शिक्षक दिवस पर औपचारिकता का आडंबर बंद करे सरकार: लेख मणि पांडे
बेमेतरा/छत्तीसगढ़- 05 सितंबर 2026
आने वाली पीढ़ी को नशे से बचाने और बेहतर शिक्षा देने के लिए सरकार को अपनी प्राथमिकताओं पर गंभीरता से विचार करना होगा।
जब युवा बेरोजगारी से जूझ रहे हों, शिक्षा व्यवस्था चुनौतियों का सामना कर रही हो और नशे का प्रभाव बढ़ रहा हो, तब केवल शिक्षक दिवस मनाने की औपचारिकता पर्याप्त नहीं है।
छत्तीसगढ़ सर्व ब्राह्मण समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष लेखमणि पांडेय और प्रदेश प्रचार सचिव दीपक पांडेय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर संयुक्त प्रेस बयान जारी कर देश और प्रदेश में शिक्षा के गिरते स्तर, बढ़ती बेरोजगारी और आबकारी नीति को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष 5 सितंबर को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की स्मृति में शिक्षक दिवस मनाया जाता है, लेकिन केवल सम्मान समारोह आयोजित करने से शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति नहीं बदलेगी।
लेखमणि पांडेय ने कहा कि आज समाज के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार, समाज और शिक्षा—क्या इन तीनों की दिशा सही है? एक ओर निजी स्कूल आधुनिक सुविधाओं के साथ आगे बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई सरकारी स्कूलों में स्वच्छ पेयजल, बेहतर शौचालय और आवश्यक सुविधाओं की कमी दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि जिस शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए, उसके सामने शराब की बढ़ती उपलब्धता और दुकानों के विस्तार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर देने के बजाय शराब की बिक्री से राजस्व जुटाने की नीति को प्राथमिकता देती नजर आ रही है। “समाज को शिक्षा चाहिए या शराब—सरकार को अपनी प्राथमिकता स्पष्ट करनी होगी।”
बयान में हाल की एक घटना का हवाला देते हुए स्कूलों में शिक्षकों के नशे की हालत में पहुंचने के आरोपों पर भी चिंता जताई गई। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा के मंदिर में ही नशे जैसी प्रवृत्तियां प्रवेश कर रही हैं, तो यह पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
प्रदेश प्रचार सचिव दीपक पांडेय ने सरकार से सीधा सवाल करते हुए कहा कि क्या शिक्षा का स्तर सुधारना जरूरी है या शराब बेचकर राजस्व कमाना? उन्होंने कहा कि आज घर और कॉलेज के बीच शराब की दुकानें नजर आ रही हैं।
कई स्थानों पर विद्यालय, महाविद्यालय और सभ्रांत बस्तियों के आसपास शराब दुकानों की मौजूदगी को लेकर समाज में सवाल उठ रहे हैं।
संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में सरकार से मांग की है कि शिक्षा व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए, सरकारी स्कूलों का स्तर बेहतर बनाया जाए और शैक्षणिक संस्थानों तथा आबादी वाले संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास शराब दुकानों की स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
विज्ञप्ति में कहना है कि आने वाली पीढ़ी का भविष्य केवल आयोजनों से नहीं, बल्कि मजबूत शिक्षा और स्वस्थ सामाजिक वातावरण से सुरक्षित होगा।
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