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Tuesday, October 20, 2026
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लेख-आलेख

लाइफस्टाइल या ‘डेथ-स्टाइल’: नशे की गिरफ्त में भविष्य, खुद को आईना दिखाती सरकारें

डिजिटल डेस्क, 17 अप्रैल 2026 आज के दौर में जिसे हम 'आधुनिक लाइफस्टाइल' का नाम दे रहे हैं, वह धीरे-धीरे 'विनाश-स्टाइल' में बदलती जा रही...

भीषण गर्मी में हेल्दी लाइफस्टाइल: खुद को रखें फिट, फ्रेश और सुरक्षित

लाइफ़ स्टाइल/जीवन मंत्रास -16/04/2026गर्मी का मौसम अपने साथ कई स्वास्थ्य चुनौतियां लेकर आता है—डिहाइड्रेशन, थकान, हीट स्ट्रोक और पाचन संबंधी समस्याएं आम हो जाती...

महिला और पुरुष की सोच में अंतर: तनाव, जिम्मेदारियां और लाइफ मैनेजमेंट का संतुलन

लाइफ स्टाइल/16/04/2026समाज में अक्सर यह चर्चा होती है कि महिला और पुरुष की सोच में कितना अंतर होता है और जीवन को देखने का...

समय अच्छा नहीं होता, अच्छे हम होते हैं: स्वयं से सृजन तक का सफर

लेख/आलेख -14/04/2026 "deeapak pandey "अक्सर लोग यह कहते सुनाई देते हैं कि "समय खराब चल रहा है" या "अच्छा वक्त पता नहीं कब आएगा।"...

अध्यात्म एक यात्रा—परंपराओं के गौरव से आधुनिकता के तर्कों तक (भाग-1)

अध्यात्म डेस्क,12/04/2026धर्म जहाँ जीवन जीने की मर्यादा और बाहरी अनुशासन का विज्ञान है, वहीं अध्यात्म स्वयं की खोज और आंतरिक चेतना का विज्ञान है।...

जीवन का दूसरा सिरा: भूख या रूह का सुकून?रोटी खाता बच्चा या अध्यात्म में डूबा आदमी

लेख/आलेख/रविवारीय -12/04/2026अक्सर समाज हमें सिखाता है कि 'रोटी, कपड़ा और मकान' मिल जाए तो जीवन सफल है। लेकिन क्या कभी आपने गौर किया है...

ठहराव से तूफान तक: जिंदगी को एक खूबसूरत मोड़ देने की कला ,बैसाखियों को छोड़िए, खुद के पैरों पर ऐतबार कीजिए।”

लेख-आलेख/रविवारीय-12/04/2026 हम मान लेते हैं कि जो मिल गया वही मुकद्दर है और जो छूट गया वही मलाल। लेकिन असल में, जिंदगी किसी ढर्रे पर...

कल आज और कल:आधुनिक भारत के निर्माता – राजा राममोहन राय

भोर का तारा – जब एक दीपक ने अंधेरे को चुनौती दी लेख_आलेख_13/03/2026 भूमिका तबकल्पना कीजिए एक ऐसे भारत की, जहाँ धर्म के नाम पर कुरीतियाँ...

“मुझे ज़िंदगी दे दो, ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है?”बेशुमार दौलत के आगे भी एक सवाल?

प्रभु ने जो जीवन हमें उपहार में दिया है, उसे दूसरों की भलाई और अच्छे कर्मों में लगाओ। निस्वार्थ भाव से की गई सेवा...

रसोई की ‘ज्वाला’ और ज्योतिपति की चिंता: क्या घर के मुखिया देंगे राहत?

ज्योतिपति सोच रहा था कहीं रसोई की आग में उसका पूरा वजूद खत्म न हो जाए,उसको अब भुक्तभोगी जनता का समग्र संसार दिखने लगा।...

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