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Friday, October 23, 2026
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CG College Yuktiyuktkaran: छत्तीसगढ़ के कम छात्र संख्या वाले सरकारी कॉलेजों का होगा पुनर्गठन? 7 संस्थानों में पिछले सत्र में एक भी दाखिला नहीं, 38 कॉलेजों में 200 से कम विद्यार्थी

 छत्तीसगढ़ :  उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार युक्तियुक्तकरण यानी कॉलेजों के पुनर्समायोजन की तैयारी कर रही है। प्रदेश के कई शासकीय कॉलेजों में विद्यार्थियों की कम संख्या को देखते हुए यह कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है। सामने आई जानकारी के अनुसार, पिछले प्रवेश सत्र में करीब 7 सरकारी कॉलेज ऐसे रहे, जहां एक भी विद्यार्थी ने दाखिला नहीं लिया। वहीं, कई संस्थानों में कुल प्रवेश पाने वाले छात्रों की संख्या 100 तक भी नहीं पहुंच सकी। इसके अलावा, प्रदेश के 38 कॉलेजों में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को मिलाकर विद्यार्थियों की संख्या 200 से कम दर्ज की गई है।

कॉलेजों से जुटाई जा रही प्रवेश, सीट और बजट की जानकारी

उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि फिलहाल प्रदेश के कॉलेजों से जुड़ी विभिन्न जानकारियां एकत्र की जा रही हैं। इनमें संस्थानों में उपलब्ध सीटों की संख्या, विद्यार्थियों के प्रवेश की स्थिति और बजट से संबंधित विवरण शामिल हैं। इन आंकड़ों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा।

उच्च शिक्षा संचालनालय ने क्षेत्रीय अधिकारियों से मांगा ब्योरा

कॉलेजों की मौजूदा स्थिति का आकलन करने के लिए उच्च शिक्षा संचालनालय ने क्षेत्रीय कार्यालयों में पदस्थ अपर संचालकों को पत्र भेजा है। उनसे संबंधित कॉलेजों के बारे में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है।

कम छात्र संख्या वाले संस्थानों के आंकड़े सामने आने के बाद युक्तियुक्तकरण की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, किन कॉलेजों में बदलाव किया जाएगा और इस प्रक्रिया के तहत क्या कदम उठाए जाएंगे, इसे लेकर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

छत्तीसगढ़ में ट्रांसफर सिंडिकेट का खुलासा, 19 शिक्षकों के जारी किए थे फर्जी आदेश, 15 जिलों के DEO से मांगा जवाब

CG News: छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में फर्जी तबादला आदेश जारी करने का मामला सामने आया है. विभागीय लेटरहेड, मंत्रालय की नकली सील और अवर सचिव आरपी वर्मा के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर 19 शिक्षकों और कर्मचारियों के ट्रांसफर आदेश जारी किए गए. मामला सामने आने के बाद लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) में हड़कंप मच गया है.

15 जिलों के DEO को तीन दिन का अल्टीमेटम

फर्जी आदेशों में सहायक शिक्षक, व्याख्याता, प्रधान पाठक और व्यायाम शिक्षक के नाम शामिल हैं. हैरानी की बात है कि इन तबादलों की जानकारी संबंधित 15 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को नहीं थी. डीपीआई ने मामले की जांच शुरू करते हुए सभी संबंधित डीईओ से तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है. शासन को आशंका है कि इस फर्जीवाड़े में कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है.

तीन बिंदुओं पर मांगा जवाब

डीपीआई ने अधिकारियों से पूछा है कि फर्जी आदेश उनके कार्यालय तक कैसे पहुंचे, इनके आधार पर कितने कर्मचारियों को कार्यमुक्त किया गया या जॉइनिंग दी गई और मामले की जानकारी मिलने पर जिला स्तर पर क्या कार्रवाई हुई. रिपोर्ट मांगे गए जिलों में रायपुर, दुर्ग, बस्तर, बालोद, धमतरी, सरगुजा, कांकेर, कबीरधाम समेत कुल 15 जिले शामिल हैं. दोषी पाए जाने वाले शासकीय सेवकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है.

बिना सत्यापन कैसे हुई रिलीविंग और जॉइनिंग?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि मंत्रालय से आदेशों की पुष्टि किए बिना जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों ने कर्मचारियों को रिलीव या जॉइन कैसे कराया. जांच में इस लापरवाही की भी पड़ताल की जाएगी.

2020 में भी सामने आया था मामला

स्कूल शिक्षा विभाग में ऐसा फर्जीवाड़ा पहले भी हो चुका है. 30 मार्च 2020 को अवर सचिव जनक कुमार के नाम से 21 व्याख्याताओं, शिक्षकों और एक क्लर्क के तबादले का फर्जी आदेश जारी किया गया था. मामला उजागर होने पर अवर सचिव ने नवा रायपुर के राखी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी.

