डिजिटल डेस्क _19 मार्च 2026
भारत की शिक्षा क्रांति का सपना अधर में लटका है। अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की `स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026` रिपोर्ट एक कड़वी हकीकत उजागर करती है: 40% ग्रेजुएट युवा आज भी बेरोजगार। चौंकाने वाली बात? यह आंकड़ा 1983 से 2023 तक—40 सालों से लगभग अपरिवर्तित। डिग्रियां तो उग आईं, लेकिन नौकरियां क्यों नहीं?
क्यों अटकी है यह गाड़ी?
शिक्षा का ढांचा तो बदला, लेकिन बाजार की मांग से तालमेल नहीं। ग्रेजुएट्स में स्किल गैप है—डिग्री मिलते ही 93% को अस्थिर काम या बेरोजगारी का सामना। महंगाई ने कमर तोड़ दी: 72% युवा आर्थिक मजबूरी में पढ़ाई बीच में छोड़ रहे हैं (2017 के 58% से बढ़कर)। नई जॉब्स? 8.3 करोड़ में आधे खेती में—विकास का उल्टा चक्र।पिछले एक दशक से भारत में युवा बेरोजगारी दर लगभग 22 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है।
युवाओं का भविष्य: सुनहरा या काला?
मनपसंद या अच्छी जॉब नहीं मिल पाया बेकारी बढ़ी तभी तो डिग्रियों की बाढ़ के बावजूद, व्यावहारिक कौशल (Skill) की कमी और शिक्षा-रोजगार के बीच का तालमेल न होना ही इस 40% बेरोजगारी का मुख्य रहस्य है।इस सबके बीच पुरुषों में पढ़ाई छोड़ने का ट्रेंड बढ़ा है, जबकि महिलाओं के लिए लेबर मार्केट के परिणाम में थोड़ा सुधार हुआ है। 36 करोड़ युवा `डेमोग्राफिक डिविडेंड` हैं, लेकिन 2030 तक यह खजाना सूखेगा। बिना क्वालिटी जॉब्स के, यह बोझ बन जाएगा। सरकार-उद्योग को स्किल ट्रेनिंग, मैन्युफैक्चरिंग बूस्ट और एजुकेशन रिफॉर्म चाहिए। वरना, डिग्रियां कागज के टुकड़े बनकर रहेंगी। समय है जागने का—नहीं तो पीढ़ी खो देंगे।मीडिया सूत्र।
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