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“चिरायु” योजना से बेमेतरा के सैकड़ों बच्चों को मिला नया जीवन

हृदय रोग से ग्रसित 6 गंभीर रोगियों का राज्य से बाहर निःशुल्क इलाज।

बेमेतरा, 22 मई 2026

स्वास्थ्य विभाग जिला बेमेतरा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम “चिरायु” योजना के माध्यम से बेमेतरा जिले में 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण, बीमारियों की प्रारंभिक पहचान एवं निःशुल्क उपचार कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई के निर्देश पर सीएमएचओ डॉ अमृत लाल रोहलेडर के मार्गदर्शन एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री लता बंजारे के सक्रियता में सतत रूप से किया जा रहा है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बेमेतरा ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में “4D”अर्थात जन्मजात दोष (Defects at Birth), बीमारी (Diseases), पोषण संबंधी कमियों (Deficiencies) और विकासात्मक समस्याओं एवं विकलांगता (Developmental Delays & Disabilities) की समय पर पहचान कर समुचित उपचार एवं परामर्श उपलब्ध कराना है।

जिले में 9 चिरायु दलों का संचालन सहायक जिला नोडल अधिकारी डॉ ऋषभ शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में बेमेतरा जिले में कुल 9 चिरायु दल प्रत्येक विकासखण्ड में दो एवं शहरी क्षेत्र में एक सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। प्रत्येक दल में 1 पुरुष चिकित्सक, 1 महिला चिकित्सक, 1 फार्मासिस्ट तथा 1 ए.एन.एम. सम्मिलित हैं। इन प्रशिक्षित मोबाइल हेल्थ टीमों द्वारा प्रतिवर्ष जिले के 1300 शासकीय विद्यालयों के 1लाख 45 हजार विद्यार्थियों एवं 1200 आंगनबाड़ी केंद्रों के 61 हजार 311 बच्चों में विशेष स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित कर बच्चों की स्क्रीनिंग की जा रही है।

दो वर्षों में 163 बच्चों को मिला लाभ
चिरायु दलों द्वारा किए गए कार्यों का विवरण निम्नानुसार है:
क्र. बीमारी/जन्मजात दोष सत्र 2024-25 सत्र 2025-26
1 कटे-फटे होंठ एवं तालु 15 – 7
2 मुड़े हुए पैर 13 – 3
3 जन्मजात मोतियाबिंद 4 – 6
4 जन्मजात बधिरता 7 – 4
5 जन्मजात हृदय रोग 60 – 43
6 न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट – 1 कुल99_64

गंभीर रोगियों का राज्य से बाहर निःशुल्क इलाज
जटिल जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित कुल 06 बच्चों का इलाज राज्य शासन एवं राज्य नोडल एजेंसी के माध्यम से राशि स्वीकृत कराकर राज्य से बाहर के उच्च स्तरीय अस्पतालों में करवाया गया है।

प्रमुख सफल प्रकरण:
1. कमल वर्मा, उम्र 15 वर्ष, ग्राम मंजगांव, जटिल जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित था। बच्चे का इलाज अपोलो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल, चेन्नई में करवाया गया, जिसके लिए दो चरणों में लगभग 8 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई।
2. लक्ष्मी साहू, उम्र 14 वर्ष, ग्राम पेंड्रीतरई, जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित थी। बच्ची का सफल इलाज बालाजी हॉस्पिटल, रायपुर में करवाया गया।
3. चिरायु योजना के माध्यम से जन्मजात बधिरता के 3 बच्चों कंचन वर्मा निवासी – भैंसा (बेमेतरा), रिहान सिंह निवासी – दोहतरा (नवागढ़) और पांशुल शर्मा निवासी – सांकरा (बेरला) का कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक एम्स रायपुर में करवाया गया।
4. युभांश वर्मा, उम्र 4.5 माह, सुवरतला, जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित था। बच्चे का इलाज राज्य से बाहर करवाया गया, जिसके लिए 6.5 लाख रुपये तक की राशि स्वीकृत की गई।

सीएमएचओ बेमेतरा ने जिलेवासियों से अपील की है कि यदि उनके आसपास 0 से 18 वर्ष तक का कोई बच्चा जन्मजात रोग या विकृति से ग्रसित है तो वे निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या चिरायु दल से संपर्क कर निःशुल्क जांच एवं उपचार का लाभ लें।

