न्यूज डेस्क 08 जुलाई 2026
जनजातीय शिक्षा को डिजिटल स्वरूप देने और भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जनजातीय कार्य मंत्रालय ने ‘ट्राइबएक्स’ (Tribex) डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया। जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) की राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान इसका उद्घाटन किया।
“ट्राइबएक्स’ देश का अपनी तरह का पहला डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो जनजातीय कला, संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और कौशल विकास पर आधारित निःशुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध कराएगा। शुरुआती चरण में इस प्लेटफॉर्म पर चित्रकला, हस्तशिल्प, हथकरघा, कलाकृतियां और पारंपरिक वाद्ययंत्र जैसे विषयों पर 20 मुफ्त सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए गए हैं। भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाकर 100 से अधिक करने की योजना है।
इस अवसर पर जुएल ओराम ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय विरासत को संरक्षित करने, उसे वैश्विक पहचान दिलाने और पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों तथा विश्वविद्यालयों से इस प्लेटफॉर्म का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के दौरान जनजातीय कार्य मंत्रालय और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी हस्ताक्षरित किया गया। इसके तहत ‘ट्राइबएक्स’ के माध्यम से यूजीसी-मान्यता प्राप्त पांच एक-वर्षीय हाइब्रिड डिप्लोमा कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।


