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40 भेड़-बकरियों की मौत: अलर्ट पर पशुधन विभाग धमतरी में आकाशीय बिजली का कहर

धमतरी/रायपुर, 22 जून 2026

जिले के विकासखंड मगरलोड के अंतर्गत आने वाले ग्राम डुमरपाली में विगत 17 जून की रात कुदरत का कहर टूटा, जहां गाज गिरने से लगभग 40 भेड़-बकरियों की असमय जान चली गई।

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से आकाशीय बिजली गिरने के कारण भारी संख्या में मवेशियों की मौत की एक दुखद खबर सामने आई है।

इस बड़ी प्राकृतिक आपदा की सूचना मिलते ही पशुधन विकास विभाग का अमला तुरंत हरकत में आया और तत्परता दिखाते हुए प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर मोर्चा संभाल लिया।

घटना की गंभीरता को देखते हुए विभागीय अमले ने ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय ग्रामीणों से सघन चर्चा कर जमीनी वस्तुस्थिति की विस्तृत जानकारी ली। जांच और पूछताछ में यह बात सामने आई है कि आकाशीय बिजली के शिकार हुए ये सभी मवेशी अन्य राज्यों से आए घुमंतू चरवाहों के थे।

इस दर्दनाक हादसे के तुरंत बाद, चरवाहों ने नियमानुसार गहरा गड्ढा खोदकर मृत पशुओं के शवों को सुरक्षित रूप से दफना दिया और इसके बाद वे अपने बचे हुए रेवड़ के साथ आगे के सफर पर निकल गए।

इधर, पशुधन विकास विभाग के अधिकारियों ने दफन स्थल का बारीकी से वैज्ञानिक निरीक्षण किया है।

ग्रामीणों और प्रशासन के लिए राहत की बात यह है कि वर्तमान में उस स्थल पर किसी भी प्रकार के संक्रमण या पशुजनित बीमारी (Zoonotic Disease) के फैलने की कोई आशंका नहीं है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और घबराने जैसी कोई बात नहीं है।

पशुधन विकास विभाग के अनुसार, प्राकृतिक आपदा के कारण हुई इस आकस्मिक घटना से जुड़े सभी आवश्यक तथ्यों और आंकड़ों का संकलन कर लिया गया है, जिसके आधार पर आगे की आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने और पशुपालकों को त्वरित सहायता पहुंचाने के लिए उनकी टीमें 24 घंटे पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही हैं।

वर्तमान में विभाग द्वारा एहतियातन कदम उठाते हुए प्रभावित क्षेत्र और उसके आसपास के सभी सीमावर्ती गांवों में स्थिति पर सतत निगरानी रखी जा रही है, ताकि मानसून के इस मौसम में पशुओं के स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी अप्रिय स्थिति या बीमारी से समय रहते बचा जा सके।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस जिलाध्यक्षों का बढ़ा ‘पावर’ और राहुल गांधी का सीधा संवाद

डिजिटल न्यूज/ कांग्रेस 22 जून 2026

खबर पर खबर एक नजर –
न्यूज सोर्स (टीवी चैनल्स,सोशल मीडिया)

कांग्रेस ने अब रणनीति के तहत छत्तीसगढ़ के अभनपुर में 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया है।जिसमें राहुल गांधी ने साफ़ तौर पर जिलाध्यक्षों और शहर अध्यक्षों से कहा है कि वे संगठन की रीढ़ हैं और अब वे सीधे उनसे (राहुल गांधी से) संवाद कर सकते हैं। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि अब संगठन में जिलाध्यक्षों का वजन और पावर काफी बढ़ने वाला है।

सिर्फ भाषण नहीं, गांवों में गुजारनी होगी रात (नया फॉर्मेट)
इस 10 दिवसीय (20 से 29 जून) आवासीय शिविर का फॉर्मेट इस बार एकदम अलग और जमीनी रखा गया है:
श्रमदान और फील्ड विजिट:
प्रशिक्षण ले रहे नेताओं को केवल लेक्चर नहीं सुनना है, बल्कि उन्हें फील्ड में जाकर ‘श्रमदान’ (स्वैच्छिक सामुदायिक सेवा) करना होगा।
गांवों में रात्रि विश्राम:
नेताओं को जमीनी हकीकत समझने और लोगों से सीधे जुड़ने के लिए गांवों में एक रात बितानी होगी।