अवैध रेत परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की 4 वाहन जप्त

बेमेतरा – 21 मई 2026:-

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में 20 मई 2026 को खनिज विभाग की टीम ने जांच अभियान चलाया। इस दौरान बिना किसी कागज-पत्र के रेत ले जा रहे 4 वाहनों को पकड़ा गया।

जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी रोक लगाने हेतु कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई के निर्देशानुसार खनिज विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है।

इसी क्रम में 20 मई 2026 को खनिज अमले द्वारा बेमेतरा क्षेत्र में विशेष जांच एवं निरीक्षण अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान रेत का अवैध परिवहन करते हुए 04 वाहनों को पकड़ा गया।

खनिज विभाग की टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए संबंधित वाहनों को जप्त कर थाना बेमेतरा की अभिरक्षा में सुरक्षार्थ खड़ा कराया है। जांच के दौरान वाहनों के पास वैध दस्तावेज एवं परिवहन संबंधी अनुमति नहीं पाई गई, जिसके चलते अवैध परिवहन का प्रकरण दर्ज किया गया है।

खनिज विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित वाहन संचालकों के विरुद्ध खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 से 23-ख के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रकरण में कुल 1 लाख 22 हजार रुपये की अर्थदण्ड राशि निर्धारित कर प्रशमन की कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।

कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण करने वालों के खिलाफ निरंतर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं शासन को राजस्व क्षति से बचाने के लिए प्रशासन पूरी गंभीरता के साथ कार्य कर रहा है।

वाहन चालकों से अपील करते हुए खनिज विभाग ने कहा है — रेत या अन्य खनिज ले जाना है तो पहले वैध अनुमति और दस्तावेज लें, वरना सख्त कार्रवाई होगी।

छत्तीसगढ़ में नशा मुक्ति केंद्र से ज्यादा नशा नियंत्रण जरूरी — नशे के खिलाफ असली लड़ाई तभी शुरू होगी

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रायपुर, 21 मई 2026


जशपुर में 170 लोग नशा मुक्ति केंद्र से लाभान्वित हुए — यह खबर राहत देती है। लेकिन एक सवाल मन को कचोटता है:

जब घर में आग लगी हो, तो क्या सिर्फ अस्पताल बनाना काफी है — या आग बुझाना भी जरूरी है?


केंद्र बनते हैं, लेकिन नशा बिकता रहता है

सरकार पुनर्वास केंद्र खोलती है, करोड़ों खर्च होते हैं, परिवार टूटते हैं — और दूसरी तरफ शराब की दुकानें सरकारी लाइसेंस पर धड़ल्ले से चलती रहती हैं।

छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग हर साल अरबों रुपये का राजस्व कमाता है। यानी एक तरफ सरकार नशे से होने वाली तबाही को “ठीक” करने में पैसा लगाती है — दूसरी तरफ उसी नशे को लाइसेंस देकर पैसा कमाती भी है।

यह दोहरापन समाज के साथ सबसे बड़ा धोखा है।


सरकारी नियंत्रण — जो होना चाहिए, होता नहीं

❌ स्कूल-कॉलेज के पास शराब दुकानें बंद होनी चाहिए — नहीं होतीं

❌ रात 10 बजे के बाद बिक्री बंद होनी चाहिए — नियम है, पालन नहीं

❌ नाबालिगों को शराब नहीं मिलनी चाहिए — रोज मिलती है

❌ गुटखा-तंबाकू पर सख्त पाबंदी होनी चाहिए — विज्ञापन आज भी चलते हैं


समाज को भी उठानी होगी आवाज

सरकार तभी हिलती है जब समाज बोलता है।

  • महिला मंडल, युवा संगठन और पंचायतें शराब दुकानों का विरोध करें
  • शिक्षक और अभिभावक नशे के खिलाफ स्कूलों में माहौल बनाएं
  • मीडिया सिर्फ पुनर्वास की खबरें न छापे — नशे की जड़ों पर भी सवाल उठाए

पुनर्वास केंद्र जरूरी है — पर अधूरा इलाज है

नंद कुमार सिंह और उनकी टीम की मेहनत को सलाम। 170 लोगों की जिंदगी बदलना छोटी बात नहीं।

लेकिन जब तक नशे की आपूर्ति पर लगाम नहीं लगेगी — 170 की जगह 1700 लोग इन केंद्रों में आते रहेंगे।

इलाज के साथ-साथ रोकथाम — यही असली नशा मुक्ति है।


📞 जशपुर नशा मुक्ति केंद्र से संपर्क: +91-8103110460
— लेकिन साथ ही अपने जनप्रतिनिधि से भी पूछिए: नशे पर लगाम कब लगेगी?

