार की मोस्ट वांटेड लिस्ट में टॉप लीडर।

केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, गणपति को नेपाल से पकड़कर भारत लाया गया है। जल्द ही उसका औपचारिक समर्पण हो सकता है।

गिरफ्तारी पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
पुलिस महानिरीक्षक (डीआईजी) ने कहा,
“इस तरह की सूचना सामने आई है, लेकिन फिलहाल किसी राज्य या केंद्रीय एजेंसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की। जब तक अधिकृत जानकारी नहीं मिलती, तब तक स्पष्ट कुछ कहना संभव नहीं।”उन्होंने कहा कि जब तक अधिकृत स्तर पर जानकारी सामने नहीं आ जाती तब तक इस विषय पर स्पष्ट रूप से कुछ भी कहना संभव नहीं है।

यह गिरफ्तारी नक्सलवाद के खिलाफ चल रही महामुहिम को नई गति देगी। केंद्र सरकार का डेडलाइन मार्च 2026 है, और पुलिस नेपाल तक पहुंच गई है।

नीतीश कुमार राज्यसभा जाएंगे — बिहार में नया सियासी भूचाल!

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर हमेशा से उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। अब देखना यह है कि राज्यसभा जाने के बाद बिहार की सत्ता किसके हाथ आती है और JDU का भविष्य क्या होगा। यह बिहार ही नहीं, पूरे देश की राजनीति को प्रभावित करने वाला घटनाक्रम है।

पटना_ 6 मार्च 2026

बिहार मख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब से नामांकन राज्यसभा के लिए डाला है बिहार की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल मची हुई है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया, उनका कहना भी है कि मैं इस राजनीतिक दिशा के लिए 5 दशकों से सोच रहा था,इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। इस घटनाक्रम ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

क्या है पूरा मामला?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार को बिहार की मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाकर राज्यसभा भेजा जा रहा है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सीएम नीतीश कुमार और उनकी पार्टी को खत्म करना चाहती है और बिहार में “महाराष्ट्र मॉडल” लागू किया जा रहा है।
तेजस्वी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा — “घोड़ा तो चढ़ाया, लेकिन फेरे किसी और के साथ।”

रोहिणी आचार्य का तीखा वार
लालू प्रसाद यादव की बेटी और राजद नेता रोहिणी आचार्य ने भी नीतीश कुमार पर हमला बोला। रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अपनों के साथ बारम्बार बेवफाई करने वाले नीतीश कुमार अपनी बदहाली के लिए खुद जिम्मेदार हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जनवरी 2024 में महागठबंधन का साथ छोड़ने का फैसला नीतीश की राजनीतिक गिरावट की शुरुआत थी।

JDU में बगावत की आशंका
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या नीतीश के बेटे निशांत कुमार JDU की कमान संभालेंगे और क्या इससे पार्टी में बगावत थमेगी। राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से जदयू की राजनीति और संगठन पर बड़ा असर पड़ सकता है। 

BJP का रुख — चुप्पी या रणनीति?
भाजपा की रणनीति के बारे में राजद का कहना है कि पार्टी ने जिस भी सहयोगी दल के साथ काम किया है, वहां यही हुआ है।इससे NDA के भीतर आपसी विश्वास पर भी सवाल उठ रहे हैं।

बिहार में अगला कदम क्या?
बिहार राजनीति में संभावित नए मोड़ को लेकर यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या भाजपा को अब बिहार का मुख्यमंत्री पद मिलेगा। अगर ऐसा होता है, तो यह बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव होगा।

राजनाथ सिंह का GRSE दौरा: ‘युद्धपोत सिर्फ स्टील नहीं, करोड़ों हाथों की मेहनत है’

— यह भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति और समुद्री शक्ति को मजबूत करने की प्रतिबद्धता का संदेश साथ GRSE जैसे सार्वजनिक उपक्रमों पर सरकार का यह भरोसा दर्शाता है कि भारत रक्षा निर्माण में दुनिया के सामने एक नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है।

कोलकाता, 6 मार्च 2026। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) के परिसर में पहुंचे और कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत के रक्षा और समुद्री क्षेत्र को लेकर कई अहम बातें कहीं, जो देश की रक्षा नीति की दिशा को और स्पष्ट करती हैं।

तकनीक के युग में GRSE से बड़ी उम्मीद
रक्षा मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि आज का दौर तकनीक का दौर है। उन्होंने GRSE से अपील की कि वे ऐसे अत्याधुनिक जहाज और प्लेटफॉर्म विकसित करें, जो भारत और पूरी दुनिया में जहाज निर्माण के क्षेत्र में उत्कृष्टता की मिसाल बनें।
उनके शब्दों में — “नई चुनौतियां आएंगी, नई तकनीकें आएंगी और प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी, लेकिन इसी मेहनत और समर्पण से GRSE भारत और दुनिया में जहाज निर्माण उत्कृष्टता का चमकता सितारा बनेगा।”

विकसित भारत 2047 में GRSE की अहम भूमिका
राजनाथ सिंह ने GRSE को ‘विकसित भारत 2047’ के सपने से सीधे जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत को एक आत्मनिर्भर और वैश्विक शक्ति बनाने में देश के शिपयार्ड की केंद्रीय भूमिका होगी। पिछले डेढ़ सदी से GRSE ने भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल को फ्रिगेट, युद्धपोत और अन्य उन्नत जहाज उपलब्ध कराए हैं।

‘युद्धपोत सिर्फ मशीन नहीं — हजारों सपनों का प्रतीक’
इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने एक भावपूर्ण बात कही जो खूब चर्चा में है —
“जब आपका बनाया हुआ आधुनिक युद्धपोत समुद्र की लहरों पर चलता है, तो वह केवल स्टील और मशीनों का ढांचा नहीं होता। यह हजारों श्रमिकों की मेहनत, इंजीनियरों की नवाचार क्षमता और देश के प्रति समर्पण का प्रतीक होता है।”
इन शब्दों ने कर्मचारियों में जोश और गर्व का संचार किया।

कर्मचारी हैं राष्ट्र-निर्माता — राजनाथ
रक्षा मंत्री ने GRSE कर्मचारियों को महज नौकरीपेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण के महान अभियान का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने उनकी मेहनत, कौशल और प्रतिबद्धता की जमकर सराहना की।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिखी भारत की विविधता
कार्यक्रम में GRSE के कर्मचारियों और उनके परिवारों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। राजनाथ सिंह ने इसे ‘बहुत शानदार’ बताते हुए कहा कि यह भारत की विविधता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरत झलक थी।
इस कार्यक्रम में GRSE के CMD कमोडोर पी.आर. हरि (सेवानिवृत्त), रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और शिपयार्ड के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।