अंदर जाने को लेकर धक्का-मुक्की: गेट के बाहर फंसे रह गए चरणदास महंत
प्रशिक्षण शिविर को वैसे तो पूरी तरह ‘गोपनीय’ (closed-door) रखा गया था, लेकिन राहुल गांधी के आने की खबर पाकर पूरे प्रदेश से भारी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता अभनपुर पहुंच गए।

मुख्य गेट पर इतनी जबरदस्त भीड़ और धक्का-मुक्की हुई कि सुरक्षाकर्मियों को गेट बंद करना पड़ा।

इस गहमागहमी के बीच छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत काफी देर तक मुख्य गेट के बाहर ही फंसे रह गए। बाद में जानकारी मिलने पर सुरक्षाकर्मियों ने गेट खोलकर उन्हें अंदर लिया। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

सड़क किनारे चाय-बिस्किट की चर्चा

अभनपुर में करीब 4 घंटे का सत्र पूरा करने के बाद जब राहुल गांधी वापस रायपुर एयरपोर्ट लौट रहे थे, तो उन्होंने रास्ते में सड़क किनारे एक आम चाय की दुकान (टपरी) पर अपनी गाड़ी रुकवाई। वहां उन्होंने छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, सचिन पायलट और भूपेश बघेल के साथ बैठकर चाय पी और बिस्किट शेयर किए, जिसकी तस्वीरें और वीडियो स्थानीय स्तर पर काफी वायरल हो रहे हैं।

NEET परीक्षा और राष्ट्रीय मुद्दों पर मंथन

शिविर में प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट ने स्पष्ट किया कि संगठन और विचारधारा के साथ-साथ इस कैंप में NEET परीक्षा में हुई गड़बड़ी और छात्रों के भविष्य जैसे ज्वलंत राष्ट्रीय मुद्दों पर भी जिला अध्यक्षों को ट्रेंड किया जा रहा है, ताकि वे जनता के बीच जाकर बीजेपी के नैरेटिव का आक्रामक जवाब दे सकें।

एक्शन: रेत माफियाओं पर कड़ा प्रहार रात के अंधेरे में केंद्रीय उड़नदस्ते का औचक छापा, हाईटेक ड्रोन से मापी जा रही रेत

रायपुर 22 जून 2026:-

छत्तीसगढ़ में अवैध खनिज को लेकर सरकार अब पूरा एक्शन मोड में है मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर अवैध रेत खनन एवं भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रदेश भर में लगातार अभियान चलाकर बड़ी कार्रवाई की जा रही है।

जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ खनिज विभाग का मैदानी अमला अवैध गतिविधियों की रोकथाम के लिए कड़ी निगरानी कर रहा है।

इसी क्रम में केंद्रीय खनि उड़नदस्ता की संयुक्त टीम द्वारा प्राप्त शिकायतों के आधार पर 21 जून 2026 को रात्रिकालीन खनन क्षेत्रों का औचक निरीक्षण किया गया।

इस दौरान जिला एम.सी.बी. की तहसील केल्हारी अंतर्गत दंडाहस्वाही स्थित केवाई नदी, पसौरी, कुटरा तथा हसदेव नदी क्षेत्रों के सघन निरीक्षण में स्वीकृत दो अस्थायी रेत भंडारण अनुज्ञप्ति स्थलों का विस्तृत परीक्षण किया गया।

मौके पर उपलब्ध रेत की मात्रा का आकलन हाईटेक ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से किया गया। निरीक्षण में भंडारण अनुज्ञा की शर्तों के उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित रेत भंडारणकर्ताओं को कारण बताओ सूचना जारी कर तीन दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में अवैध खनन गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं है और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ खनिज संपदा का नियमानुसार दोहन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि अवैध खनन एवं भंडारण में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


खनिज सचिव श्री पी. दयानंद ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य के पहुंच-विहीन एवं संवेदनशील क्षेत्रों की सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए।

इसी उद्देश्य से विभिन्न जिलों में अवैध रेत उत्खनन संभावित क्षेत्रों का चिन्हांकन कर हाईटेक ड्रोन सर्वे के माध्यम से निगरानी की जा रही है, जिससे अवैध रेत खनन एवं भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। उक्त कार्रवाई में केंद्रीय उड़नदस्ता की संयुक्त जांच टीम एवं जिला स्तरीय टीम के अधिकारी उपस्थित रहे।