जशपुर में नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र बना सहारा नशा मुक्ति का नया अध्याय

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रायपुर/जशपुर – 21 मई 2026

जशपुर की गलियों में एक बदलाव की बयार बह रही है। जो लोग कभी नशे की गिरफ्त में अपनी जिंदगी गँवाते जा रहे थे, उनके लिए अब एक नई राह खुली है —नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र, जशपुर।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित यह केंद्र पिछले दो वर्षों में 170 जिंदगियों को नया मोड़ दे चुका है — और वो भी बिल्कुल निःशुल्क।

एक महीना, एक नई शुरुआत
केंद्र में दाखिल होने वाले हर हितग्राही को **पूरे एक माह की मुफ्त पुनर्वास सुविधा मिलती है। इस दौरान उन्हें मिलता है:

योग — तन और मन को साधने के लिए
पौष्टिक भोजन— शरीर को फिर से ताकत देने के लिए
आवासीय सुविधा — एक सुरक्षित छत के नीचे
काउंसिलिंग — मनोबल बढ़ाने और जड़ों तक उपचार के लिए
मनोरंजन — ताकि मन को सकारात्मक दिशा मिले।

कहाँ है यह केंद्र?
भागलपुर रोड, रणजीता स्टेडियम के पीछे, विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सामने — जशपुर के बीचोबीच। छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग से मान्यता एवं अनुदान प्राप्त यह संस्था अपनी पारदर्शिता और सेवाभाव के लिए जानी जाती है।

आपके अपनों के लिए एक अपील
अगर आपके घर में, आपके पड़ोस में, आपके किसी अपने की जिंदगी नशे की वजह से बर्बाद हो रही है — तो देर न करें।
केंद्र अधीक्षक नंद कुमार सिंह मोबाइल: +91-8103110460
नशे से लड़ाई अकेले नहीं लड़नी — हम साथ हैं।

बलौदाबाजार: तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान बायसन के हमले में ग्रामीण की मृत्यु

रायपुर, 21 मई 2026


वन विभाग ने किया तत्काल सहायता राशि का वितरण मृतक परिजनों को 25,000 रुपये की तात्कालिक सहायता, शासन प्रावधान अनुसार क्षतिपूर्ति राशि भी की जाएगी प्रदान

वन विकास निगम परियोजना परिक्षेत्र रवान अंतर्गत मंगलवार को तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए जंगल गए ग्रामीणों पर बायसन(जंगली गौर(के हमले में एक ग्रामीण की मृत्यु हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही बलौदाबाजार की वन विभाग टीम एवं संबंधित अधिकारियों द्वारा तत्काल आवश्यक कार्रवाई की गई।

परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी रवान द्वारा मृतक के परिजनों को तात्कालिक सहायता राशि 25,000 रुपये प्रदान की गई है। साथ ही शासन के प्रावधान अनुसार मृतक के परिवार को देय क्षतिपूर्ति राशि भी प्रदान की जाएगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बायसन के हमले में तीन ग्रामीण घायल हो गए। इस घटना में ग्राम गजराडीह निवासी देवेन्द्र साहू (उम्र 45 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनकी उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। घटना में घायल अन्य दो ग्रामीणों का निजी अस्पताल में उपचार जारी है।

वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा है कि वन विभाग द्वारा लगातार ग्रामीणों को मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं से बचाव के संबंध में जागरूक किया जा रहा है तथा वन क्षेत्रों में सुरक्षा एवं सतर्कता बनाए रखने हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

खबर अनुसार एक अन्य हमले में भी गोवा (पोंडा) में भी मई 2026 में एक होमगार्ड की बायसन के हमले में मौत हुई। जून 2025 में कोल्हापुर, महाराष्ट्र में एक किसान को भी गौर ने मार डाला था।

ग्रामीणों से अपील की गई है कि वन क्षेत्रों में जाते समय सावधानी बरतें एवं वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें।

कलेक्टर लंगेह ने चौपाल लगा जनजातीय गरिमा उत्सव का बताया उद्देश्य:ग्रामीणों ने बताई समस्याएं

