आगरा/इलाहाबाद 07 जुलाई 2026
ताजमहल परिसर में प्राचीन शिव मंदिर होने के विवादित दावे को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सोमवार को अहम सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने इस मामले में दाखिल एक रिट याचिका पर केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह याचिका 3 जुलाई को “अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय” मंदिर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरि शंकर जैन सहित पांच लोगों ने दायर की थी। याचिका में मांग की गई है कि ताजमहल परिसर के भीतर उक्त मंदिर के अस्तित्व की न्यायिक घोषणा की जाए।
अदालत में क्या दलीलें दी गईं
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता हरि शंकर जैन ने कोर्ट को बताया कि विवादित परिसर की फोटोग्राफी कराने और एक एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने के लिए निचली अदालत में आवेदन दिया गया था, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद दाखिल पुनर्विचार याचिका को भी सुनवाई योग्य न मानते हुए रद्द कर दिया गया। जैन ने अदालत के समक्ष कहा कि विवाद के निष्पक्ष निपटारे के लिए परिसर का सर्वे और फोटोग्राफी अनिवार्य है।
हाईकोर्ट का रुख
पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और ASI को अपना पक्ष स्पष्ट करने का आदेश दिया। साथ ही अदालत ने याचिका में प्रतिवादी नंबर 4 पंकज कुमार वर्मा को भी नोटिस जारी किया। गौरतलब है कि आगरा की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अदालत और अतिरिक्त जिला जज दोनों ने पहले ही परिसर सर्वे के लिए एडवोकेट कमीशन गठित करने से इनकार कर दिया था, और मौजूदा याचिका उन्हीं आदेशों को चुनौती देने के लिए दायर की गई है।
2015 से चल रहा है मूल मुकदमा
इस विवाद की जड़ें 2015 में दायर एक मुकदमे से जुड़ी हैं, जो अब भी आगरा की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अदालत में लंबित है। मूल मुकदमे में भी यही मांग की गई थी कि ताजमहल परिसर में तेजो महालय मंदिर मौजूद होने की घोषणा की जाए। इसी मामले की सुनवाई के दौरान एडवोकेट कमिश्नर नियुक्ति की अर्जी दाखिल हुई थी, जिसे जिला अदालतों ने अस्वीकार कर दिया था। अब इसी फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का रुख किया है।
मामले की अगली सुनवाई में केंद्र सरकार और ASI के जवाबी हलफनामे के बाद कोर्ट आगे की कार्यवाही तय करेगा।
(यह रिपोर्ट न्यायालयी कार्यवाही और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है।)


