21.1 C
Raipur
Sunday, November 1, 2026
Home Blog Page 183

बेमेतरा में खाद्य विभाग का बड़ा एक्शन: होटलों में घरेलू गैस सिलेंडरों का दुरुपयोग, 10 सिलेंडर जब्त

बेमेतरा _ 12 मार्च 2026

बेमेतरा जिला प्रशासन ने घरेलू गैस सिलेंडरों के अवैध व्यावसायिक उपयोग के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। कलेक्टर के निर्देशानुसार, खाद्य विभाग की टीम ने आज शहर के विभिन्न होटल, ढाबा और खाद्य प्रतिष्ठानों पर औचक दबिश दी। इस कार्रवाई के दौरान नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए पाए गए 10 घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए गए हैं।

इन प्रमुख प्रतिष्ठानों पर हुई कार्रवाई
जांच दल ने शहर के नामी होटलों और नाश्ता केंद्रों का निरीक्षण किया। विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार, निम्नलिखित स्थानों पर घरेलू गैस का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था:
गुजराती स्वीट्स: 02 सिलेंडर बरामद
मनोहर चाय एवं आरसी किचन: 02-02 सिलेंडर जब्त
चाचा-भतीजा एवं जय मां शीतला ढाबा: 01-01 सिलेंडर
यादव पुड़ी सब्जी एवं अनिल स्वीट्स: 01-01 सिलेंडर

कानूनी प्रावधान और सख्त चेतावनी
खाद्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि घरेलू गैस (LPG) का उपयोग केवल घरों में खाना पकाने के लिए ही वैध है। व्यावसायिक स्थलों पर इसका उपयोग करना द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (प्रदाय और वितरण विनियमन) आदेश, 2000 का सीधा उल्लंघन है।
“नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध वैधानिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं। यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।” – खाद्य विभाग, बेमेतरा

व्यवसायियों के लिए प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने सभी होटल संचालकों और छोटे व्यापारियों से अपील की है कि वे आर्थिक लाभ के लिए घरेलू सिलेंडरों का उपयोग न करें। व्यावसायिक कार्यों के लिए केवल निर्धारित कमर्शियल (नीले) गैस सिलेंडरों का ही उपयोग करें। नियमों की अनदेखी करने पर भविष्य में भारी जुर्माना या प्रतिष्ठान सील करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

निष्कर्ष: उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा
इस प्रकार की कार्रवाई से न केवल घरेलू गैस की कालाबाजारी रुकती है, बल्कि आम उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित होती है। खाद्य विभाग ने साफ कर दिया है कि जिले में कहीं भी गैस सिलेंडरों का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

क्या आपको लगता है कि इस तरह की कार्रवाई से घरेलू गैस की किल्लत कम होगी? हमें कमेंट्स में बताएं।




विश्व ग्लूकोमा सप्ताह 2026: बेमेतरा में ‘काला मोतियाबिंद’ के प्रति जागरूकता अभियान शुरू

बेमेतरा _ 12 मार्च 2026

स्वास्थ्य विभाग, जिला बेमेतरा द्वारा राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत ‘विश्व ग्लूकोमा सप्ताह’ (08 से 14 मार्च) का आयोजन किया जा रहा है। कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं के निर्देशानुसार आयोजित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य आम जनता को ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद) की शीघ्र पहचान और समय पर उपचार के प्रति जागरूक करना है।
इस वर्ष की थीम “ग्लूकोमा मुक्त विश्व के लिए एकजुट होना” रखी गई है।

क्या है ग्लूकोमा और यह क्यों है खतरनाक?
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमृत लाल रोहलेडर ने बताया कि ग्लूकोमा एक ऐसी स्थिति है जिसमें आंख के अंदर दबाव (Intraocular Pressure) धीरे-धीरे बढ़ता है। यह दबाव आंखों की ऑप्टिक नर्व को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचाता है। यदि सही समय पर इसका निदान न हो, तो व्यक्ति की आंखों की रोशनी पूरी तरह जा सकती है।
“समय पर इलाज मिलने से ग्लूकोमा के कारण होने वाले अंधेपन को रोका जा सकता है।” – डॉ. अमृत लाल रोहलेडर

