21.1 C
Raipur
Sunday, November 1, 2026
Home Blog Page 182

यूपी सब-इंस्पेक्टर परीक्षा विवाद—आरक्षण के ‘भस्मासुर’ और ‘अवसरवादी’ विशेषण पर चौपाल संग्राम

डिजिटल डेस्क 16/03/2026 लखनऊ/उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित सब-इंस्पेक्टर (SI) की लिखित परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न ने प्रदेश की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने में उबाल ला दिया है। 14 मार्च को हुई इस परीक्षा के हिंदी खंड में ‘अवसरवादी’ शब्द के विकल्प के रूप में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग किए जाने पर ब्राह्मण समाज और प्रबुद्ध वर्ग ने गहरी आपत्ति जताई है।

इसी विषय पर गाँव की चौपाल में ज्वाला सिंह और ज्योतिपति के बीच तीखा और वैचारिक संवाद हुआ, जो वर्तमान व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करता है।

चौपाल संवाद: जब ‘पंडित’ शब्द पर छिड़ी रार
चौपाल में दनदनाते हुए प्रवेश करते ही ज्वाला सिंह ने अपना रोष व्यक्त किया:
“देखो ज्योतिपति जी, यह उत्तर प्रदेश में पंडित शब्द का कैसा घृणित प्रयोग किया जा रहा है! सब-इंस्पेक्टर की परीक्षा में ‘अवसरवादी’ के विकल्प में ‘पंडित’ देना क्या उन आरक्षण के भस्मासुरों की साजिश नहीं है? यह हमारी आस्था और मर्यादा पर चोट है इसमें एक विकल्प आरक्षण भी तो हो सकता है।”
जब कोई अज्ञानी, क्रोधी और कामी (भस्मासुर की तरह) हो जाए, तो उसे सीधे तर्क या शास्त्र से नहीं सुधारा जा सकता। उसे केवल उसके अपने ही जाल में उलझाकर शांत किया जा सकता है इसके लिए क्या इन्हें विश्व मोहिनी का स्वरूप का दर्शन कराना होगा।

ज्योतिपति:
“ज्वाला, तुमने बहुत गूढ़ बात कही है। मोहिनी अवतार इस बात का प्रमाण है कि धर्म की रक्षा के लिए ‘अहंकार’ का दमन करना ही अंतिम लक्ष्य होता है, चाहे मार्ग कोई भी हो। भगवान विष्णु का स्त्री रूप धारण करना यह दिखाता है कि शक्ति केवल बल में नहीं, बल्कि ‘बुद्धि और कला’ में भी है। ज्ञान की अधिष्ठात्री माता सरस्वती हैं, जो स्त्री रूप में ही संपूर्ण जगत को प्रकाश देती हैं।”

ज्वाला सिंह:
“बिल्कुल ज्योतिपति जी! इसीलिए मैं कहता हूँ कि आज के इन ‘भस्मासुरों’ को, जो पंडित और ज्ञान की परंपरा का अपमान कर रहे हैं, उन्हें केवल ज्ञान के प्रकाश से ही भस्म किया जा सकता है। अज्ञानता का अंधकार तभी मिटेगा जब हम अपनी बौद्धिक विरासत पर गर्व करेंगे और इनके झूठ को बेनकाब करेंगे।”

ज्योतिपति ने शांत परंतु गंभीर स्वर में उत्तर दिया:
“ज्वाला, मूर्ख लोग पंडित का अर्थ जान ही नहीं सकते। आपदा को अवसर में बदलना बुद्धिमानी है, अवसरवादिता नहीं। वेदों की रचना सृष्टि के कल्याण के लिए हुई, जिसका मर्म ये अज्ञानी क्या समझेंगे? विश्वामित्र ने अवसर देखकर ही राम को मांगा था ताकि रावण का वध हो सके। यह अवसर पहचानना केवल पंडितों (ज्ञानियों) के वश की बात है।”

