21.1 C
Raipur
Sunday, November 1, 2026
Home Blog Page 145

बलौदाबाजार: तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान बायसन के हमले में ग्रामीण की मृत्यु

रायपुर, 21 मई 2026


वन विभाग ने किया तत्काल सहायता राशि का वितरण मृतक परिजनों को 25,000 रुपये की तात्कालिक सहायता, शासन प्रावधान अनुसार क्षतिपूर्ति राशि भी की जाएगी प्रदान

वन विकास निगम परियोजना परिक्षेत्र रवान अंतर्गत मंगलवार को तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए जंगल गए ग्रामीणों पर बायसन(जंगली गौर(के हमले में एक ग्रामीण की मृत्यु हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही बलौदाबाजार की वन विभाग टीम एवं संबंधित अधिकारियों द्वारा तत्काल आवश्यक कार्रवाई की गई।

परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी रवान द्वारा मृतक के परिजनों को तात्कालिक सहायता राशि 25,000 रुपये प्रदान की गई है। साथ ही शासन के प्रावधान अनुसार मृतक के परिवार को देय क्षतिपूर्ति राशि भी प्रदान की जाएगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बायसन के हमले में तीन ग्रामीण घायल हो गए। इस घटना में ग्राम गजराडीह निवासी देवेन्द्र साहू (उम्र 45 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनकी उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। घटना में घायल अन्य दो ग्रामीणों का निजी अस्पताल में उपचार जारी है।

वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा है कि वन विभाग द्वारा लगातार ग्रामीणों को मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं से बचाव के संबंध में जागरूक किया जा रहा है तथा वन क्षेत्रों में सुरक्षा एवं सतर्कता बनाए रखने हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

खबर अनुसार एक अन्य हमले में भी गोवा (पोंडा) में भी मई 2026 में एक होमगार्ड की बायसन के हमले में मौत हुई। जून 2025 में कोल्हापुर, महाराष्ट्र में एक किसान को भी गौर ने मार डाला था।

ग्रामीणों से अपील की गई है कि वन क्षेत्रों में जाते समय सावधानी बरतें एवं वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें।

कलेक्टर लंगेह ने चौपाल लगा जनजातीय गरिमा उत्सव का बताया उद्देश्य:ग्रामीणों ने बताई समस्याएं

महासमुंद, 21 मई 2026

जनजातीय समुदायों के सर्वांगीण विकास एवं उनकी मूलभूत आवश्यकताओं को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के उद्देश्य से आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव के अंतर्गत जिला कलेक्टर विनय कुमार लंगेह द्वारा विकासखंड बागबाहरा के ग्राम जोरातराई एवं ग्राम रैताल में ट्रांजेक्ट वॉक कर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया गया।

कलेक्टर ने जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों के साथ गांव की गलियों, बस्तियों एवं सार्वजनिक स्थलों का भ्रमण कर स्थानीय परिस्थितियों का अवलोकन किया तथा जनजातीय परिवारों की समस्याओं, आवश्यकताओं एवं विकास संबंधी अपेक्षाओं को विस्तार से समझा। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों के बीच बैठकर चौपाल लगाई और जनजातीय गरिमा उत्सव के उद्देश्य, शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा विकास कार्यों की जानकारी दी।

कलेक्टर ने कहा कि गांवों की वास्तविक आवश्यकताओं को समझकर ही प्रभावी एवं स्थायी विकास संभव है। इसी उद्देश्य से ट्रांजेक्ट वॉक के माध्यम से गांव की मूलभूत जरूरतों, अधोसंरचना, पेयजल, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों एवं स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर शीघ्र ही समग्र कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे जनजातीय क्षेत्रों में विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ क्रियान्वित किया जा सके।

ग्रामीणों ने भी अपनी समस्याएं एवं आवश्यकताएं खुलकर साझा कीं। चौपाल में ग्रामीणों ने पेयजल व्यवस्था, सड़क सुधार, रोजगार के अवसर, शासकीय योजनाओं के लाभ तथा अन्य स्थानीय विषयों पर अपनी बात रखी। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित निराकरण हेतु आवश्यक निर्देश दिए तथा कई विषयों पर ग्रामीणों से ही समाधान के सुझाव भी प्राप्त किए।

इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष भीखम सिंह ठाकुर, जनपद पंचायत सीईओ श्री मंडावी, सहायक आयुक्त श्री शिल्पा साय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि जनजातीय गरिमा उत्सव अंतर्गत जनसुनवाई प्रत्येक जनजातीय ग्रामों में 21 से 25 मई तक आयोजित की जाएगी।

द्विपक्षीय सहयोग पर भारत-इटली विशेष रणनीतिक साझेदारी:ऐतिहासिक मील का पत्थर

0

डिजिटल डेस्क/नमो ऐप – 21/05/2026

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 19-20 मई 2026 को इटली की आधिकारिक यात्रा की, जो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुई। इस यात्रा में भारत और इटली ने अपने संबंधों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया।

भारत-इटली विशेष रणनीतिक साझेदारी की प्रभावशाली वृद्धि और गहराते संबंधों को रेखांकित करते हुए दोनों नेताओं ने सभी क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तारित करने तथा प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर उच्चस्तरीय निकट परामर्श जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की सरकार और वहां की जनता द्वारा गर्मजोशी से भरे स्वागत करने तथा शानदार आतिथ्य के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी को धन्यवाद दिया और प्रधानमंत्री मेलोनी को पारस्परिक रूप से सुविधाजनक समय पर भारत आने का निमंत्रण दिया।

राजनीतिक और आर्थिक सहयोग
दोनों नेताओं ने नेताओं की वार्षिक बैठकें और नियमित मंत्रिस्तरीय संवाद जारी रखने पर सहमति जताई। आर्थिक मोर्चे पर 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुँचाने का साझा लक्ष्य निर्धारित किया गया। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताओं के सफल समापन ने इस लक्ष्य की संभावनाओं को और मजबूत बनाया है।

रक्षा, सुरक्षा और अंतरिक्ष
रक्षा सहयोग के अंतर्गत संयुक्त आशय घोषणा और रक्षा औद्योगिक रोडमैप अपनाया गया, जो सह-उत्पादन और सह-विकास को बढ़ावा देगा। अंतरिक्ष क्षेत्र में इसरो और इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी के बीच पृथ्वी अवलोकन और अंतरिक्ष अन्वेषण में साझेदारी को गहरा करने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए आतंकवाद के सभी रूपों के विरुद्ध मिलकर लड़ने की प्रतिबद्धता दोहराई।

सांस्कृतिक और वैश्विक साझेदारी
लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के विकास में इटली की भागीदारी के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) पर सहयोग की प्रतिबद्धता ने वैश्विक कनेक्टिविटी में दोनों देशों की साझा भूमिका को रेखांकित किया।

यह यात्रा भारत और इटली के संबंधों को एक नई ऊँचाई देने वाली साबित हुई, जो आने वाले वर्षों में दोनों देशों की समृद्धि और सुरक्षा की मजबूत नींव बनेगी।

मोदी जी की ‘चॉकलेट डिप्लोमेसी’ और दिल का रिश्ता :अगर दिल मजबूत है, तो आप पूरी दुनिया जीत सकते हैं!

आर्टिकल 21/05/2026

हाल ही में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी इटली की यात्रा पर गए, तो वहां की ‘चॉकलेट’ और उनकी मुलाकात सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड करने लगी। पूरी दुनिया ने इसे देखा और सराहा। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में इसे ‘सॉफ्ट डिप्लोमेसी’ कहा जाता है, जहां कड़वाहट और गंभीर मुद्दों के बीच मिठास घोलने का काम एक छोटी सी चॉकलेट कर देती है।

वहीं जब इतिहास को झांकते हैं तो हमें यह दिखाता है,
इतिहास की गवाही और दिल की जीत
इतिहास गवाह है कि हमारे विद्वानों ने सिकंदर को ‘महान’ यूँ ही नहीं कहा। उसकी महानता का असली प्रमाण तब दिखा, जब युद्ध के मैदान में उसने बंदी राजा पुरू से पूछा कि ‘बताओ, तुम्हारे साथ क्या व्यवहार किया जाए?’ तब पुरू ने पूरी वीरता और निडरता से जवाब दिया था कि ‘वही व्यवहार करो, जो एक राजा दूसरे राजा के साथ करता है।’ पुरू के इस स्वाभिमानी जवाब पर सिकंदर ने कोई कूटनीतिक कड़वाहट नहीं दिखाई, बल्कि एक ‘बड़ा दिल’ दिखाते हुए उनका राज्य ससम्मान वापस लौटा दिया।