40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग रहें सावधान
जिला नोडल अधिकारी (अंधत्व) डॉ. बी.एल. राज ने ग्लूकोमा के वैज्ञानिक कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि:
आंख के भीतर ‘एक्वस ह्यूमर’ नामक तरल का प्रवाह असंतुलित होने से आंखों का तनाव बढ़ जाता है।
40 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों को नियमित जांच करानी चाहिए।
जोखिम समूह: मधुमेह (Diabetes), उच्च रक्तचाप (BP), या जिनके परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास रहा हो, उन्हें अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।

ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद) के प्रमुख लक्षण
यदि आपको निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो तुरंत विशेषज्ञ से मिलें:
आंखों में लगातार दर्द रहना।
रोशनी के चारों ओर रंगीन घेरे (Halos) नजर आना।
दृष्टि का धीरे-धीरे कम होना।
चश्मे के नंबर का बार-बार बदलना।

बचाव और उपचार: विशेषज्ञ की सलाह
जिला सहायक नोडल अधिकारी विद्या सागर रात्रे ने जानकारी दी कि जिला चिकित्सालय बेमेतरा में इसकी जांच की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्लूकोमा के कारण जो रोशनी एक बार चली जाती है, उसे वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन उपचार के जरिए बची हुई रोशनी को सुरक्षित रखा जा सकता है। ग्लूकोमा के मरीजों को जीवन भर देखभाल और डॉक्टर के संपर्क में रहने की आवश्यकता होती है। अंधत्व से बचने के लिए एक बार नेत्र विशेषज्ञ से जांच अवश्य कराएं।
क्या आप भी अपनी आंखों की नियमित जांच कराते हैं? अपनी राय हमें कमेंट में बताएं या इस जानकारी को साझा करें।

अवैध गैस रिफिलिंग के बड़े नेटवर्क पर प्रहार, रिहायशी इलाके में चल रहा था ‘मौत का खेल’

जगदलपुर (बस्तर) 12 मार्च 2026

मुख्य हाइलाइट्स:
स्थान: राउतपारा, बालाजी केयर अस्पताल के पास, जगदलपुर।कुल जब्ती: 34 गैस सिलेंडर और 3 रिफिलिंग पाइप।प्रशासनिक रुख: आगामी दिनों में शहर के अन्य वार्डों में भी औचक निरीक्षण जारी रहेगा।

जन-केंद्रित पहल: जनता से अपील
जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके आसपास कहीं भी अवैध गैस भंडारण या रिफिलिंग का काम हो रहा है, तो इसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दें। इस तरह की गतिविधियां न केवल आर्थिक अपराध हैं, बल्कि रिहायशी इलाकों में बड़े विस्फोट का कारण भी बन सकती हैं। जब्त सामग्री को राजसात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और आरोपी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय तनाव की आड़ में कालाबाजारी का खेल
प्रशासनिक जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ असामाजिक तत्व मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण गैस आपूर्ति में होने वाली संभावित कमी का फायदा उठा रहे हैं। घरेलू गैस को कमर्शियल सिलेंडरों में भरकर ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि जनता के हक की गैस की कालाबाजारी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कलेक्टर आकाश चिकारा के सख्त निर्देशों के बाद खाद्य विभाग की टीम ने छापामार कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में गैस सिलेंडर और रिफिलिंग उपकरण जब्त किए हैं। इस कार्रवाई से शहर के अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।

अस्पताल के पास चल रहा था अवैध कारोबार
खाद्य नियंत्रक घनश्याम राठौर को पुख्ता सूचना मिली थी कि दीनदयाल उपाध्याय वार्ड के राउतपारा स्थित बालाजी केयर अस्पताल के पास एक रिहायशी मकान में अवैध रूप से गैस की रिफिलिंग की जा रही है। घनी आबादी और अस्पताल के नजदीक होने के कारण यह गतिविधि किसी बड़ी अनहोनी को दावत दे रही थी। सूचना की गंभीरता को देखते हुए खाद्य विभाग की एक विशेष टीम गठित की गई।