अंतर्राष्ट्रीय योग के रंग में रंगा साजा कृषि महाविद्यालय: छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने मिलकर लिया सेहत का संकल्प

साजा/छत्तीसगढ़- 22 जून 2026:-

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कुमारी देवी चौबे कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, साजा में भव्य सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए योग को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का आधार बताया।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. ललित कुमार रामटेके की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर है, जिसने आज वैश्विक स्तर पर मानव स्वास्थ्य और कल्याण के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, अनियमित जीवनशैली और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच योग शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक संतुलन स्थापित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।साथ ही विद्यार्थियों से प्रतिदिन योग एवं ध्यान को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में विशेष रूप से आमंत्रित योग प्रशिक्षक वोकेश साहू ने प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम, सूक्ष्म व्यायाम एवं ध्यान का अभ्यास कराया। उन्होंने ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, वज्रासन, शशांकासन सहित अनेक महत्वपूर्ण योगासनों का प्रदर्शन करते हुए उनके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी देते हुए अनुलोम-विलोम, कपालभाति एवं भ्रामरी प्राणायाम के माध्यम से मानसिक शांति, एकाग्रता तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाय भी बताए।

योग सत्र के दौरान छात्र-छात्राओं ने पूरे अनुशासन और उत्साह के साथ योगाभ्यास किया।

प्रशिक्षक के निर्देशन में सभी प्रतिभागियों ने विभिन्न आसनों एवं प्राणायाम का अभ्यास करते हुए योग के महत्व और दैनिक जीवन में इसकी उपयोगिता को समझा।

कार्यक्रम के दौरान योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली, तनावमुक्त जीवन तथा सकारात्मक सोच विकसित करने पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

इस अवसर पर डॉ. गोविंद प्रसाद कन्नौजे, डॉ. निर्झरनी नंदेहा, डॉ. स्वर्णलता बारा, डॉ. ओम कुमार नेताम, डॉ. श्रुति वर्मा एवं डॉ. ज्योति बाला सहित महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण उपस्थित रहे।

सभी शिक्षकों ने विद्यार्थियों के साथ योगाभ्यास में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए नियमित योग, संतुलित आहार एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के अधिकारी-कर्मचारियों एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी रही। योगाभ्यास के उपरांत सभी प्रतिभागियों ने स्वस्थ, तनावमुक्त, नशामुक्त एवं सकारात्मक जीवन के निर्माण हेतु नियमित योग करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का सफल संचालन एवं आभार प्रदर्शन डॉ. गोविंद प्रसाद कन्नौजे द्वारा किया गया। उन्होंने योग प्रशिक्षक, अतिथियों, प्राध्यापकगण, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योग को जीवन का अभिन्न अंग बनाकर ही स्वस्थ, जागरूक और सशक्त समाज का निर्माण संभव है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम योग के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने, स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने तथा विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने वाला एक सफल एवं स्मरणीय आयोजन सिद्ध हुआ।

सुश्री तारा पाठक भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल (BJMTUC) की राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त

नई दिल्ली / धनबाद 22 जून 2026

नवनियुक्त राष्ट्रीय महासचिव को मिला ‘ऑल इंडिया कैजुअल एंड कॉन्ट्रैक्चुअल वर्कर्स यूनियन’ का अतिरिक्त प्रभार।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय श्रम मंत्री समेत शीर्ष नेतृत्व को भेजी गई नियुक्ति की प्रतिलिपि।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नीतियों से प्रेरित और देश के संगठित व असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के कल्याण के लिए समर्पित प्रमुख संगठन भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल (BJMTUC) राष्ट्रीय समिति ने सांगठनिक विस्तार करते हुए एक बड़ा फैसला लिया है।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रजेश शर्मा द्वारा जारी आधिकारिक पत्र (संदर्भ संख्या: NP43/BJMTUC/26) के अनुसार, झारखंड के धनबाद की रहने वालीं सुश्री तारा पाठक को तत्काल प्रभाव से संगठन का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया है।
अपनी इस नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के साथ ही सुश्री तारा पाठक को BJMTUC के “ऑल इंडिया कैजुअल एंड कॉन्ट्रैक्चुअल वर्कर्स यूनियन” सेक्टर का राष्ट्रीय प्रभारी भी बनाया गया है। वह अगले आदेश तक इस पद पर बने रहकर संगठन द्वारा सौंपे गए दायित्वों का निर्वहन करेंगी।