यही ‘दिल की डिप्लोमेसी’ आगे चलकर एक बड़े पारिवारिक और साम्राज्यिक रिश्ते में बदल गई, जब सेल्यूकस की पुत्री का विवाह चंद्रगुप्त मौर्य के साथ हुआ और यहीं से अखंड भारत के मौर्य साम्राज्य के विस्तार की एक नई पटकथा लिखी गई। इतिहास भी यही सिखाता है कि जब दुनिया की बंदूकें और कूटनीति थक जाती हैं, तब एक बड़ा दिल ही नए युग की शुरुआत करता है।

लेकिन सोचने वाली बात यह है कि हमने दुनिया की डिप्लोमेसी तो बहुत अच्छे से समझ ली, पर ‘दिल की डिप्लोमेसी’ समझने में हम हमेशा कमजोर रह गए। जब तक दिल है, तभी तक दुनिया है। हमने दुनिया को तो बहुत देखा, बहुत परखा, बहुत जाना, लेकिन अपने ही दिल को न जाना, न पहचाना और न कभी उसका ख्याल रखा। हमने दिल को मार कर दुनिया को जीतने की कोशिश की है।

दिल को क्या पसंद है?
दिल की डिप्लोमेसी बहुत सरल है—दिल को ‘चॉकलेट’ पसंद है! एक चॉकलेट में कई गुण और खासियतें होती हैं। चॉकलेट सबके लिए प्रिय है, और खासकर महिलाओं की सेहत का राज भी चॉकलेट (Dark Chocolate) में छिपा है।

विज्ञान भी मानता है कि शरीर का असली इंजन ‘दिल’ ही है। अब सवाल यह है कि इस इंजन को चलाएं कैसे? इसका ईंधन क्या होगा? अगर मशीन है, इंजन है, तो ईंधन भी चाहिए। तो इस दिल का असली ईंधन है—भावनाएं, समर्पण और सद्व्यवहार।

स्वास्थ्य का आधार: धड़कता हुआ इंजन (A Medical Perspective)
चिकित्सा विज्ञान कहता है कि मनुष्य का जन्म उसके दिल की पहली धड़कन से शुरू होता है और अंत आखिरी धड़कन पर। हम अक्सर कहते हैं ‘Health is Wealth’ (स्वास्थ्य ही धन है), लेकिन इस धन का असली ‘बैंक’ हमारा दिल है। जब तक यह बैंक सुरक्षित है, जीवन की पूंजी बची हुई है।

दौलत की दौड़ और जिंदगी का गम
दौलत की बातें हमेशा एक अनजाना सा तनाव और मानसिक बोझ दे जाती हैं। जब-जब हम इस भौतिकवादी दुनिया में सिर्फ धन-दौलत और तिजोरी भरने के बारे में सोचते हैं, तो एक अजीब सी बेचैनी घेर लेती है। हमारे भीतर यह बात घर कर जाती है कि जो कुछ भी हमारे पास है, वह इस रफ़्तार पकड़ती दुनिया के मुकाबले बहुत कम है।

बस, यही ‘कम’ होने का अहसास ही इंसान की जिंदगी का सबसे बड़ा गम है जो क्रोनिक स्ट्रेस बन जाता है। इस अंतहीन दौड़ में हम यह भूल जाते हैं कि दुनिया की हर दौलत सिर्फ एक आंकड़ा बनकर रह जाती है, जब इंसान अपने ही दिल की धड़कनों की कद्र करना छोड़ देता है।

दिल की रईसी और सुकून का एहसास
इसके विपरीत, जब हम थोड़ी देर ठहरकर दिल की बातें सुनते और सोचते हैं, तो भीतर एक असीम सुकून उतर आता है। दिल की बातें तो सचमुच दिल ही जानता है। जब हम दिल के कोने को टटोलते हैं, तो महसूस होता है कि असली रईस और बड़े पूंजीपति तो हम खुद हैं। हमारा दिल हमेशा हमसे चुपके से कहता है कि यह बाहरी दुनिया बहुत छोटी और सीमित है, इंसान का दिल बड़ा होना चाहिए। जिसके पास भावनाओं, समर्पण और संतोष की पूंजी है, वही इस दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति है, क्योंकि दिल की रईसी ही इंसान को असली मानसिक शांति और लंबी उम्र का वरदान देती है।