अब ज्वाला जरा देखो तो
सरकार का कड़ा रुख और ‘भस्मासुर’ वाली चेतावनी
इस विवाद के तूल पकड़ते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने सभी भर्ती बोर्ड के चेयरपर्सन्स को हिदायत दी है कि किसी भी जाति, पंथ या संप्रदाय की मर्यादा के खिलाफ टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ज्वाला सिंह ने आरक्षण की नीति पर प्रहार करते हुए कहा
“ज्योतिपति जी, आजादी की लड़ाई में पंडितों का त्याग सर्वोपरि था। लेकिन आज आरक्षण की सोच ने ‘भस्मासुर’ पैदा कर दिए हैं। आरक्षण एक वरदान था, अधिकार नहीं। अब ये भस्मासुर पूरे देश को भस्म करने पर तुले हैं। विकल्प में ‘पंडित’ की जगह ‘आरक्षण’ क्यों नहीं लिखा गया? क्या 78 साल का यह देश अब भी इन विसंगतियों को सहेगा?”

राजनीतिक गलियारों में हलचल
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश बीजेपी के सचिव अभिजात मिश्रा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी स्पष्ट किया है कि किसी भी समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाना “बिल्कुल अस्वीकार्य” है और जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

अस्वीकरण: प्रस्तुत संवाद पूर्णतः वैचारिक है, इसे किसी वाद-विवाद या व्यक्तिगत आक्षेप के रूप में न देखा जाए। हमारी दृष्टि में “पंडित” ज्ञान का प्रतीक है और “भस्मासुर” अज्ञानता व अहंकार का। अज्ञानता को उजागर करना और ज्ञान की महत्ता स्थापित करना पत्रकारिता का धर्म है, अपराध नहीं।




17 मार्च विधानसभा घेराव की तैयारी: बेमेतरा में कांग्रेस की बड़ी बैठक, जिले से भारी भागीदारी का संकल्प

बेमेतरा | 15 मार्च 2026 | राजनीति

आगामी 17 मार्च को नवा रायपुर में प्रस्तावित विधानसभा घेराव को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी बेमेतरा ने रविवार को राजीव भवन में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक आयोजित की। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर बुलाई गई इस बैठक में जिले भर के पदाधिकारी, प्रकोष्ठ प्रमुख और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

यह विधानसभा घेराव मुख्यतः दो बड़े मुद्दों को लेकर आयोजित किया जा रहा है — पहला, प्रदेश में भाजपा कार्यकर्ता द्वारा अफीम की खेती किए जाने का विरोध, और दूसरा, मनरेगा बचाओ आंदोलन। बैठक में इन दोनों मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई और घेराव को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने की रणनीति तैयार की गई।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा ने कहा कि 17 मार्च के विधानसभा घेराव में बेमेतरा जिले की अग्रिम भूमिका रहेगी और जिले से बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भाग लेंगे। उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और जनता के मुद्दों को प्रबलता से उठाने का आह्वान भी किया।

बैठक में सुनील माहेश्वरी (जिला बूथ प्रभारी), आनंद सिंह ठाकुर (बेमेतरा विधानसभा घेराव प्रभारी), लाल जी चंद्रवंशी (साजा विधानसभा प्रभारी) और सुजित बघेल (नवागढ़ विधानसभा प्रभारी) विशेष रूप से उपस्थित रहे। महिला कांग्रेस की ओर से योगिता साहू, शशि प्रभा गायकवाड़, सुशीला जोशी, रश्मि मिश्रा, रूबी सलूजा और सविता साहू ने बैठक में सक्रिय भागीदारी की।

बैठक का एक अहम हिस्सा बूथ समितियों के गठन पर केंद्रित रहा। नेताओं ने कहा कि मजबूत बूथ समिति ही किसी भी राजनीतिक संगठन की असली ताकत होती है। प्रदेश कांग्रेस के निर्देशानुसार प्रत्येक बूथ पर सक्रिय समिति बनाने पर जोर दिया गया, जिसमें महिलाओं, युवाओं, किसानों, मजदूरों और सामाजिक रूप से सक्रिय लोगों की भागीदारी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाएगी।