योग्यता और समृद्ध राजनीतिक-सामाजिक अनुभव
मूल रूप से न्यू कार्मिक नगर, भवरदहा, धनबाद (झारखंड) की निवासी और श्री ऋषिकेश पाठक की पुत्री सुश्री तारा पाठक शैक्षणिक रूप से परास्नातक (M.A.) हैं। उनके पास सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र का एक लंबा और समृद्ध अनुभव है ।

सरकारी निकायों में प्रतिनिधित्व:
उन्होंने भारत सरकार के अधीन ‘केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद’ और ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा निकाय’ की सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। इसके अलावा, वह झारखंड सरकार के ‘राज्य नियामक समिति बोर्ड’ की सदस्य भी रह चुकी हैं।

अंतरराष्ट्रीय अनुभव:
भारत सरकार के बैनर तले वह अंतरराष्ट्रीय मानक संस्था (ISO) के कार्यों के सिलसिले में बैंकॉक (थाईलैंड) में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

सांगठनिक व चुनावी अनुभव:
सुश्री तारा पाठक पूर्व में जनता दल (यूनाइटेड) की प्रदेश महासचिव रह चुकी हैं और साल 2000 में उन्होंने विधानसभा चुनाव व 2015 में उत्तर प्रदेश में मेयर का चुनाव भी लड़ा है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रजेश शर्मा का संदेश:
“सुश्री तारा पाठक के व्यापक सांगठनिक और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। हमें पूरा विश्वास है कि उनके नेतृत्व में देश के कैजुअल और कॉन्ट्रैक्चुअल (ठेका) मजदूरों के अधिकारों की आवाज को और मजबूती मिलेगी तथा संगठन का देशव्यापी विस्तार होगा।”

नवनियुक्त तारा पाठक का वक्तव्य
अपनी नियुक्ति पर आभार व्यक्त करते हुए नवनियुक्त राष्ट्रीय महासचिव सुश्री तारा पाठक ने कहा कि वह संगठन के भरोसे पर पूरी तरह खरा उतरने का प्रयास करेंगी और देश के करोड़ों शोषित, वंचित, संगठित व असंगठित कामगारों के हक की लड़ाई को पूरी निष्ठा से लड़ेंगी।

पुलिस ने चलाया अभियान : एक युद्ध नशे के विरुद्ध’ कुसमी बहेरा में ग्रामीणों को किया गया जागरूक

बेमेतरा 21 जून 2026

बेमेतरा पुलिस ने दिलाई नशा मुक्त जीवन की शपथ, हेल्पलाइन 1933 की जानकारी दी।

पुलिस उप महानिरीक्षक रामकृष्ण साहू (आईपीएस) के निर्देशन में जिले में चलाए जा रहे ‘‘एक युद्ध नशे के विरुद्ध’’ अभियान के तहत बेमेतरा पुलिस ने ग्राम कुसमी बहेरा में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। सामुदायिक पुलिसिंग अभियान ‘‘हमर पुलिस हमर बाजार’’ एवं ‘‘हमर पुलिस हमर गांव’’ के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए नशा मुक्त समाज निर्माण का संदेश दिया गया।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश कुमार यादव एवं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में थाना बेरला प्रभारी उप निरीक्षक राजकुमार साहू, प्रशिक्षु उप निरीक्षक गीतांजली तथा पुलिस स्टाफ ने ग्रामीणों से संवाद कर उन्हें ‘‘नशा मुक्त जीवन’’ की शपथ दिलाई। उपस्थित लोगों ने ‘‘जिंदगी को हाँ, नशे को ना’’ का संकल्प लेते हुए स्वयं नशे से दूर रहने और समाज को भी जागरूक करने का प्रण लिया।

कार्यक्रम में बताया गया कि नशा व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके परिवार एवं समाज को भी प्रभावित करता है। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों से नशे के खिलाफ जनजागरण में सक्रिय भागीदारी निभाने और युवाओं को इस सामाजिक बुराई से दूर रखने की अपील की।