छापेमारी में 34 सिलेंडर और रिफिलिंग पाइप बरामद
टीम ने जब प्रशांत महाजन के आवास पर अचानक दबिश दी, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। बिना किसी सुरक्षा मानक और वैध दस्तावेजों के बड़ी संख्या में सिलेंडर डंप किए गए थे। कार्रवाई के दौरान निम्नलिखित सामग्री जब्त की गई_ घरेलू एलपीजी सिलेंडर: 24 नग।कमर्शियल सिलेंडर: 10 नग।रिफिलिंग पाइप: 03 नग (गैस चोरी के लिए उपयोग होने वाले)

अभियान को सफल बनाने खाद्य विभाग की अनुभवी टीम ने अंजाम दिया, जिसमें मुख्य रूप से: खाद्य निरीक्षक शेख अब्दुल कादिर। खाद्य निरीक्षक उमेश चौधरी। खाद्य निरीक्षक हेमंत ब्रह्मभट्ट। खाद्य निरीक्षक पायल वर्मा शामिल थे।


रायपुर महापौर का बड़ा फैसला: मच्छरों पर लगाम कसने के लिए शहर में ‘स्पेशल 6’ अभियान शुरू

रायपुर _ 12 मार्च 2026

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बढ़ते मच्छरों के प्रकोप और मौसमी बीमारियों के खतरे को देखते हुए नगर निगम प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। रायपुर महापौर मीनल चौबे ने शहर के स्वास्थ्य विभाग को कड़े निर्देश जारी करते हुए मच्छर नियंत्रण अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने का आदेश दिया है। अब शहर के सभी 70 वार्डों में फॉगिंग और एंटी-लार्वा ट्रीटमेंट के समय में बढ़ोतरी कर दी गई है।

एंटी-लार्वा ट्रीटमेंट अब 4 नहीं, 6 घंटे चलेगा
महापौर कार्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मीनल चौबे ने स्वास्थ्य सेवाओं की सुस्ती पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी 10 जोनों के अंतर्गत आने वाले वार्डों में जो एंटी-लार्वा ट्रीटमेंट पहले 4 घंटे चलता था, उसे अब बढ़ाकर 6 घंटे प्रतिदिन किया जाए। इसके लिए अतिरिक्त टीमें तैनात करने और कीटनाशक दवाओं का व्यापक छिड़काव सुनिश्चित करने को कहा गया है।

100% कचरा संग्रहण और नालियों की सफाई पर जोर
बैठक में नगर वित्त समिति के अध्यक्ष महेंद्र खोडियार और स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. तृप्ति पाणिग्राही की मौजूदगी में शहर की स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा की गई।

महापौर ने स्पष्ट किया कि:
डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण: हर घर से 100% कचरा उठाना अनिवार्य है।
सफाई वाहनों की निगरानी: कचरा ढोने वाले वाहनों की जीपीएस और जमीनी स्तर पर कड़ी मॉनिटरिंग की जाएगी।
नाली सफाई: जोन स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे नालियों और बड़े नालों की गहराई से सफाई कराएं ताकि जलजमाव न हो और मच्छरों को पनपने की जगह न मिले।
महापौर ने पुरानी पाइपलाइनों से होने वाले लीकेज को रोकने के भी निर्देश दिए हैं, ताकि दूषित पानी और जलभराव से होने वाली बीमारियों से आम जनता को सुरक्षित रखा जा सके।

जन स्वास्थ्य सुरक्षा सर्वोपरि
राजधानी में डेंगू, मलेरिया और अन्य मच्छर जनित रोगों के प्रसार को रोकने के लिए नगर निगम ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। मेयर ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि किसी भी वार्ड में सफाई या मच्छर उन्मूलन अभियान में लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य बिंदु
* लक्ष्य: रायपुर के सभी 70 वार्डों में मच्छरों पर पूर्ण नियंत्रण।
नया समय सुबह के एंटी-लार्वा अभियान को 6 घंटे तक विस्तारित किया गया। स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. तृप्ति पाणिग्राही को ग्राउंड रिपोर्ट देने के निर्देश।