UP SIR: फॉर्म-7 के जरिए मतदाता का नाम गलत तरीके से कटवाने पर होगी कार्रवाई, चुनाव आयोग ने जारी किए निर्देश, 2 करोड़ नए नाम जोड़ने की तैयारी

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Form 7 Rules:  उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी बहस के बीच निर्वाचन आयोग ने फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया है कि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से कटवाने के लिए फॉर्म-7 का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों से व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया है, ताकि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया का दुरुपयोग रोका जा सके।

फॉर्म-7 के गलत इस्तेमाल पर निर्वाचन आयोग सख्त

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा है कि लोगों को फॉर्म-7 के इस्तेमाल और उससे जुड़े नियमों के बारे में जागरूक करना जरूरी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी योग्य मतदाता का नाम अनुचित तरीके से सूची से हटाने का प्रयास न हो। आयोग की ओर से विभिन्न प्रचार माध्यमों के जरिए लोगों तक जरूरी जानकारी पहुंचाने की बात कही गई है।

उत्तर प्रदेश में 17 से 24 अक्टूबर तक विशेष अभियान

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने और छूटे हुए पात्र मतदाताओं को शामिल करने के लिए 17 अक्टूबर से विशेष पंजीकरण अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान 24 अक्टूबर तक चलेगा। इसके तहत ऐसे लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है, जिनके नाम किसी वजह से सूची में दर्ज नहीं हो पाए हैं।

इस अभियान को आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्वाचन अधिकारियों का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि सभी पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में जगह मिले।

प्रदेश में करीब 2 करोड़ मतदाताओं के नाम जोड़ने की जरूरत

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, प्रदेश में लगभग 2 करोड़ पात्र मतदाताओं के नाम सूची में जोड़े जाने की जरूरत है। उनके अनुसार, आबादी के अनुपात के आधार पर मतदाताओं की संख्या करीब 16 करोड़ होने का अनुमान था, जबकि SIR के दौरान लगभग 14 करोड़ मतदाताओं के नाम सामने आए। इस अंतर को देखते हुए छूटे हुए पात्र लोगों का पंजीकरण कराने पर जोर दिया जा रहा है।

नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 भरकर आवेदन किया जा सकता है।

राजनीतिक दलों के साथ साझा होगी मतदाता सूची

विशेष अभियान के दौरान मतदाता सूची में जोड़े जाने वाले नामों की जानकारी सभी राजनीतिक दलों के साथ साझा की जाएगी। इससे सूची को लेकर सामने आने वाले दावों और आपत्तियों का समय पर निपटारा करने में मदद मिलेगी। निर्वाचन आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक समावेशी और सटीक बनाना है, ताकि पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहें।

EPFO WhatsApp Channel: PF, पेंशन और कर्मचारी कल्याण योजनाओं की हर अपडेट मिलेगी मोबाइल पर, 2 लाख से अधिक लोग जुड़े, जानें फॉलो करने का तरीका

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EPFO WhatsApp Channel:   कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों सदस्यों को PF और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। कर्मचारियों तक जरूरी सूचनाएं और योजनाओं से जुड़ी जानकारी आसानी से पहुंचाने के लिए संगठन ने अपना आधिकारिक WhatsApp चैनल शुरू किया है। इस चैनल से अब तक 2 लाख से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। इसके जरिए कर्मचारी और नियोक्ता EPF, पेंशन समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर ताजा जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

WhatsApp चैनल पर मिलेंगे EPF, EPS और EDLI से जुड़े अपडेट

EPFO के आधिकारिक WhatsApp चैनल पर कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI) से जुड़े नए फैसलों और घोषणाओं की जानकारी साझा की जाती है। इसके अलावा, संगठन की ओर से आयोजित जन-सुनवाई कार्यक्रमों और सहायता शिविरों से जुड़ी सूचनाएं भी यहां मिलती हैं। इससे कर्मचारियों और कंपनियों को जरूरी अपडेट एक ही माध्यम पर प्राप्त करने में मदद मिलती है।

वीडियो के जरिए समझ सकते हैं PF से जुड़े काम

EPFO अपने WhatsApp चैनल पर YouTube वीडियो के लिंक भी साझा करता है। इन वीडियो की मदद से सदस्य PF एडवांस निकालने की प्रक्रिया, नौकरी बदलने के बाद PF से जुड़े जरूरी काम और प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना जैसी पहलों के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। इस तरह कर्मचारी विभिन्न प्रक्रियाओं को समझने के लिए उपलब्ध आधिकारिक जानकारी का लाभ उठा सकते हैं।

क्या WhatsApp से PF निकालना या पेंशन क्लेम करना संभव है?