इस दौरान मानस-नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 1933 की जानकारी भी दी गई तथा मादक पदार्थों की तस्करी या अवैध गतिविधियों की सूचना पुलिस को देने का आग्रह किया गया। पुलिस ने आश्वस्त किया कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी।

बेमेतरा पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे नशे के खिलाफ इस जनअभियान में सहभागी बनें और एक स्वस्थ, सुरक्षित एवं नशा मुक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर कृषि महाविद्यालय बेमेतरा में सामूहिक योगाभ्यास

बेमेतरा/छत्तीसगढ़ 21 जून 2026

योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का दिया गया संदेश।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रेवेंद्र सिंह वर्मा कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, ढोलिया (बेमेतरा) में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई के तत्वावधान में योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. संदीप भंडारकर के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए सामूहिक योगाभ्यास किया।

योग प्रशिक्षकों के निर्देशन में प्रतिभागियों ने सूर्य नमस्कार, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम सहित विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास किया। इस दौरान योग के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक लाभों की जानकारी भी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित कर स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन की दिशा प्रदान करता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिष्ठाता डॉ. संदीप भंडारकर ने कहा कि वर्तमान जीवनशैली में योग की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित योगाभ्यास करने और अपने परिवार व समाज को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने तथा स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया। उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न यह आयोजन स्वास्थ्य, जागरूकता और अनुशासन का संदेश देकर सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।


अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कबीरधाम: सामूहिक योगाभ्यास- योग ऋषि-मुनियों की अमूल्य विरासत-उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

कवर्धा- 21 जून 2026

छत्तीसगढ़ में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कबीरधाम जिले के पीजी कॉलेज डोम में जिला स्तरीय सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री शामिल हुए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल से योग आज विश्वव्यापी आंदोलन बन चुका है और दुनिया के अनेक देशों में इसे अपनाया जा रहा है।

इस दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारी-कर्मचारियों, विद्यार्थियों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि योग भारत की प्राचीन और गौरवशाली परंपरा है, जिसे देश के ऋषि-मुनियों ने विकसित कर मानवता को अमूल्य विरासत के रूप में सौंपा है।

उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलने के पीछे भारत की सांस्कृतिक शक्ति और योग की वैज्ञानिक उपयोगिता प्रमुख कारण है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि निरोगी काया और स्वस्थ चित्त का आधार है। नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है। उन्होंने सभी नागरिकों से योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

योग सत्र का संचालन पतंजलि योग समिति के वरिष्ठ प्रशिक्षक सुरेश चंद्रवंशी एवं अन्य प्रशिक्षकों ने किया।
प्रार्थना से शुरू हुए सत्र में ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, भद्रासन, वज्रासन, वक्रासन, भुजंगासन, उत्तान मंडूकासन, मकरासन, उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन तथा विभिन्न प्राणायामों का अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षकों ने उपस्थित लोगों को इन आसनों के स्वास्थ्य लाभों की भी जानकारी दी। ध्यान और प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

इस अवसर पर गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष बिसेसर पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, पूर्व संसदीय सचिव डॉ. सियाराम साहू, कलेक्टर गोपाल वर्मा, पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


योग पतंजलि चित्तवृत्ति निरोध की बात करते हैं, हम सेल्फी-वृत्ति विस्तार में लगे हैं

व्यंग्य डेस्क — 21/06/2026

आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है। योग को अक्सर केवल शरीर को मोड़ने-बाँधने की क्रिया समझ लिया जाता है, जबकि भारतीय दर्शन में योग का अर्थ कहीं अधिक गहरा है। षड्दर्शनों में महर्षि पतंजलि का योग दर्शन मन, चित्त, वृत्तियों और आचरण के अनुशासन की बात करता है।

योग की परंपरा हजारों वर्ष पुरानी मानी जाती है। इसके दार्शनिक आधार वेदों, उपनिषदों, भगवद्गीता और विशेष रूप से महर्षि पतंजलि के योगसूत्रों में मिलते हैं।

योग का उद्देश्य स्वयं पर विजय पाना है, दूसरों पर नहीं; अहंकार का क्षय करना है, उसका विस्तार नहीं। लेकिन हमारे समय का एक विचित्र व्यंग्य यह है कि जहां पतंजलि का योग मन को साधने का मार्ग बताता है, वहीं प्रजातंत्र का ‘राजयोग’ वोटों के महायोग से प्राप्त होता है।

