“आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों पर मुआवजे की जिम्मेदारी डाली।”
नई दिल्ली, 13 जनवरी 2026
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अगर कोई आवारा कुत्ता किसी बच्चे या बुजुर्ग को काट लेता है और इससे चोट या मौत होती है, तो राज्य सरकार को मुआवजा देना होगा। जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने सुनवाई के दौरान कुत्ते प्रेमियों और फीडिंग करने वालों पर भी जिम्मेदारी ठोंकी।
जस्टिस मेहता ने तल्खी से कहा, “अगर कोई आवारा कुत्ता हमला कर दे तो उसकी जिम्मेदारी किसकी? काश अनाथ बच्चों के लिए भी ऐसी भावुकता दिखाई जाती। 2011 में मुझे जज बनाया गया, लेकिन इंसानों के लिए इतने भावुक तर्क कभी नहीं सुने।” उन्होंने मानवीय सहानुभूति की कमी पर सवाल उठाए। जस्टिस नाथ ने फटकार लगाई, “कुत्तों को खाना खिलाने वाले लोग जिम्मेदार होंगे। एक काम करो, उन्हें घर ले जाओ, इधर-उधर भटकने क्यों छोड़ते हो?”ये टिप्पणियां वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी की दलीलों के बाद आईं, जिन्होंने आवारा कुत्तों को ‘भावुक मुद्दा’ बताया।
कोर्ट ने फटकारा, “ये भावुकता सिर्फ कुत्तों के लिए ही दिखती है।” मेनका ने सफाई दी, “हमें लोगों की भी चिंता है।”दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर के शहरों में कुत्तों का कहर बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले 7 नवंबर 2025 को स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। सरकारी-सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों का प्रवेश बंद करने को कहा, लेकिन कई ने विरोध किया। अब मुआवजे का प्रावधान लागू होगा, जो राज्य सरकारों पर भारी पड़ेगा।
कोर्ट ने डॉग लवर्स को चेतावनी दी कि फीडिंग से कुत्ते आबादी बढ़ेगी और खतरा और गहराएगा। ये फैसला जन स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए ऐतिहासिक है।