कार्यक्रम का संचालन मनोज शर्मा ने किया, जबकि जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष प्रांजल तिवारी ने अंत में सभी अतिथियों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। बैठक में नव नियुक्त जिला पदाधिकारियों के साथ-साथ महिला कांग्रेस, किसान कांग्रेस, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, सेवादल, अल्पसंख्यक कांग्रेस और अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ के पदाधिकारी भी शामिल रहे।

सोने के लालच में डूबे 10 लाख — नकली सोना बेच पति-पत्नी ने की ठगी, गिरफ्तार

गौरेला पेंड्रा मरवाही /15 मार्च 2026/छत्तीसगढ़ डिजिटल डेस्क

छत्तीसगढ़ के गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में एक हैरान करने वाला ठगी का मामला सामने आया है। शातिर आरोपियों ने तालाब की खुदाई में सोना मिलने की झूठी कहानी गढ़ी, पीड़ित को नकली सोना असली बताकर दिखाया और उससे 10 लाख रुपये ऐंठ लिए। पुलिस ने मामले में आरोपी पति-पत्नी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि दो अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं।

कैसे बिछाया गया जाल?
मुंगेली जिले के रहने वाले उमेद साहू के पास कुछ शातिर ठगों ने संपर्क किया और एक लुभावनी कहानी सुनाई — कि कारीआम गांव के पास तालाब की खुदाई के दौरान भारी मात्रा में सोना मिला है और वे उसे सस्ते दाम पर बेचना चाहते हैं। भरोसा दिलाने के लिए आरोपियों ने नकली सोने का एक टुकड़ा असली बताकर दिखाया। चमकती हुई धातु और सस्ते दाम का लालच — बस यही दो हथियार काफी थे पीड़ित को फंसाने के लिए।

15 लाख में पूरा सोदा, 10 लाख पीड़ित देगा
आरोपियों ने पीड़ित के सामने एक योजना रखी — कुल 15 लाख रुपये में पूरा सोना खरीदा जाएगा, जिसमें से 10 लाख पीड़ित लगाएगा और 5 लाख वे खुद मिलाएंगे। मुनाफे का सपना दिखाकर पीड़ित को इस सौदे में शामिल किया गया। उमेद साहू ने किसी तरह 10 लाख रुपये की व्यवस्था की और दोबारा आरोपियों के साथ कारीआम गांव पहुंचा। वहां आरोपियों ने उसे एक किलो सोना बताकर धातु का एक टुकड़ा थमाया और बदले में 10 लाख रुपये ले लिए।

जांच में खुली पोल, तब हुआ ठगी का एहसास
घर लौटकर जब उमेद ने उस सोने की दोबारा जांच कराई तो वह पूरी तरह नकली निकला। ठगी का एहसास होते ही उसने आरोपियों से पैसे वापस मांगे, लेकिन वे आज-कल का बहाना बनाकर टालते रहे। आखिरकार 5 दिसंबर 2025 को उमेद साहू ने थाना गौरेला में चार आरोपियों के खिलाफ ठगी की शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस की कार्रवाई और सावधानी की अपील
पुलिस ने जांच के बाद आरोपी पति-पत्नी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सस्ते दाम पर सोना या कीमती धातु दिलाने का झांसा देने वाले अनजान लोगों से सावधान रहें। ऐसे मामलों में लालच ही सबसे बड़ा दुश्मन साबित होता है — और यह घटना इसकी जीती-जागती मिसाल है।

मनरेगा (वीबीजीराम)सोशल ऑडिट में बड़ा खुलासा: 18,664 मामलों में 136 करोड़ की अनियमितता, वसूली मात्र 20 लाख