छत्तीसगढ़ में मवेशी तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: बीजापुर, कबीरधाम और कोरबा में 180 से ज्यादा मवेशी मुक्त, 13 गिरफ्तार

36गढ़_बीजापुर/कबीरधाम (12 मार्च 2026)

छत्तीसगढ़ में अवैध पशु तस्करी के खिलाफ पुलिस और गौ-सेवकों ने संयुक्त मोर्चा खोल दिया है। पिछले 24 घंटों के भीतर राज्य के विभिन्न जिलों और सीमावर्ती क्षेत्रों में छापेमारी कर भारी मात्रा में मवेशी बरामद किए गए हैं और कई तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा गया है।

बीजापुर: अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश
बीजापुर जिले के भोपालपटनम थाना क्षेत्र के अंतर्गत पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने उल्लूर घाटी और चिल्लामरका के जंगलों में घेराबंदी की। यहाँ से 171 मवेशियों (गाय, बैल, बछड़े) को मुक्त कराया गया, जिन्हें पैदल ही तेलंगाना ले जाया जा रहा था। इस मामले में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना के 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

कबीरधाम: पिकअप वाहनों से तस्करी नाकाम
कबीरधाम (कवर्धा) के रेंगाखार क्षेत्र में गौ-सेवकों की सक्रियता से दो पिकअप वाहनों (CG 07 BU 4598 और CG 10 AJ 0274) को पकड़ा गया। एसडीओपी कृष्णा कुमार चंद्राकर के अनुसार, इन वाहनों में क्रूरतापूर्वक भरे गए 7 मवेशी बरामद हुए हैं। पुलिस ने 13.50 लाख रुपये की सामग्री जब्त कर 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

कोरबा: पुलिस की सख्त कार्रवाई
कोरबा पुलिस ने भी मवेशी तस्करी के मामले में चार आरोपियों (राम यादव, दिनेश राम, मंगलू यादव और खिकराम बघेल) को गिरफ्तार किया है। यहाँ से एक पिकअप और एक बाइक सहित करीब 7.50 लाख रुपये का माल जब्त किया गया है।

खबर सारांश
कुल बरामद मवेशी: 180+,गिरफ्तार आरोपी: 13
प्रमुख हॉटस्पॉट: बीजापुर, कबीरधाम, कोरबा, पांढुर्णा सीमा।जब्त वाहन: 3 पिकअप, 1 कार, 1 बाइक।

निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ पुलिस अब सीमावर्ती राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर इन तस्करी मार्गों की मैपिंग कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

अंतरराज्यीय मवेशी तस्करी का जाल और व्यवस्था की चुनौतियां

डिजिटल डेस्क_12/03/2026

छत्तीसगढ़ और उसके सीमावर्ती राज्यों में हाल के दिनों में मवेशी तस्करी की घटनाओं में आई तेजी न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि मानवीय क्रूरता की पराकाष्ठा को भी दर्शाती है। बीजापुर के दुर्गम जंगलों से लेकर पांढुर्णा की सड़कों पर तेज रफ्तार कारों में मवेशियों को ठूंसना यह बताता है कि तस्कर अब बेखौफ हो चुके हैं।

बीजापुर में 171 मवेशियों की बरामदगी और पांढुर्णा में एक छोटी कार (स्विफ्ट) के भीतर 8 मवेशियों को क्रूरतापूर्वक बांधकर ले जाना यह स्पष्ट करता है कि यह केवल छिटपुट अपराध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अंतरराज्यीय संगठित अपराध है। छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति, जहां इसकी सीमाएं महाराष्ट्र, तेलंगाना और ओडिशा जैसे राज्यों से मिलती हैं, तस्करों के लिए एक ‘सेफ पैसेज’ बनती जा रही है।