महासमुंद, 21 मई 2026

जनजातीय समुदायों के सर्वांगीण विकास एवं उनकी मूलभूत आवश्यकताओं को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के उद्देश्य से आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव के अंतर्गत जिला कलेक्टर विनय कुमार लंगेह द्वारा विकासखंड बागबाहरा के ग्राम जोरातराई एवं ग्राम रैताल में ट्रांजेक्ट वॉक कर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया गया।

कलेक्टर ने जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों के साथ गांव की गलियों, बस्तियों एवं सार्वजनिक स्थलों का भ्रमण कर स्थानीय परिस्थितियों का अवलोकन किया तथा जनजातीय परिवारों की समस्याओं, आवश्यकताओं एवं विकास संबंधी अपेक्षाओं को विस्तार से समझा। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों के बीच बैठकर चौपाल लगाई और जनजातीय गरिमा उत्सव के उद्देश्य, शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा विकास कार्यों की जानकारी दी।

कलेक्टर ने कहा कि गांवों की वास्तविक आवश्यकताओं को समझकर ही प्रभावी एवं स्थायी विकास संभव है। इसी उद्देश्य से ट्रांजेक्ट वॉक के माध्यम से गांव की मूलभूत जरूरतों, अधोसंरचना, पेयजल, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों एवं स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर शीघ्र ही समग्र कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे जनजातीय क्षेत्रों में विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ क्रियान्वित किया जा सके।

ग्रामीणों ने भी अपनी समस्याएं एवं आवश्यकताएं खुलकर साझा कीं। चौपाल में ग्रामीणों ने पेयजल व्यवस्था, सड़क सुधार, रोजगार के अवसर, शासकीय योजनाओं के लाभ तथा अन्य स्थानीय विषयों पर अपनी बात रखी। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित निराकरण हेतु आवश्यक निर्देश दिए तथा कई विषयों पर ग्रामीणों से ही समाधान के सुझाव भी प्राप्त किए।

इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष भीखम सिंह ठाकुर, जनपद पंचायत सीईओ श्री मंडावी, सहायक आयुक्त श्री शिल्पा साय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि जनजातीय गरिमा उत्सव अंतर्गत जनसुनवाई प्रत्येक जनजातीय ग्रामों में 21 से 25 मई तक आयोजित की जाएगी।

द्विपक्षीय सहयोग पर भारत-इटली विशेष रणनीतिक साझेदारी:ऐतिहासिक मील का पत्थर

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डिजिटल डेस्क/नमो ऐप – 21/05/2026

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 19-20 मई 2026 को इटली की आधिकारिक यात्रा की, जो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुई। इस यात्रा में भारत और इटली ने अपने संबंधों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया।

भारत-इटली विशेष रणनीतिक साझेदारी की प्रभावशाली वृद्धि और गहराते संबंधों को रेखांकित करते हुए दोनों नेताओं ने सभी क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तारित करने तथा प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर उच्चस्तरीय निकट परामर्श जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की सरकार और वहां की जनता द्वारा गर्मजोशी से भरे स्वागत करने तथा शानदार आतिथ्य के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी को धन्यवाद दिया और प्रधानमंत्री मेलोनी को पारस्परिक रूप से सुविधाजनक समय पर भारत आने का निमंत्रण दिया।

राजनीतिक और आर्थिक सहयोग
दोनों नेताओं ने नेताओं की वार्षिक बैठकें और नियमित मंत्रिस्तरीय संवाद जारी रखने पर सहमति जताई। आर्थिक मोर्चे पर 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुँचाने का साझा लक्ष्य निर्धारित किया गया। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताओं के सफल समापन ने इस लक्ष्य की संभावनाओं को और मजबूत बनाया है।

रक्षा, सुरक्षा और अंतरिक्ष
रक्षा सहयोग के अंतर्गत संयुक्त आशय घोषणा और रक्षा औद्योगिक रोडमैप अपनाया गया, जो सह-उत्पादन और सह-विकास को बढ़ावा देगा। अंतरिक्ष क्षेत्र में इसरो और इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी के बीच पृथ्वी अवलोकन और अंतरिक्ष अन्वेषण में साझेदारी को गहरा करने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए आतंकवाद के सभी रूपों के विरुद्ध मिलकर लड़ने की प्रतिबद्धता दोहराई।

