सावन और उमस के बीच जब घरों में पंखे हवा फेंकने की बजाय बिजली पर ही दम तोड़ने लगें, और पानी की एक-एक बूंद के लिए मोटर जवाब दे जाए, तो जनता का सब्र टूटना वाजिब है। बेमेतरा में आज कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां बिजली विभाग की मनमानी और गैर-जिम्मेदाराना रवैये से तंग आकर वार्ड पार्षद नीतू कोठारी को सीधे बिजली ऑफिस के भीतर ही धरने पर बैठना पड़ा।
यह सिर्फ एक पार्षद का विरोध नहीं था, बल्कि उस आम इंसान की चीख थी जो हर महीने महंगे स्मार्ट मीटर के बिल तो समय पर भर रहा है, बदले में उसे मिलता क्या है? सिर्फ अघोषित बिजली कटौती, लो वोल्टेज और फुंके हुए उपकरणों का भारी-भरकम हिसाब!
सिस्टम के खिलाफ जनता की दहाड़
आज छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों—चाहे वह रायपुर हो, धमतरी हो या बेमेतरा—हर जगह से एक ही रोना सामने आ रहा है। बिना किसी आंधी-तूफान के, बिना किसी पूर्व सूचना के, बिजली का आना-जाना किसी आंख-मिचौली से कम नहीं है।
लो वोल्टेज का टॉर्चर: घरों में रखे कूलर, पंखे और पानी के पंप महज शो-पीस बनकर रह गए हैं। अचानक झटके और लाखों का नुकसान: बिना किसी चेतावनी के अचानक बिजली गुल होना और फिर झटके से वापस आना।
इस लुकाछिपी में कितने ही घरों के फ्रिज, पंखे और महंगे वॉटर आरओ (RO) उड़ जाते हैं। पलक झपकते ही हजारों रुपए का नुकसान सीधे आम आदमी की जेब पर डाका डालता है।
ओवरलोडेड ट्रांसफार्मर: शिकायतों के अंबार लगने के बाद भी महीनों तक खराब या ओवरलोडेड ट्रांसफार्मर न बदले जाना विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है।
जब कुर्सी पर बैठे अफसरों को जगाना पड़ा लगातार वार्डवासियों की शिकायतें सुनने के बाद जब जिम्मेदार अधिकारी टालमटोल की मुद्रा में रहे, तब पार्षद नीतू कोठारी ने अपनी जन-प्रतिनिधि होने की असल जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने साफ कर दिया कि एसी कमरों में बैठकर जनता के दर्द को नजरअंदाज करने वाले अधिकारी अब मनमानी नहीं कर पाएंगे।
धरने की तपिश और जनता के आक्रोश का असर यह हुआ कि बिजली विभाग के अधिकारियों को झुकना पड़ा। वार्ता के तुरंत बाद क्षेत्र में नया ट्रांसफार्मर लगाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है।
कलम की दो टूक चेतावनी वार्डवासियों ने इस त्वरित कार्रवाई का स्वागत तो किया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या हर समस्या के समाधान के लिए जनता और जनप्रतिनिधियों को दफ्तरों में धरना ही देना पड़ेगा? क्या विभागीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारी खुद नहीं समझ सकते?
पार्षद नीतू कोठारी ने इस संघर्ष में साथ देने वाले समस्त वार्डवासियों का आभार जताया है, साथ ही बिजली विभाग को दो टूक चेतावनी भी दी है कि भविष्य में यदि जनता को बिना वजह ऐसी किसी भी प्रताड़ना से गुजरना पड़ा, तो विरोध का यह स्वर और अधिक उग्र होगा।
पत्रकार की कलम से: बिजली विभाग के दफ्तर में दिया गया यह धरना सिर्फ एक ट्रांसफार्मर बदलने की कहानी नहीं है, यह उस सुस्त और बहरी व्यवस्था के कान खींचने का उदाहरण है जो कागजों पर सब ठीक होने का दावा करती है, लेकिन जमीन पर जनता अंधेरे में सिसक रही है।