छत्तीसगढ़ डिजिटल डेस्क/15 मार्च 2026

छत्तीसगढ़ में मनरेगा (अब वीबीजीराम) के तहत कराए गए सोशल ऑडिट में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राज्यभर की हजारों ग्राम पंचायतों में हुए इस सामाजिक अंकेक्षण में कुल 18,664 मामलों में 136 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताएं दर्ज की गई हैं। इन मामलों में वित्तीय गबन, नियमों का उल्लंघन और शिकायत से जुड़े प्रकरण शामिल हैं।

जो बात सबसे ज्यादा चिंताजनक है वह यह है कि इतनी बड़ी अनियमितता सामने आने के बावजूद अब तक वसूली के नाम पर केवल 20 लाख रुपये ही वापस लिए जा सके हैं। यानी 136 करोड़ की गड़बड़ी में से महज 20 लाख की रिकवरी — यह आंकड़ा खुद ही पूरी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

सोशल ऑडिट की प्रक्रिया क्या है?
छत्तीसगढ़ में सामाजिक अंकेक्षण की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ सामाजिक अंकेक्षण इकाई के पास है। यह इकाई हर साल अलग-अलग विकासखंडों की ग्राम पंचायतों के लिए सोशल ऑडिट का कैलेंडर तैयार करती है। इसके बाद जिला कार्यक्रम समन्वयक सह कलेक्टर संबंधित एजेंसियों को मनरेगा के कार्यों से जुड़े दस्तावेज 7 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश देते हैं।

ऑडिट के लिए गांवों के जॉबकार्डधारी परिवारों के 12वीं पास युवाओं और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को चुना जाता है। इन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है और फिर ये ग्रामीण स्तर पर योजनाओं की जांच करते हैं। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई थी ताकि आम नागरिक सरकारी खर्च पर नजर रख सकें — लेकिन अब यही ऑडिट सरकारी तंत्र में हुई गड़बड़ियों की पोल खोल रहा है।

वसूली की रफ्तार इतनी धीमी क्यों?
136 करोड़ की अनियमितता और मात्र 20 लाख की वसूली — यह अनुपात साफ बताता है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कागजों तक ही सीमित रही है। नियमों के अनुसार गड़बड़ी करने वालों से राशि वसूली जानी चाहिए, लेकिन व्यवहार में यह प्रक्रिया अत्यंत सुस्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर सख्त और पारदर्शी कार्रवाई हो तो सरकारी योजनाओं में होने वाली गड़बड़ियों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

मनरेगा जैसी योजना जो गरीब और मजदूर वर्ग की रोजी-रोटी से सीधे जुड़ी है, उसमें इस स्तर की अनियमितता न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि उन लाखों जरूरतमंद परिवारों के साथ भी अन्याय है जिनके हक का पैसा बीच में ही गायब हो गया। अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन इस खुलासे के बाद कितनी तेजी और ईमानदारी से वसूली और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।

नगर निगम की सख्त रुख राजधानी रायपुर के 100 बड़े बकायादारों के नाम होंगे सार्वजनिक

रायपुर | 15 मार्च 2026 | नगर प्रशासन

मीडिया खबर की जानकारी अनुसार रायपुर नगर पालिक निगम का राजस्व विभाग इन दिनों संपत्ति कर बकायादारों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। निगम ने शहर के 10 जोनों से 10-10 बड़े बकायादारों की सूची तैयार कर ली है, यानी कुल 100 ऐसे लोग हैं जिन पर निगम की नजर टिकी हुई है। यदि इन बकायादारों ने जल्द ही अपना बकाया संपत्ति कर जमा नहीं किया, तो उनके नाम और पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाएगा।

नाम सार्वजनिक करना तो बस पहला कदम है। निगम प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इसके साथ-साथ नियमों के तहत कुर्की और संपत्तियों की सीलबंदी जैसी कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है। राजस्व विभाग का कहना है कि बकायादार यदि कार्रवाई से बचना चाहते हैं तो जल्द से जल्द अपना पूरा बकाया जमा कर दें।