जैसी नजर वैसी नजरिया
डिप्लोमेसी का मतलब सिर्फ गंभीर बैठकें या समझौते नहीं होते; आज के दौर में इसे ‘सॉफ्ट डिप्लोमेसी’ (Soft Diplomacy) कहा जाता है। जब दो देशों के नेता गर्मजोशी से मिलते हैं, उपहार (जैसे चॉकलेट) साझा करते हैं, तो वह वैश्विक स्तर पर एक सकारात्मक और मानवीय संदेश देता है।


बेमेतरा जिला धान छोड़ दलहन-तिलहन की ओर बढ़ा, बना राज्य का ‘मॉडल जिला’

बेमेतरा – 20 मई 2026

जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बेमेतरा जिला छत्तीसगढ़ में एक प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है। जिला प्रशासन, कृषि विभाग और किसानों के सामूहिक प्रयास से इस साल जिले में ग्रीष्मकालीन (गर्मी के) धान के रकबे में भारी कमी आई है, जबकि कम पानी में बेहतर मुनाफा देने वाली दलहन और तिलहन फसलों का क्षेत्र रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ गया है।

​जल संकट से उबरने पंचायतों ने उठाई कसम

​बेमेतरा जिला वृष्टि छाया क्षेत्र में आता है, जहां औसत वर्षा मात्र 995 मि.मी. है। पिछले साल कम बारिश के बावजूद 26,680 हेक्टेयर में ग्रीष्मकालीन धान लगाया गया था। चूंकि 1 किलो धान के लिए 2500 से 3000 लीटर पानी की जरूरत होती है, नतीजतन जिले के कई गांवों में ट्यूबवेल और हैंडपंप सूख गए थे। इस गंभीर जल संकट को देखते हुए जिले की सभी 425 ग्राम पंचायतों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर गर्मी में धान न लगाने और वैकल्पिक फसलें अपनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।

​आंकड़ों में बड़ा बदलाव:

  • ​धान का रकबा घटा: पिछले वर्ष के 26,680 हेक्टेयर के मुकाबले इस साल ग्रीष्मकालीन धान का रकबा घटकर महज 5,139 हेक्टेयर रह गया।
  • ​दलहन में उछाल: दलहन फसलों का रकबा 70,800 हेक्टेयर से बढ़कर 83,330 हेक्टेयर पहुंच गया।
  • ​तिलहन हुआ तीन गुना: तिलहन फसलों का क्षेत्र 820 हेक्टेयर से बढ़कर 2,582 हेक्टेयर हो गया (लगभग 3 गुना वृद्धि)।

समर्थन मूल्य पर खरीदी से बढ़ा उत्साह

पीएम अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत जिले में दलहन-तिलहन की सरकारी खरीदी की जा रही है। अब तक 54,300 क्विंटल फसल खरीदी जा चुकी है, जिसके बदले किसानों को 14 करोड़ 58 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। किसानों के उत्साह को देखते हुए अगले साल खरीदी केंद्रों की संख्या और बढ़ाई जाएगी।

अगले साल की तैयारी

प्रशासन ने बताया कि बचे हुए 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में भी अगले साल मक्का, गेहूं, चना, सूरजमुखी और सरसों जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए गांव-गांव में जागरूकता शिविर और उन्नत बीज वितरण की व्यवस्था की जा रही है। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे टिकाऊ खेती और पर्यावरण संरक्षण के लिए इस मुहिम से जुड़ें।

बेमेतरा जिला पंचायत सीईओ ने विकास कार्यों की समीक्षा कर दिए आवश्यक निर्देश

बेमेतरा- 20 मई 2026

समीक्षा बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्रीमती प्रेमलता पद्माकर द्वारा पंचायतों में संचालित विभिन्न विकास कार्यों की एक महत्वपूर्ण योजना तैयार की गई। बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना, महात्मा गांधी नरेगा, जल संरक्षण कार्यों एवं स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में सीईओ ने अधिकारियों को शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्यों में तेजी लाते हुए, उन्हें समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के कड़े निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री आवास योजना: लापरवाही बर्दाश्त नहीं
बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन आवासों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई:
कम प्रगति वाले क्षेत्रों पर फोकस: सीईओ श्रीमती पद्माकर ने 65 प्रतिशत से कम पूर्णता वाली पंचायतों की विशेष रूप से समीक्षा करते हुए संबंधित नोडल अधिकारियों से जवाब-तलब किया।

