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Sunday, October 25, 2026

CHIPS आउटसोर्स घोटाला: वेतन कटौती से परेशान इंजीनियर पहुंचे BJMTU काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दरबार, ब्रजेश शर्मा ने दिया न्याय का भरोसा

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डिजिटल डेस्क | 13 जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHIPS) से जुड़ी आउटसोर्स एजेंसी Akshara Enterprises पर काम कर रहे इंजीनियरों के कथित शोषण का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। वेतन में अवैध कटौती, RFP शर्तों के उल्लंघन और शिकायतों पर कार्रवाई न होने से परेशान 33 DMC और 146 BMC कर्मचारियों ने आज भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रजेश शर्मा से मुलाकात की।

पीड़ित कर्मचारियों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को सैलरी स्लिप, वर्क ऑर्डर और अन्य दस्तावेज सौंपते हुए बताया कि कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रजेश शर्मा ने सभी पीड़ितों को आश्वस्त किया कि काउंसिल उनके साथ खड़ी है और हर स्तर पर न्याय दिलाया जाएगा।मुलाकात के दौरान काउंसिल के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. सुजीत परिहार विशेष रूप से उपस्थित रहे।

“कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों के लिए अंतिम लड़ाई तक लड़ेंगे” – दीपक पाण्डेय राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी

काउंसिल के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी दीपक पाण्डेय ने बयान जारी करते हुए कहा कि –
“भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल सभी पीड़ित कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हम इस पूरे मामले को शासन और संबंधित उच्च अधिकारियों के समक्ष पूरी मजबूती से उठाएंगे। जरूरत पड़ी तो लोकतांत्रिक और कानूनी दोनों रास्तों से लड़ाई लड़ी जाएगी।”

उन्होंने कहा कि काउंसिल का उद्देश्य है – एकजुट रहें, मजदूर साथियों के अधिकारों के लिए आवाज उठाएं।

क्या है पूरा मामला ?
पीड़ितों के अनुसार CHIPS ने प्रदेश में IT सेवाओं के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर मॉनिटरिंग कोऑर्डिनेटर की नियुक्ति का जिम्मा वर्ष 2022 से एक निजी आउटसोर्स एजेंसी को दिया था।

आरोप है कि एजेंसी सरकार से प्रति कर्मचारी पूरे वेतन के रूप में राशि ले रही है, लेकिन कर्मचारियों को उसका लगभग आधा ही भुगतान कर रही है। पिछले दिनों कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी इस कथित वेतन घोटाले का जिक्र आया था, जिसमें 3 साल में करीब 9.5 करोड़ रुपये की हेराफेरी का अनुमान जताया गया था।

पीड़ितों का कहना है कि दस्तावेजों के अनुसार उन्हें मिलनी वाली राशि और हाथ में आ रही सैलरी में 50-55 प्रतिशत तक का अंतर है। PF, ESIC के नाम पर की जा रही कटौती भी RFP की शर्तों से कहीं अधिक है।

फिलहाल भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल ने इस मामले में शासन से उच्च स्तरीय जांच और दोषी एजेंसी पर कार्रवाई की मांग की है। काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
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