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Thursday, October 1, 2026

एक का दृढ़ निश्चय और एक की मजबूरी: चोर की असफलता संत की सफलता

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प्रेरक कथा- 30/09/2026

एक की सफलता दूसरे की मजबूरी तो नहीं।
सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आप कितनी बार असफल हुए, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि आप में पुनः प्रयास करने का कितना दृढ़ निश्चय है। निरंतर प्रयास और अटूट विश्वास ही सफलता की कुंजी है।

एक बार एक संत महाराज किसी कार्यवश एक अनजान कस्बे में पहुंचे। रात ढल चुकी थी, इसलिए वे विश्राम के लिए पास के एक मंदिर में गए। लेकिन मंदिर के पुजारी ने शर्त रख दी—”महाराज, इस कस्बे से किसी ऐसे व्यक्ति को ले आइए जो आपकी पहचान की पुष्टि कर सके, तभी आपको रुकने की अनुमति मिलेगी।”

उस अनजान शहर में संत को कौन जानता? वे अन्य मंदिरों और धर्मशालाओं में भी गए, लेकिन हर जगह यही शर्त सामने आई। संत महाराज परेशान होकर सड़क किनारे खड़े सोच में पड़ गए।

तभी एक व्यक्ति उनके पास आया और बोला, “महाराज, मैं आपकी समस्या समझ रहा हूँ। मैं आपकी गवाही दे सकता था, लेकिन मैं इस कस्बे का कुख्यात चोर हूँ। मेरी गवाही से आपकी समस्या बढ़ ही जाएगी। यदि आपको आपत्ति न हो, तो आप आज रात मेरे गरीब खाने पर विश्राम कर सकते हैं।”

संत महाराज असमंजस में पड़ गए—”एक चोर का घर? कोई देखेगा तो क्या कहेगा?” लेकिन कोई अन्य उपाय न देख, मजबूरी में उन्होंने मन को समझाया कि बस आज रात की ही तो बात है, कल कोई और व्यवस्था कर लेंगे।

घर पहुँचाकर चोर संत की सेवा-सत्कार करने के बाद अपने काम—यानी चोरी करने निकल गया। सुबह जब वह लौटा, तो उसके चेहरे पर एक अद्भुत प्रसन्नता थी। उसने संत से कहा, “महाराज! आज तो कोई दांव नहीं लग सका, लेकिन कोई बात नहीं, कल जरूर लगेगा!”
चोर का व्यवहार बेहद विनम्र और आत्मीय था।

देखते ही देखते संत महाराज उसके यहाँ पूरे एक महीने तक रुक गए। चोर रोज रात को निकलता और सुबह खाली हाथ लौटता, लेकिन हर सुबह उसके चेहरे पर वही मुस्कान और विश्वास होता—”आज नहीं तो कल, सफलता जरूर मिलेगी।” अंततः, एक महीने की निरंतर कोशिश के बाद उसे एक बड़ा अवसर मिल ही गया।

संत महाराज यह देखकर स्तब्ध रह गए। उन्होंने सोचा—”एक चोर होकर भी यह अपने काम के प्रति कितना दृढ़निश्चयी है! रोज़ खाली हाथ लौटने के बाद भी इसका विश्वास नहीं डगमगाता। जबकि हम ईश्वर भक्ति या जीवन के भले कार्यों में ज़रा सी असफलता मिलते ही निराश हो जाते हैं।”

संत को उस चोर से जीवन की सबसे बड़ी सीख मिल चुकी थी।

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