EPFO के WhatsApp चैनल का इस्तेमाल केवल सूचनाएं प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है। इस माध्यम से PF का पैसा निकालने, पासबुक देखने या पेंशन क्लेम करने जैसी सेवाएं पूरी नहीं होती हैं।

PF से जुड़े ऑनलाइन कामों के लिए सदस्य EPFO की आधिकारिक वेबसाइट या UMANG ऐप का उपयोग कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर नजदीकी EPFO कार्यालय से भी संपर्क किया जा सकता है।

EPFO के आधिकारिक WhatsApp चैनल को फॉलो कैसे करें?

EPFO के चैनल से जुड़ने के लिए नीचे दिए गए आसान चरणों का पालन करें:

  1. अपने मोबाइल फोन में WhatsApp खोलें।
  2. ऐप के Updates या Channels सेक्शन में जाएं।
  3. EPFO के आधिकारिक चैनल के लिंक यहां क्लिक करें।
  4. चैनल खुलने के बाद ऊपर दिखाई देने वाले Follow बटन पर टैप करें।

इन चरणों को पूरा करने के बाद आप चैनल पर साझा की जाने वाली EPF, पेंशन और अन्य कर्मचारी कल्याण योजनाओं से जुड़ी नई सूचनाएं देख सकेंगे।

ग्वालियर शीतला माता मंदिर हादसे में बड़ी कार्रवाई, ट्रक ड्राइवर और मालिक गिरफ्तार, सीएम ने दिए जांच के आदेश

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मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर जा रहे श्रद्धालुओं के साथ हुए दर्दनाक हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने ट्रक चालक दिलबाग सिंह और वाहन मालिक मोहित सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक के बावजूद ट्रक प्रतिबंधित क्षेत्र में कैसे पहुंचा और बैरिकेडिंग तोड़ने की नौबत क्यों आई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने हादसे पर दुख जताया है।

ट्रक चालक और मालिक गिरफ्तार, प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश की पड़ताल

ग्वालियर हादसे के मामले में पुलिस ने चालक दिलबाग सिंह और ट्रक मालिक मोहित सिंह को गिरफ्तार किया है। दोनों से पूछताछ के दौरान दुर्घटना की परिस्थितियों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।

जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि चेक पोस्ट पर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक होने के बावजूद ट्रक संबंधित क्षेत्र में कैसे दाखिल हुआ। इसके साथ ही बैरिकेडिंग तोड़े जाने और प्रतिबंधित मार्ग पर वाहन की आवाजाही को लेकर भी सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।

CM मोहन यादव ने दिए जांच के आदेश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हादसे को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित क्षेत्र में ट्रक के प्रवेश के कारण दुर्घटना हुई। मुख्यमंत्री ने पूरे घटनाक्रम की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है।

उन्होंने बताया कि दो मंत्रियों को घटनास्थल पर जाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही गंभीर रूप से घायल लोगों के इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा उठाने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टर से भी घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

मंत्री राकेश शुक्ला बोले- लापरवाही पर होगी कार्रवाई

कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला ने हादसे में घायल लोगों और उनके परिजनों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को घायलों के उचित इलाज की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने इसे लापरवाही का मामला बताया। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। अब जांच में यह स्पष्ट करने का प्रयास होगा कि दुर्घटना के पीछे किन परिस्थितियों और संभावित चूकों की भूमिका रही।

PM मोदी ने मृतकों के परिजनों के लिए 2 लाख रुपये की सहायता घोषित की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्वालियर हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।

प्रधानमंत्री की ओर से घोषित सहायता के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से 2 लाख रुपये दिए जाएंगे। वहीं, दुर्घटना में घायल लोगों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी।

राहुल गांधी ने भी जताया शोक

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस दुर्घटना पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में शीतला माता मंदिर के पास बेकाबू ट्रक से हुए हादसे में श्रद्धालुओं की मौत को बेहद दुखद बताया।

राहुल गांधी ने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने दुख की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों के साथ अपनी सहानुभूति जताई।

चेक पोस्ट और बैरिकेडिंग की भूमिका भी जांच के दायरे में

हादसे के बाद प्रतिबंधित क्षेत्र में भारी वाहन के प्रवेश और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस और प्रशासन यह पता लगाने में जुटे हैं कि निर्धारित प्रतिबंधों का पालन क्यों नहीं हुआ और बैरिकेडिंग तोड़े जाने के बावजूद ट्रक आगे कैसे पहुंचा।

फिलहाल चालक और मालिक की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ जारी है। जांच पूरी होने पर ही दुर्घटना के कारणों और जिम्मेदारी से जुड़े तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

फ्रांस में क्यों भड़का आक्रोश? महंगाई से लेकर बदहाल स्कूलों तक, सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोग

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France Protests: फ्रांस में बढ़ती महंगाई और फ्यूल की कीमतों के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं. शुरुआत में छात्रों की समस्याओं को लेकर उठी आवाज अब महंगाई तक आ गई है. जनता सरकार के खिलाफ नारेबाजी आगजनी और दुकानों में लूटपाट कर रही है. इसके अलावा कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को भी निशाना बनाया है.