सांस्कृतिक और वैश्विक साझेदारी
लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के विकास में इटली की भागीदारी के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) पर सहयोग की प्रतिबद्धता ने वैश्विक कनेक्टिविटी में दोनों देशों की साझा भूमिका को रेखांकित किया।

यह यात्रा भारत और इटली के संबंधों को एक नई ऊँचाई देने वाली साबित हुई, जो आने वाले वर्षों में दोनों देशों की समृद्धि और सुरक्षा की मजबूत नींव बनेगी।

मोदी जी की ‘चॉकलेट डिप्लोमेसी’ और दिल का रिश्ता :अगर दिल मजबूत है, तो आप पूरी दुनिया जीत सकते हैं!

आर्टिकल 21/05/2026

हाल ही में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी इटली की यात्रा पर गए, तो वहां की ‘चॉकलेट’ और उनकी मुलाकात सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड करने लगी। पूरी दुनिया ने इसे देखा और सराहा। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में इसे ‘सॉफ्ट डिप्लोमेसी’ कहा जाता है, जहां कड़वाहट और गंभीर मुद्दों के बीच मिठास घोलने का काम एक छोटी सी चॉकलेट कर देती है।

वहीं जब इतिहास को झांकते हैं तो हमें यह दिखाता है,
इतिहास की गवाही और दिल की जीत
इतिहास गवाह है कि हमारे विद्वानों ने सिकंदर को ‘महान’ यूँ ही नहीं कहा। उसकी महानता का असली प्रमाण तब दिखा, जब युद्ध के मैदान में उसने बंदी राजा पुरू से पूछा कि ‘बताओ, तुम्हारे साथ क्या व्यवहार किया जाए?’ तब पुरू ने पूरी वीरता और निडरता से जवाब दिया था कि ‘वही व्यवहार करो, जो एक राजा दूसरे राजा के साथ करता है।’ पुरू के इस स्वाभिमानी जवाब पर सिकंदर ने कोई कूटनीतिक कड़वाहट नहीं दिखाई, बल्कि एक ‘बड़ा दिल’ दिखाते हुए उनका राज्य ससम्मान वापस लौटा दिया।

यही ‘दिल की डिप्लोमेसी’ आगे चलकर एक बड़े पारिवारिक और साम्राज्यिक रिश्ते में बदल गई, जब सेल्यूकस की पुत्री का विवाह चंद्रगुप्त मौर्य के साथ हुआ और यहीं से अखंड भारत के मौर्य साम्राज्य के विस्तार की एक नई पटकथा लिखी गई। इतिहास भी यही सिखाता है कि जब दुनिया की बंदूकें और कूटनीति थक जाती हैं, तब एक बड़ा दिल ही नए युग की शुरुआत करता है।

लेकिन सोचने वाली बात यह है कि हमने दुनिया की डिप्लोमेसी तो बहुत अच्छे से समझ ली, पर ‘दिल की डिप्लोमेसी’ समझने में हम हमेशा कमजोर रह गए। जब तक दिल है, तभी तक दुनिया है। हमने दुनिया को तो बहुत देखा, बहुत परखा, बहुत जाना, लेकिन अपने ही दिल को न जाना, न पहचाना और न कभी उसका ख्याल रखा। हमने दिल को मार कर दुनिया को जीतने की कोशिश की है।

दिल को क्या पसंद है?
दिल की डिप्लोमेसी बहुत सरल है—दिल को ‘चॉकलेट’ पसंद है! एक चॉकलेट में कई गुण और खासियतें होती हैं। चॉकलेट सबके लिए प्रिय है, और खासकर महिलाओं की सेहत का राज भी चॉकलेट (Dark Chocolate) में छिपा है।

विज्ञान भी मानता है कि शरीर का असली इंजन ‘दिल’ ही है। अब सवाल यह है कि इस इंजन को चलाएं कैसे? इसका ईंधन क्या होगा? अगर मशीन है, इंजन है, तो ईंधन भी चाहिए। तो इस दिल का असली ईंधन है—भावनाएं, समर्पण और सद्व्यवहार।