यह कार्रवाई केवल बड़े बकायादारों तक सीमित नहीं है। निगम ने शहर के सभी संपत्तिकरदाताओं से भी अपील की है कि वे 31 मार्च 2026 से पहले अपना देय कर जमा कर दें। इस तिथि के बाद कर जमा करने पर नियमानुसार 17 प्रतिशत अधिभार के साथ वसूली की जाएगी, जो सीधे करदाता की जेब पर भारी पड़ेगा।

जनसुविधा का ध्यान रखते हुए नगर निगम ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था की है। 31 मार्च 2026 तक सभी 10 जोन कार्यालयों के राजस्व विभाग प्रत्येक शनिवार और रविवार को भी खुले रहेंगे, ताकि नौकरीपेशा और व्यस्त करदाता भी आसानी से अपना कर जमा कर सकें।

अब सवाल यह उठता है कि आखिर हर साल यही नौबत क्यों आती है? दरअसल, संपत्ति कर नगर निगम की आय का सबसे बड़ा स्रोत है। इसी से सड़क, सफाई, स्ट्रीट लाइट और तमाम नागरिक सुविधाएं चलती हैं। जब बड़े बकायादार कर नहीं चुकाते, तो विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ता है और निगम को हर बार सख्ती की राह पकड़नी पड़ती है। यह सिलसिला तब तक नहीं थमेगा जब तक लोग यह न समझ लें कि टैक्स तो जमा करना ही होगा।

हड़ताल का 81 वां दिन दंडवत प्रणाम करते विधानसभा घेराव को निकले डीएड अभ्यर्थी, पुलिस ने बीच रास्ते रोका

खबर राजधानी रायपुर 15/03/2026

कल डीएड धारी आमरण अनशन का 81 वां दिन — 1326 पात्र अभ्यर्थी अब भी नियुक्ति से वंचित, न्यायालय के तीन आदेशों की अनदेखी जारी। 81अनशन के दिन 1326 वंचित अभ्यर्थी 2300 मांगे गए पद।

राजधानी रायपुर में रविवार को एक असाधारण दृश्य देखने को मिला। डीएड अभ्यर्थी दंडवत प्रणाम करते हुए विधानसभा घेराव के लिए शांतिपूर्वक निकले, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें आधे रास्ते में ही रोक दिया।

यह आंदोलन का 81वां दिन था। अभ्यर्थी 24 दिसंबर 2025 से नया रायपुर के तूता धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि 2300 सहायक शिक्षक पदों पर न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए नियुक्ति दी जाए।

मौके पर उपस्थित एसडीएम ने स्पष्ट किया कि अभ्यर्थियों ने बॉन्ड भरकर अनशन की अनुमति ली है, अतः उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। आगे बढ़ने पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
न्यायालय के आदेश
हाईकोर्ट — 2 अप्रैल 2024।सुप्रीम कोर्ट — 28 अगस्त 2024
हाईकोर्ट — 26 सितंबर 2025,तीनों में 2621डीएड अभ्यर्थियों को नियुक्ति का आदेश।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि शिक्षा विभाग ने बिना दस्तावेज सत्यापन के ही कॉमन मेरिट सूची से स्कूल आवंटन कर दिया। इससे कई अपात्र अभ्यर्थियों को भी स्कूल मिल गए और 1326 पात्र अभ्यर्थी वंचित रह गए।

उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने 2621 बर्खास्त बीएड सहायक शिक्षकों के स्थान पर 2621 डीएड अभ्यर्थियों को नियुक्त करने का स्पष्ट आदेश दिया था। शिक्षा विभाग की कथित लापरवाही से यह विवाद अब तक सुलझ नहीं सका है।

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकला भारत का एलपीजी जहाज ‘शिवालिक’