आंदोलन की प्रमुख वजह बढ़ती महंगाई और आम लोगों पर बढ़ता आर्थिक दबाव है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ने से परिवारों का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है. वहीं, लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि देश की संपत्ति और सत्ता कुछ लोगों तक सीमित होती जा रही है.

स्कूलों की खराब स्थिति भी विरोध की बड़ी वजह बनी है. छात्रों और शिक्षकों ने शिक्षकों की कमी, मजदूर संगठन बेहतर वेतन, पेंशन और सरकारी सेवाओं की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शन में पुलिस की कार्रवाई और कथित हिंसा को लेकर नाराजगी भी सामने आई है.

कौन कर रहा है प्रदर्शन?

इस आंदोलन में छात्र, युवा, मजदूर संगठन, किसान, वामपंथी कार्यकर्ता और 2018 के येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोग शामिल हैं. फ्रांस के प्रमुख श्रमिक संगठनों में शामिल CGT ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया है. सोशल मीडिया के जरिए लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की गई थी.

प्रदर्शन में अब तक कितना नुकसान हुआ?

हिंसा का असर पेरिस के अलावा लियोन, मार्सिले और लिमोज जैसे शहरों में भी दिखाई दिया है. पेरिस में दुकानों के शीशे तोड़े गए, कई दुकानों में लूटपाट हुई और वाहनों में आग लगाई गई. लियोन में टूरिस्ट ऑफिस की इमारत को आग के हवाले कर दिया गया, जबकि लिमोज में सिटी हॉल का बड़ा हिस्सा आग से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ. मार्सिले में भी नगर प्रशासन की इमारत में तोड़फोड़ की गई.

कितने लोग घायल और कितने गिरफ्तार हुए?

 फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने 17 अक्टूबर की देर रात तक 1,200 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी. इससे पहले गृह मंत्रालय की ओर से करीब 400 लोगों को हिरासत में लेने का आंकड़ा दिया गया था.हिंसा में कम से कम 150 पुलिसकर्मियों के घायल होने की सूचना भी दी गई.

कुल मिलाकर, फ्रांस का यह विरोध केवल महंगाई तक सीमित नहीं रह गया है.  हालांकि, प्रदर्शनकारियों की मांगों और आगजनी-लूटपाट करने वाले समूहों की गतिविधियों को अलग-अलग समझना जरूरी है. सरकार ने हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है.

एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत के मामले में 3 पर FIR, मरने से पहले लिया था इन लोगों का नाम

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Greater Noida News: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत के बाद हड़कंप मच गया था. पुलिस ने पांच लोगों की मौत को आत्महत्या बताते हुए 3 लोगों की खिलाफ मामला दर्ज किया है. जिसमें मृतक की दो बहनें और एक बहनोई शामिल है. मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने तीनों को हिरासत में ले लिया है. अब विसरा जांच रिपोर्ट आने का इंतजार है. रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की सही वजह का पता लग पाएगा.

जानकारी के अनुसार, परिवार के सभी लोग मेला देखने गए थे. वहां से लौटने के बाद घर पर मैगी बनाई और चाय के साथ सभी ने खा ली. इसके बाद सोने चले गए. लेकिन सुबह देर तक जब घर का दरवाजा नहीं खुला तो पड़ोसी का एक बच्चा दीवार फांदकर सीधे अंदर घुस गया और जो देखा वह हैरान करने वाला था. अंदर पांच लोग मृत अवस्था में पड़े मिले.

आत्महत्या का हुआ खुलासा

बच्चे ने इसकी जानकारी पड़ोसियों और पुलिस को दी. जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस की टीम ने सभी शवों को सुपुर्द कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए अस्पताल पहुंचाया. इस दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम भी मौके पर पुहंचकर खाने-पीने की जांच की. शुरुआती दौर में तो फूड पॉइजनिंग की आशंका उठाई जा रही थी, लेकिन बाद में आत्महत्या का खुलासा हुआ.

पवन सिंह को बलिया कोर्ट से झटका, पेशी पर नहीं पहुंचे तो लगा 3 हजार रुपये का हर्जाना

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Pawan Singh: भोजपुरी स्टार पवन सिंह एक बार फिर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में हैं. पत्नी ज्योति सिंह की ओर से दाखिल भरण-पोषण याचिका के मामले में उन्हें बलिया की अदालत से झटका लगा है. निर्धारित तारीख पर कोर्ट में पेश नहीं होने पर अपर परिवार न्यायालयa ने पवन सिंह पर 3,000 रुपये का हर्जाना लगाया है. साथ ही उन्हें अगली सुनवाई की पर अदालत मी उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है. यह मामला फिलहाल न्यायालय में चल रहा है.

