“जैसे संसद भवन एक सशक्त नींव पर खड़ा है, वैसे ही लोकतंत्र की नींव बहस और संवाद हैं, जिन पर जनता के विश्वास की मजबूत मीनार खड़ी है।”“लोकतंत्र में बहस से समाधान निकलता है और जनता का भरोसा बढ़ता है। स्वस्थ संवाद से बेहतर कानून बनते हैं और शासन मज़बूत होता है।”
बेंगलुरु, 11 सितम्बर 2025
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में गरिमा बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बहस और संवाद से ही समाधान निकलता है, न कि शोर-शराबे से।
बहस से बनता है भरोसा
बेंगलुरु में हो रहे 11वें राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) भारत क्षेत्र सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए श्री बिरला ने कहा –
“जनता हमसे शोर नहीं, समाधान चाहती है।”
“अगर बहस रचनात्मक होगी तो कानून बेहतर बनेंगे।”
“बेहतर कानून से शासन मजबूत होगा और जनता का विश्वास अटूट रहेगा।”
संविधान से मिली ताकत
उन्होंने याद दिलाया कि संविधान सभा में हर अनुच्छेद पर गहन चर्चा हुई थी। इसी वजह से भारत का संविधान सबको साथ लेकर चलने वाला और दूरदर्शी बना।
भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसका संविधान सबसे जीवंत है।
तकनीक से आसान हुई पहुंच
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि डिजिटल संसद ऐप, नेवा (NeVA) और संसद-भाषिणी जैसे प्रयासों से संसद की कार्यवाही अब 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और ज्यादा लोगों तक पहुँच पा रही है।
सम्मेलन का विषय
इस तीन दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय है –
“विधायी संस्थाओं में संवाद और चर्चा – जन विश्वास का आधार, जन आकांक्षाओं की पूर्ति का माध्यम।”बहस और संवाद से ही लोकतंत्र मज़बूत होगा
इस मौके पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरामैय्या, उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सहित कई नेताओं ने भी अपने विचार रखे।