“एक दिन का योग और 364 दिन का भोग”
इसका केंद्र योग दिवस, प्रदर्शनवाद और योग के वास्तविक दर्शन के बीच का अंतर है।
मुख्य विचार यह कि योग केवल आसन नहीं, बल्कि जीवन का अनुशासन है। यदि योग वर्ष में एक दिन का सार्वजनिक आयोजन बनकर रह जाए, तो वह साधना से अधिक प्रदर्शन बन जाता है।


जनता के एक-एक वोट से कोई व्यक्ति सत्ता के शिखर तक पहुंच जाता है, किंतु कई बार राजयोग मिलते ही वह यह भूल जाता है कि योग का पहला पाठ विनम्रता है।

“जिस देश में लोग इतिहास पढ़ने से अधिक प्रचार सुनते हों, वहाँ कभी-कभी माली को ही बगीचे का निर्माता समझ लिया जाता है।”

योग उत्सव और राजयोग अधिकार
“प्रजातंत्र में वोटों का महायोग राजयोग देता है, और योग दर्शन सिखाता है कि राजयोग मिलने के बाद भी अहंकार से बचना चाहिए। दुर्भाग्य यह है कि हम योग को उत्सव और राजयोग को अधिकार समझ बैठे हैं।
तब शेर बने चूहे की कथा जीवंत हो उठती है—रूप बदल जाता है, पद बदल जाता है, पर यदि चित्त, वृत्ति-प्रवृत्ति और चरित्र का रूपांतरण न हुआ तो योग केवल राजयोग बनकर रह जाता है, आत्मयोग नहीं।

शायद यही कारण है कि आज योग दिवस पर आसनों से अधिक आवश्यकता मन, वचन और आचरण के योग को समझने की है। क्योंकि जिसने स्वयं को साध लिया, उसे राजयोग की आवश्यकता नहीं रहती; और जिसने स्वयं को नहीं साधा, उसका राजयोग भी अधिक दिन नहीं टिकता।

एक दिन का योग
“यदि योग केवल 21 जून की सुबह का कार्यक्रम बनकर रह जाए, तो वह साधना नहीं, आयोजन है। योग तब है जब आसन समाप्त होने के बाद भी संयम, संतुलन और सजगता जीवन में बनी रहे। वरना एक दिन योग और बाकी 364 दिन भोग—यह पतंजलि का योग नहीं, हमारे समय का अभिनय है।”

बाकी 364 दिन का योग
“आज लाखों लोग योग किए होंगे, तस्वीरें खिंचवाएंगे और स्वास्थ्य का संदेश देंगे। प्रश्न यह नहीं है कि 21 जून को कौन कितना देर पद्मासन में बैठा? प्रश्न यह है कि 22 जून से वह अपने विचारों, वाणी और व्यवहार में कितना संतुलन रखता है। योग की असली परीक्षा मंच पर नहीं, दिनचर्या में होती है।”

योग का एक अर्थ जुड़ना है मगर ,किससे आज 1 दिन से या बाकी साल के 364 दिन से योग की सार्थकता तभी है जब सरकार, समाज और व्यक्ति नशा-पान से बचे और नशे का बहिष्कार करें कारोबार नहीं।

दिव्य-योग : ऋषि, चूहा और अहंकार का रहस्य एवं दर्शन

रविवारीय /लेख – 21 जून 2026

एक शांत वन में एक सिद्ध ऋषि निवास करते थे। उनके आश्रम में एक छोटा-सा चूहा भी रहता था। वह साधारण चूहा था, लेकिन उसका हृदय असाधारण था। जब ऋषि ध्यान में बैठते, वह उनके समीप चुपचाप बैठकर भजन और मंत्रों की ध्वनि सुनता। धीरे-धीरे उसके भीतर भी ईश्वर के प्रति प्रेम जागने लगा।

किन्तु संसार का भय उसके मन से नहीं गया था। बिल्ली की आहट, कुत्ते का भौंकना या आकाश में मंडराती चील उसे भयभीत कर देती। उसका जीवन निरंतर भय और असुरक्षा में बीत रहा था।

