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Monday, August 17, 2026

छत्तीसगढ़ी साहित्य का गौरवपूर्ण उत्सव:साहित्यकारों का सम्मान और 26 पुस्तकों का विमोचन

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रायपुर – 17 अगस्त 2026

छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य के संरक्षण, संवर्धन एवं विकास को समर्पित राजभाषा आयोग के कार्यालय स्थापना दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में गरिमामय साहित्यिक आयोजन हुआ। कार्यक्रम में प्रदेशभर से साहित्यकार, कवि, रचनाकार, भाषा-सेवी, विद्वान और साहित्यप्रेमी शामिल हुए।

आयोजन में छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रचार-प्रसार, साहित्य सृजन और भाषा को जनमानस तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले वरिष्ठ साहित्यकारों एवं भाषा-सेवियों का सम्मान किया गया। वहीं, राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित 26 पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और साहित्यिक समृद्धि को लेकर साहित्यकारों एवं विद्वानों ने अपने विचार साझा किए।

भाषा-सेवियों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए लंबे समय से कार्य कर रहे भाषा-सेवियों के योगदान को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में सेवानिवृत्त उद्घोषक, आकाशवाणी संजय पाण्डेय, वरिष्ठ दूरदर्शन उद्घोषक एवं पत्रकार श्रीमती ज्योति सिंह, सेवानिवृत्त कार्यक्रम अधिकारी, आकाशवाणी समीर शुक्ला, साहित्यकार चेतन भारती, रायपुर तथा साहित्यकार चोवाराम वर्मा ‘बादल’ शामिल रहे।

वक्ताओं ने कहा कि किसी भी भाषा की वास्तविक शक्ति उसके साहित्य, लोक परंपराओं और उसे अपने जीवन का हिस्सा बनाने वाले लोगों से निर्मित होती है। छत्तीसगढ़ी भाषा को समृद्ध बनाने में साहित्यकारों, कवियों, पत्रकारों, कलाकारों और भाषा-सेवियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

राजभाषा आयोग की 26 पुस्तकों का विमोचन

समारोह का प्रमुख आकर्षण राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित 26 पुस्तकों का विमोचन रहा। इन पुस्तकों के माध्यम से छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य, लोकभाषा और लोकसंस्कृति से जुड़े विविध पक्षों को दस्तावेज के रूप में संरक्षित करने की दिशा में पहल की गई है।

वक्ताओं ने कहा कि पुस्तकों का प्रकाशन केवल साहित्य के संरक्षण का कार्य नहीं है, बल्कि यह नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी है। आयोग की प्रकाशित पुस्तकों से छत्तीसगढ़ी साहित्य के अलग-अलग पक्षों को सामने लाने और प्रदेश के रचनाकारों को व्यापक मंच देने में मदद मिलेगी।

प्रो. राजन यादव ने भाषा और संस्कृति पर दिया प्रस्तुतिकरण

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के अधिष्ठाता कला संकाय एवं विभागाध्यक्ष प्रो. राजन यादव ने ज्ञानवर्धक प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने भाषा, साहित्य और संस्कृति के आपसी संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए छत्तीसगढ़ी भाषा की साहित्यिक परंपरा और उसकी समृद्ध अभिव्यक्ति पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि किसी समाज की पहचान, इतिहास, संस्कृति, संवेदनाओं और सामूहिक स्मृतियों को अपने भीतर संजोए रखती है। ऐसे में छत्तीसगढ़ी भाषा के साहित्य को समृद्ध करना प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने के समान है।

वरिष्ठ साहित्यकारों की रही गरिमामयी उपस्थिति

आयोजन में विधायक मोतीलाल साहू, विधायक पुरन्दर मिश्रा, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज दयाल, संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, संस्कृति एवं राजभाषा संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा तथा राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार सहित प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

वरिष्ठ साहित्यकार परदेशी राम वर्मा, अरुण निगम, मीर अली मीर, वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती शशिकला दुबे, वीर अजीत शर्मा, श्रीमती शकुंतला तरार और श्रीमती सीमा निगम सहित प्रदेश के विभिन्न अंचलों से पहुंचे साहित्यकारों ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।

एक मंच पर दिखी साहित्य की पीढ़ियों की सहभागिता

राजभाषा आयोग के कार्यालय स्थापना दिवस समारोह में प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से आए साहित्यकारों ने एक-दूसरे से संवाद किया और छत्तीसगढ़ी भाषा के भविष्य, साहित्य सृजन, संरक्षण तथा प्रचार-प्रसार से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।

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