समय पर निर्माण:उन्होंने निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा हितग्राहियों के आवास समय पर पूर्ण कराने के निर्देश दिए।
“प्रधानमंत्री आवास योजना शासन की महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।” – श्रीमती प्रेमलता पद्माकर, सीईओ**

मनरेगा: मांग के अनुसार तुरंत मिले रोजगार
महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत सभी ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया:
प्रत्येक गांव में नए कार्य प्रारंभ कर अधिक से अधिक ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ा जाए।
मनरेगा को केवल रोजगार का माध्यम न मानकर, इसे ग्रामीण विकास एवं जल संरक्षण के कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रभावी जरिया बनाया जाए।

जल संरक्षण: बारिश से पहले कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य
आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण को लेकर विशेष कार्ययोजना पर चर्चा की गई:
रेन वाटर हार्वेस्टिंग: जिले के सभी शासकीय भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग निर्माण कराने पर विशेष जोर दिया गया।
नवा तरिया: “नवा तरिया” (नए तालाबों) के निर्माण हेतु प्रस्ताव प्राप्त कर स्वीकृति की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।

जल संरक्षण को जिले में एक जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की बात कही गई।

कुओं की सफाई और ‘जलदूत ऐप’ से सर्वे
भविष्य की पेयजल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जल स्रोतों के संरक्षण पर ध्यान केंद्रित किया गया:
जिले में उपलब्ध सभी कुओं की साफ-सफाई कराई जाएगी।
जलदूत ऐप (Jaldoot App)के माध्यम से कुओं का सर्वे कर जल स्तर (Water Level) मापने के निर्देश दिए गए ताकि नियमित मॉनिटरिंग हो सके।

स्वच्छ भारत मिशन:
स्वच्छता और जनजागरूकता
बैठक में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में संचालित गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को गांवों में स्वच्छता अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा ग्रामीणों में जनजागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

अंतिम छोर तक पहुंचे लाभ:
बैठक के समापन पर जिला पंचायत सीईओ ने सभी विभागीय अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा कि योजनाओं एवं विकास कार्यों में प्रगति लाते हुए निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करें। शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

नशामुक्ति केंद्र और सियान गुड़ी के बुजुर्गों का हुआ हेल्थ चेकअप, डॉक्टरों ने दिए सेहत के टिप्स:जशपुर में अनूठी पहल

रायपुर/जशपुर:20 मई 2026

स्वास्थ्य विभाग और समाज कल्याण विभाग के साझा समन्वय से समाज के सबसे संवेदनशील और खास वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए जशपुर जिला प्रशासन ने एक बेहतरीन कदम उठाया है। जिले के नशामुक्ति केंद्र और बुजुर्गों के आश्रय स्थल ‘सियान गुड़ी’ में विशेष स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। जिला अस्पताल के विशेषज्ञों की टीम ने खुद इन केंद्रों पर पहुंचकर हितग्राहियों की सेहत का हाल जाना।

केवल जांच नहीं, मानसिक हौसले को भी बढ़ाया
अक्सर नशामुक्ति केंद्रों और वृद्ध आश्रमों में रह रहे लोगों को न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक संबल की भी जरूरत होती है। डॉक्टरों की टीम ने शिविर के दौरान सामान्य जांच के साथ-साथ ब्लड प्रेशर (बीपी) और शुगर की भी जांच की।

इस शिविर की सबसे खास बात रही मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग। काउंसलर्स ने नशामुक्ति केंद्र के युवाओं को नशे के दलदल से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया। विशेषज्ञों ने उन्हें बताया कि कैसे मजबूत इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और सकारात्मक जीवनशैली के जरिए वे वापस एक सामान्य और सम्मानजनक सामाजिक जीवन जी सकते हैं।