पांढुर्णा: कार के अंदर मवेशियों की क्रूरता
एक चौंकाने वाले मामले में, पांढुर्णा में तस्करों ने स्विफ्ट कार का इस्तेमाल किया। गौरक्षकों ने संदिग्ध कार का 22 किलोमीटर तक पीछा कर लोधीखेड़ा के पास उसे रोका। कार के भीतर 8 मवेशी अमानवीय तरीके से बांधकर भरे गए थे। हालांकि चालक और तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए, लेकिन पुलिस ने वाहन जब्त कर मवेशियों को गौशाला भेज दिया है।


यहाँ दो मुख्य पहलू विचारणीय हैं:
खुफिया तंत्र और जनभागीदारी: बीजापुर और कबीरधाम की कार्रवाइयों में मुखबिरों और गौ-सेवकों की भूमिका अहम रही है। यह दर्शाता है कि जब तक समाज और पुलिस के बीच तालमेल रहेगा, ऐसे नेटवर्क ध्वस्त होते रहेंगे।
तकनीक और तस्करी का नया तरीका: अब तस्कर केवल ट्रकों का सहारा नहीं ले रहे, बल्कि छोटी कारों और पिकअप वाहनों का उपयोग कर रहे हैं ताकि पुलिस की नजरों से बचा जा सके।

प्रशासन को केवल जब्ती और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इन तस्करों के ‘फाइनेंशियल बैकबोन’ और उन कत्लखानों तक पहुंचना होगा जहाँ ये मवेशी भेजे जा रहे हैं। यदि समय रहते इन पर नकेल नहीं कसी गई, तो यह समस्या न केवल पशुधन का नुकसान करेगी बल्कि सांप्रदायिक और सामाजिक सद्भाव के लिए भी खतरा बन सकती है।


पश्चिम एशिया तनाव : निर्यात गतिविधियां प्रभावित गल्फ देशों को भेजी गई कारें होंगी वापस चेन्नई बंदरगाह

नई दिल्ली, 11 मार्च 2026:

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के समुद्री व्यापार और निर्यात पर भी दिखाई देने लगा है। स्थिति ऐसी बन गई है कि कई जहाजरानी कंपनियां अपने समुद्री रास्तों में बदलाव करने पर मजबूर हो रही हैं, जिससे निर्यात की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

खबर सूत्रों पर ताजा मामला करीब 2000 कारों का है, जिन्हें गल्फ देशों के लिए भेजा गया था। अब मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इन्हें वापस चेन्नई बंदरगाह लाने की संभावना जताई जा रही है। इससे साफ है कि क्षेत्रीय तनाव का असर भारत के व्यापार और निर्यात गतिविधियों तक पहुंच रहा है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ये गाड़ियां हुंडई मोटर इंडिया द्वारा गल्फ देशों के बाजारों के लिए भेजी गई थीं। योजना के मुताबिक इन्हें हंबनटोटा बंदरगाह के रास्ते पश्चिम एशिया के देशों तक पहुंचाया जाना था।
हालांकि समुद्र में बढ़े जोखिम के कारण कई जहाजरानी कंपनियां अपने जहाजों के मार्ग और माल ढुलाई की व्यवस्था की समीक्षा कर रही हैं। बंदरगाह अधिकारियों के अनुसार प्रमुख समुद्री रास्तों जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के आसपास की स्थिति को देखते हुए जहाजों की आवाजाही में सावधानी बरती जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार लगभग 4000 कंटेनरों को उनके तय मार्ग से वापस मोड़ दिया गया है, जिनमें से करीब 1800 कंटेनर चेन्नई से भेजे गए थे। फरवरी के आखिर से हालात बदलने के बाद तमिलनाडु के बंदरगाहों से जहाजों की आवाजाही भी कुछ धीमी हो गई है।

इसका असर खासकर वी. ओ. चिदंबरनार पोर्ट पर देखा जा रहा है, जो गल्फ देशों के लिए कंटेनर निर्यात का एक बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां से सामान्य तौर पर कपड़े, घरेलू उपयोग के वस्त्र, खाद्य पदार्थ, अंडे और इंजीनियरिंग से जुड़े उत्पाद पश्चिम एशिया भेजे जाते हैं।