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली_ 14/03/2026

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के 15 वें दिन भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारत का एलपीजी (रसोई गैस) ले जाने वाला जहाज ‘शिवालिक’ शुक्रवार रात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित पार कर गया।जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली ट्रैकिंग साइट ‘मरीनट्रैफिक’ के अनुसार यह जहाज 7 मार्च को कतर से अमेरिका के लिए रवाना हुआ था।

‘शिवालिक’ शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया का जहाज है। इसमें करीब 50,000 टन से अधिक एलपीजी ले जाने की क्षमता है।क्षेत्र में तनाव के कारण समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ गया है, ऐसे में इस जहाज का सुरक्षित निकलना भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल भारत में एलपीजी की कोई कमी नहीं है। वैश्विक हालात को देखते हुए कुछ लोग घबराहट में सिलेंडर बुक कर रहे हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि गलत सूचनाओं के कारण लोग घबराकर बुकिंग और जमाखोरी करने लगे हैं। उन्होंने बताया कि घरेलू एलपीजी डिलीवरी का औसत चक्र करीब ढाई दिन का है।

एलपीजी के डायवर्जन को रोकने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) सिस्टम लागू किया गया है। इस व्यवस्था के तहत ग्राहकों को सिलेंडर प्राप्त करते समय डिलीवरी कर्मी को एक कोड देना होगा। इसके अलावा अस्थायी उपाय के तौर पर एलपीजी बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतराल 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी में स्थित खार्ग द्वीप पर ईरान के सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर इस इलाके के ऑयल इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जा सकता है। ईरान के लगभग 80-90% कच्चे तेल का निर्यात इसी द्वीप से होता है।

(स्त्रोत ddnews इनपुट: आईएएनएस )

तमिलनाडु में थूथुकुडी जिले में ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर की स्थापना

डिजिटल डेस्क 14 मार्च 2026 नई दिल्ली

तमिलनाडु सरकार थूथुकुडी जिले में एक ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर स्थापित करने का प्रस्ताव कर रही है।वीओ चिदंबरनार पोर्ट (वीओसीपीए) और तमिलनाडु राज्य उद्योग संवर्धन निगम (एसआईपीसीओटी) ने एनएसएचआईपीटीएन नामक विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) का गठन किया है तथा संबंधित जिम्मेदारियों पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

राज्य सरकार ने रामनाथपुरम सहित तटीय जिलों में जहाज निर्माण एवं मरम्मत पहलों के आर्थिक-रोजगार प्रभावों का अध्ययन किया है। क्लस्टर से उद्योग क्षमता बढ़ेगी, सहायक क्षेत्र आकर्षित होंगे तथा आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी।उद्योग का 6.4 का उच्च रोजगार गुणक प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करेगा।

एनएसएचआईपीटीएन से जहाज निर्माण, मरम्मत, समुद्री इंजीनियरिंग, फैब्रिकेशन, लॉजिस्टिक्स व बंदरगाह सेवाओं में 55,000 से अधिक रोजगार सृजित होंगे। सहायक उद्योगों जैसे समुद्री उपकरण, इस्पात फैब्रिकेशन, विद्युत प्रणाली, कोटिंग्स व इंजीनियरिंग का पारिस्थितिकी तंत्र बनेगा।

नीली अर्थव्यवस्था को मजबूत करने हेतु मत्स्य पालन, लॉजिस्टिक्स, एमएसएमई व सेवा क्षेत्रों में गुणक प्रभाव पड़ेगा। तमिलनाडु बंदरगाह आधारित औद्योगीकरण, कौशल विकास, एमएसएमई भागीदारी व आपूर्ति विस्तार पर कार्यरत है।तमिलनाडु जहाज निर्माण नीति 2026 में इक्विटी समर्थन, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) व अवसंरचना प्रोत्साहन शामिल हैं।

