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Thursday, August 27, 2026

डिब्बी में शक्कर, डाक से वार – महंगाई पर कांग्रेस का मीठा प्रहार

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न्यूज डेस्क- देश/प्रदेश – 27 अगस्त 2026

शक्कर पर हुई सियासत-कांग्रेस ने महंगाई की मिठास पर कड़वा विरोध जताया।
चीनी का लंगर और बिना चीनी की चाय – महंगाई पर विपक्ष का नया दांव।
त्योहार से पहले कड़वी हुई चीनी, सड़कों पर उतरी सियासत।

छत्तीसगढ़ में चीनी के दाम 70 रुपये किलो के पार पहुंचते ही सियासत गरमा गई है। त्योहारी सीजन से ठीक पहले शक्कर की कीमतों में आई इस अप्रत्याशित तेजी ने आम आदमी के रसोई बजट को बिगाड़ दिया है, और विपक्ष को सरकार को घेरने का एक बड़ा मुद्दा दे दिया है।

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर दोहरी रणनीति अपनाई है – प्रदेश में आक्रामक प्रदर्शन और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतीकात्मक विरोध। रायपुर में पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने अनोखा तरीका अपनाया।

उन्होंने शक्कर को छोटी-छोटी डिब्बियों में भरकर भाजपा के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को स्पीड पोस्ट से भेजा। उनका तर्क था कि जब जनता तक शक्कर पहुंच ही नहीं रही, तो सत्ता में बैठे लोगों को इसका अहसास डाक से ही कराया जाए।

इसी कड़ी में रायपुर में कांग्रेस खाद्य विभाग विंग के अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन के नेतृत्व में खाद्य विभाग के कार्यालय का घेराव किया गया। कार्यकर्ताओं ने कालाबाजारी और जमाखोरी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।

इस विरोध को सियासी धार तब मिली जब कांकेर से भाजपा सांसद के ‘बारिश रोकने के लिए नींबू काटने’ वाले बयान पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने तंज कसा कि अगर नींबू काटने से सब ठीक होता है, तो सांसद जी को महंगाई और शक्कर के दाम घटाने के लिए भी नींबू काटना चाहिए।

छत्तीसगढ़ की आग चंडीगढ़ तक पहुंची। वहां कांग्रेस ने ‘चीनी का लंगर’ लगाकर विरोध जताया। चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एच.एस. लकी के नेतृत्व में सेक्टर-35 स्थित कांग्रेस भवन के बाहर गरीबों को मुफ्त चीनी के पैकेट बांटे गए।

वहीं पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने बिना चीनी की चाय बनाकर और पिलाकर केंद्र सरकार की नीतियों पर कटाक्ष किया।

कांग्रेस का आरोप है कि जो चीनी कुछ महीने पहले तक 30-45 रुपये किलो मिलती थी, वह आज 70-75 रुपये तक पहुंच गई है।

इसके लिए पार्टी केंद्र की नीतियों – अंधाधुंध चीनी निर्यात, E20 इथेनॉल कार्यक्रम के लिए गन्ने का डायवर्जन और आयात नीति में विफलता को जिम्मेदार बता रही है। सवाल सिर्फ शक्कर का नहीं, बल्कि त्योहारों पर आम घरों की मिठास का है।


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