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Wednesday, July 22, 2026

एक नजर:-खाड़ी युद्ध और तनाव से भारत में बढ़ती घरेलू आम समस्याएं

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डिजिटल डेस्क/नई दिल्ली 18 मई 2026

ईरान इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव और पश्चिम एशिया में हॉर्मूज पर मंडराते संकट ने भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की रसोई तक दस्तक दे दी है। छत्तीसगढ़ में भी यातायात बाधित हो रहा है ट्रांसपोर्ट सर्विस पर असर दिख रहा है ।वर्षों बाद पेट्रोल डीजल संकट गहराता जा रहा पंपों पर लंबी कतारें घंटों की लाइन कुछ अलग ही किस्सा बयां कर रही है।

इजरायल-ईरान टकराव और लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतें 6 महीने में 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, जिसमें से 55% खाड़ी देशों से आता है। इस वजह से भारत पर सीधा असर पड़ रहा है।

महंगाई की मार
क्रूड महंगा होते ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। अप्रैल 2026 में थोक महंगाई दर 4.8% पहुंच गई, जबकि खाद्य महंगाई 8.2% है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सब्जी, दाल और फल 10-15% तक महंगे हुए हैं। आरबीआई ने माना है कि अगर खाड़ी में युद्ध लंबा खिंचा तो रेपो रेट घटाना मुश्किल होगा, जिससे EMI का बोझ कम नहीं होगा।

व्यापार और निर्यात पर संकट
लाल सागर रूट बाधित होने से भारत का यूरोप को निर्यात 22% महंगा हो गया है। शिपिंग कंपनियां अब अफ्रीका का चक्कर लगाकर जा रही हैं, जिससे 15 दिन ज्यादा लग रहे हैं। निर्यातकों का कहना है कि चावल, मसाले, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग सामान की डिलीवरी लेट हो रही है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, इस साल 30 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित हो सकता है।

90 लाख भारतीयों की सुरक्षा चिंता
खाड़ी देशों में 90 लाख से ज्यादा भारतीय काम करते हैं। सऊदी, यूएई, कतर और कुवैत में हालात बिगड़े तो बड़े पैमाने पर वापसी शुरू हो सकती है। 2020 में कोरोना के दौरान 12 लाख लोग लौटे थे, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ा था। अभी विदेश मंत्रालय ने ‘ऑपरेशन सुरक्षा’ के तहत एडवाइजरी जारी की है।

रेमिटेंस घटने का खतरा
भारत को हर साल खाड़ी से 45 अरब डॉलर रेमिटेंस मिलता है। यह केरल, यूपी, बिहार और तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। युद्ध की स्थिति में नौकरियां गईं तो गांवों तक पैसा पहुंचना कम होगा। वर्ल्ड बैंक ने 2026 में भारत के रेमिटेंस में 8-10% गिरावट की आशंका जताई है।

उर्वरक और खाद्य सुरक्षा पर असर
भारत 60% यूरिया और DAP खाड़ी देशों से मंगाता है। सप्लाई चेन टूटने से खरीफ सीजन में खाद महंगी हो सकती है। सरकार ने रणनीतिक भंडार बढ़ाया है, पर लंबा संकट किसानों की लागत बढ़ाएगा।

भारत की तैयारी
सरकार ने क्रूड का रणनीतिक भंडार 9.5 दिन से बढ़ाकर 14 दिन किया है। रूस और ब्राजील से तेल खरीद बढ़ाई जा रही है। साथ ही चाबहार पोर्ट के जरिए ईरान-अफगानिस्तान रूट को वैकल्पिक व्यापार मार्ग के रूप में तैयार किया जा रहा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि खाड़ी में शांति भारत के हित में है। जब तक तनाव कम नहीं होता, आम आदमी को महंगाई और नौकरी के मोर्चे पर सावधान रहना होगा।(संक्षिप्त जानकारी पर आधारित)

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