परियोजना जहाज निर्माण-मरम्मत पारिस्थितिकी तंत्र बढ़ाएगी तथा क्षेत्रीय एमएसएमई को समुद्री आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत करेगी। कौशल विकास में जहाज मरम्मत, पर्यावरण-अनुकूल रखरखाव, इंजीनियरिंग सेवाएं, वेल्डिंग, विद्युत कार्य, लॉजिस्टिक्स व बंदरगाह संचालन के प्रशिक्षण मॉड्यूल हैं। मछुआरा समुदाय को नाव निर्माण व सेवाओं में लाभ मिलेगा।

दक्षिणी तटीय जिलों में बुनियादी ढांचा, औद्योगीकरण व आजीविका के लिए जिला-विशिष्ट पहलें चल रही हैं, जिसमें बंदरगाह संपर्क सुधार, समुद्री उद्योग प्रोत्साहन, मत्स्य पालन ढांचा मजबूती, एमएसएमई समूह समर्थन व कौशल विस्तार शामिल है। यह जानकारी केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।खबर स्त्रोत पीआईबी।

अफीम खेती पर प्रशासन सख्त: दोषी BJP नेता के खेत पर बड़ी कार्रवाई, अफसर निलंबित

डिजिटल डेस्क _ दुर्ग, 14 मार्च 2026

दुर्ग जिले के समोदा गांव में BJP नेता के खेत पर अवैध अफीम की खेती पकड़े जाने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। क्या यह ज्यादा मुनाफे के चक्कर में छत्तीसगढ़ी जनता को नशे की गिरफ्त में धकेलने की साजिश है? जिला प्रशासन ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है।

कलेक्टर अभिजीत सिंह ने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू को तत्काल निलंबित कर दिया। जांच में पाया गया कि उन्होंने जिस खेत को मक्का फसल के प्रदर्शन प्लॉट के रूप में रिकॉर्ड किया था, वहां वास्तव में धान लगी थी और अफीम की खेती हो रही थी। पटवारी अनिता साहू और फसल सर्वेयर शशिकांत साहू को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनके जवाब का इंतजार है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फसल सर्वे में गलत तस्वीरें अपलोड की गईं और बिना मौके जांच के रिपोर्ट मंजूर हो गई। एकता साहू ने नोटिस का जवाब दिया, लेकिन वह संतोषजनक नहीं पाया गया। कलेक्टर ने कहा, “अवैध खेती पर जीरो टॉलरेंस। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।” अन्य अधिकारियों को भी नोटिस दिए गए हैं।

यह मामला छत्तीसगढ़ में नशे के खिलाफ जंग को मजबूत करता है। अफीम जैसी खेती न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि युवाओं को नशे की लत में धकेलती है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आगे ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

वहीं हालिया बयान में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा अफीम खेती पर गंभीर होते हुए सभी जिलों के कलेक्टरों को संभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।

दो नई उप-तहसीलों से बढ़ेंगी प्रशासनिक सुविधाएं, राजस्व कार्य होंगे आसान

रायपुर, 14 मार्च 2026।
छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने दो नई उप-तहसीलों की घोषणा की है। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों को प्रशासनिक और राजस्व सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा तथा उन्हें दूरस्थ तहसील कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

विधानसभा में राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार राजस्व सेवाओं को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

मंत्री ने कहा कि भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण, ऑटो डायवर्सन व्यवस्था और डिजिटल किसान किताब जैसी सुविधाओं से नागरिकों और किसानों को काफी राहत मिल रही है। नई उप-तहसीलों के गठन से नामांतरण, बंटवारा, खसरा-खतौनी की नकल और अन्य राजस्व कार्य स्थानीय स्तर पर ही आसानी से हो सकेंगे।

उन्होंने बताया कि सरकार आपदा प्रबंधन को भी सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने के लिए राहत एवं पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और पूर्व चेतावनी प्रणाली के माध्यम से आपदाओं के प्रभाव को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

राजस्व मंत्री ने जानकारी दी कि प्राकृतिक आपदा राहत के लिए छत्तीसगढ़ को 15.70 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि प्राप्त हुई है। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।