मौजूदा परिस्थितियों के कारण कई माल भेजने की प्रक्रियाओं में देरी हो रही है या उनके मार्ग बदलने पड़ रहे हैं। उदाहरण के तौर पर 28 फरवरी को झोंग गु ताई युआन मालवाहक जहाज लगभग 250 कंटेनर लेकर थूथुकुडी बंदरगाह से रवाना हुआ था, लेकिन समुद्र में आगे बढ़ने के बाद उसे अपना रास्ता बदलना पड़ा और माल को जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह पर उतारना पड़ा।

स्थिति को देखते हुए चेन्नई बंदरगाह प्राधिकरण वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर काम कर रही है। वी. ओ. चिदंबरनार पोर्ट
के टर्मिनल के बाहर करीब 20,000 वर्ग मीटर क्षेत्र को अस्थायी माल भंडारण के रूप में उपयोग करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर कंटेनरों को वहां रखा जा सके।

बंदरगाह प्राधिकरण और निर्यातकों के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं, जिनमें जहाजों को संवेदनशील समुद्री मार्गों से बचाते हुए दूसरे सुरक्षित समुद्री रास्तों पर भी विचार किया जा रहा है।

गैस संकट?: 9 राज्यों में कॉमर्शियल एलपीजी सप्लाई ठप, कालाबाजारी पर प्रशासन की नजर जरूरी

0

नई दिल्ली_ 11 मार्च 2026

देश के नौ राज्यों में कॉमर्शियल रसोई गैस (एलपीजी) की सप्लाई बाधित होने से होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों में हाहाकार मच गया है। मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक और तेलंगाना समेत आंध्र प्रदेश में कॉमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति पर अस्थायी रोक लगाई गई है।

क्यों आया यह संकट?
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत आने वाले एलपीजी शिपमेंट में देरी हो रही है। इसका सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा है। हालात को काबू में लाने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के कार्यकारी निदेशकों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जो सप्लाई की समीक्षा करेगी।

सरकार ने सभी तेल रिफाइनरी कंपनियों को आदेश दिया है कि प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग केवल रसोई गैस निर्माण के लिए किया जाए। साथ ही घरेलू सिलेंडर की री-फिल बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया गया है — अब उपभोक्ता डिलीवरी के 25 दिन बाद ही अगला सिलेंडर बुक कर सकेंगे, जो पहले 21 दिन था।

शादी के सीजन में दोहरी मार
छत्तीसगढ़ में डीलरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कॉमर्शियल सिलेंडर केवल शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों को दें। ऐसे में शादी-विवाह के मौसम में कैटरर्स और छोटे खानपान व्यवसायियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि वे बढ़ी हुई कीमत चुकाने को भी तैयार हैं, लेकिन उन्हें गैस ही नहीं मिल रही।

कालाबाजारी पर कसनी होगी नकेल
इस संकट के बीच एक और गंभीर समस्या सामने आ रही है — स्थानीय बाजार में डीलरों द्वारा बिना कार्ड के और तय दर से अधिक कीमत पर सिलेंडर की अवैध बिक्री। जब आपूर्ति कम और मांग अधिक हो, तो कालाबाजारी की आशंका स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।

ऐसे हालात में जिला प्रशासन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग और पुलिस को सतर्क रहना होगा। गैस एजेंसियों की औचक जांच, स्टॉक रजिस्टर की पड़ताल और उपभोक्ताओं के लिए शिकायत नंबर जारी करना इस दिशा में कारगर कदम हो सकते हैं। जो डीलर बिना रसीद के या बाजार भाव से अधिक कीमत पर सिलेंडर बेचते पाए जाएं, उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

उपभोक्ता क्या करें?
गैस की बुकिंग हमेशा आधिकारिक ऐप या हेल्पलाइन नंबर से करें।
अधिक कीमत वसूली की शिकायत नजदीकी जिला आपूर्ति कार्यालय में करें।
संदिग्ध कालाबाजारी की जानकारी 1967 (LPG हेल्पलाइन) पर दें।