स्वास्थ्य का आधार: धड़कता हुआ इंजन (A Medical Perspective)
चिकित्सा विज्ञान कहता है कि मनुष्य का जन्म उसके दिल की पहली धड़कन से शुरू होता है और अंत आखिरी धड़कन पर। हम अक्सर कहते हैं ‘Health is Wealth’ (स्वास्थ्य ही धन है), लेकिन इस धन का असली ‘बैंक’ हमारा दिल है। जब तक यह बैंक सुरक्षित है, जीवन की पूंजी बची हुई है।

दौलत की दौड़ और जिंदगी का गम
दौलत की बातें हमेशा एक अनजाना सा तनाव और मानसिक बोझ दे जाती हैं। जब-जब हम इस भौतिकवादी दुनिया में सिर्फ धन-दौलत और तिजोरी भरने के बारे में सोचते हैं, तो एक अजीब सी बेचैनी घेर लेती है। हमारे भीतर यह बात घर कर जाती है कि जो कुछ भी हमारे पास है, वह इस रफ़्तार पकड़ती दुनिया के मुकाबले बहुत कम है।

बस, यही ‘कम’ होने का अहसास ही इंसान की जिंदगी का सबसे बड़ा गम है जो क्रोनिक स्ट्रेस बन जाता है। इस अंतहीन दौड़ में हम यह भूल जाते हैं कि दुनिया की हर दौलत सिर्फ एक आंकड़ा बनकर रह जाती है, जब इंसान अपने ही दिल की धड़कनों की कद्र करना छोड़ देता है।

दिल की रईसी और सुकून का एहसास
इसके विपरीत, जब हम थोड़ी देर ठहरकर दिल की बातें सुनते और सोचते हैं, तो भीतर एक असीम सुकून उतर आता है। दिल की बातें तो सचमुच दिल ही जानता है। जब हम दिल के कोने को टटोलते हैं, तो महसूस होता है कि असली रईस और बड़े पूंजीपति तो हम खुद हैं। हमारा दिल हमेशा हमसे चुपके से कहता है कि यह बाहरी दुनिया बहुत छोटी और सीमित है, इंसान का दिल बड़ा होना चाहिए। जिसके पास भावनाओं, समर्पण और संतोष की पूंजी है, वही इस दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति है, क्योंकि दिल की रईसी ही इंसान को असली मानसिक शांति और लंबी उम्र का वरदान देती है।

जैसी नजर वैसी नजरिया
डिप्लोमेसी का मतलब सिर्फ गंभीर बैठकें या समझौते नहीं होते; आज के दौर में इसे ‘सॉफ्ट डिप्लोमेसी’ (Soft Diplomacy) कहा जाता है। जब दो देशों के नेता गर्मजोशी से मिलते हैं, उपहार (जैसे चॉकलेट) साझा करते हैं, तो वह वैश्विक स्तर पर एक सकारात्मक और मानवीय संदेश देता है।


बेमेतरा जिला धान छोड़ दलहन-तिलहन की ओर बढ़ा, बना राज्य का ‘मॉडल जिला’

बेमेतरा – 20 मई 2026

जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बेमेतरा जिला छत्तीसगढ़ में एक प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है। जिला प्रशासन, कृषि विभाग और किसानों के सामूहिक प्रयास से इस साल जिले में ग्रीष्मकालीन (गर्मी के) धान के रकबे में भारी कमी आई है, जबकि कम पानी में बेहतर मुनाफा देने वाली दलहन और तिलहन फसलों का क्षेत्र रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ गया है।

​जल संकट से उबरने पंचायतों ने उठाई कसम

​बेमेतरा जिला वृष्टि छाया क्षेत्र में आता है, जहां औसत वर्षा मात्र 995 मि.मी. है। पिछले साल कम बारिश के बावजूद 26,680 हेक्टेयर में ग्रीष्मकालीन धान लगाया गया था। चूंकि 1 किलो धान के लिए 2500 से 3000 लीटर पानी की जरूरत होती है, नतीजतन जिले के कई गांवों में ट्यूबवेल और हैंडपंप सूख गए थे। इस गंभीर जल संकट को देखते हुए जिले की सभी 425 ग्राम पंचायतों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर गर्मी में धान न लगाने और वैकल्पिक फसलें अपनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।

​आंकड़ों में बड़ा बदलाव:

  • ​धान का रकबा घटा: पिछले वर्ष के 26,680 हेक्टेयर के मुकाबले इस साल ग्रीष्मकालीन धान का रकबा घटकर महज 5,139 हेक्टेयर रह गया।
  • ​दलहन में उछाल: दलहन फसलों का रकबा 70,800 हेक्टेयर से बढ़कर 83,330 हेक्टेयर पहुंच गया।
  • ​तिलहन हुआ तीन गुना: तिलहन फसलों का क्षेत्र 820 हेक्टेयर से बढ़कर 2,582 हेक्टेयर हो गया (लगभग 3 गुना वृद्धि)।

समर्थन मूल्य पर खरीदी से बढ़ा उत्साह

पीएम अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत जिले में दलहन-तिलहन की सरकारी खरीदी की जा रही है। अब तक 54,300 क्विंटल फसल खरीदी जा चुकी है, जिसके बदले किसानों को 14 करोड़ 58 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। किसानों के उत्साह को देखते हुए अगले साल खरीदी केंद्रों की संख्या और बढ़ाई जाएगी।

अगले साल की तैयारी

प्रशासन ने बताया कि बचे हुए 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में भी अगले साल मक्का, गेहूं, चना, सूरजमुखी और सरसों जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए गांव-गांव में जागरूकता शिविर और उन्नत बीज वितरण की व्यवस्था की जा रही है। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे टिकाऊ खेती और पर्यावरण संरक्षण के लिए इस मुहिम से जुड़ें।

बेमेतरा जिला पंचायत सीईओ ने विकास कार्यों की समीक्षा कर दिए आवश्यक निर्देश

बेमेतरा- 20 मई 2026

समीक्षा बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्रीमती प्रेमलता पद्माकर द्वारा पंचायतों में संचालित विभिन्न विकास कार्यों की एक महत्वपूर्ण योजना तैयार की गई। बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना, महात्मा गांधी नरेगा, जल संरक्षण कार्यों एवं स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में सीईओ ने अधिकारियों को शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्यों में तेजी लाते हुए, उन्हें समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के कड़े निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री आवास योजना: लापरवाही बर्दाश्त नहीं
बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन आवासों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई:
कम प्रगति वाले क्षेत्रों पर फोकस: सीईओ श्रीमती पद्माकर ने 65 प्रतिशत से कम पूर्णता वाली पंचायतों की विशेष रूप से समीक्षा करते हुए संबंधित नोडल अधिकारियों से जवाब-तलब किया।

समय पर निर्माण:उन्होंने निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा हितग्राहियों के आवास समय पर पूर्ण कराने के निर्देश दिए।
“प्रधानमंत्री आवास योजना शासन की महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।” – श्रीमती प्रेमलता पद्माकर, सीईओ**

मनरेगा: मांग के अनुसार तुरंत मिले रोजगार
महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत सभी ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया:
प्रत्येक गांव में नए कार्य प्रारंभ कर अधिक से अधिक ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ा जाए।
मनरेगा को केवल रोजगार का माध्यम न मानकर, इसे ग्रामीण विकास एवं जल संरक्षण के कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रभावी जरिया बनाया जाए।

जल संरक्षण: बारिश से पहले कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य
आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण को लेकर विशेष कार्ययोजना पर चर्चा की गई:
रेन वाटर हार्वेस्टिंग: जिले के सभी शासकीय भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग निर्माण कराने पर विशेष जोर दिया गया।
नवा तरिया: “नवा तरिया” (नए तालाबों) के निर्माण हेतु प्रस्ताव प्राप्त कर स्वीकृति की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।

जल संरक्षण को जिले में एक जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की बात कही गई।

कुओं की सफाई और ‘जलदूत ऐप’ से सर्वे
भविष्य की पेयजल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जल स्रोतों के संरक्षण पर ध्यान केंद्रित किया गया:
जिले में उपलब्ध सभी कुओं की साफ-सफाई कराई जाएगी।
जलदूत ऐप (Jaldoot App)के माध्यम से कुओं का सर्वे कर जल स्तर (Water Level) मापने के निर्देश दिए गए ताकि नियमित मॉनिटरिंग हो सके।

स्वच्छ भारत मिशन:
स्वच्छता और जनजागरूकता
बैठक में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में संचालित गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को गांवों में स्वच्छता अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा ग्रामीणों में जनजागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

अंतिम छोर तक पहुंचे लाभ:
बैठक के समापन पर जिला पंचायत सीईओ ने सभी विभागीय अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा कि योजनाओं एवं विकास कार्यों में प्रगति लाते हुए निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करें। शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।