पत्नी ज्योति सिंह ने की 5 लाख रुपये महीने की मांग

कोर्ट सूत्रों के अनुसार, ज्योति सिंह ने लगभग तीन साल पहले बलिया में भरण-पोषण के लिए याचिका दायर की थी. इसमें उन्होंने पवन सिंह से हर महीने पांच लाख रुपये भरण-पोषण के रूप में देने की मांग की है. इस मामले की सुनवाई अपर परिवार न्यायालय के न्यायाधीश कमलापति की अदालत में चल रही है. हालांकि अभी तक भरण-पोषण की राशि को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं आया है.

पेशी पर गैरहाजिरी के कारण लगा जुर्माना

सुनवाई के लिए निर्धारित डेट पर पवन सिंह अदालत में उपस्थित नहीं हुए. इसके बाद न्यायालय ने उन पर 3,000 रुपये का हर्जाना लगाया और अगली तरीख पर पेश होने का आदेश दिया. बताया जा रहा है कि इससे पहले पवन सिंह इस मामले में अदालत में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं.

ज्योति सिंह की ओर से पेश किए गए साक्ष्य

बता दें कि मामले की सुनवाई के दौरान ज्योति सिंह के वकील ने अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं. फिलहाल इन साक्ष्यों पर प्रोसेस चल रही है. दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्य सुनने के बाद ही अदालत इस मामले में आगे का निर्णय लेगी.

पिछली पेशी के दौरान हुआ था हंगामा

इससे पहले पवन सिंह की पेशी के दौरान अदालत परिसर में शोर-शराबा होने की बात सामने आई थी. स्थिति को कंट्रोल करने के लिए पुलिस को बीच में आना पड़ा था. अब गैरहाजिरी के कारण हर्जाना लगाए जाने के बाद मामले की अगली सुनवाई पर सबकी नजरें रहेंगी.

बालों की सही देखभाल कैसे करें? जानिए उम्र के अनुसार बालों का झड़ना कम करने के प्रभावी उपाय

बालों को स्वस्थ, घना और मजबूत बनाए रखने के लिए अपनाएँ सही खानपान, नियमित देखभाल और वैज्ञानिक तरीके

बाल हमारी सुंदरता और व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सिर पर घने, स्वस्थ और चमकदार बाल हर किसी को अच्छे लगते हैं, लेकिन आजकल कम उम्र से लेकर 50–60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में भी बाल झड़ने, पतले होने और गंजेपन की समस्या देखने को मिल रही है। कई लोग बालों को बचाने के लिए तरह-तरह के तेल, शैम्पू और घरेलू नुस्खे अपनाते हैं, लेकिन सही जानकारी के अभाव में अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाते।

सच्चाई यह है कि बालों की उचित देखभाल, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और बाल झड़ने के वास्तविक कारण की पहचान करके उनकी सेहत को बेहतर बनाया जा सकता है। हालाँकि, हर व्यक्ति में बाल झड़ने का कारण एक जैसा नहीं होता। इसलिए समस्या को समझना और उसके अनुसार कदम उठाना जरूरी है।

1. बाल झड़ने के प्रमुख कारण क्या हैं?

बालों का प्रतिदिन कुछ मात्रा में झड़ना सामान्य है। आमतौर पर एक दिन में लगभग 50 से 100 बाल झड़ सकते हैं। लेकिन यदि बाल लगातार अधिक मात्रा में गिर रहे हों, माँग चौड़ी हो रही हो या सिर की त्वचा दिखाई देने लगी हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

बाल झड़ने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:

  • आनुवंशिक कारण: परिवार में गंजेपन का इतिहास होने पर बालों का पतला होना और झड़ना बढ़ सकता है।
  • पोषण की कमी: शरीर में आयरन, प्रोटीन या अन्य पोषक तत्त्वों की कमी बालों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।
  • तनाव और नींद की कमी: लंबे समय तक मानसिक तनाव या खराब नींद बाल झड़ने की समस्या को बढ़ा सकती है।
  • हार्मोनल और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ: थायरॉइड की समस्या, कुछ बीमारियाँ और दवाएँ भी बाल झड़ने का कारण बन सकती हैं।
  • बालों की अनुचित देखभाल: बालों को जोर से रगड़ना, बार-बार गर्म उपकरणों का उपयोग और कठोर रासायनिक उपचार बालों को नुकसान पहुँचा सकते हैं।

2. बालों की देखभाल के लिए रोजाना क्या करें?