सियान गुड़ी के बुजुर्गों को मिली ‘एक्टिव लाइफ’ की सीख
वहीं दूसरी ओर, सियान गुड़ी में रह रहे बुजुर्गों (वरिष्ठ नागरिकों) को बढ़ती उम्र में सेहतमंद रहने के गुर सिखाए गए। डॉक्टरों ने उन्हें नियमित दवाइयां लेने, संतुलित और सुपाच्य आहार खाने के साथ-साथ दिनभर खुद को किसी न किसी सकारात्मक गतिविधि में व्यस्त रखने की सलाह दी।

अधिकारियों का कहना है:
“इस तरह के संयुक्त प्रयासों का मुख्य उद्देश्य उन लोगों तक सीधे स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, जो अस्पतालों तक पहुंचने में हिचकिचाते हैं या असमर्थ हैं। इससे नशामुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण को गति मिलेगी।”

जिला प्रशासन के मुताबिक, यह कोई एक दिन का आयोजन नहीं था। आने वाले दिनों में भी समाज के हर वर्ग को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और सही मार्गदर्शन देने के लिए ऐसे जागरूकता व स्वास्थ्य शिविर लगातार आयोजित किए जाते रहेंगे।

कबीरधाम में खेल क्रांति: उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल पर ₹52-52 लाख की लागत से बन रहे मिनी स्टेडियम

मानसून से पहले काम पूरा करने की समय-सीमा तय, अधिकारियों को कड़े निर्देश

रायपुर, 20 मई 2026

उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से कबीरधाम जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 52-52 लाख रुपए की लागत से आधुनिक मिनी स्टेडियमों का निर्माण कराया जा रहा है। इन स्टेडियमों के निर्माण से ग्रामीण अंचलों के युवाओं को खेल प्रतिभा निखारने के साथ-साथ पुलिस, सेना एवं अन्य सुरक्षा बलों की भर्ती हेतु फिजिकल तैयारी करने में भी बड़ी सुविधा मिलेगी।

धरातल पर निरीक्षण: जिला पंचायत अध्यक्ष ने निर्माण कार्यों का लिया जायजा

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने सभी निर्माण कार्यों को मानसून पूर्व पूर्ण कर संबंधित ग्राम समितियों को हैंडओवर करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। उनके निर्देशों के पालन में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू ने विभिन्न ग्रामों में पहुंचकर निर्माणाधीन मिनी स्टेडियमों का निरीक्षण किया। इस अवसर पर श्री नरेन्द्र मानिकपुरी, आरईएस विभाग के अधिकारी, स्टेडियम समिति के सदस्य, ठेकेदार एवं संबंधित ग्रामों के सरपंच उपस्थित रहे।

ग्रामीण युवाओं का सशक्तिकरण: शहरों जैसी खेल सुविधाएं अब गांवों में

जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू ने कहा कि उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को शहरों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उनके नेतृत्व में गांवों में खेल सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल युवाओं को नशे और भटकाव से दूर रखते हुए खेल एवं अनुशासन की ओर प्रेरित करेगी।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल अधोसंरचना विकसित होने से युवाओं को अब अपने ही गांव में खेल अभ्यास एवं प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं की शारीरिक तैयारी करने का अवसर मिलेगा। इससे युवाओं की प्रतिभा को नया मंच मिलेगा तथा खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार होगा

युवाओं की सहभागिता: रख-रखाव के लिए स्थानीय समितियों का गठन

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा के निर्देश पर स्टेडियमों के रख-रखाव एवं संचालन के लिए स्थानीय युवाओं की समिति भी गठित की गई है। यह समिति स्टेडियम की देखरेख, स्वच्छता एवं खेल गतिविधियों के संचालन में सहयोग करेगी। इससे युवाओं में जिम्मेदारी एवं सहभागिता की भावना भी विकसित होगी। उन्होंने ग्राम दौजरी, बैजलपुर, घुघरी कला, खारा, उसरवाही, तितरी, झलमला एवं चिल्फी में निर्माणाधीन मिनी स्टेडियमों का निरीक्षण किया।

‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेड इन इटली’ साथ-साथ:रक्षा और तकनीक में नया अध्याय

नई दिल्ली/रायपुर:20 मई 2026

2029 तक 20 बिलियन यूरो के व्यापार का बड़ा लक्ष्य के साथ
भारत और इटली के बीच द्विपक्षीय संबंध अब एक ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुके हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में न केवल अभूतपूर्व तेज़ी आई है, बल्कि यह पारंपरिक मित्रता से आगे बढ़कर अब भविष्य के साझा विज़न और लोकतंत्र पर आधारित एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) में बदल चुकी है।