आगे क्या?
सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था अस्थायी है और जैसे ही वैश्विक आपूर्ति सामान्य होगी, सप्लाई बहाल कर दी जाएगी। लेकिन जब तक संकट है, प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह आम आदमी और छोटे व्यापारियों को कालाबाजारों के चंगुल से बचाए।

धान का दाना-दाना हिसाब मांगे जनता — विधानसभा में हंगामे से नहीं, जवाबदेही से होगा समाधान

छत्तीसगढ़ समाचार (संपादकीय)11. 3.2026

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को जो दृश्य देखने को मिला, वह लोकतंत्र के लिए न तो नया है और न ही उत्साहजनक। विपक्ष का गर्भगृह में जाना, नारेबाजी करना फिर 30 विधायकों का निलंबन होकर बहाल होना — यह सब एक ऐसे ज्वलंत मुद्दे की आड़ में हुआ, जो वास्तव में गंभीर जांच और ठोस जवाब का हकदार था।

मुद्दा गंभीर है, हंगामा नहीं
सवाल सिर्फ यह नहीं है कि “चूहों ने धान खाया या नहीं।” असली सवाल यह है कि 149.25 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद के बाद उसके भंडारण की जिम्मेदारी किसकी थी? नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत के अनुसार, मार्कफेड के भंडारण केंद्रों से 16.03 लाख क्विंटल और खरीदी केंद्रों से 6.67 लाख क्विंटल धान गायब है। यह कोई छोटी संख्या नहीं है — यह लाखों किसानों की मेहनत और करदाताओं के हजारों करोड़ रुपए से जुड़ा मामला है।

सरकार के जवाब में कितनी पारदर्शिता?
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने सदन में जो रिपोर्ट पेश की, उसमें कुछ सकारात्मक तथ्य भी थे। उन्होंने बताया कि 2739 में से 2728 खरीदी केंद्रों पर स्टॉक सत्यापन पूरा हो चुका है, दो भंडारण प्रभारियों पर एफआईआर दर्ज हुई है और दो अन्य निलंबित किए गए हैं। लेकिन 78 अधिकारियों को बस नोटिस भेज देना और बाकी 11 केंद्रों पर सत्यापन अधूरा रहना — ये बातें जनता के मन में संदेह पैदा करती हैं।

यदि नुकसान “कुल खरीद का तीन प्रतिशत से भी कम” है, जैसा सरकार कह रही है, तो भी 149 लाख टन का तीन प्रतिशत लगभग 4.5 लाख टन होता है — यह कोई मामूली आंकड़ा नहीं है।

विपक्ष का दायित्व भी है
विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना है, लेकिन गर्भगृह में जाकर नारेबाजी करना न तो किसान का भला करता है और न ही सदन की गरिमा बढ़ाता है। स्थगन प्रस्ताव के जरिए उठाया गया मुद्दा सही था, लेकिन उसे तर्क और तथ्यों के बल पर लड़ा जाना चाहिए था। सदन में जितना समय हंगामे में बर्बाद हुआ, उतने समय में शायद किसानों की असली समस्याओं पर कोई ठोस चर्चा हो सकती थी।

आदिवासी किसानों का क्या?
कांग्रेस विधायक कवासी लखमा का यह आरोप कि 32 हजार से अधिक आदिवासी किसानों से धान नहीं खरीदा गया — यह सबसे चिंताजनक पहलू है। यदि यह सच है, तो यह न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति की सबसे बड़ी विफलता है। सरकार को इस पर बिंदुवार और पारदर्शी स्पष्टीकरण देना चाहिए।

खबर का निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ की जनता चाहती है कि उसके धान का एक-एक दाना सुरक्षित रहे, किसानों को उनका उचित मूल्य मिले और दोषियों को सजा हो। इसके लिए सदन में सार्थक बहस, स्वतंत्र जांच और पारदर्शी रिपोर्टिंग जरूरी है — हंगामा नहीं।
लोकतंत्र में विरोध की आवाज बुलंद होनी चाहिए, लेकिन वह आवाज प्रश्न और तर्क की भाषा में होनी चाहिए, शोर की नहीं क्योंकि बाहर तो शोर ही शोर है।