बालों को स्वस्थ रखने के लिए महँगे उत्पादों से अधिक जरूरी है कि उनकी नियमित और सही तरीके से देखभाल की जाए।

हल्के शैम्पू का इस्तेमाल करें: अपने सिर की त्वचा और बालों के प्रकार के अनुसार शैम्पू चुनें। पसीना, धूल और अतिरिक्त चिकनाई को साफ रखें। शैम्पू की आवृत्ति बालों की जरूरत के अनुसार तय करें।

गीले बालों को सावधानी से सँवारें: गीले बाल अधिक आसानी से टूट सकते हैं। तौलिए से जोर-जोर से रगड़ने के बजाय धीरे-धीरे पानी सुखाएँ और चौड़े दाँतों वाली कंघी का उपयोग करें।

गर्म उपकरणों से बचें: हेयर ड्रायर, स्ट्रेटनर और कर्लिंग मशीन का अत्यधिक तापमान बालों को कमजोर कर सकता है। इनका सीमित उपयोग करें।

सिर की त्वचा को साफ रखें: रूसी, खुजली या लालिमा होने पर उचित उपचार कराएँ। लगातार खुजलाने और नाखूनों से त्वचा को नुकसान पहुँचाने से बचें।

बालों को बहुत कसकर न बाँधें: लगातार खिंचाव पड़ने से बालों की जड़ों को नुकसान पहुँच सकता है।

3. बालों को मजबूत बनाने के लिए कैसा आहार लें?

बालों की वृद्धि के लिए शरीर को पर्याप्त प्रोटीन और अन्य पोषक तत्त्व चाहिए। केवल तेल लगाने से पोषण की कमी दूर नहीं होती।

अपने दैनिक भोजन में इन चीजों को शामिल करने का प्रयास करें:

  • प्रोटीन: दालें, चना, राजमा, दूध, दही, पनीर, अंडे या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत।
  • हरी सब्जियाँ: पालक, मेथी और अन्य मौसमी सब्जियाँ।
  • फल: अमरूद, संतरा, आँवला और अन्य मौसमी फल।
  • मेवे और बीज: बादाम, अखरोट, अलसी या अन्य बीज उचित मात्रा में।
  • आयरन युक्त खाद्य पदार्थ: दालें, हरी पत्तेदार सब्जियाँ और जरूरत के अनुसार अन्य स्रोत।

पर्याप्त पानी पिएँ और संतुलित भोजन करें। बिना जाँच के आयरन, जिंक, बायोटिन या अन्य सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है। जरूरत से अधिक मात्रा नुकसान भी पहुँचा सकती है।

4. उम्र के अनुसार बालों की देखभाल कैसे करें?

20 से 30 वर्ष की उम्र

इस उम्र में बालों की देखभाल की अच्छी आदतें विकसित करना महत्वपूर्ण है। संतुलित आहार लें, पर्याप्त नींद लें और अत्यधिक गर्मी या रासायनिक उपचार से बचें। यदि माथे के दोनों किनारों से बाल पीछे जाने लगें या सिर के ऊपर बाल पतले हों, तो इसे केवल उम्र या तनाव का परिणाम मानकर न छोड़ें।

30 से 40 वर्ष की उम्र

इस उम्र में कुछ लोगों में आनुवंशिक कारणों से बाल पतले होने लगते हैं। बालों की घनता में बदलाव पर ध्यान दें और लगातार बाल झड़ने पर त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी भी उपचार को नियमित रूप से और सही तरीके से अपनाना महत्वपूर्ण है।

40 से 60 वर्ष की उम्र

इस आयु वर्ग में सिर के ऊपर बाल कम होना, माथे के पास बाल पीछे जाना या बालों का पतला होना अधिक स्पष्ट हो सकता है। यह पुरुषों में होने वाले आनुवंशिक गंजेपन का संकेत हो सकता है, हालाँकि अन्य कारण भी संभव हैं।

इस उम्र में विशेष रूप से ध्यान दें:

  • बालों में बदलाव को नियमित रूप से देखें।
  • संतुलित आहार और पर्याप्त नींद बनाए रखें।
  • मधुमेह, थायरॉइड या अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ हों तो उनका उचित प्रबंधन करें।
  • लगातार बाल कम होने पर त्वचा विशेषज्ञ से जाँच कराएँ।
  • डॉक्टर की सलाह से प्रमाण-आधारित उपचार पर विचार करें।

60 वर्ष से अधिक उम्र

इस उम्र में बालों का पतला होना और उनकी वृद्धि धीमी होना कुछ हद तक सामान्य हो सकता है। फिर भी बहुत तेजी से बाल झड़ना, अचानक खाली जगह बनना या सिर की त्वचा में परेशानी होना सामान्य उम्र बढ़ने का हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इस उम्र में बालों और सिर की त्वचा को कोमलता से साफ रखें, पौष्टिक भोजन लें और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं या दवाओं के संभावित प्रभाव के बारे में डॉक्टर से चर्चा करें।

5. क्या तेल लगाने से बाल झड़ना बंद हो जाता है?

बालों में तेल लगाने से रूखापन कम करने, बालों को मुलायम बनाने और कंघी करते समय होने वाले टूटने को कम करने में मदद मिल सकती है। सिर की हल्की मालिश भी आरामदायक हो सकती है।

लेकिन यह समझना जरूरी है कि तेल लगाने से हर प्रकार का बाल झड़ना बंद नहीं होता और न ही हर तेल नए बाल उगाने में सक्षम होता है। यदि बाल आनुवंशिक कारणों से पतले हो रहे हैं या किसी बीमारी के कारण झड़ रहे हैं, तो केवल तेल लगाने से मूल समस्या का उपचार नहीं होगा।

इसलिए तेल या अन्य उत्पाद चुनते समय उनके दावों के बजाय अपनी समस्या, उत्पाद की उपयुक्तता और उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों पर ध्यान दें।

6. बाल झड़ने पर कौन-से उपचार उपयोगी हो सकते हैं?