एक दिन ऋषि के हृदय में करुणा उमड़ पड़ी। उन्होंने सोचा, “यदि यह चूहा शेर बन जाए, तो इसका भय समाप्त हो जाएगा।”
अपनी योगशक्ति से उन्होंने चूहे को शेर बना दिया।
“ऋषि ने अपनी सिद्धि का प्रयोग कर चूहे को शेर का स्वरूप तो प्रदान किया, किंतु वे जानते थे कि बाहरी रूप बदलने से अंतःकरण नहीं बदलता।”

अब जंगल का दृश्य बदल गया। जो जीव कभी उसे डराते थे, वे स्वयं उससे डरने लगे। हर ओर उसका सम्मान होने लगा। वह जहां जाता, सब उसके आगे सिर झुकाते।

लेकिन एक बात नहीं बदली।
भीतर बैठा भय, असुरक्षा और अहंकार का बीज वहीं रहा। संसार में रूप बदलना सरल है, किंतु स्वभाव का रूपांतरण ही वास्तविक साधना है।”

ऋषि उसे पहले की तरह ही देखते रहे। वे जानते थे कि बाहर का रूप बदल गया है, पर भीतर का स्वभाव अभी भी चूहे का ही है।

यही बात शेर बने चूहे को चुभने लगी।
वह सोचने लगा, “सारा जंगल मुझे राजा मानता है, पर यह ऋषि आज भी मुझे चूहा समझते हैं। जब तक ये जीवित हैं, मेरी महानता अधूरी है।”

यहीं से उसके भीतर अहंकार का जन्म हुआ।अहंकारी के लिए योग साधना योग मार्ग समाज में खतरा पैदा करता है ।

धीरे-धीरे वह यह भूल गया कि उसकी शक्ति उसकी अपनी नहीं थी। वह भूल गया कि जिसे वह अपना वैभव समझ रहा है, वह किसी और की कृपा का परिणाम था।
एक दिन वह ऋषि को मारने के उद्देश्य से उनकी ओर बढ़ा।

ऋषि ने उसकी आंखों में उठते अहंकार को पढ़ लिया। वे मुस्कुराए और बोले—
“जिसे शक्ति मिली है, वह स्वयं को शक्तिशाली समझ बैठा। जिसने कृपा पाई है, वह स्वयं को कर्ता मान बैठा।”

अगले ही क्षण उन्होंने अपनी योगशक्ति से उसे पुनः चूहा बना दिया।
शेर समाप्त हो गया, चूहा शेष रह गया।

कहानी का दर्शन पक्ष क्या है। ऋषि का पात्र यह संकेत देता है कि सत्ता और अहंकार स्थायी नहीं होते। समय, सत्य, व्यवस्था, जनचेतना या प्रकृति—किसी न किसी रूप में वास्तविकता सामने आ ही जाती है।

योग और शक्ति
“योग हमें शेर बनने की शक्ति नहीं देता, बल्कि अपने भीतर छिपे चूहे जैसे भय, असुरक्षा, लोभ और अहंकार को पहचानकर उन पर विजय प्राप्त करना सिखाता है। बाहरी सामर्थ्य नहीं, बल्कि आंतरिक संतुलन ही योग का वास्तविक फल है।”

शक्ति और अहंकार
“समस्या यह नहीं है कि चूहा शेर बन गया। समस्या तब पैदा होती है जब वह अपनी जड़ों, अपने उपकारकों और अपनी सीमाओं को भूल जाता है। शक्ति, पद और अधिकार जब सेवा के बजाय अहंकार का साधन बन जाते हैं, तब जंगल राज की स्थिति बनती है।”

दार्शनिक दृष्टि
यह कहानी केवल चूहे और शेर की नहीं है, यह हर मनुष्य की कहानी है।
ईश्वर हमें धन, पद, सौंदर्य, ज्ञान, शक्ति और प्रतिष्ठा देता है। लेकिन जब हम इन उपहारों को अपनी उपलब्धि मान लेते हैं, तब अहंकार जन्म लेता है।
अहंकार की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि वह हमें हमारी वास्तविकता से दूर कर देता है। हम भूल जाते हैं कि जो कुछ हमारे पास है, वह क्षणभंगुर है।
उपनिषदों का संदेश है—
“जो स्वयं को बड़ा समझता है, वह सत्य से दूर हो जाता है; और जो स्वयं को ईश्वर का साधन समझता है, वही ज्ञान के निकट पहुंचता है।”