स्कूल वाले टैक्स से भागें, तो निगम क्यों बख्शे? — रायपुर में अब होगी सख्त कार्रवाई

छत्तीसगढ़/रायपुर_ 11 मार्च 2026

राजधानी रायपुर के निजी स्कूल हर साल लाखों रुपए फीस वसूलते हैं, महंगी बसें चलाते हैं, एसी क्लासरूम बनाते हैं — लेकिन जब बात नगर निगम को प्रॉपर्टी टैक्स देने की आती है, तो अचानक इनकी “हिम्मत” जवाब दे जाती है। रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे ने होली से पहले तीन दिन का अल्टीमेटम दिया था — अपनी प्रॉपर्टी की स्वविवरणी जमा करो। लेकिन सात दिन बाद भी शहर के अधिकांश निजी स्कूलों ने कोई जानकारी नहीं दी।

मीडिया खबर से अब निगम प्रशासन का सब्र टूट रहा है और कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है।

बैठक में हाँ, असल में ना सवाल अनदेखी का है
बात सिर्फ इतनी नहीं कि स्कूलों ने देर की। असल बात यह है कि छत्तीसगढ़ निजी स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारी खुद महापौर के साथ हुई बैठक में मौजूद थे। वहाँ उन्होंने सुना, सहमति जताई — और घर जाकर भूल गए। निगम के किसी भी जोन में एक भी स्कूल ने अपनी प्रॉपर्टी का पूरा ब्यौरा जमा नहीं किया। यह लापरवाही नहीं, यह सीधी अनदेखी है।

वर्षों से टैक्स नहीं, और अब जानकारी भी नहीं
निगम की राजस्व उपायुक्त जागृति साहू बताती हैं कि शहर के करीब 42 स्कूलों से अब तक 38 लाख रुपए का प्रॉपर्टी टैक्स जमा हुआ है — ये वो स्कूल हैं जो ईमानदारी से टैक्स भरते आए हैं। लेकिन बाकी कई स्कूल न सिर्फ वर्षों से टैक्स नहीं दे रहे, बल्कि अब प्रॉपर्टी की जानकारी देने से भी कतरा रहे हैं।
सवाल उठता है — जो स्कूल प्रशासन से सुविधाएं लेता है, सड़क इस्तेमाल करता है, सफाई की उम्मीद रखता है, वो टैक्स देने से क्यों भागे?

निगम का अभियान जोरदार, पर स्कूल बेफिक्र
दूसरी तरफ रायपुर नगर निगम ने 4 से 9 मार्च के बीच महज पाँच दिनों में 5 करोड़ 33 लाख रुपए से ज्यादा प्रॉपर्टी टैक्स वसूला — 9 हजार 161 प्रॉपर्टी से। जोन-8 ने सबसे अच्छा प्रदर्शन करते हुए 1356 प्रॉपर्टी से 64 लाख 57 हजार रुपए वसूले। निगम सीमा में कुल 3 लाख 43 हजार से ज्यादा टैक्सेबल प्रॉपर्टी हैं — और अभियान जारी है।लेकिन इस पूरे अभियान में बड़े-बड़े निजी स्कूलों का रवैया शर्मनाक रहा।

जनता की राय
रायपुर के आम नागरिकों का कहना है कि जब एक छोटा दुकानदार, एक मकान मालिक और एक मध्यमवर्गीय परिवार समय पर टैक्स भरता है — तो करोड़ों की संपत्ति रखने वाले प्राइवेट स्कूल क्यों छूट पाएं? यह न्याय का सवाल है।

अब क्या होगा?नियम सबके लिए बराबर हो
निगम प्रशासन ने साफ कर दिया है कि महापौर और निगम आयुक्त को पूरी स्थिति से अवगत करा दिया गया है। जल्द ही बकायेदार स्कूलों के खिलाफ वसूली की कड़ी कार्रवाई शुरू होगी। उम्मीद है कि इस बार निगम सिर्फ नोटिस तक न रुके — बल्कि नियम सबके लिए बराबर हों, चाहे वो छोटा दुकानदार हो या बड़ा अंग्रेजी माध्यम का स्कूल।