स्वामी आत्मानंद स्कूलों के 8 हजार संविदा शिक्षक दो दिवसीय हड़ताल पर, 5 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार को अल्टीमेटम
रायपुर- 05 अगस्त 2026
शिक्षकों की 5 प्रमुख मांगें
नियमितीकरण/संविलियन कर शिक्षा विभाग में समायोजन तथा कलेक्टर स्तर की समिति को समाप्त किया जाए।
वार्षिक वेतन वृद्धि लागू की जाए तथा वेतन विसंगतियों, विशेषकर ग्रंथपालों की समस्या का समाधान किया जाए।
समय पर वेतन भुगतान और भविष्य निधि (PF) की सुविधा शुरू की जाए।
सेवा सुरक्षा, बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
मध्यप्रदेश की तर्ज पर संविदा नियम एवं शासकीय सुविधाएं लागू की जाएं।
छत्तीसगढ़ के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में कार्यरत लगभग 8 हजार संविदा शिक्षक एवं कर्मचारी अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर 4 और 5 अगस्त 2026 को राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल पर हैं।
प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक धरना स्थल पहुंचे, जिससे कई विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुईं।
संघ का कहना है कि वर्षों से सरकार को ज्ञापन देकर नियमितीकरण, वेतन वृद्धि और सेवा सुरक्षा जैसी मांगें उठाई जा रही हैं, लेकिन अब तक किसी भी मांग पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी कारण आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
संघ ने क्या कहा
संघ के प्रदेश अध्यक्ष दुर्योधन यादव ने कहा कि यह आंदोलन किसी सरकार के विरोध में नहीं, बल्कि न्याय और सम्मानजनक सेवा की मांग के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आत्मानंद विद्यालयों में उत्कृष्ट परिणाम देने वाले शिक्षक आज भी कम वेतन, असुरक्षित नौकरी और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। सरकार को उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वामी आत्मानंद विद्यालयों का परिणाम प्रदेश के शीर्ष विद्यालयों में शामिल रहता है, जिसकी सफलता में संविदा शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
कर्मचारी फेडरेशन का मिला समर्थन
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने भी आंदोलन का समर्थन किया है। फेडरेशन का कहना है कि इन शिक्षकों की भर्ती विधिवत विज्ञापन और आरक्षण रोस्टर के अनुसार हुई है, इसलिए उनकी मांगें पूरी तरह जायज हैं और समाधान होने तक संगठन उनके साथ खड़ा रहेगा।
आगे क्या होगा
संघ के मीडिया प्रभारी राहुल कुमार पाण्डेय ने बताया कि धरने का पहला दिन शांतिपूर्ण और सफल रहा। यदि दो दिवसीय आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से सकारात्मक पहल या ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अनिश्चितकालीन आंदोलन सहित आगे की रणनीति तय करेगा।
धरना स्थल पर शिक्षक “सम्मानजनक सेवा हमारा अधिकार है”, “शिक्षक का सम्मान, शिक्षा का सम्मान” और “नियमितीकरण हमारा अधिकार है” जैसे नारे लगाते रहे। आंदोलनकारी शिक्षकों का कहना है कि जब तक उनकी जायज मांगों पर निर्णय नहीं होता, तब तक उनका लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रहेगा।
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