बदलती हुई वैश्विक व्यवस्था के बीच, भारत और इटली का यह नया कदम आर्थिक गतिशीलता, सामाजिक रचनात्मकता और दोनों देशों की हजारों साल पुरानी सभ्यता के तालमेल को दिखाता है। यह साफ है कि 21वीं सदी में समृद्धि और सुरक्षा इस बात से तय होगी कि देश इनोवेशन, ऊर्जा बदलाव (Energy Transition) और अपनी रणनीतिक संप्रभुता को मजबूत करने में कितने सक्षम हैं।

सुपरकंप्यूटर और स्टार्ट-अप का अनूठा संगम
इस साझेदारी का सबसे बड़ा लक्ष्य दोनों देशों की ताकत को एक मंच पर लाना है। एक तरफ जहां इटली की विश्वस्तरीय डिजाइन क्षमता, मैन्युफैक्चरिंग एक्सीलेंस और वर्ल्ड-क्लास सुपरकंप्यूटर्स उसे एक ग्लोबल इंडस्ट्रियल पावरहाउस बनाते हैं; वहीं दूसरी तरफ भारत के पास दुनिया की सबसे तेज़ आर्थिक ग्रोथ, बेजोड़ इंजीनियरिंग टैलेंट और 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न व 2 लाख से अधिक स्टार्ट-अप वाला एक मजबूत एंटरप्रेन्योरशिप इकोसिस्टम है।

इन दोनों ताकतों का मिलना सिर्फ एक सामान्य समझौता नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत है।

2029 तक बड़ा व्यापारिक लक्ष्य
यूरोपियन यूनियन (EU) और भारत के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) दोनों देशों के लिए व्यापार और निवेश के नए रास्ते खोल रहा है। दोनों देशों ने साल 2029 तक आपसी व्यापार को 20 बिलियन यूरो (लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये) के पार ले जाने का एक बड़ा लक्ष्य रखा है।

इसके लिए मुख्य रूप से इन सेक्टर्स पर फोकस किया जा रहा है:
रक्षा और एयरोस्पेस,क्लीन टेक्नोलॉजी और एनर्जी,ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और मशीनरी,केमिकल्स और फार्मास्युटिकल्स,टेक्सटाइल, एग्री-फूड और टूरिज्म।


आज दुनिया भर में एक्सीलेंस का प्रतीक माना जाने वाला “मेड इन इटली” ब्रांड, भारत के “मेक इन इंडिया” अभियान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है। वर्तमान में दोनों तरफ से 1,000 से ज्यादा कंपनियां एक-दूसरे के देश में काम कर रही हैं, जो हमारी ग्लोबल सप्लाई चेन को और मजबूत बनाने का सकारात्मक संकेत है।

स्पेस और डिफेंस में मिलकर बढ़ेगा दम
आने वाले दशकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्रिटिकल मिनरल्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी तकनीकें दुनिया को बदलने वाली हैं। भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) पहले ही ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) में अपनी धाक जमा चुका है।

इसके साथ ही, स्पेस एक्सप्लोरेशन और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी में भारत की शानदार प्रगति और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में इटली के अनुभव का फायदा अब दोनों देशों को मिलने जा रहा है। रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर भी दोनों देश महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ आतंकवाद, ड्रग तस्करी, साइबर क्राइम और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ एकजुट होकर मुकाबला करेंगे।
(साभार: नमो ऐप)

इंटरनेट महासंकट: क्या समंदर के नीचे ‘डिजिटल नाकेबंदी’ से थम जाएगी आपकी दुनिया?

डिजिटल डेस्क – 20/05/2026

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz): कहीं साम्राज्यवाद और बाजारवाद का निशाना तो नहीं है,महीनों से चल रहे तनाव और विश्व में आर्थिक संकट का दिखना तो यही दिखाता है।
अब तक दुनिया इसे सिर्फ ‘तेल का रास्ता’ मानती थी, लेकिन 20 मई 2026 की सबसे बड़ी कड़वी सच्चाई यह है कि यह आपकी जेब में रखे स्मार्टफोन और डिजिटल लाइफ की ‘लाइफलाइन’ भी है। ईरान-अमेरिका युद्ध की आग अब इंटरनेट की उन नसों तक पहुंच चुकी है जो समंदर के सन्नाटे में गहरे दबी हुई हैं।