बाल झड़ने का उपचार उसके कारण पर निर्भर करता है।

  • आनुवंशिक गंजेपन के कुछ मामलों में मिनॉक्सिडिल जैसे उपचार उपयोगी हो सकते हैं।
  • पोषण की कमी होने पर जाँच के आधार पर उसकी पूर्ति की जा सकती है।
  • थायरॉइड या अन्य स्वास्थ्य समस्या होने पर मूल समस्या का उपचार जरूरी होता है।
  • सिर की त्वचा में संक्रमण या सूजन होने पर उसके अनुसार इलाज किया जाता है।

मिनॉक्सिडिल या अन्य दवाएँ शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। उपचार के परिणाम आने में कई महीने लग सकते हैं और हर व्यक्ति को समान लाभ नहीं मिलता। दवाओं के संभावित दुष्प्रभावों और लंबे समय तक उपयोग की जरूरत को भी समझना चाहिए।

7. इन गलतियों से बचें

बालों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आम गलतियों से बचना भी जरूरी है।

  1. हर दिन बहुत अधिक तेल लगाने को बाल उगाने का निश्चित उपाय न मानें।
  2. सोशल मीडिया पर बताए गए हर घरेलू नुस्खे को बिना जाँच के न अपनाएँ।
  3. बाल झड़ने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के सप्लीमेंट या दवाएँ शुरू न करें।
  4. अचानक बाल झड़ने या गोल धब्बे बनने पर उपचार में देरी न करें।
  5. कुछ ही दिनों में घने बाल उगाने के दावों पर भरोसा न करें।

यदि बाल लगातार झड़ रहे हैं, सिर के ऊपर से पतले हो रहे हैं या गंजेपन के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना समझदारी है।

याद रखें: बालों की सही देखभाल केवल बाहरी सुंदरता नहीं, बल्कि अपने संपूर्ण स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का भी हिस्सा है।

संडे स्पेशल: रविवार की छुट्टी तो मिल गई, लेकिन क्या परिवार के लिए समय बचा?

मोबाइल, काम और जिम्मेदारियों के बीच कहीं खो तो नहीं रहे रिश्तों के अनमोल पल?

विशेष आलेख | Janchoupal36

रविवार का दिन आते ही मन में एक अलग तरह का सुकून महसूस होता है। नौकरी करने वालों को दफ्तर से छुट्टी मिलती है, बच्चों को स्कूल की चिंता नहीं रहती और परिवार के साथ बैठने का अवसर मिलता है। लेकिन क्या आज का रविवार वास्तव में परिवार के नाम होता है?

सुबह आँख खुलते ही मोबाइल पर संदेश देखने की आदत, सोशल मीडिया की लंबी स्क्रॉलिंग, अधूरे कामों की चिंता और आने वाले सप्ताह की तैयारी—इन सबके बीच दिन कब निकल जाता है, पता ही नहीं चलता। शाम होते-होते एक और रविवार बीत जाता है और हम सोचते रह जाते हैं कि अपनों के साथ कुछ अच्छा समय बिताने का मौका फिर नहीं मिला।

एक ही घर में रहते हैं, फिर भी दूर हो रहे हैं?

आज तकनीक ने दुनिया को हमारे हाथों में पहुँचा दिया है। कुछ ही सेकंड में हम हजारों किलोमीटर दूर बैठे व्यक्ति से बात कर सकते हैं। लेकिन कभी-कभी ऐसा भी होता है कि घर के दूसरे कमरे में बैठे अपने ही लोगों से बात करने का समय नहीं मिलता।
पिता मोबाइल में व्यस्त हैं, बच्चे ऑनलाइन दुनिया में खोए हैं और परिवार के अन्य सदस्य अपने-अपने कामों में लगे हैं। घर में सभी मौजूद हैं, लेकिन क्या सभी एक-दूसरे के साथ भी हैं?
यह सवाल किसी एक परिवार का नहीं, बल्कि आधुनिक जीवनशैली पर विचार करने का अवसर है। तकनीक हमारी जरूरत है, लेकिन रिश्तों की जगह लेने लगे तो हमें अपनी प्राथमिकताओं पर दोबारा विचार करना चाहिए।

