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Saturday, March 7, 2026

“बर्फीले तूफ़ान थमे, अंटार्कटिका भी झुक गया… अंटार्कटिका की ऊंची चोटी और भारत की एक बेटी

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अल्मोड़ा की कविता चंद ने 4,892 मीटर की ऊंचाई पर भारत का मान बढ़ाया है। यह जीत केवल एक चोटी की नहीं,बल्कि उस अटूट हौसले की है जो कहता है— ‘कुछ भी असंभव नहीं’।

देहरादून | 17 दिसंबर, 2025

​इंसान का जुनून जब हिमालय की ऊंचाइयों से टकराता है, तो इतिहास लिखा जाता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है उत्तराखंड के अल्मोड़ा की बेटी कविता चंद ने। अंटार्कटिका की जमा देने वाली ठंड और हाड़ कंपाने वाली हवाओं को मात देकर कविता ने महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट विंसन (4,892 मीटर) पर तिरंगा फहराकर पूरी दुनिया में भारत का मस्तक ऊंचा कर दिया है।

चुनौतियों को बनाया सीढ़ी:_वर्तमान में मुंबई में रह रहीं 40 वर्षीय एंड्योरेंस एथलीट कविता के लिए यह सफर आसान नहीं था। अंटार्कटिका का अप्रत्याशित मौसम, शून्य से कई डिग्री नीचे का तापमान और मीलों तक फैला एकांत किसी भी फौलाद को पिघला सकता है, लेकिन कविता का इरादा अटल था। यह सफलता उनके ‘सेवन समिट्स’ (सात महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियां) के सपने की एक और सुनहरी कड़ी है। इससे पहले वे यूरोप के माउंट एल्ब्रस पर भी विजय पा चुकी हैं।

सफर जोश का, खुशी जीत की:_3 दिसंबर को भारत से शुरू हुआ यह साहसिक अभियान कई पड़ावों से गुजरा। चिली के पुंटा एरेनास से लेकर यूनियन ग्लेशियर की दुर्गम उड़ान तक, कविता ने हर कदम पर धैर्य का परिचय दिया। मशहूर गाइड मिंग्मा डेविड शेरपा के नेतृत्व और ‘बूट्स एंड क्रैम्पन’ के सहयोग से 9 सदस्यीय भारतीय दल ने इस फतह को मुमकिन बनाया।

बेटियों के लिए बनीं मिसाल:_कविता चंद की यह जीत केवल एक पर्वतारोहण नहीं, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए एक संदेश है जो अपनी उम्र या परिस्थितियों को बाधा मानती हैं। कविता ने साबित कर दिया कि जुनून शब्द में स्त्री या पुरुष का भेद नहीं होता; जीत सिर्फ उसकी होती है जिसके पास अटूट साहस हो। आज देवभूमि की यह बेटी करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणापुंज बन चुकी है।

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