खबर सूत्रों पर जानकारी के अनुसार:-
ईरान की नई धमकी: ‘इंटरनेट टैक्स’ का जाल
ईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघरी का सोशल मीडिया (X) पर आया एक बयान डिजिटल वर्ल्ड के लिए किसी एटम बम से कम नहीं है कि “हम इंटरनेट केबल पर शुल्क (Taxes) लगाएंगे।”

इसका मतलब सीधा है कि जिस समंदर के रास्ते से पूरी दुनिया का डेटा दौड़ता है, ईरान अब वहां ‘डिजिटल टोल टैक्स’ वसूलने की तैयारी में है। अगर कंपनियों ने पैसे नहीं दिए, तो क्या होगा? इंटरनेट की ब्लैकआउट!

समंदर के नीचे का वो ‘जाल’ जो भारत को चलाता है
इंडिया टुडे की ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) और अंतरराष्ट्रीय संस्था टेली जियोग्राफी के डेटा के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नीचे फाइबर ऑप्टिक केबल्स का एक ऐसा चक्रव्यूह है, जिसके बिना आधुनिक दुनिया की कल्पना असंभव है।

प्रमुख केबल्स जो खतरे में हैं:
FALCON & GBICS:खाड़ी देशों को जोड़ने वाली रीढ़ की हड्डी।
2Africa: दुनिया के सबसे बड़े केबल नेटवर्क्स में से एक।
SeaMeWe 6 & AAE 1: एशिया, अफ्रीका और यूरोप को आपस में जोड़ने वाला डिजिटल हाईवे।

यूरोप/अफ्रीका के साथ खतरे का केंद्र: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भारत: मुंबई / चेन्नई।

भारत पर इसका सीधा असर:
एयरटेल और जियो भी रडार पर आ सकते है;-
यह सिर्फ दो देशों की जंग नहीं है, इसका सीधा कनेक्शन मुंबई और चेन्नई के कोस्टलाइन से है। भारत की दिग्गज टेलीकॉम कंपनियां (Airtel, Jio) इन्हीं केबल्स के भरोसे देश में हाई-स्पीड इंटरनेट दे रही हैं।

यदि इस रास्ते पर ईरान ने कोई रुकावट डाली, टैक्स बढ़ाया या केबल्स को नुकसान पहुंचा, तो भारत में ये 5 चीजें तुरंत प्रभावित होंगी:
बैंकिंग और UPI
डिजिटल पेमेंट फेल होने लगेंगे, ट्रांजैक्शन धीमे हो जाएंगे। |
वर्क फ्रॉम होम (WFH)
विदेशी सर्वर से कनेक्टिविटी टूटने के कारण आईटी सेक्टर ठप हो सकता है।
मनोरंजन पर प्रभाव नेटफ्लिक्स, यूट्यूब जैसी वीडियो स्ट्रीमिंग में भारी बफरिंग होगी।
ऑनलाइन एजुकेशन प्रभाव लाइव क्लासेस और क्लाउड डेटा एक्सेस करना मुश्किल होगा।
इंटरनेट की कीमत में वृद्धि-अगर कंपनियों पर टैक्स लगा, तो वे इसका बोझ आम भारतीय ग्राहकों की जेब पर डालेंगी (प्लान महंगे होंगे)।

सबसे बड़ा डर: अगर केबल कटी, तो महीनों लगेंगे!
जमीन पर तार टूटे तो कुछ घंटों में ठीक हो जाता है, लेकिन समंदर के नीचे गहरे पानी में केबल रिपेयर करना दुनिया के सबसे जटिल कामों में से एक है।

युद्ध के माहौल के बीच रिपेयरिंग जहाजों का वहां पहुंचना लगभग नामुमकिन होगा। यानी अगर एक बार खराबी आई, तो हफ्तों या महीनों तक डिजिटल दुनिया ‘अंधेरे’ में डूबी रह सकती है।

राइट शॉट बॉटम लाइन:बंदूक और मिसाइल की जंग पुरानी हो चुकी है। अब असली दबाव ‘डिजिटल नस’ को दबाकर बनाया जा रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लगी एक चिंगारी, आपके घर का वाई-फाई बंद कर सकती है। तैयार रहिए।