बचपन को महँगे उपहार नहीं, माता-पिता का साथ चाहिए

बच्चों की खुशियों के लिए माता-पिता दिन-रात मेहनत करते हैं। अच्छी शिक्षा, बेहतर सुविधाएँ और सुरक्षित भविष्य देना उनकी जिम्मेदारी और प्रेम का हिस्सा है।
बचपन तेजी से बीतता है। आज जो बच्चा माता-पिता का हाथ पकड़कर चलता है, कल वही अपनी दुनिया में व्यस्त हो जाएगा। इसलिए बच्चों के साथ बिताया गया समय केवल छुट्टी का उपयोग नहीं, बल्कि जीवनभर याद रहने वाली पूँजी है।

लेकिन बच्चों के जीवन में कुछ ऐसी जरूरतें भी होती हैं, जिन्हें पैसे से पूरा नहीं किया जा सकता। उनके साथ बैठकर बात करना, उनकी छोटी-छोटी कहानियाँ सुनना, उनकी परेशानियों को समझना और उनके साथ हँसना—ये पल उनके भावनात्मक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।

माता-पिता को भी चाहिए आपका थोड़ा-सा समय

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, माता-पिता की जरूरतें बदलने लगती हैं। कभी उन्हें किसी काम में मदद चाहिए होती है, कभी स्वास्थ्य को लेकर चिंता होती है और कभी सिर्फ इतना चाहते हैं कि बेटा-बेटी कुछ देर पास बैठकर हालचाल पूछ लें।

कई बार हम उनके लिए सुविधाएँ जुटा देते हैं, लेकिन उनके साथ बैठकर बातचीत करना भूल जाते हैं। याद रखिए, हर बार समस्या का समाधान देना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी किसी की बात ध्यान से सुन लेना ही बहुत बड़ा सहारा बन जाता है।

रविवार इस बात का अच्छा अवसर है कि हम अपने माता-पिता, दादा-दादी या परिवार के बुजुर्गों के साथ कुछ समय बिताएँ।

रविवार को खास बनाने के लिए क्या करें?

रविवार को खास बनाने के लिए जरूरी नहीं कि किसी महँगे रेस्तराँ में जाएँ या दूर घूमने निकलें। छोटी-छोटी कोशिशें भी रिश्तों में नई ऊर्जा ला सकती हैं।

पहला कदम: दिन की शुरुआत परिवार के साथ चाय या नाश्ता करते हुए करें।

दूसरा कदम: कुछ समय के लिए मोबाइल अलग रखकर परिवार के सदस्यों से खुलकर बातचीत करें।

तीसरा कदम: बच्चों के साथ खेलें, उन्हें कोई कहानी सुनाएँ या उनकी पसंद का काम करें।

पाँचवाँ कदम: आने वाले सप्ताह की तैयारी परिवार के साथ मिलकर करें, ताकि जिम्मेदारियाँ किसी एक व्यक्ति पर न रहें।

चौथा कदम: माता-पिता और बुजुर्गों का हालचाल पूछें। संभव हो तो किसी जरूरतमंद रिश्तेदार या पुराने मित्र से भी संपर्क करें।

इन छोटे प्रयासों से रविवार केवल आराम का दिन नहीं, बल्कि संबंधों को मजबूत बनाने का अवसर बन सकता है।

अपनी जिंदगी में संतुलन बनाना भी जरूरी है

यह भी सच है कि हर व्यक्ति का रविवार एक जैसा नहीं होता। किसी को रविवार को भी काम करना पड़ता है, किसी पर घरेलू जिम्मेदारियाँ होती हैं और किसी को आराम की सख्त जरूरत होती है। इसलिए परिवार के लिए समय निकालने का अर्थ स्वयं पर अतिरिक्त दबाव डालना नहीं है।

जरूरत है कि हम अपनी परिस्थितियों के अनुसार थोड़ा-सा समय निकालें। कभी दस मिनट की सच्ची बातचीत भी घंटों की औपचारिक मौजूदगी से अधिक अर्थपूर्ण हो सकती है।

इस रविवार खुद से एक सवाल पूछिए

हम जीवनभर बेहतर भविष्य बनाने के लिए मेहनत करते हैं। घर बनाते हैं, सुविधाएँ जुटाते हैं, बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों के लिए बचत करते हैं। यह सब जरूरी है, लेकिन इस यात्रा में वर्तमान के खूबसूरत पलों को पूरी तरह भूल जाना भी ठीक नहीं।

क्योंकि जिंदगी केवल आने वाले कल की तैयारी का नाम नहीं है। आज की मुस्कान, परिवार के साथ बैठकर पी गई चाय, बच्चों की हँसी और माता-पिता के चेहरे का सुकून भी जिंदगी की असली कमाई हैं।

इस रविवार एक छोटा-सा संकल्प लें—काम करेंगे, जिम्मेदारियाँ निभाएँगे और तकनीक का उपयोग भी करेंगे, लेकिन अपनों के लिए समय निकालना नहीं भूलेंगे।

क्योंकि छुट्टी कैलेंडर में रविवार को मिलती है, लेकिन रिश्तों को समय देना हमारी अपनी प्राथमिकता है।

— Janchoupal36 | संडे स्पेशल